योगी जी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
योगी जी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 11 अप्रैल 2026

एक सवाल योगी जी से: वृंदावन में कल 10 जानें जाने का जिम्मेदार कौन, क्या होगा किसी पर कोई एक्शन?


 योगीराज भगवान कृष्ण की क्रीड़ास्थली वृंदावन में कल 10 जानें अकाल मृत्यु का शिकार हो गईं। पलक झपकते ही पंजाब के 10 तीर्थयात्री काल के गाल में समा गए, लेकिन घटना के 24 घंटे बाद तक जिला प्रशासन यही बताने की स्थिति में नहीं है कि आखिर इस हृदय विदारक मोटर बोट हादसे का जिम्मेदार है कौन, किसके नकारापन ने एक साथ 10 लोगों की जिंदगियां छीन लीं।  

चूंकि वृंदावन सहित समूचे मथुरा जनपद में प्रतिदिन लाखों तीर्थयात्री आते हैं इसलिए लोगों का यह जान लेना जरूरी है कि यदि आप यहां आ रहे हैं तो आपकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी आपकी ही है। 

कहने को इस विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पर यात्रियों की सुख-सुविधा के लिए अनेक सरकारी इंतजामात का ढिंढोरा पीटा जाता है, हर आयोजन-प्रायोजन तथा तीज-त्यौहार एवं विशेष पर्वों पर अधिकारियों का लाव-लश्कर भी नजर आता है किंतु चलता सब रामभरोसे ही है क्योंकि धर्म की आड़ में अधर्म का जैसा नंगा नाच मथुरा में होता है, वैसा शायद ही कहीं और देखने को मिले।

See The video link here: 

https://www.youtube.com/shorts/UrYhV5TSIWM

दुख और अफसोस की बात यह है कि इस धार्मिक जनपद में पर्यटन के लिए आने वाले उच्च अधिकारी भी किसी प्रश्न का जवाब देने को तैयार नहीं हैं। यहां तैनात अधिकारी शायद इसलिए बेलगाम हैं क्यों कि दर्जनों बार मथुरा के विभिन्न स्थानों का अलग-अलग मौकों पर दौरा कर चुके सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक बार भी न तो मीडिया से मुलाकात करना जरूरी समझा और न किसी अन्य सूत्रों से यह जानने की कोशिश की कि यहां तैनात अधिकारियों को लेकर आमजन क्या विचार रखता है। 

इसीलिए अब सीधा सवाल सूबे के सीएम योगी से क्योंकि एक झटके में 10 जिंदगियां जाने के बावजूद मथुरा में तैनात अधिकारी, लापरवाही का ठीकरा एक-दूसरे के सिर फोड़ने में व्यस्त हैं। 

इन फैक्‍ट, वो यमुना में सैकड़ों मोटर बोट... चप्पू नाव तथा स्‍टीमर के अवैध संचालन तक की जिम्मेदारी शासन की कार्यप्रणाली पर डाल रहे हैं जबकि यमुना में इनका अवैध संचालन उनकी तिजोरियां भर रहा है। 

कल जब इस बारे में मीडिया ने नगर निगम के अधिकारियों से बात की तो उनकी बेशर्मी का आलम यह था कि वो इनके अवैध संचालन को स्वीकार करते हुए भी ढाई महीने पहले प्रयागराज भेजे गए उस गजट का हवाला दे रहे थे जो नावों के संचालन हेतु लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। 

क्या सीएम योगी यह बताएंगे कि बिना लाइसेंस यमुना में चल रही सैकड़ों नावों के खिलाफ जिम्मेदार अधिकारियों ने कभी कोई एक्शन क्यों नहीं लिया? 

विभिन्न मौकों पर अधिकारी इन्हीं अवैध मोटर बोटों में खुद कैसे भ्रमण करते रहे हैं, और क्यों किसी आमजन के लिए लाइफ जैकेट जरूरी नहीं की गई, क्या उसके लिए भी किसी गजट की दरकार है या आम आदमी की जिंदगी का अधिकारियों की दृष्टि में कोई मोल है ही नहीं? 

