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गुरुवार, 11 दिसंबर 2014

IPL स्‍पॉट फिक्‍सिंग: धोनी ही हैं संदिग्‍ध Individual No 2

मुंबई। 
आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में मुख्य संदिग्ध गुरुनाथ मयप्पन टीम इंडिया और आईपीएल टीम चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के होटल के कमरे में रोज जाते थे। मामले की जांच कर रही मुद्गल कमेटी की रिपोर्ट में जिस ‘Individual No 2’ का जिक्र है, वह कोई और नहीं बल्कि कप्तान धोनी हैं।
बता दें कि 5000 पन्नों की मुद्गल कमेटी की रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है। सिर्फ जस्टिस मुद्गल द्वारा तैयार 29 पेज की सिनॉप्सिस संबंधित लोगों को दी गई है। इसमें क्रिकेटर्स के नाम का जिक्र नंबर से है।
जस्टिस मुकुल मुद्गल की ओर से अप्वाइंट किए गए जांच कर्ता बीबी मिश्रा की चार महीने लंबी चली जांच की रिपोर्ट में पता चला है कि ‘Individual No 2’ के कमरे में सीधी पहुंच रखने वाला कोई एक शख्स था, तो वे थे गुरुनाथ मयप्पन। धोनी बीसीसीआई की एंटी करप्शन यूनिट की पाबंदियों की वजह से हर रोज सभी से उस होटल के बिजनेस सेंटर में मिलते थे, जहां टीम ठहरी होती थी। हालांकि, जांचकर्ताओं ने पाया कि मयप्पन धोनी के कमरे तक सीधी पहुंच रखते थे। वह रोजाना, यहां तक कि आईपीएल 6 के मैचों के दौरान भी धोनी से सीधे संपर्क में होते थे।
होटल स्टाफ से पूछताछ में हुआ खुलासा
कई टीम अधिकारी, खिलाड़ी और होटल स्टाफ से पूछताछ के बाद जांचकर्ता इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं। मयप्पन की धोनी के कमरे तक सीधी पहुंच सिर्फ इस वजह से थी क्योंकि उन्हें चेन्नई सुपर किंग्स के मालिक के तौर पर सभी से मिलाया गया था।
कोर्ट में दी थी अजीबोगरीब दलील
सुप्रीम कोर्ट में आईपीएल फिक्सिंग मामले में चल रही सुनवाई में बीसीसीआई के निर्वाचित प्रमुख और मयप्पन के रिश्तेदार एन श्रीनिवासन के वकील ने दलील दी थी कि मयप्पन को सट्‌टेबाजी में बड़ा नुकसान हुआ है। वकील के मुताबिक, अगर मयप्पन के पास अंदर की खबर होती तो उन्हें नुकसान नहीं होता लेकिन मुद्गल कमेटी के लिए जांच करने वाले मिश्रा की रिपोर्ट में पता चला है कि धोनी और मयप्पन रोजाना दो से तीन बार मिलते थे। मुद्गल कमेटी ने भले ही यह पाया हो कि मयप्पन वास्तव में सीएसके के अधिकारी थे और सट्‌टेबाजी में शामिल थे, श्रीनिवासन और टीम सीएसके ने जोर देकर कहा था कि मयप्पन का टीम के मामलों से कोई मतलब नहीं है और उन्हें टीम स्ट्रैटिजी की कोई जानकारी नहीं है।
-एजेंसी

बुधवार, 16 अप्रैल 2014

स्पॉट फिक्सिंग रिपोर्ट में 12 क्रिकेटर्स और श्रीनिवासन भी

सुप्रीम कोर्ट ने आज खुलासा किया है कि आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले की जांच करने वाली जस्टिस मुद्गल समिति की रिपोर्ट में एन. श्रीनिवासन और 12 प्रतिष्ठित खिलाडियों के नाम हैं। कोर्ट ने कहा कि इन सभी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं। बीसीसीआई आरोपों की सीबीआई या एसआईटी से जांच कराने के लिए तैयार नहीं है। उसका कहना है कि इससे प्रतिष्ठित क्रिकेटर्स की छवि धूमिल हो जाएगी। साथ ही क्रिकेट बोर्ड की स्वायत्ता कमजोर हो जाएगी। श्रीनिवासन और चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी ने जस्टिस मुद्गल समिति की रिपोर्ट के इन निष्कर्षों को चुनौती दी थी कि दोनों ने गुरूनाथ मयप्पन की चेन्नई सुपर किंग्स में भूमिका को लेकर झूठ बोला था।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि सीलबंद रिपोर्ट में जो आरोप लगाए गए हैं, उनकी गहनता से जांच होनी चाहिए। आरोपों की प्रकृति गंभीर किस्म की है। कोर्ट ने कहा जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक श्रीनिवासन को बीसीसीआई से दूर रहना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, आरोपों को जानने के बाद हम अपनी आंखें बंद नहीं कर सकते।" "हम किसी की छवि खराब नहीं करना चाहते, लेकिन हमें क्रिकेट के भविष्‍य की चिंता है।" कोर्ट ने बीसीसीआई और श्रीनिवासन से पूछा कि आरोपों पर जांच किस तरह की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने आईपीएल के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर सुदरन रमन को राहत देते हुए पद पर बने रहने की अनुमति दी है। बीसीसीआई के अंतरिम अध्यक्ष सुनील गावस्कर ने सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर कहा था कि वह सुंदरन रमन को सीओओ पद से हटाने या बने रहने के संबंध में फैसला नहीं ले सकते।
बीसीसीआई के अध्यक्ष पद से हटाए गए श्रीनिवासन ने सुप्रीम कोर्ट से फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा था। श्रीनिवासन ने कोर्ट से अनुरोध किया था कि उन्हें इस साल सितंबर तक अध्यक्ष पद पर काम करते रहने की इजाजत दी जाए। इस मामले में श्रीनिवासन ने दलील दी कि बिहार क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से सीनियर वकील ने उनके खिलाफ अनुचित और अप्रमाणित आरोप लगाए हैं।
-एजेंसी
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