रविवार, 12 जुलाई 2026

देश के सबसे बड़े 'ठग' का नाम है मुकेश अंबानी, Jio Fiber के जरिए हर दिन करते हैं करोड़ों की ठगी


 सामान्यत: किसी को भी यह जानकर झटका लग सकता है कि एशिया ही नहीं,  दुनियाभर के प्रमुख उद्योगपतियों में शुमार रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी देश के सबसे बड़े 'ठग' भी हैं क्योंकि वो Jio Fiber के जरिए हर दिन अपने उपभोक्ताओं से करोड़ों रुपए की 'ठगी' करते हैं। 

यूं तो किसी भी आम व्यक्ति के साथ ठगी का ये खेल उसी दिन शुरू हो जाता है जिस दिन वह Jio Fiber का कनेक्शन लेने की प्रक्रिया शुरू करता है, किंतु उसे असली ठगी का अहसास तब होता है जब वो कुछ महीने अथवा कुछ सालों तक Jio Fiber का इस्तेमाल करता है। 
सबसे पहले 5G की स्‍पीड के नाम पर ठगी 
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि आम आदमी को Jio Fiber उसी दिन से ठगना प्रारंभ कर देता है जब वो कनेक्शन प्रोवाइड कराने की प्रक्रिया के तहत यह बताता है उसके इंटरनेट की स्‍पीड 5G है और वो अधिकतम 1 Gbps (1000 Mbps) तक की तथा न्यूनतम 30 Mbps (मेगाबाइट प्रति सेकंड) की स्पीड प्रदान करता है जबकि यह सबसे बड़ा झूठ है। न तो वह किसी भी उपभोक्ता को अपनी अधिकतम स्पीड उपलब्ध करा पाता है और न न्यूनतम। 
कनेक्शन लेने के बाद जब Jio से इसकी शिकायत की जाती है तो वह अनेक ऐसी तकनीकी खामियां गिना देता है जो शायद ही कोई उपभोक्ता कभी पूरी कर सके, हालांकि कनेक्शन लगाने तक पूरी स्पीड देने का 'दावा' किया जाता है। 
उदाहरण के लिए स्‍पीड कम आने की शिकायत पर Jio के 'कर्मचारी या एजेंट' आपको बताएंगे कि दीवारों, उपकरणों और दूरी अधिक होने के कारण स्पीड थोड़ी कम हो सकती है। नेटवर्क जाम है, राउटर गलत जगह रखा है, अथवा आपके बहुत सारे डिवाइस एक ही राउटर से कनेक्ट हैं। ये सब बातें उपभोक्ता को कनेक्शन लेते समय नहीं बताई जातीं। यहां तक कि ये भी नहीं बताया जाता कि तकनीकी तौर पर आप सर्वाधिक बेहतर स्‍पीड किस तरह पा सकते हैं, या राउटर इंस्टॉल करने की सबसे उपयुक्त जगह कौन सी होगी। 
एक और बहाना: आपके डिवाइस 5G को सपोर्ट नहीं कर रहे 
कनेक्शन लेने के बाद जब उपभोक्ता स्‍पीड पूरी न मिलने की शिकायत करता है तब उसे बताया जाता है कि आपके डिवाइस 5G को सपोर्ट नहीं कर रहे। ऐसी स्‍थिति में आप या तो लाखों रुपए खर्च करके 5G को सपोर्ट करने वाले सभी डिवाइस खरीदें या फिर  50 और 100 Mbps की स्‍पीड वाले प्लान पर पैसा खर्च करने के बावजूद 'मिनीमम स्‍पीड' 30 Mbps पाकर खुश रहें। 
स्‍पीड के इस खेल से बचने वाला सारा पैसा रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की जेब में जाता है, जिसका आपको कोई मुआवजा नहीं मिलने वाला। यदि आप इस सबसे आजिज आकर अपना प्लान बदलवाना चाहते हैं तो जो पैसा आप पहले दे चुके हैं, उसका हिसाब नहीं होगा। आप कोशिश कर-करके थक जाएंगे लेकिन रिलायंस उसका हिसाब अपने हिसाब से करेगा। 
स्‍पीड कम मिलने से एक ओर जहां आप उस गति से काम नहीं कर पाएंगे जिस गति से से काम की अपेक्षा में आपने हाई स्‍पीड नेट कनेक्शन लिया है, तो दूसरी ओर आपको अपना काम पूरा करने में समय भी अधिक जाया करना होगा जिससे रिलांयस को कोई मतलब नहीं। 
जियो एक्सटेंडर या जियो वाई-फाई मेश एक्सटेंडर लगवाने की सलाह 
स्‍पीड कम मिलने की शिकायत करने पर जियो के एजेंट आपको जियो एक्सटेंडर  या जियो वाई-फाई मेश एक्सटेंडर लगवाने की सलाह देते हैं जो अलग-अलग मॉडल और तकनीक के अनुसार ढाई हजार रुपए से लेकर 25 हजार रुपए तक आते हैं। 
यहां यह जान लेना भी जरूरी है कि सामान्य मध्‍यम वर्गीय व्‍यक्ति ऐसा कर पाने में सक्षम नहीं होता, लिहाजा इस पूरे तमाशे से बचने वाला डेटा भी रिलांयस कंपनी के खाते में जाता है और इस तरह कंपनी प्रति कनेक्शन, प्रति दिन एक बड़ी रकम हजम कर जाती है। 
