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शुक्रवार, 15 अगस्त 2025

सबूत सहित जानिए: क्या वाकई यूपी के बिजली विभाग ने ऊर्जा मंत्री और योगी सरकार की सुपारी ले रखी है?


 क्या वाकई यूपी के बिजली विभाग ने ऊर्जा मंत्री और योगी सरकार की सुपारी ले रखी है? ये सवाल इसलिए क्योंकि बीती 23 जुलाई को ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने लखनऊ के शक्ति भवन में हुई समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को जमकर फटकारा था। इस समीक्षा बैठक में विभाग के चेयरमैन से लेकर अधिशासी अभियंता स्‍तर तक के अधिकारी शामिल थे।  

ऊर्जा मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि आप लोग आंख-कान बंद किए बैठे हैं जबकि जनता बिजली न आने से परेशान है। उन्होंने यहां तक बोला कि हमारी सरकार कोई दुकान नहीं चला रही कि जिसमें हमें सिर्फ वसूली की चिंता हो, हमारे लिए यह एक जनसेवा है और हमें उसी के अनुरूप काम करना होगा। ऊर्जा मंत्री ने अधिकारियों को फील्ड में जाने के निर्देश भी दिए। मंत्री महोदय ने कहा कि आपके गलत आचरण का खामियाजा पूरा प्रदेश भुगत रहा है। 

इस समीक्षा बैठक के चार-पांच दिन बाद मंत्री महोदय के एक्स हैंडिल से लिखा गया कि विभाग के कुछ अधिकारी एवं कर्मचारियों ने ऊर्जा मंत्री की ''सुपारी'' ले रखी है। यही नहीं, सोशल साइट पर यह भी लिखा गया कि कुछ अधिकारी और कर्मचारी अराजक तत्वों के साथ मिलकर बिजली विभाग को बदनाम करने में लगे हैं। 

गौरतलब है कि यूपी के ऊर्जा मंत्री खुद गुजरात कैडर के एक नौकरशाह रहे हैं और इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफी करीबी तथा भरोसेमंद माने जाते हैं। अब जरा अंदाज लगाइए कि पीएम का नजदीकी कोई पूर्व नौकरशाह जब अपने विभागीय अधिकारियों पर इतने संगीन आरोप लगा रहा हो तो उसके मायने कितने गंभीर हो सकते हैं। गंभीर इसलिए भी कि जो व्‍यक्‍ति स्‍वयं नौकरशाह रहा हो, वह नौकरशाहों की सभी कारगुजारियों से भली-भांति परिचित तो होगा ही।  

मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी बोले 

ऊर्जा मंत्री की समीक्षा बैठक और एक्स हैंडिल पर लिखी गई उनकी पोस्ट के बीच गत 25 जुलाई को सीएम योगी आदित्यनाथ ने ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदेश में बिजली व्यवस्था अब केवल तकनीकी या प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और शासन की संवेदनशीलता का पैमाना बन चुकी है। 

सीएम योगी ने अफसरों को दो टूक शब्दों में कहा कि ट्रिपिंग, ओवरबिलिंग और अनावश्यक कटौती अब किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी, सुधार करना ही होगा। इसके साथ ही सीएम ने कहा कि लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने ट्रिपिंग की लगातार आ रही शिकायतों पर गहरी नाराजगी जताई और निर्देश दिया कि प्रत्येक फीडर की तकनीकी जांच हो, कमजोर स्थानों की पहचान कर तुरंत सुधार कराया जाए। 

मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों से कहा कि संसाधनों की कोई कमी नहीं है। सरकार ने बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण को मजबूत करने के लिए रिकॉर्ड बजट उपलब्ध कराया है। ऐसे में किसी भी स्तर पर लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी डिस्कॉम के प्रबंध निदेशकों से उनके क्षेत्रों की आपूर्ति की स्थिति जानने के बाद मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाए। 

अचानक नाराज नहीं हुए ऊर्जा मंत्री और मुख्‍यमंत्री

ऊर्जा मंत्री और मुख्‍यमंत्री की बिजली विभाग के अधिकारियों को लेकर यह नाराजगी किसी एक दिन की कुव्यवस्‍था का परिणाम नहीं है। यह लंबे समय से चली आ रही अधिकारियों की लापरवाह कार्यप्रणाली से उपजा आक्रोश है। लेकिन घोर आश्चर्य की बात है कि विभागीय मंत्री तथा मुख्‍मंत्री की इतनी कठोर टिप्‍पणियों के बावजूद अधिकारी हैं कि सुधरने का नाम नहीं ले रहे। 