किसी को भी यह जानकार आश्‍चर्य हो सकता है कि मथुरा-वृंदावन में अवैध रुप से चल रही इन नावों पर उनके संचालकों ने लोगों को आकर्षित करने के लिए बाकायदा सेल्फी प्‍वाइंट तक बना रखे हैं और उनका उपयोग ऊट-पटांग हरकतों के साथ बिना लाइफ जैकेट पहने बेखौफ किया जाता है क्योंकि न कोई रोकने वाला है और न टोकने वाला। 

कृष्‍ण की नगरी में आने वाले अधिकांश अधिकारी कहने को अपनी तैनाती के पहले दिन से तो धार्मिक चोला ओढ़ लेते हैं, किंतु उनकी गिद्ध दृष्टि हर समय अधिक से अधिक अतिरिक्त कमाई के स्‍त्रोत ढूंढने में लगी रहती है। अवैध रुप से संचालित नावें भी उनमें से एक हैं। 

यह भी मान सकते हैं उत्तर प्रदेश में मथुरा जनपद की तैनाती किसी भी अधिकारी के लिए उसकी सर्विस का स्‍वर्णिम काल साबित होता है। यही कारण है कि कार्यकाल के दौरान ही नहीं, रिटायरमेंट के बाद भी कोई अधिकारी मथुरा को छोड़ना नहीं चाहता। वह किसी न किसी रूप में यहीं बने रहना चाहता है। आज भी कई अधिकारी उसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। चाहे बांके बिहारी मंदिर की भीड़ में कोई दबकर मरे, या नाव दुर्घटना में किसी का पूरा परिवार समाप्त हो जाए, अधिकारियों को फर्क नहीं पड़ता। फर्क पड़ता तो इतनी दर्दनाक दुर्घटना के जवाब ऐसे बेदर्द नहीं होते। 

योगी जी, मथुरा बेशक एक विश्व प्रसिद्ध धार्मिक नगरी है लेकिन किसी भी अधर्म के लिए धर्म एक बड़ी आड़ का काम करता है इसलिए कृपया करके यहां हो रहे अधर्म तथा उसे संरक्षण देने वाले अधिकारियों की करतूतों पर भी गौर कीजिए ताकि फिर किसी की नाव इस तरह न डूबे और इस तरह इतने लोग अकाल मृत्यु का शिकार न बनें। 

-सुरेन्‍द्र चतुर्वेदी  

बुधवार, 20 जुलाई 2022

योगी जी... देखिए तो कि भ्रष्‍टाचार पर आपकी जीरो टॉलरेंस नीति का मथुरा पुलिस ने कैसा मजाक बनाया है?

ऐसा लगता है कि भ्रष्‍टाचार के मामले में योगी सरकार द्वारा अपनाई जा रही 'जीरो टॉलरेंस' की नीति को तमाम सरकारी विभागों की तरह बहुत से पुलिसकर्मी भी अपने लिए एक 'स्‍वर्णिम अवसर' मान कर चल रहे हैं, और इसलिए भ्रष्‍टाचार पर सख्‍ती के संदेश का भरपूर लाभ उठाने में लगे हैं। 

