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शनिवार, 13 नवंबर 2021
312.50 करोड़ के फ्रॉड केस में “नयति” की चेयरपर्सन नीरा राडिया से EOW ने की 4 घंटे तक पूछताछ
312.50 करोड़ रुपए के कर्ज का गबन करने के मामले में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने गत 27 अक्टूबर को नयति हेल्थकेयर की चेयरपर्सन और प्रमोटर नीरा राडिया से करीब 4 घंटे कड़ी पूछताछ की है।दरअसल, नयति हेल्थकेयर के दो निदेशकों यतीश वहाल और सतीश कुमार नरुला को गत दिनों इस मामले में एक अन्य व्यक्ति राहुल सिंह के साथ गिरफ्तार किए जाने के बाद पुलिस ने राडिया को जांच में शामिल होने के लिए तलब किया था।
पिछले साल 4 नवंबर को पुलिस ने आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. राजीव कुमार शर्मा की शिकायत पर नारायणी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड, नीरा राडिया, उनकी बहन करुणा मेनन, सतीश नरुला और यतीश वहल पर धोखाधड़ी, अमानत में खयानत, खातों में हेराफेरी, फ्रॉड, धन के गबन समेत अन्य आरोपों के तहत एक FIR दर्ज की थी।
हालांकि नयति हेल्थकेयर के एक प्रवक्ता ने राडिया के खिलाफ आरोपों से इंकार करते हुए दावा किया था कि प्राथमिकी “निराधार” है और कंपनी बोर्ड हेराफेरी के आरोपों की जांच कर रहा है।
FIR के अनुसार आरोपियों ने दो अस्पतालों गुड़गांव में नयति मेडिसिटी और दिल्ली में विमहंस के लिए कर्ज लिया था, जहां डॉ. शर्मा “प्रमुख पदों” पर थे। शर्मा ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने नारायणी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से इन दो परियोजनाओं का धोखाधड़ी पूर्वक एक बड़ा हिस्सा हासिल कर लिया, जिसे बाद में नयति हेल्थकेयर एनसीआर नाम दिया गया।
शर्मा ने आरोप लगाया कि आरोपी ने अस्पताल को विकसित करने के लिए 312.50 करोड़ रुपये का कर्ज लिया और फिर निजी इस्तेमाल के लिए कर्ज का पैसा ट्रांसफर करने को ‘फर्जी खाते’ बनाए।
EOW के अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर आर के सिंह के अनुसार “यस बैंक से 312.50 करोड़ रुपये का ऋण प्राप्त करने के बाद अहलूवालिया कंस्ट्रक्शन के नाम से 208 करोड़ रुपये एक बैंक खाते में स्थानांतरित किए गए। जांच करने पर पता चला कि यह खाता अहलूवालिया कंस्ट्रक्शन के प्रमोटर राहुल सिंह यादव ने खोला था। खातों को वहाल और नरुला द्वारा अधिकृत किया गया था।”
पुलिस के अनुसार नीरा राडिया से उसने लगभग 50 प्रश्न पूछे। राडिया ने सभी सवालों के जवाब दिए लेकिन 312.50 करोड़ रुपये के कर्ज पर संतोषजनक जवाब नहीं दिया। पुलिस ने बताया कि आने वाले दिनों में नीरा राडिया को फिर तलब किया जाएगा।
गौरतलब है कि मथुरा में नीरा राडिया ने दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर- 2 पर नयति मल्टी सुपर स्पेशलिटी के नाम से एक हॉस्पिटल खोला था, जो पिछले करीब ढाई महीने से बंद पड़ा है। नीरा राडिया के इस हॉस्पिटल में प्रसिद्ध चार्टर्ड एकाउंटेंट दीनानाथ चतुर्वेदी के पुत्र राजेश चतुर्वेदी का नाम भी बतौर प्रमोटर्स शामिल है। हॉस्पिटल बंद होने के बाद से नयति के कर्मचारी अपने वेतन तक को तरस गए हैं जबकि हॉस्पिटल के प्रबंधतंत्र का कहना है कि मेंटिनेंस के चलते हॉस्पिटल को कुछ समय के लिए बंद किया गया है।
बहरहाल, ”2G स्पैक्ट्रम” घोटाला हो या “पनामा लीक्स” और पेंडोरा लीक मामला, नीरा राडिया का नाम हर एक से जुड़ा है जिससे इतना तो साफ होता है कि नयति के मालिकों में शुमार इस महिला की न तो नीयत ठीक है और न नेकी से इसका दूर-दूर तक कोई संबंध है।
यही कारण है कि आने वाला समय नीरा राडिया के लिए और मुश्किल भरा हो सकता है, साथ ही नीरा राडिया के नयति की नीयति भी यही समय तय करने वाला है।
-सुरेन्द्र चतुर्वेदी
शनिवार, 7 नवंबर 2020
नीरा राडिया के नयति हेल्थकेयर पर 300 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का मामला दर्ज
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मामला दर्ज कर दो फर्मों के खिलाफ जांच शुरू की है, जिसमें नयति हेल्थकेयर (Nayati Healthcare) भी शामिल है, जिसकी चेयरपर्सन और प्रमोटर नीरा राडिया हैं। गुरुग्राम की हेल्थ फर्म के साथ-साथ ईओडब्ल्यू की एफआइआर में दर्ज एक अन्य कंपनी नारायणी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड पर 300 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है जो एक ऋण के माध्यम से प्राप्त की गई थी। नयति और नारायणी पर गुरुग्राम और विमहंस हॉस्पिटल दिल्ली के प्रिमामेद हॉस्पिटल परियोजनाओं (Primamed Hospital Projects) में 2018-2020 के बीच 312.50 करोड़ रुपये की राशि के गबन और जालसाजी का आरोप लगाया गया है।दिल्ली के ऑर्थोपेडिक सर्जन राजीव के शर्मा ने यह शिकायत दर्ज की है। सूत्रों के अनुसार फर्मों ने विभिन्न प्रसिद्ध ठेकेदारों के नाम पर फर्जी खाते खोलकर और इन खातों में सीधे लोन मनी ट्रांसफर करके लोन से करोड़ों का गबन किया। राजीव शर्मा ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि 400 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण और इक्विटी मनी को बेशर्मी से निकाल दिया गया है जबकि गुरुग्राम अस्पताल के बिल्डिंग की हालत पहले से भी बदतर हो गई है।
इस संबंध में अन्य जांच की प्रक्रिया अभी है जारी
नयति हेल्थकेयर ने बाद में इस मामले को लेकर एक बयान जारी किया। डॉ. शर्मा बोर्ड के सदस्य होने के नाते कंपनी के सभी कार्यों के लिए एक पार्टी और हस्ताक्षरकर्ता थे। मतभेदों के कारण जो गतिविधियों के एक फोरेंसिक ऑडिट के संचालन के लिए पीछा किया गया था। डॉ. राजीव शर्मा के तहत पिछला प्रबंधन, गलतबयानी और दुर्भावना के कुछ मामले सामने आए। इन मुद्दों को डॉ. शर्मा के साथ उठाया गया था और विधिवत रूप से पुलिस को एक शिकायत (SIC) के रूप में सूचित किया गया था। इस संबंध में अन्य जांच की प्रक्रिया अभी जारी है।
-एजेंसियां
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