कृष्‍ण की नगरी मथुरा इसका बड़ा उदाहरण 

उदाहरण के तौर पर यूपी के अत्यंत महत्वपूर्ण जनपदों में शुमार मथुरा के बिजली अधिकारियों की कार्यशैली देखी जा सकती है। 

उल्लेखनीय है कि मथुरा न केवल भाजपा के लिए राजनीतिक दृष्‍टि से एक अहम जिला है बल्कि धार्मिक नजरिए से भी विश्व पटल पर विशिष्ट स्थान रखता है। यहां प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु विभिन्न स्‍थानों का भ्रमण करने तथा अपने आराध्य के दर्शन करने आते हैं। 

योगी सरकार के सबसे पहले कार्यकाल में मथुरा-वृंदावन क्षेत्र के विधायक पंडित श्रीकांत शर्मा को ही प्रदेश के ऊर्जा मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया था, और तब उन्‍होंने पूरे पांच साल बहुत अच्छे तरीके से बिजली की व्यवस्था को संभालने का काम किया था। प्रदेश की जनता आज उनके कार्यकाल को याद करती है। लेकिन अब अचानक ऐसा क्या हो गया कि उसी व्‍यवस्था पर ऊर्जा मंत्री अरविंद शर्मा से लेकर मुख्‍यमंत्री योगी तक नाराजगी जता रहे हैं।  

कहने के लिए तो मथुरा में बिजली विभाग के सुपरिटेंडिंग इंजीनियर से लेकर चीफ इंजीनियर तक तैनात हैं किंतु उनके पास जनता तो छोड़िए, पत्रकारों तथा विधायकों की भी बात न तो सुनने का समय है और न उनके किसी मैसेज का जवाब देने का। सबूत के साथ बानगी देखिए-  

ये वो मैसेज हैं जो Legend News की ओर से चीफ इंजीनियर (CE) तथा सुपरिंटेंडेट इंजीनियर (SE) को समय-समय पर भेजे गए। इन वाट्सऐप मैसेज में समय का काफी अंतर होने के बाद भी अधिकारियों की कार्यप्रणाली में कोई अंतर नजर नहीं आता। 
मैसेज डिलीवर होने पर भी किसी प्रकार की कोई प्रतिक्रिया न देना इस बात को साबित करता है कि इन अधिकारियों को किसी का कोई खौफ नहीं है। इन्‍हें योगी सरकार के उन आदेश-निर्देशों की भी परवाह नहीं है जिसके तहत बार-बार कहा जाता है कि हर फोन तथा मैसेज का जवाब देना जरूरी है और तत्काल जवाब न दे पाने की स्‍थिति में समय मिलने पर संपर्क साधना आवश्यक है। 
जाहिर है कि ये और इन जैसे प्रदेश के तमाम अधिकारी आश्‍वस्‍त हैं कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। यहां तक कि मंत्री और मुख्‍यमंत्री भी। यदि ऐसा नहीं होता तो नौकरशाहों की इतनी हिमाकत नहीं होती, और न ये इतने बेलगाम होते कि मंत्री तथा मुख्‍यमंत्री की नाराजगी से भी इनके कानों पर जूं नहीं रेंगती। 
यहां यह जान लेना भी जरूरी है कि मथुरा में तैनात इन अधिकारियों सहित प्रदेशभर के बहुत से अधिकारियों का ऐसा दुस्‍साहस तभी संभव है जब वो जानते हों कि मंत्री और मुख्‍यमंत्री कहीं न कहीं इतने मजबूर हैं कि वो घुड़की तो दे सकते हैं, एक्शन नहीं ले सकते। वर्ना यदि एक-दो ऐसे अफसरों पर भी समुचित एक्शन हुआ होता तो ऐसी नौबत नहीं आती। 
एक्शन हुआ होता तो न ऊर्जा मंत्री इतने असहाय दिखाई देते और न मुख्‍यमंत्री को नाराजगी जाहिर करनी पड़ती। 2027 के विधानसभा चुनाव बहुत दूर नहीं हैं। समय रहते यदि योगी सरकार नहीं चेती, तो इसका भाजपा को बड़ा नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। 
-सुरेन्‍द्र चतुर्वेदी  

रविवार, 22 नवंबर 2020

बड़ा सवाल: ऊर्जा मंत्री की अधिकारियों पर ‘चल’ नहीं रही, या वो पब्‍लिक को ‘चला’ रहे हैं?


