लगभग तीस महिलाएँ, पुरुष और बच्चे हाथ
हिला-हिलाकर, झूम झूमकर नाच रहे हैं. स्टेज पर एक नौजवान गिटार बजा रहा है
और कई लड़के लड़कियाँ एक साथ गा रही हैं.
ये किसी पार्टी का दृश्य नहीं है.
मुंबई के पास अम्बरनाथ में ये एक चर्च का दृश्य है, जहाँ हर महीने के पहले हफ़्ते में अलग- अलग धर्मों के लोग लाइलाज बीमारियों से मुक्ति पाने या ‘चंगाई’ हासिल करने के लिए इकट्ठा होते हैं.
इसके बाद उनमें से ज़्यादातर ईसाई धर्म को अपना लेते हैं.
चर्च के अधिकारियों का फिर भी कहना है कि ये धर्म परिवर्तन नहीं बल्कि ‘मन परिवर्तन है’.
सभा के बीच में कुछ महिलाएँ और पुरुष स्टेज पर आकर अपने अनुभव बताते हैं और कहते हैं कि चर्च आने के बाद कैसे उन्हें बीमारियों से छुटकारा मिल गया.
वहाँ मौजूद सब लोग इन विवरणों को सुनकर तालियाँ बजाते हैं.
ये किसी पार्टी का दृश्य नहीं है.
मुंबई के पास अम्बरनाथ में ये एक चर्च का दृश्य है, जहाँ हर महीने के पहले हफ़्ते में अलग- अलग धर्मों के लोग लाइलाज बीमारियों से मुक्ति पाने या ‘चंगाई’ हासिल करने के लिए इकट्ठा होते हैं.
इसके बाद उनमें से ज़्यादातर ईसाई धर्म को अपना लेते हैं.
चर्च के अधिकारियों का फिर भी कहना है कि ये धर्म परिवर्तन नहीं बल्कि ‘मन परिवर्तन है’.
सभा के बीच में कुछ महिलाएँ और पुरुष स्टेज पर आकर अपने अनुभव बताते हैं और कहते हैं कि चर्च आने के बाद कैसे उन्हें बीमारियों से छुटकारा मिल गया.
वहाँ मौजूद सब लोग इन विवरणों को सुनकर तालियाँ बजाते हैं.