Jio Fiber के देशभर में कुल कितने वाई-फाई कनेक्शन हैं? 
Reliance Jio Annual Report में दी गई जानकारी के मुताबिक देश में Jio Fiber के फिक्स्ड ब्रॉडबैंड (जियो फाइबर और जियो एयर फाइबर) के कुल 2.71 करोड़ उपभोक्ता हैं। इस तरह यदि रिलायंस कम स्‍पीड, आफ्टर सेल सर्विस तथा कस्‍टम केयर में धोखाधड़ी करके एक उपभोक्ता से हर महीने 100 रुपए भी ठगता है तो यह रकम प्रति माह 270 करोड़ रुपये से अधिक जाकर बैठती है। 
विचार कीजिए कि करोड़ों उपभोक्‍ताओं की मजबूरी का लाभ उठाकर मुकेश अंबानी की रिलायंस हर महीने 270 करोड़ रुपए तो सिर्फ ठगी करके कमा रही है। ये वो रकम है जिसमें कारोबार से होने वाला लाभ नहीं जुड़ा है। 
कस्टमर केयर और टोल फ्री नंबरों पर शिकायत का 'स्‍याह सच' 
जहां तक सवाल मामूली से मामूली शिकायत करने का है तो उसके लिए प्रक्रिया इतनी जटिल बना रखी है कि उपभोक्ता अपना माथा पीटने लगता है। जिला स्तर पर सुनवाई का कोई प्रावधान नहीं है। जो कुछ है वो एप के माध्यम से या फिर टोल फ्री नंबरों के  जरिए संभव है। इन दोनों माध्यमों से शिकायत करने वाला ही जान सकता है कि इस सब में अच्‍छा-खासा समय खर्च हो जाने तथा निरर्थक सवाल पूछे जाने के बावजूद नतीजा कुछ नहीं निकलता। थक-हारकर उपभोक्ता के पास सिर्फ एक चारा बचता है कि वह कंपनी के कर्मचारी का इंतजार करे। यह इंतजार 24 घंटों से लेकर एक सप्ताह तक भी हो सकता है क्योंकि आपने रिलायंस के Jio का कनेक्शन लेने की भारी भूल कर दी है। और हां, इस दौरान जो डेटा आप इस्तेमाल नहीं कर सके हैं, वो भी रिलायंस की संपत्ति में इजाफा करने के काम आएगा। 
बिलिंग साइकिल में हेराफेरी 
बिलिंग साइकिल में हेराफेरी करके भी रिलायंस की Jio Fiber करोड़ों रुपए हर महीने उपभोक्ताओं की जेब से निकाल लेती है। जैसे यदि आपका बिल प्लान हर महीने की 28 तारीख तक का है, तो अगले महीने इसे 27 या 26 कर दिया जाएगा। इस तरह सालभर में एक-एक, दो-दो दिन कम करते हुए करीब पूरा एक महीने का बिल अधिक वसूल कर लिया जाएगा, जिसका आपको अहसास तक नहीं होगा क्‍योंकि अधिकांश लोग बिल की आखिरी तारीख देखकर रीचार्ज करा लेते हैं। वह यह देखते ही नहीं कि पिछले महीने यही बिल जमा कराने की अंतिम तिथि एक दिन पहले थी। 
सालभर में किसी एक उपभोक्ता की जेब से पूरे एक महीने का पैसा ठग लेने का मतलब पूरे साल में करीब पौने तीन करोड़ उपभोक्ताओं की जेब काट कर कितना पैसा हड़प जाना होता है, इसका हिसाब आप अलग से लगाते रहिए। 
हां, अब आप बड़ी आसानी से यह अनुमान लगा सकते हैं वैश्विक रईसों की सूची में कैसे हर बार रिलायंस और उसके मालिक 'मुकेश धीरूभाई अंबानी' का नाम ऊपर चढ़ता जाता है और कैसे वह अपने बेटे की शादी का जश्न लगातार कई महीनों चलाते हुए उस पर अरबों रुपए खर्च कर देते हैं। 
Jio Fiber के कारनामे यहीं समाप्त नहीं हो जाते। सोशल मीडिया, डिजिटल मीडिया और शिकायती प्लेटफार्म उसकी 'ठगी' के किस्सों से भरे पड़े हैं परंतु फिलहाल स्‍थिति यह है कि न कोई सुनने वाला और न बताने वाला कि ठगी के इस नायाब तरीके से निपटा कैसे जाए। 
दरअसल, बड़ा सवाल यह भी है कि आज जबकि इंटरनेट 'मूलभूत आवश्यकता' बन चुका है और उसे पूरा करने वाले बाजार में बहुत कम हैं तो उपभोक्ता करे क्या? 
वह अर्थशास्‍त्र के उस सिद्धांत से बंधा है जो मांग और पूर्ति पर चलता है। मुकेश अंबानी जान चुके हैं कि जब तक बाजार में मांग अधिक है और उसकी पूर्ति करने वाले कम हैं, तब तक वह खुले हाथों से कितनी ही लूट करते रहें... लोग शिकायत भले ही कर लें... बिगाड़ कुछ नहीं सकते। 
-सुरेन्‍द्र चतुर्वेदी   
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