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शुक्रवार, 13 दिसंबर 2013

5 करोड़ लेकर दरोगा ही बचा रहा था नारायण साईं को

अहमदाबाद। 
गुजरात पुलिस ने क्राइम ब्रांच के सब-इंस्पेक्टर सीएम कुंभानी को गिरफ्तार किया है। कुंभानी पर नारायण साईं की मदद करने का आरोप है। प्राप्त जानकारी के अनुसार कुंभानी के घर से ‍पुलिस ने 5 करोड़ रुपए और आठ मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। कुंभानी ने नारायण साईं को भागने में मदद की थी। कुंभानी की मदद की वजह से ही नारायण लंबे समय तक पुलिस की गिरफ्त स दूर रहने में कामयाब रहा था।
पता चला है कि कुंभानी पुलिस की रणनीति की पूरी जानकारी नारायण साईं के सेवक को देता था, जिसके माध्यम से जानकारी नारायण तक पहुंचती थी और जब पुलिस संभावित ठिकानों पर छापेमारी करती तो उसके हाथ कुछ नहीं लगता है।
चूंकि नारायण को पुलिस कार्यवाही की पहले ही जानकारी मिल जाती थी, अत: पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह अपने ठिकाने बदल लेता था। इस मदद के बदले कुंभानी को 5 करोड़ रुपए मिले थे। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों गिरफ्तार नारायण अभी सूरत पुलिस के ही कब्जे में है।
इसके साथ ही पुलिस ने नारायण साईं के खिलाफ एक और एफआई दर्ज कर ली है। नारायण ने पूछताछ में सनसनीखेज खुलासा किया है कि कुल 30 करोड़ रुपए रिश्वत के रूप में दिए जाने थे। यह पैसा साईं के सभी मददगारों के बीच बंटना था।
-एजेंसी

मंगलवार, 3 दिसंबर 2013

महिला सीईओ पर लगा पुरुषों के यौन शोषण का आरोप

न्‍यूयॉर्क। 
भारत में सुप्रीम कोर्ट के जज एके गांगुली और तहलका के पूर्व मुख्‍य संपादक तरुण तेजपाल पर यौन शोषण के आरोपों के बाद अब अमेरिका में एक सीईओ पर यौन शोषण के आरोप का मामला सामने आया है। भारत के इन दो मामलों और अमेरिका के इस केस में फर्क इतना है कि हमारे देश में पुरुषों पर यौन शोषण के आरोप लगे हैं जबकि न्‍यूयॉर्क के मामले में आरोप महिला सीईओ पर लगे हैं। अमेरिकी मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार, 'आर्ची कॉमिक्‍स' की 59 वर्षीय सीईओ नैंसी सिलबरकेट से परेशान होकर पांच कर्मचारियों ने उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया है।

शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2013

मानव अंगों की तस्‍करी भी करता है आसाराम!