 बीजेपी के कद्दावर नेताओं में शामिल प्रदेश के ऊर्जा मंत्री और योगी सरकार के प्रवक्‍ता श्रीकांत शर्मा की अब अधिकारियों पर ‘चल’ नहीं रही या वो ऐसा दिखाकर पब्‍लिक को ‘चला’ रहे हैं?

यह सवाल 17 नवंबर को ‘दैनिक हिन्‍दुस्‍तान’ के आगरा संस्‍करण में छपी उस खबर के बाद पूछा जा रहा है जिसके अनुसार ऊर्जा मंत्री श्रीकांत ने वृंदावन कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर स्‍थानीय प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा बरती जा रही ढील पर नाराजगी जताते हुए मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ को एक पत्र लिखा है और इस संबंध में उनसे अनुरोध किया है कि वह अधिकारियों को निर्देशित करें।
अखबार के पृष्‍ठ 3 पर छपी इस खबर के मुताबिक 16 फरवरी 2021 से 28 मार्च 2021 तक 41 दिन वृंदावन में यमुना किनारे चलने वाले इस कुंभ मेले की अब तक कोई भौतिक प्रगति नहीं है जिस कारण साधु-संतों सहित स्‍थानीय जनमानस निराश व आक्रोशित है।
खबर के अनुसार ऊर्जा मंत्री ने मुख्‍यमंत्री को भेजे पत्र में लिखा है कि जिला प्रशासन, ब्रज तीर्थ विकास परिषद के मुख्‍य कार्यपालक अधिकारी तथा अन्‍य एजेंसियों को परस्‍पर समन्‍वय स्‍थापित कर कुंभ मेले को भव्‍य बनाने और समय से कार्य पूर्ण कराने के लिए आदेशित किया जाए।
17 नवंबर को छपी इस खबर के बाद ‘दैनिक हिन्‍दुस्‍तान’ में ही आज यानी 19 नवंबर के दिन एक और खबर छपी है जिसके मुताबिक ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ एवं कुंभ मेला अधिकारी तथा मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के उपाध्‍यक्ष नागेन्‍द्र प्रताप यादव ने बीते कल (बुधवार) को मेला स्‍थल का निरीक्षण किया।
इस दौरान उन्‍होंने जल निगम एवं नगर निगम के अधिकारियों को कुंभ मेला शुरू होने से पहले सभी व्‍यवस्‍थाएं पूरी करने के निर्देश देते हुए मेला क्षेत्र में सीवर का पानी फिर से भर दिए जाने पर नाराजगी जताई।
इसके अलावा मेला अधिकारी नागेन्‍द्र प्रताप यादव ने संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर यमुना के दोनों ओर अतिक्रमण हटवाने तथा पार्किंग के लिए जमीन का चयन करने को भी कहा है।
नागेन्‍द्र प्रताप ने यह निरीक्षण कार्य ऊर्जा मंत्री द्वारा सीएम योगी को पत्र लिखने के बाद ही क्‍यों किया, यह तो वही जानते होंगे अलबत्ता नेता नगरी में चर्चाएं अच्‍छी-खासी हैं।
गौरतलब है कि नागेन्‍द्र प्रताप यादव एक ओर जहां मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के उपाध्‍यक्ष और ब्रज तीर्थ विकास प्ररिषद के सीईओ हैं वहीं दूसरी ओर ‘उज्‍जवल ब्रज’ नामक संस्‍था से भी जुड़े हैं जो ब्रज के विकास हेतु पंजीकृत कराई गई है।
कुल मिलाकर पहले से तीन-तीन बड़ी जिम्‍मेदारियां निभाते चले आ रहे नागेन्‍द्र प्रताप पर वृंदावन कुंभ मेला अधिकारी की भी अतिरिक्‍त जिम्‍मेदारी है।
बहरहाल, ऊर्जा मंत्री और योगी सरकार के प्रवक्‍ता श्रीकांत शर्मा का कुंभ मेले की तैयारियों में ढील बरतने पर स्‍थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ सीधे मुख्‍यमंत्री को शिकायती पत्र लिखना बहुत कुछ कहता है, वो भी तब जबकि 2022 में यूपी विधानसभा के चुनाव प्रस्‍तावित हैं।
मथुरा की जिस विधानसभा सीट से कांग्रेस के लगातार 15 साल विधायक रहे प्रदीप माथुर को हराकर श्रीकांत शर्मा सन् 2017 में भाजपा की टिकट पर विधायक निर्वावित हुए हैं, वह मथुरा-वृंदावन विधानसभा सीट ही है।
कस्‍बा गोवर्धन के मूल निवासी श्रीकांत शर्मा का इस तरह मथुरा न सिर्फ गृह जनपद है बल्‍कि निर्वाचन क्षेत्र भी है। ऐसे में श्रीकांत शर्मा का स्‍थानीय प्रशासनिक अधिकारियों को लेकर मुख्‍यमंत्री को लिखा गया पत्र समझ से परे है।