पुलिस में ऐसे ही एक सुनियोजित भ्रष्‍टाचार का मामला तब सामने आया जब साइबर क्राइम करने वाले पूरे गिरोह के डेढ़ दर्जन से अधिक सदस्‍यों को लाखों रुपए लेकर थाने से ही छोड़ दिया गया। 
हालांकि इसकी भनक लगते ही एक ओर जहां एसएसपी मथुरा अभिषेक यादव ने विभागीय जांच के आदेश देते हुए संबंधित थाना प्रभारी इंस्‍पेक्‍टर अजय कौशल और चौकी प्रभारी सतोहा योगेश नागर को निलंबित कर दिया वहीं दूसरी ओर आईजी आगरा जोन नचिकेता झा ने भी जिले में तैनात आईपीएस अधिकारी (एएसपी) संदीप मीणा को जांच सौंपी है, लेकिन यहां सवाल यह पैदा होता है कि किसी इतने गंभीर मामले में क्या केवल विभागीय जांच कराया जाना पर्याप्‍त है? 
पूरे पुलिस विभाग को शर्मिंदा करने और योगी सरकार के आदेश-निर्देशों को बेखौफ होकर ताक पर रखने के इस मामले में प्रथम दृष्‍ट्या संलिप्‍त दिखाई दे रहे पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की जानी चाहिए? 
बताया जाता है भ्रष्‍टाचार के इस पूरे नायाब खेल की सूचना लखनऊ में बैठे बड़े अधिकारियों को भी लग चुकी है, और वो आगरा तथा मथुरा के बड़े अधिकारियों की कार्रवाई पर पूरी नजर बनाए हुए हैं। 
क्‍या है पूरा मामला 
घटनाक्रम के अनुसार मथुरा जनपद के मलाईदार थानों में शुमार हाईवे थाना पुलिस ने विगत 11 जुलाई को साइबर क्राइम करने वाले गिरोह के 19 सदस्‍यों को मुखबिर की सूचना पर एकसाथ धर-दबोचा। 
पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ है साइबर क्राइम 
यहां यह जान लेना जरूरी है कि सोशल मीडिया के इस दौर में साइबर क्राइम पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है और इसीलिए हर जनपद में पुलिस का एक साइबर सेल काम भी कर रहा है। 
ये बात अलग है कि अपराधियों के हमेशा पुलिस से दो कदम आगे चलने तथा पुलिस के पास उनकी तुलना में संसाधनों के अभाव की वजह से पुलिस को साइबर अपराधियों से निपटने में दिक्‍कतें पेश आती हैं। 
यही कारण है कि हर दिन कोई न कोई व्‍यक्‍ति कहीं न कहीं साइबर अपराधियों का शिकार होता है। 
पैसे लेकर छोड़ दिए सभी 19 अपराधी 
पुलिस भी इस बात से भली-भांति परिचित है और उच्‍च अधिकारी इनकी धर-पकड़ के लिए परेशान भी रहते हैं, बावजूद इसके मथुरा के थाना हाईवे की पुलिस ने साइबर अपराधियों के इस पूरे गिरोह को लाखों रुपए लेकर छोड़ दिया और अपने अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगने दी। 
विभागीय सूत्र बताते हैं कि हाईवे थाना पुलिस ने गिरोह के सभी 19 सदस्‍यों को छोड़ने की एवज में दलालों के माध्‍यम से प्रति सदस्‍य करीब डेढ़ लाख रुपया वसूला। दलालों को क्या मिला, इसकी जानकारी होना बाकी है। 
थाना पुलिस के इस योजनाबद्ध भ्रष्‍टाचार का अंदाज लगाने के लिए यह जान लेना काफी है कि थाने में कुछ देर रखने के बाद इन सभी 19 अपराधियों को थाना परिसर में पीछे की ओर बने कमरों में रखा गया, जिससे मामला चुपचाप निपटाने में आसानी हो।
छोड़े गए अपराधियों के नाम
रविकांत पुत्र श्रीचंद निवासी गांव नवादा थाना हाईवे, जितेन्‍द्र पुत्र राजकुमार निवासी अलीगढ़, गिर्राज पुत्र रवीन्द्र निवासी एटा, विनोद पुत्र नवी निवासी असम, सैकुल पुत्र रेशम, साहिल पुत्र अब्‍दुल, तस्‍लीम पुत्र नसरू, रॉबिन पुत्र रेशम, हमीद पुत्र आशू, मकसूद पुत्र कमरुद्दीन, साहिल पुत्र आयन, भाकिल पुत्र मोहन्‍दा, सुहैल पुत्र याकतअली, साबिर पुत्र अनवर, ताहिर पुत्र जाकिर, सकलम पुत्र मोहन्‍दा, इरशाद पुत्र महमूदा और राशिद।     