मुझे ठीक-ठीक दिन, महीना या साल तो याद नहीं पर इतना जरूर याद है कि सन् 1998 के बाद की बात होगी। संभवत: 1999 से 2000 के बीच की। आसाराम बापू शायद पहली बार मथुरा आए थे और वृंदावन में टीबी सेनोटोरियम के सामने उनका भव्‍य पण्‍डाल लगा था। अपनी कथा शुरू करने से पहले उन्‍होंने एक प्रेस कांफ्रेस वृंदावन के छटीकरा रोड पर स्‍थित नंदनवन में बुलाई। उस समय तक मैं भी पीसी अटेंड करने जाया करता था।
मैंने आसाराम बापू से पूछा कि आप अपने अनुयायियों को क्‍या संदेश देते हैं, क्‍या बताते हैं?
आसाराम का जवाब था- मैं लोगों को भौतिकता की अंधी दौड़ से मुक्‍त होने का मार्ग बताता हूं।
मैंने प्रतिप्रश्‍न किया- आप स्‍वयं सारी भौतिक सुविधाएं इस्‍तेमाल करते हैं, फिर अपने अनुयायियों को कैसे भौतिकता की अंधी दौड़ से मुक्‍ति का मार्ग बता सकते हैं?
इस पर उनका उत्‍तर बड़ा चालाकी भरा था। वह बोले- मैं भौतिक सुविधाओं का 'उपयोग' करता हूं जबकि बाकी लोग उनका 'उपभोग' करते हैं।
सच कहूं तो उनके इस चालाकी भरे जवाब में मुझे पत्रकारिता को चुनौती देने और अपना थोथा अहम् प्रदर्शित करने जैसा आभास हुआ लिहाजा मैंने अगला प्रश्‍न थोड़ा तीखा पर सटीक किया।
मेरा प्रश्‍न था- एक शराबी, किसी दूसरे शराबी को यह कैसे समझा सकता है कि वह उसका 'उपयोग' कर रहा है जबकि सामने वाला उसका 'उपभोग' करता है?
प्रश्‍न तीखा था इसलिए असर करना स्‍वाभाविक था, नतीजतन तथाकथित संत आसाराम प्रेस वार्ता से उठ खड़े हुए और बाकी की जिम्‍मेदारी अपने प्रमुख सेवादारों पर छोड़ दी।
मेरे द्वारा पूछे गए प्रश्‍न का जवाब तो किसी ने नहीं दिया अलबत्‍ता जमकर हंगामा जरूर हुआ।
बाद में आसाराम के कुछ ब्‍यूरोक्रेट शिष्‍य मेरे ऑफिस आए और यह समझाने की कोशिश की कि बापू से टकराव की जगह यदि सामंजस्‍य बनाकर चलूंगा तो फायदे में रहूंगा।
बहरहाल, उनकी यह सलाह न मेरे काम आनी थी और न आई।
आज इस घटना का ज़िक्र इसलिए कर रहा हूं क्‍योंकि वृंदावन में भी आसाराम बापू का एक आश्रम है और यहां का भी एक वृद्ध समाजसेवी, आसाराम की अंधभक्‍ति का शिकार हुआ है। इस वृद्ध की बातों पर भरोसा करें तो आसाराम का जंजाल सिर्फ यौन उत्‍पीड़न, ज़मीन कब्‍जाने आदि तक सीमित नहीं है। उसके कई और ऐसे कारनामे हैं जिनसे यदि परदा उठ जाता है तो ऐसी बातें सामने आयेंगी जो किसी को भी दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर सकती हैं। 
वृंदावनवासी जो व्‍यक्‍ति आसाराम का शिकार बना है, उसे लोग लालबाबा कहकर पुकारते हैं। लालबाबा नामक इस शख्‍स की पत्‍नी आसाराम के साबरमती (गुजरात) आश्रम से तब आधे घंटे के अंदर लापता हो गई जब कुछ लोगों के कहने पर वह अपनी पत्‍नी का इलाज कराने उसे वहां ले गया था। लालबाबा का कहना है कि आसाराम के कहने पर ही मैंने अपनी पत्‍नी को अलग उनके महिला आश्रम में ठहराया था लेकिन उसके बाद उसका कोई पता नहीं लगा।
मूल रूप से राजस्‍थान के निवासी और हार्डवेयर व्‍यवसाई लालबाबा ने कुछ वर्षों पूर्व समाजसेवा करना शुरू कर दिया था और तभी से वृंदावनवासी हो गए।
लालबाबा का पुत्र अपने परिवार सहित उत्‍तम नगर (दिल्‍ली) में रहता है।
चार वर्षों से लालबाबा और उनका परिवार पुलिस, प्रशासन, महिला आयोग आदि के चक्‍कर काट रहा है लेकिन कहीं से उसे राहत नहीं मिली है।
लालबाबा के अनुसार जिस वक्‍त उनकी पत्‍नी गायब हुई थी, तब उसकी उम्र करीब 52 साल थी इसलिए मैंने उनसे यह जानना चाहा कि उनकी पत्‍नी को गायब कराने के पीछे आसाराम या उनके सेवादारों की मंशा क्‍या हो सकती है?
इस प्रश्‍न के जवाब में लालबाबा ने चौंकाने वाली जानकारी दी। उनका कहना था कि एक लंबे समय तक मैं खुद भी इस प्रश्‍न से जूझता रहा कि एक 52 साल की महिला को गायब करने के पीछे क्‍या उद्देश्‍य हो सकता है।
बहुत प्रयास करने पर कुछ लोगों से पता लगा कि आसाराम का नेटवर्क मानव अंगों की तस्‍करी के जघन्‍य आपराधिक कारोबार से भी जुड़ा है। अब तक उनके विभिन्‍न आश्रमों तथा गुरूकुलों से गायब बच्‍चे, लड़कियां तथा महिला-पुरुषों के लापता होने की असली वजह तांत्रिक क्रियाओं के लिए बलि न होकर उनके अंगों को निकालने के लिए हत्‍याएं कर देना रहा है।
लालबाबा के कथन में यदि थोड़ी भी सच्‍चाई है तो यह दुराचार अथवा दूसरे आपराधिक कृत्‍यों से कहीं बहुत बड़ा मामला है और इसकी सच्‍चाई सामने आना अत्‍यंत जरूरी है।
फिलहाल लालबाबा दिल्‍ली के उत्‍तम नगर में अपने पुत्र के साथ रह रहे हैं और कई चैनलों पर उनकी पत्‍नी के चार साल पहले आसाराम आश्रम से गायब होने की कहानी बताई जा चुकी है लेकिन लालबाबा उस कहानी से संतुष्‍ट नहीं हैं।
लालबाबा इसलिए संतुष्‍ट नहीं हैं क्‍योंकि किसी भी मीडिया पर्सन ने उनकी बात को समझने का प्रयास नहीं किया। किसी ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि लालबाबा क्‍या बताना चाहते हैं।
सभी का फोकस आसाराम की तथाकथित हवस तक सीमित है, कोई यह नहीं जानना चाहता कि 52 साल की किसी औरत को गायब करने का मकसद क्‍या हो सकता है।
लालबाबा ने इन चार सालों में जो कुछ पता किया और जितना कुछ जाना, एकबार उस पर भी गौर करना क्‍या जरूरी नहीं। हो सकता है कि आसाराम का एक और रूप सामने आये।