लोगों का मत है कि इस पत्र के दो मतलब निकलते हैं। जिसमें पहला तो ये कि श्रीकांत शर्मा का योगीराज में कद घट रहा है इसलिए प्रशासनिक अधिकारियों पर उनकी पकड़ ढीली पड़ रही है और वह श्रीकांत शर्मा की बात को तरजीह नहीं दे रहे।
इसके अलावा एक दूसरा मतलब यह भी निकलता है कि ऊर्जा मंत्री की खुद कुंभ मेले की तैयारियों में कोई रुचि नहीं है इसलिए वो पत्र लिखकर स्‍थानीय नागरिकों एवं साधु-संतों की नाराजगी से पल्‍ला झाड़ रहे हैं और उन्‍हें ‘चलता’ कर रहे हैं। हालांकि इसमें पहले वाली बात ज्‍यादा दमदार लगती है क्‍योंकि अधिकारी कई मौकों पर उनसे भारी पड़ते दिखाई दिए हैं।
यूं भी काफी समय बाद मथुरा में कोई जिलाधिकारी इतने लंबे समय तक तैनात रहा है, जिस कारण उनकी सत्ता के गलियारों में मजबूत पकड़ के खासे चर्चे हैं।
बताया जाता है कि जिलाधिकारी आसानी से किसी को भाव नहीं देते, फिर चाहे सत्ताधारी दल का कोई नेता हो, मंत्री हो या फिर मीडियाकर्मी ही क्‍यों न हों।
जहां तक प्रश्‍न ब्रज तीर्थ विकास परिषद से जुड़े प्रमुख अधिकारियों नागेन्‍द्र प्रताप और शैलजाकांत मिश्र का है तो उनकी कार्यप्रणाली को लेकर ऊर्जा मंत्री ने भले ही पहली बार सार्वजनिक तौर पर नाराजगी व्‍यक्‍त की हो किंतु आम जनता तथा विभिन्‍न समाजसेवी संगठनों सहित जागरूक लोगों में पहले से काफी नाराजगी है, बावजूद इसके हर बार उनका पलड़ा भारी साबित हुआ है।
यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि आईपीएस अधिकारी शैलजाकांत मिश्र और प्रशासनिक अधिकारी नागेन्‍द्र प्रताप यादव का मथुरा से बहुत गहरा लगाव लगातार बना हुआ है।
नागेन्‍द्र प्रताप यादव जहां मथुरा में ही एसडीएम और एडीएम भी रहे हैं वहीं शैलजाकांत मिश्र करीब तीन दशक पहले बतौर पुलिस अधीक्षक यहां तैनाती रही। इसी दौरान वह ‘देवरिया बाबा’ के नाम से मशहूर संत ‘देवरहा बाबा’ के संपर्क में आए और फिर उनका निरंतर सानिध्‍य प्राप्‍त करने के लिए मथुरा-वृंदावन के होकर रह गए। उनकी तैनाती कहीं भी रही हो परंतु मथुरा आना उनका कम नहीं हुआ। फिलहाल ब्रज तीर्थ विकास परिषद के मुखिया की हैसियत से वो यहां सेवारत हैं।
शैलजाकांत मिश्र का दावा है कि देवरहा बाबा ने उन्‍हें मथुरा में तैनाती के दौरान ही ऐसा आशीर्वाद दिया था जिसके कारण उन्‍हें ब्रज तीर्थ विकास परिषद के मुखिया की हैसियत से दोबारा यहां सेवा करने का मौका मिल रहा है। ये बात और है कि लोग उनकी सेवा को संदिग्‍ध मानते हैं और सेवा की आड़ में मेवा हासिल करने का आरोप भी लगाते हैं।
जो भी हो, किंतु इसमें दो राय नहीं कि जिलाधिकारी सर्वज्ञराम मिश्र से लेकर ब्रज तीर्थ विकास परिषद के मुखिया शैलजाकांत मिश्र तक और तीन-तीन सरकारी जिम्‍मेदारियां निभा रहे नागेन्‍द्र प्रताप यादव सहित कई अन्‍य प्रशासनिक अधिकारियों की सत्ता के गलियारों में कहीं तो कोई ऐसी पकड़ है जिसके बूते वह श्रीकांत शर्मा जैसे कद्दावर मंत्री व भाजपा नेता की बात को दरकिनार करने का माद्दा रखते हैं।
यदि ऐसा नहीं है और श्रीकांत शर्मा आम जनता और साधु-संतों को गुमराह करने के उद्देश्‍य से मुख्‍यमंत्री को शिकायती पत्र लिखकर कोई खेल कर रहे हैं तो तय जानिए कि आगामी चुनाव उनके लिए इतना आसान नहीं होगा क्‍योंकि उन्‍हें लेकर भी जनता को बहुत शिकायतें हैं।
ये भी कह सकते हैं कि उनका अपना मतदाता हो या पार्टी का कार्यकर्ता, कम से कम उनसे खुश तो नहीं है। बेहतर होगा कि ऊर्जा मंत्री उनके अंदर निहित ऊर्जा को कम आंकने की भूल न करें अन्‍यथा चुनावों में उसका करंट मुश्‍किल में डाल सकता है।
-सुरेन्‍द्र चतुर्वेदी

