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सोमवार, 11 फ़रवरी 2013

ये कैसा मोक्ष: एबुंलेंस तक मयस्‍सर नहीं

भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजन बेहद नाराज़ हैं क्योंकि प्रशासन मृतकों के शवों को ले जाने के लिए एबुंलेंस तक मुहैय्या नहीं करा रहा है.
इलाहाबाद के स्वरुप रानी मेडिकल कॉलेज में मृतकों के परिजन आए हुए हैं और पोस्टमार्टम के बाद शवों को ले जा रहे हैं.

परिजन खुद ही कफन लेकर आए हैं और गाड़ियों की व्यवस्था भी खुद ही कर रहे हैं. लोगों में इस बात को लेकर बहुत गुस्सा है.
अभी तक कोई आला अधिकारी भगदड़ की घटना के बाद इलाहाबाद नहीं पहुंचा है. इतना ही नहीं, सरकार को कोई मंत्री भी यहां नहीं आया है.
कुंभ मेला आयुक्त देवेश चतुर्वेदी जब अस्पताल में पहुंचे तो लोगों ने उनके खिलाफ़ नारेबाज़ी की और उनके साथ दुर्व्यवहार भी किया.
हालात ये हैं कि पोस्टमार्टम के बाद मृतकों के परिजन शवों को लेकर बैठे हुए हैं कि उन्हें कोई गाड़ी मिले ताकि वो अंतिम संस्कार के लिए लाश ले जा सकें.

रविवार, 2 दिसंबर 2012

यूपी: सरकार को लगा 30 हजार करोड़ का चूना

इलाहाबाद। बारा और करछना स्थित पॉवर प्रोजेक्ट प्लांट को मंजूरी देने में करीब 30 हजार करोड़ रुपए के घपले का आरोप लगा है। इसे लेकर बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई। याचिका में पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई है।
बारा के अनवारुल हक की याचिका पर सुनवाई कर रही कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश शिवकीर्ति सिंह और न्यायमूर्ति संजय मिश्र की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। सुनवाई 17 दिसंबर को होगी।
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