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शुक्रवार, 23 जनवरी 2026
बड़े खेल का खुलासा: करोड़ों की पेशगी लेकर लाया गया नगर निगम की जमीन कॉलोनाइजर को देने का प्रस्ताव, PIL दायर करने की तैयारी
वृंदावन में कुछ खास कॉलोनाइजर के लिए लेंड एक्सचेंज का प्रस्ताव यूं ही नहीं लाया गया। इसके लिए षड्यंत्र के तहत बाकायदा एक ''दुरभि संधि'' की गई। चूंकि मामला करोड़ों का नहीं, अरबों रुपए का था इसलिए करोड़ों रुपए तो पेशगी में ही दे दिए गए। हालांकि अब नगर आयुक्त कह रहे हैं कि ये प्रस्ताव दफन किया जा चुका है लिहाजा भविष्य में ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं लाया जाएगा। नगर आयुक्त कुछ भी कहें, लेकिन सवाल तो यह है कि निजी टाउनशिप के लिए पहले तो मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण और फिर मथुरा-वृंदावन नगर निगम, ये प्रस्ताव लेकर आया ही क्यों?
इस 'क्यों' का जवाब देने को कोई तैयार नहीं है इसलिए कुछ जागरूक लोग न्यायालय की शरण में जाने की तैयारी कर चुके हैं। वो इसे उच्च न्यायालय और फिर जरूरत पड़ने पर उच्चतम न्यायालय तक ले जाना चाहते हैं ताकि बेशकीमती सरकारी जमीन को माफिया के कब्जे में जाने से बचाया जा सके।
एनजीटी में ये मामला पहले ही जा चुका है और वहां से सभी संबंधित पक्षों को नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं, परंतु अब लोगों को समझ में आ गया है कि डालमिया बाग की तरह इस केस को भी उच्च या उच्चतम न्यायालय ले जाना ही उपयुक्त होगा इसलिए वो इसकी तैयारी कर चुके हैं।
वृंदावन निवासी लक्ष्मीनारायण उर्फ ब्रजबिहारी शर्मा तथा दीपक शर्मा ने कल इसी संदर्भ में जिलाधिकारी मथुरा के नाम एक ज्ञापन सौंपा है और उसकी प्रति लोकायुक्त को भी भेजी है।
शिकायतकर्ताओं ने इस ज्ञापन में लिखा है कि इस ''लेंड एक्सचेंज'' का प्रस्ताव पेश करने से पहले न तो विकास प्राधिकरण ने और ना ही नगर निगम ने पारदर्शिता एवं नियमों का पालन किया जिससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि ऐसा एक निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया।
शिकायतकर्ताओं ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है जिससे प्रस्ताव लाने के पीछे छिपी मंशा सामने आ सके और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को कठघरे में खड़ा किया जा सके।
मथुरा जिला प्रशासन तथा नगर निगम मथुरा-वृंदावन से जुड़े भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि सनसिटी अनंतम एवं अन्य बिल्डर्स के पक्ष में लेंड एक्सचेंज का मात्र प्रस्ताव लाने की पेशगी करीब 5 करोड़ रुपए प्राप्त की गई तथा 'शेष के लिए' पूरी 'साजिश' बनाई गई कि किसको किस तरह और कितना-कितना लाभ पहुंचाना है।
ये सारा काम कितनी गोपनीयता से किया जा रहा था, इसका अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि सनसिटी अनंतम के मालिकों तक का नाम किसी को नहीं बताया जाता।
सूत्र बताते हैं कि सैकड़ों एकड़ की इस टाउनशिप के मालिकों में मुख्य रूप से ZEE TV के मालिक सुभाष चंद्रा के भाई लक्ष्मी गोयल तथा उनके समधी (जो एक्शन शू कंपनी के मालिक) शामिल हैं।
इनके अलावा जिन अन्य के लिए लेंड एक्सचेंज का प्रस्ताव लाया गया, उनमें द्वारिकादास जीवराजका मैमोरियल ट्रस्ट तथा हरिनिवास खेतान मैमोरियल ट्रस्ट द्वारा विकसित की जा रही कॉलोनियों का नाम है।
''लीजेंड न्यूज़'' ने जब इस पूरे प्रकरण में कानूनी विशेषज्ञों की राय ली तो उन्होंने इसे साफ तौर पर पद के दुरुपयोग तथा निजी स्वार्थ की पूर्ति के लिए बदनीयती का मामला बताया, जो आपराधिक कृत्य बनता है।
कानूनी विशेषज्ञों की राय में ये न सिर्फ नियमों को ताक पर रखकर माफिया के एजेंट की तरह काम करने का अपराध है बल्कि इससे साफ-साफ जाहिर होता है कि मथुरा जिले के अधिकारी तो बिक ही चुके हैं, जनप्रतिनिधि भी ऑब्लाइज हैं अन्यथा ये मुद्दा अब तक विधानसभा में भी उठ जाना चाहिए था।
कानून के जानकारों की मानें तो इस पूरे प्रकरण में प्रशासनिक अधिकारियों सहित मेयर की भी भूमिका संदिग्ध प्रतीत होती है और इसलिए यदि इसकी निष्पक्ष जांच हो जाती है तो साफ हो जाएगा कि आखिर क्यों कुछ खास कॉलोनाइजर के पक्ष में लेंड एक्सचेंज के लिए प्रशासन से लेकर निगम तक में बैठे जिम्मेदार लोग इतने उतावले हैं।
-सुरेन्द्र चतुर्वेदी
गुरुवार, 15 जनवरी 2026
