उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर तीसरे दिन, और अपने प्रत्येक जनता दर्शन कार्यक्रम में कहते रहते हैं कि भूमाफिया किसी भी तरह पनपने न पाए। वह राज्य से माफिया को नेस्तनाबूद करने के आदेश और निर्देश अधिकारियों को देते रहते हैं, लेकिन यदि मेढ़ ही खेत को खाने पर आमादा हो तो सीएम योगी कर क्या सकते हैं। ऐसे में एक योगी क्या, योगी जैसे दस मिलकर भी शायद कुछ नहीं कर सकते। दूसरे जनपदों का यहां जिक्र न किया जाए तो कम से कम मथुरा का जिला प्रशासन भली-भांति समझ चुका है कि वह चाहे जितना खुल कर खेले, चाहे जितना भ्रष्टाचार करे किंतु उसका कुछ नहीं बिगड़ने वाला। तभी तो धर्म की नगरी में अधर्म का डंका डटकर बज रहा है और जिसकी जितनी बिसात है, वह उतनी ही माफिया की मदद करने पर आमादा है।
तभी तो पहले डालमिया बाग और अब सनसिटी अनंतम का मामला भी अदालत की चौखट तक पहुंचा, अन्यथा इसकी जरूरत ही क्यों पड़ती।
ताजा मामला एक बार फिर वृंदावन के सनसिटी अनंतम से जुड़ा है जिसे नगर निगम मथुरा-वृंदावन की बेशकीमती जमीन उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन के निर्देश पर बोर्ड बैठक में बाकायदा प्रस्ताव लाया गया।
आश्चर्य की बात यह है कि यह प्रस्ताव कौड़ियों की जमीन के बदले नगर निगम की बेशकीमती जमीन देने का है, जिस पर पूर्व में एक जिलाधिकारी आपत्ति भी दर्ज करा चुके हैं। अब यह प्रस्ताव निगम की बैठक में फिर लाया गया है।
क्या है प्रस्ताव?
9 अक्टूबर 2025 को पेश एजेण्डे के अनुसार अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) मथुरा ने ग्राम जैत व छटीकरा में सनसिटी हाईटेक प्रोजेक्ट प्रा. लि. द्वारा विकसित की जा रही टाउनशिप के लिए भूमि विनिमय का प्रस्ताव बोर्ड से पास कराकर उपलब्ध कराने के निर्देश पत्रांक-322/सात-बी/भू.व्य./2023 दिनांक 06.09.2023 एवं 173/सात- बी/भू.व्य./2023 दिनांक 23.09.2024 के जरिए दिए हैं।
इस नए प्रस्ताव के मसौदे में बताया गया है कि ग्राम जैत व छटीकरा में सनसिटी हाईटेक प्रोजेक्ट प्रा. लि. द्वारा विकसित की जा रही टाउनशिप के लिए भूमि के विनिमय का जो प्रस्ताव कार्यकारिणी ने पहले रखा था, उसकी त्रुटियों को संशोधित करते हुए यह प्रस्ताव लाया गया है।
यहां यह जान लेना जरूरी है कि सनसिटी हाईटेक ने अपनी प्रस्तावित टाउनशिप में जमीन का प्राथमिक मूल्य लगभग एक लाख रुपए प्रति वर्ग गज रखा है जबकि मथुरा-वृंदावन नगर निगम को उसके विनिमय में जो भूमि मिलनी है उसकी कीमत बमुश्किल 10 हजार रुपए प्रति वर्ग गज है।
देखें नगर निगम मथुरा-वृंदावन की बोर्ड बैठक में पेश एजेण्डे की प्रति-
गौरतलब है कि समूचा मथुरा जनपद और विशेषकर भगवान श्रीकृष्ण की लीलास्थली वृंदावन इन दिनों ''धार्मिक पर्यटन'' के रूप में अपनी वैश्विक पहचान बना चुका है। वृंदावन में जमीनों के दाम आसमान छू रहे हैं इसलिए स्थानीय ही नहीं, बाहरी भूमाफिया भी इसका भरपूर लाभ उठाने में लगे हैं। चूंकि जिला प्रशासन उन्हें इसकी पूरी छूट दे रहा है इसलिए वह कोई मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहते।
इन हालातों में यह बताने की तो आवश्यकता ही नहीं रह जाती कि मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण हो या फिर नगर निगम मथुरा-वृंदावन, सब आखिर कथित कॉलोनाइजर्स या यूं कहें कि भूमाफिया पर इतने मेहरबान क्यों हैं, और क्यों जिला प्रशासन विकास की आड़ लेकर भूमाफिया को सीधा लाभ पहुंचाने की जद्दोजहद में लगा है।
दरअसल ये सारा खेल करोड़ों का नहीं, अरबों का है। जाहिर है कि इससे होने वाली हराम की कमाई कितनी भी मामूली क्यों न हो, कुबेर के खजाने से कम नहीं होगी। राधे-राधे की रट लगाकर ब्रजवासियों को मूर्ख बनाने का यह धंधा बेशक बहुत दिनों से चल रहा है लेकिन अदालतें उम्मीद की किरण दिखा रही हैं।
वो आशा जगाती हैं कि कभी न कभी तो पाप का यह घड़ा भरेगा, और किसी न किसी दिन यह फूटेगा भी। तब अकेला माफिया नहीं, नेता और अधिकारी भी नापे जाएंगे। काली कमली वाले की नजर जिस दिन टेढ़ी हो गई, उस दिन ब्रज में यह कहावत चरितार्थ होते दिखाई देगी कि उसके घर में देर भले ही हो लेकिन अंधेर नहीं होता।
-सुरेन्द्र चतुर्वेदी