सूत्रों से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार जांच अधिकारी आईपीएस संदीप मीणा ने इस मामले में एक बड़ी उपलब्‍धि हासिल करते हुए थाने के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज हासिल कर ली है और उसमें ये अपराधी आते व जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा जांच अधिकारी को एक साक्ष्‍य सतोहा चौकी के रजिस्‍टर से प्राप्‍त हुआ है। 
दरअसल, चौकी प्रभारी सतोहा ने किसी आंशका के चलते इन सभी 19 आरोपियों का नाम चौकी के रजिस्‍टर में दर्ज कर लिया था क्‍योंकि अपराधियों की धरपकड़ में वह भी शामिल थे। संभवत: इसीलिए चौकी प्रभारी सतोहा योगेश नागर अब खुद को पूरी तरह निर्दोष बता रहे हैं और कह रहे हैं कि मैं अधिकारियों के सामने पूरा सच लेकर आऊंगा। 
ऐसे में एक सवाल यह और उठता है कि बिना ठोस कार्रवाई हुए और लाखों रुपए हड़प कर एकसाथ 19 साइबर अपराधियों को छोड़ देने जैसे संगीन मामले में एफआईआर दर्ज किए बिना क्या पूरा सच सामने आ पाएगा। या मथुरा के ही डॉ. निर्विकल्‍प अपहरण काण्‍ड की तरह ये भी फाइलों में दब कर रह जाएगा।
क्या है डॉ. निर्विकल्‍प का अपहरण काण्‍ड 
10 दिसंबर 2019 को रात करीब 8 बजे हाईवे थाना क्षेत्र में ही गोवर्धन चौराहे के फ्लाई ओवर पर मथुरा के मशहूर ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. निर्विकल्‍प का अपहरण कर उनसे वसूली गई 52 लाख रुपयों की फिरौती को इलाका पुलिस हड़प गई और बदमाश छोड़ दिए गए। 
जब इस मामले में शोर-शराबा हुआ तो पूरे दो महीने बाद 11 फरवरी 2020 की रात 10 बजकर 53 मिनट पर हाईवे थाना पुलिस ने अपनी ओर से IPC की धारा 364 A के तहत एक एफआईआर दर्ज की। 
हाईवे थाने के तत्‍कालीन प्रभारी इंस्‍पेक्‍टर जगदंबा सिंह की ओर से दर्ज कराई गई इस एफआईआर में सनी मलिक पुत्र देवेन्‍द्र मलिक निवासी न्‍यू सैनिक विहार कॉलोनी थाना कंकरखेड़ा मेरठ, महेश पुत्र रघुनाथ निवासी ग्राम कौलाहार थाना नौहझील मथुरा, अनूप पुत्र जगदीश निवासी ग्राम कौलाहार थाना नौहझील मथुरा तथा नीतेश उर्फ रीगल पुत्र नामालूम निवासी भोपाल मध्‍यप्रदेश (हाल निवासी दिल्‍ली एनसीआर) को नामजद किया गया।
इस पूरे प्रकरण का एक दिलचस्‍प पहलू यह भी रहा कि डॉ. निर्विकल्‍प के अपहरण की अपनी ओर से FIR दर्ज कराने वाले इंस्‍पेक्‍टर जगदंबा सिंह को उसी दिन तत्‍काल प्रभाव से तत्‍कालीन एसएसपी शलभ माथुर ने निलंबित कर दिया। जिन्‍हें बाद में इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय के आदेश पर बहाल भी कर दिया गया। 
नामजद अपराधियों को पुलिस ने पकड़ा भी, लेकिन उन 52 लाख रुपए का कुछ पता नहीं लगा जिन्हें अपराधियों को फिरौती के रूप में देने की पुष्‍टि खुद डॉ निर्विकल्‍प कर चुके थे। 
बहरहाल, अब देखना यह होगा कि लाखों रुपए लेकर साइबर क्राइम के गिरोह से जुड़े डेढ़ दर्जन अपराधियों को छोड़ने का यह संगीन मामला भी डॉ. निर्विकल्‍प अपहरण काण्‍ड की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा या फिर ईमानदार पुलिस अफसरों के रहते किसी ऐसे अंजाम तक पहुंचेगा, जिसके बाद कोई थाना या चौकी प्रभारी इतना बड़ा दुस्‍साहर न कर सके और योगी सरकार की भ्रष्‍टाचार के मामले में अपनाई गई जीरो टॉलरेंस की नीति का इस तरह मजाक न उड़ा पाए। 
-सुरेन्‍द्र चतुर्वेदी   