माफिया पर मेहरबान प्रशासन: कौड़ियों की जमीन के बदले नगर निगम की बेशकीमती जमीन देने की तैयारी
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर तीसरे दिन, और अपने प्रत्येक जनता दर्शन कार्यक्रम में कहते रहते हैं कि भूमाफिया किसी भी तरह पनपने न पाए। वह राज्य से माफिया को नेस्तनाबूद करने के आदेश और निर्देश अधिकारियों को देते रहते हैं, लेकिन यदि मेढ़ ही खेत को खाने पर आमादा हो तो सीएम योगी कर क्या सकते हैं। ऐसे में एक योगी क्या, योगी जैसे दस मिलकर भी शायद कुछ नहीं कर सकते। दूसरे जनपदों का यहां जिक्र न किया जाए तो कम से कम मथुरा का जिला प्रशासन भली-भांति समझ चुका है कि वह चाहे जितना खुल कर खेले, चाहे जितना भ्रष्टाचार करे किंतु उसका कुछ नहीं बिगड़ने वाला। तभी तो धर्म की नगरी में अधर्म का डंका डटकर बज रहा है और जिसकी जितनी बिसात है, वह उतनी ही माफिया की मदद करने पर आमादा है।
तभी तो पहले डालमिया बाग और अब सनसिटी अनंतम का मामला भी अदालत की चौखट तक पहुंचा, अन्यथा इसकी जरूरत ही क्यों पड़ती।
ताजा मामला एक बार फिर वृंदावन के सनसिटी अनंतम से जुड़ा है जिसे नगर निगम मथुरा-वृंदावन की बेशकीमती जमीन उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन के निर्देश पर बोर्ड बैठक में बाकायदा प्रस्ताव लाया गया।
आश्चर्य की बात यह है कि यह प्रस्ताव कौड़ियों की जमीन के बदले नगर निगम की बेशकीमती जमीन देने का है, जिस पर पूर्व में एक जिलाधिकारी आपत्ति भी दर्ज करा चुके हैं। अब यह प्रस्ताव निगम की बैठक में फिर लाया गया है।
क्या है प्रस्ताव?
9 अक्टूबर 2025 को पेश एजेण्डे के अनुसार अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) मथुरा ने ग्राम जैत व छटीकरा में सनसिटी हाईटेक प्रोजेक्ट प्रा. लि. द्वारा विकसित की जा रही टाउनशिप के लिए भूमि विनिमय का प्रस्ताव बोर्ड से पास कराकर उपलब्ध कराने के निर्देश पत्रांक-322/सात-बी/भू.व्य./2023 दिनांक 06.09.2023 एवं 173/सात- बी/भू.व्य./2023 दिनांक 23.09.2024 के जरिए दिए हैं।
इस नए प्रस्ताव के मसौदे में बताया गया है कि ग्राम जैत व छटीकरा में सनसिटी हाईटेक प्रोजेक्ट प्रा. लि. द्वारा विकसित की जा रही टाउनशिप के लिए भूमि के विनिमय का जो प्रस्ताव कार्यकारिणी ने पहले रखा था, उसकी त्रुटियों को संशोधित करते हुए यह प्रस्ताव लाया गया है।
यहां यह जान लेना जरूरी है कि सनसिटी हाईटेक ने अपनी प्रस्तावित टाउनशिप में जमीन का प्राथमिक मूल्य लगभग एक लाख रुपए प्रति वर्ग गज रखा है जबकि मथुरा-वृंदावन नगर निगम को उसके विनिमय में जो भूमि मिलनी है उसकी कीमत बमुश्किल 10 हजार रुपए प्रति वर्ग गज है।
देखें नगर निगम मथुरा-वृंदावन की बोर्ड बैठक में पेश एजेण्डे की प्रति-
गौरतलब है कि समूचा मथुरा जनपद और विशेषकर भगवान श्रीकृष्ण की लीलास्थली वृंदावन इन दिनों ''धार्मिक पर्यटन'' के रूप में अपनी वैश्विक पहचान बना चुका है। वृंदावन में जमीनों के दाम आसमान छू रहे हैं इसलिए स्थानीय ही नहीं, बाहरी भूमाफिया भी इसका भरपूर लाभ उठाने में लगे हैं। चूंकि जिला प्रशासन उन्हें इसकी पूरी छूट दे रहा है इसलिए वह कोई मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहते।
इन हालातों में यह बताने की तो आवश्यकता ही नहीं रह जाती कि मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण हो या फिर नगर निगम मथुरा-वृंदावन, सब आखिर कथित कॉलोनाइजर्स या यूं कहें कि भूमाफिया पर इतने मेहरबान क्यों हैं, और क्यों जिला प्रशासन विकास की आड़ लेकर भूमाफिया को सीधा लाभ पहुंचाने की जद्दोजहद में लगा है।
दरअसल ये सारा खेल करोड़ों का नहीं, अरबों का है। जाहिर है कि इससे होने वाली हराम की कमाई कितनी भी मामूली क्यों न हो, कुबेर के खजाने से कम नहीं होगी। राधे-राधे की रट लगाकर ब्रजवासियों को मूर्ख बनाने का यह धंधा बेशक बहुत दिनों से चल रहा है लेकिन अदालतें उम्मीद की किरण दिखा रही हैं।
वो आशा जगाती हैं कि कभी न कभी तो पाप का यह घड़ा भरेगा, और किसी न किसी दिन यह फूटेगा भी। तब अकेला माफिया नहीं, नेता और अधिकारी भी नापे जाएंगे। काली कमली वाले की नजर जिस दिन टेढ़ी हो गई, उस दिन ब्रज में यह कहावत चरितार्थ होते दिखाई देगी कि उसके घर में देर भले ही हो लेकिन अंधेर नहीं होता।
-सुरेन्द्र चतुर्वेदी
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