बुधवार, 25 फ़रवरी 2026

हाईटेक प्रोजेक्ट सनसिटी अनंतम के अंत का आगाज़: कोर्ट ने रद्द किया करोड़ों का बैनामा, NEXUS का भी खुलासा


 वृंदावन में प्राइम लोकेशन पर बन रहे हाईटेक रियल एस्‍टेट प्रोजेक्ट सनसिटी अनंतम के अंत का आगाज़ उस समय होता हुआ दिखाई दिया जब न्‍यायालय अपर जिला न्‍यायाधीश श्रीमती नीलम ढाका ने इस प्रोजेक्‍ट के कई बैनामे रद्द कर दिए और जबरन कराए गए इन बैनामों को प्रशासन और बिल्डर के NEXUS का नतीजा माना। 

23 फरवरी 2026 को किए गए इस आदेश में साफ-साफ लिखा है कि न्‍यायालय ने इस पूरे मामले में राज्य के तंत्र और बिल्डर के बीच स्पष्‍ट तौर पर गठजोड़ पाया। बिल्डर के पास अधिग्रहण की अधिसूचना से पहले कोई भूमि थी ही नहीं, और वह सरकारी कार्रवाई की वजह से ही इस प्रक्रिया में शामिल हुआ। 
सरकारी तंत्र ने अधिग्रहण के अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर किसानों की जमीन बिल्डर को हस्तांतरित कर दी जो सीधे-सीधे सार्वजनिक न्यास सिद्धांत तथा संविधान के अनुच्‍छेद 14, 12 तथा 300-A का उल्लंघन है जबकि सिद्धांत कहता है कि जो काम सीधे नहीं किया जा सकता, वह अप्रत्यक्ष रूप से करना भी संभव नहीं है। 
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी टिप्‍पणी की कि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के बाद किसान फंस गए क्‍योंकि वह फिर अपनी जमीन किसी और को बेच नहीं सकते थे। बिल्डर ने उनकी इस दयनीय स्‍थिति का लाभ उठाकर उन्हें ऐसा प्रस्ताव दिया जो सरकारी मुआवजे से बेहतर तो प्रतीत होता था किंतु वह बाध्यकारी तथा अन्यायपूर्ण था। 
कोर्ट ने इस दौरान Land Acquisition Act 1894 के अंतर्गत अधिग्रहण की चरणबद्ध प्रक्रिया का उल्लेख किया और बताया कि कैसे इस मामले में धारा 17 के आपातकालीन प्रावधानों का दुरुपयोग किया गया और किसानों को उनके आपत्ति दर्ज कराने के अधिकार से भी वंचित कर दिया। 
अदालत ने सनसिटी द्वारा किए गए उस दावे की भी जांच की जिसमें हाईटेक टाउनशिप नीति के अंतर्गत छूट का हवाला दिया गया था, लेकिन हाईटेक टाउनशिप नीति तो वर्ष 2010 में ही समाप्‍त कर दी गई थी। 
कोर्ट ने अपने निर्णय में क्या-क्या लिखा 
 निचली अदालत का निर्णय दिनांक 18.12.2018 तथा डिक्री दिनांक 10.01.2019 निरस्त किए जाते हैं।
✅ विक्रय विलेख (बैनामा) दिनांक 11.01.2007— उप-पंजीयक कार्यालय, मथुरा में पंजीकृत — रद्द किया जाता है तथा शून्य एवं अमान्य घोषित किया जाता है।
✅ अपीलकर्ताओं/किसानों के पक्ष में स्थायी निषेधाज्ञा जारी की जाती है — Suncity (प्रतिवादी संख्या 1) और उसके एजेंट खसरा संख्या 393, क्षेत्रफल 7.486 हेक्टेयर, छटीकरा, मथुरा पर निर्माण या हस्तांतरण नहीं कर सकते।
✅ अपीलकर्ताओं को यह विकल्प दिया जाता है कि वे Suncity से प्राप्त विक्रय राशि (₹2,65,00,000) 6 माह के भीतर वापस करें तथा प्रतिवादी इसे स्वीकार करें।
करीब 14 वर्षों से अधिक समय तक चले वाद-विवाद के बाद अपीलीय न्यायालय ने निचली अदालत के निर्णय को पलटते हुए धोखाधड़ीपूर्ण विक्रय विलेख को निरस्त कर दिया तथा बिल्डर को उनकी भूमि पर किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से स्थायी रूप से रोक दिया। न्यायालय ने माना कि पूरा लेनदेन सरकार और बिल्डर की मिलीभगत, मिथ्या प्रतिरूपण तथा भूमि अधिग्रहण शक्तियों के दुरुपयोग का परिणाम था। 
छटीकरा स्‍थित गरुण गोविंद मंदिर के सामने खसरा नंबर 393 की 7.4860 हेक्‍टेयर जमीन के लिए 14 वर्ष से लड़ाई लड़ रहा सेंगर परिवार न्‍याय मिलने पर बहुत खुश है। 
गौरतलब है कि सनसिटी अनंतम के लिए ऐसा ही प्रयास जिला प्रशासन के पत्र पर नगर निगम मथुरा-वृंदावन द्वारा किया जा रहा है, हालांकि कई प्रयासों के बाद अभी तक लेंड एक्सचेंज का प्रस्‍ताव पास नहीं हो सका लेकिन कोशिश जारी है।   
-Legend News
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