बुधवार, 12 जनवरी 2022

योगी जी को वेस्टर्न यूपी के ही किसी जनपद से चुनाव लड़वाने पर विचार, चर्चा में मथुरा का नाम सबसे आगे


 उत्तर प्रदेश में जैसे-जैसे चुनावी सरगर्मी जोर पकड़ रही है, वैसे-वैसे इस बात की भी चर्चा तेज होती जा रही है कि योगी आदित्‍यनाथ को आखिर कहां से चुनाव मैदान में उतारा जाएगा।

योगी जी के चुनाव लड़ने के लिए संभावित सीटों की बात करें तो अयोध्या और गोरखपुर के साथ सबसे ज्यादा चर्चा मथुरा की है।
इस चर्चा का मुख्‍य आधार है अयोध्‍या तथा काशी के बाद मथुरा में श्रीकृष्‍ण जन्‍मभूमि पर बने मंदिर को भव्‍य तथा दिव्‍य बनाए जाने की वो मंशा, जिसे कभी खुद भाजपा ने जाहिर किया था।
बीजेपी के राज्यसभा सांसद हरनाथ सिंह यादव ने पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा को लिखा पत्र


बीजेपी के राज्यसभा सांसद हरनाथ सिंह यादव ने पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर योगी को मथुरा सीट से चुनाव लड़ाने की सलाह दी है। यादव ने लिखा है कि ब्रज क्षेत्र की जनता की विशेष इच्छा है कि योगीजी भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा से चुनाव लड़ें। यादव ने कहा कि योगी जी ने भी कहा है कि पार्टी जहां से कहेगी, वह वहीं से चुनाव लड़ेंगे। हरिनाथ सिंह ने कहा, ‘बीती रात मेरी आंखें दो बार खुलीं और मुझे लगा कि भगवान श्रीकृष्ण मुझसे कह रहे हैं कि मैं नेतृत्व को कहूं कि योगी जी मथुरा से चुनाव लड़ें इसलिए सुबह मैंने राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र लिखा।’