सोमवार, 2 सितंबर 2013

खुलासा: सेक्‍स करने में पूरी तरह सक्षम है आसाराम

जोधपुर। अपने ही अनुयायी की नाबालिग बेटी से यौन शोषण मामले में अरेस्ट विवादित धर्मगुरु आसाराम बापू कानून से बचने के लिए तमाम तरकीबों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने रविवार को जांच अधिकारियों से कहा कि वह नपुंसक हैं। ऐसे में इस तरह का अपराध करने में वह समर्थ ही नहीं हैं। 72 वर्षीय आसाराम के इस दावे की पोल तब खुल गई जब 'पोटेंसी टेस्ट' (मर्दानगी जांच) पॉजिटिव निकला। मतलब आसाराम की कामुकता पूरी तरह से ऐक्टिव है।
पुलिस का कहना है कि टेस्ट के पॉजिटिव रिजल्ट से उन्हें इस केस में काफी मजबूत मेडिकल सबूत मिला है। जोधपुर के पुलिस कमिश्नर बिजू जॉर्ज जोसेफ ने बताया कि डॉक्टर्स की एक टीम को राजस्थान के पुलिस हेडक्वॉर्टर में बुलाया गया था। यहीं पर आसाराम का 'पोटेंसी टेस्ट' लिया गया। कमिश्नर का कहना है कि इस 'पोटेंसी टेस्ट' से यह कन्फर्म हो गया हैकि आसाराम 16 साल की उस लड़की के साथ यौन शोषण और रेप जैसा अपराध करने लायक हैं। वहीं दूसरे सीनियर पुलिस ऑफिसर का कहना है कि यह टेस्ट एक नॉर्मल प्रक्रिया का हिस्सा है। किसी भी रेप केस में आरोपी का 'पोटेंसी टेस्ट' इसलिए लिया जाता है ताकि यह साबित हो सके कि वह रेप करने के काबिल है या नहीं।

रविवार, 1 सितंबर 2013

आसाराम बापू बनाम कृपालु आदि...