योगी जी ने भी जाहिर की थी इच्‍छा
ज्यादा दिन नहीं हुए जब योगी जी ने मंच से कहा कि अयोध्या में राम मंदिर बन रहा है, काशी में विश्वनाथ का धाम बना है, तो मथुरा-वृंदावन कैसे छूट जाएगा। मतलब साफ है कि बीजेपी इस चुनाव में भी हिंदुत्व के एजेंडे पर बढ़ रही है और सपा खेमे में चिंता का यही सबसे बड़ा कारण भी है। अयोध्या-काशी के बाद अब मथुरा की तैयारी है… यह नारा यूपी की चुनावी चर्चाओं गूंज रहा है।
वैसे भी बीजेपी के अंदर ये आवाज पहले से गूंजती रही है कि अयोध्या तो झांकी है, काशी मथुरा बाकी है! भगवान राम, कृष्ण, शिव से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है। अयोध्या, काशी, मथुरा तीनों ही जगहों पर मंदिर-मस्जिद का मसला रहा है और वैसे भी बीजेपी तथा संघ के एजेंडे में ये रहा है।
हरनाथ सिंह यादव खुद कहते हैं कि भगवान कृष्ण के मंदिर पर जो मस्जिद खड़ी है उससे मुक्ति कौन दिला सकता है, इस बारे में लोग सोच रहे हैं।
राम मंदिर ना बने इसके लिए जिन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में वकीलों की फौज खड़ी कर दी थी, ऐसे लोग भगवान कृष्ण का मंदिर कभी नहीं बनाएंगे। चाहे वह अखिलेश यादव हों, राहुल गांधी हों, मायावती या कोई अन्‍य। भगवान कृष्ण के मंदिर का निर्माण सिर्फ योगी आदित्यनाथ ही कर सकते हैं। सियासी घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ना शुरू करें तो योगी के मथुरा से चुनाव में उतरने की संभावना प्रबल दिखती है। हालांकि योगी आदित्यनाथ फिलहाल विधान परिषद के सदस्य हैं।
बीजेपी को फायदा क्या होगा?
मथुरा से योगी को चुनाव में उतारकर भाजपा कुछ वैसा ही समीकरण साधने की कोशिश कर रही है, जैसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात छोड़कर काशी आने पर उसे पूर्वांचल में हुआ। यह हिंदुत्व के एजेंडे पर भी बिल्कुल सटीक बैठता है। मथुरा में कुछ दिनों में तो मंदिर बनने से रहा, हां योगी यहां से चुनाव लड़ते हैं तो इसका जनता में मैसेज साफ जाएगा। वैसे भी किसान आंदोलन के झटके से उबर रही बीजेपी को पश्चिमी यूपी की विशेष चिंता होगी। शायद यही वजह है कि भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश की रणनीति मुथरा-वृंदावन में ही तैयार कर रही है। इसके जरिए भगवा दल पूरे पश्चिम को साधने की कोशिश में है, जो किसान आंदोलन के चलते थोड़ा दूर जाता दिख रहा था।
सीटों का नफा-नुकसान भी समझ लीजिए
वेस्टर्न यूपी के राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कृषि कानून के विरोध में जिस प्रकार से किसानों का आंदोलन एक साल से अधिक समय तक चला। कई किसानों की मौत भी हुई, उससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बीजेपी को लेकर किसानों में नाराजगी है। इसका नुकसान बीजेपी को विधानसभा चुनाव में उठाना पड़ सकता है। इस मुद्दे का फायदा राष्ट्रीय लोक दल या उससे गठबंधन करने वाली समाजवादी पार्टी को मिल सकता है। अगर ऐसा हुआ तो 16 जनपदों की करीब 136 सीटों पर सीधे तौर पर बीजेपी को नुकसान हो सकता है। 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने इस क्षेत्र की 136 में से 109 सीटें जीती थीं। यही कारण है कि बीजेपी के रणनीतिकार इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहते हैं। योगी इस चुनाव में बीजेपी के पास मजबूत चेहरा हैं, इसीलिए उन्हें वेस्टर्न यूपी के ही किसी जनपद से चुनाव लड़वाने पर विचार हो रहा है और मथुरा इसके लिए सबसे मुफीद नजर आता है।
मथुरा में श्रीकृष्‍ण जन्मभूमि को लेकर विवाद क्या है
कृष्ण जन्मभूमि विवाद मामले में मथुरा की जिला सिविल कोर्ट में याचिका दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि मुसलमानों की मदद से शाही ईदगाह ट्रस्ट ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर कब्जा कर लिया और ईश्वर के स्थान पर एक ढांचे का निर्माण कर दिया। भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण का जन्मस्थान उसी ढांचे के नीचे स्थित है। 13.37 एकड़ जमीन पर दावा करते हुए स्वामित्व मांगने के साथ ही शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की मांग की गई है। मथुरा में शादी ईदगाह मस्जिद कृष्ण जन्मभूमि से लगी हुई बनी है। इतिहासकार मानते हैं कि मुगल शासक औरंगजेब ने प्राचीन केशवनाथ मंदिर को नष्ट कर दिया था और शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण कराया था।
-Legend News
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...