(लीजेण्‍ड न्‍यूज़ विशेष)
एक बच्‍ची के साथ दुष्‍कर्म के आरोपी आसाराम बापू की गिरफ्तारी से यूं तो मथुरा-वृंदावन का कोई सीधा संबंध नहीं हैं लेकिन जो संबंध है, वो बहुत महत्‍वपूर्ण है और उसके बिना आसाराम की कहानी न तो शुरू की जा सकती है, न उसके क्‍लाईमेक्‍स का कोई मतलब रह जाता है क्‍योंकि मथुरा-वृंदावन भी धर्मनगरी हैं लिहाजा यहां साधु-संत  एवं महंतों का अच्‍छा-खासा आधिपत्‍य है।
आगे बढ़ने से पहले कुछ बातें हैं जिन पर गौर किया जाना बहुत जरूरी है ताकि यह समझा जा सके कि आखिर कैसे कोई 'आसूमल' देखते-देखते आसाराम बापू बन जाता है।
नंबर एक- श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े ने तथाकथित महिला संत राधेमां को विगत माह विवादास्‍पद तरीके से दिया गया महामण्‍डलेश्‍वर का पद बहाल कर दिया। इसकी सफाई में अखाड़े की ओर से कहा गया कि उनके ऊपर लगाये गये आरोपों की जांच के दौरान पुष्‍टि न हो पाने पर यह फैसला लिया गया है।
नंबर दो- गायत्री तपोभूमि ट्रस्‍ट में संचारी के पद पर कार्यरत चन्‍द्रपाल सिंह ने 2 करोड़ 43 लाख रुपये का गबन किया है जिसकी तपोभूमि ट्रस्‍ट ने मथुरा के गोविंदनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है।
गायत्री तपोभूमि ट्रस्‍ट के संस्‍थापक आचार्य श्रीराम शर्मा वैसे तो पड़ोसी जिला आगरा में गांव आंवलखेड़ा के मूल निवासी थे लेकिन उन्‍होंने अपनी कर्मभूमि बनाई मथुरा और यहीं से दौलत व शौहरत की ऊंचाइयां हासिल कीं।
नंबर तीन- जयगुरूदेव नाम परमात्‍मा का, सतयुग आयेगा का ढोल पीटकर नाम और दाम कमाने वाले बाबा जयगुरुदेव की बेशुमार चल-अचल संपत्‍ति पर उनकी मृत्‍यु के बाद विवाद चल रहे हैं और यह विभिन्‍न न्‍यायालयों में लंबित हैं।
नंबर चार- पूर्वी उत्‍तर प्रदेश में जनपद प्रतापगढ़ के कस्‍बा मनगढ़ का मूल निवासी है रामकृपाल त्रिपाठी। आज लोग उसे कृपालु महाराज के नाम से जानते हैं। वह खुद को पांचवां जगद्गुरू शंकराचार्य कहता है। कृपालु महाराज की मथुरा के वृंदावन एवं बरसाना सहित देश-विदेश में अरबों की संपत्‍ति है।
आसाराम बापू और कृपालु महाराज में काफी समानताएं हैं। मसलन आसाराम की तरह ही कृपालु महाराज गृहस्‍थ है और उसका भरा-पूरा परिवार है। आसाराम की तरह ही कृपालु की संतानें उसके धर्म के धंधे की वारिस हैं और कृपालु द्वारा स्‍थापित ट्रस्‍टों पर वही काबिज हैं।

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