शनिवार, 3 अक्टूबर 2020

क्‍या योगी सरकार अवैध खनन में लगे पुलिस-प्रशासन और माफिया के संगठित गिरोह को तोड़ पाएगी?

 


भ्रष्‍टाचार के मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करने का दावा करने वाले योगीराज में भ्रष्‍टाचार की शिकायतें क्‍यों आम हो गई हैं और क्‍यों इन पर अंकुश नहीं लग पा रहा, इसके पीछे यदि देखा जाए तो पुलिस-प्रशासन और माफिया का ऐसा संगठित गिरोह है जिसे किसी का खौफ नहीं रहा।

महोबा के संदर्भ में इस बात की पुष्‍टि करते हुए खुद मुख्‍यमंत्री आदित्‍यनाथ ने यह कहा है कि ऐसा लगता है जैसे पूरा गिरोह बनाकर भ्रष्‍टाचार को अंजाम दिया जा रहा है।
यहां सवाल किसी एक क्षेत्र से मिल रही शिकायत का नहीं है, हर सरकारी क्षेत्र का है क्‍योंकि कोई क्षेत्र ऐसा बाकी नहीं है जिसमें भ्रष्‍टाचार की गंध न बसी हो।
अगर बात करें अवैध खनन की तो शासन भी उसके सामने हारता दिखाई देता है, शायद इसीलिए प्रदेश का कोई हिस्‍सा खनन माफिया की सक्रियता से अछूता नहीं रहा।
वो जिले भी उनकी मनमानी से त्रस्‍त हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि योगी आदित्‍यनाथ की उन पर सीधी निगाह रहती है।
ऐसा ही एक जिला है भगवान श्रीकृष्‍ण की पावन जन्‍मस्‍थली मथुरा। मथुरा से योगी आदित्‍यनाथ की कैबिनेट में दो ताकतवर मंत्री हैं और जनपद की कुल पांच विधानसभा सीटों में से चार पर भाजपा काबिज है। यहां की सांसद हेमा मालिनी भाजपा के विशिष्‍ट सांसदों में से एक हैं जबकि जिला पंचायत से लेकर नगर निगम तक पर भाजपा का परचम लहरा रहा है।
कुल मिलाकर यदि यह कहा जाए कि योगी आदित्‍यनाथ और भाजपा की नाक, आंख और कान यहां सब सक्रिय हैं तो कुछ गलत नहीं होगा परंतु आश्‍चर्यजनक रूप से यहां का जिला प्रशासन निष्‍क्रिय है।
उत्तर प्रदेश के तमाम दूसरे जिलों की तरह अवैध खनन मथुरा जनपद की एक बड़ी समस्‍या है। कृष्‍ण की पटरानी कालिंदी को खनन माफिया ने यहां पूरी तरह खोखला कर दिया है। अवैध खनन की शिकायतें आए दिन सक्षम अधिकारियों तक पहुंचाई जाती हैं लेकिन वो एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल देते हैं।
अधिकारी ऐसा क्‍यों करते हैं, इससे कोई अनभिज्ञ नहीं है लेकिन मजबूरी यह है कि आम आदमी शिकायत करे तो किससे करे।
नियम कानूनों का हवाला देकर खनन माफिया पर हाथ न डालने वाली पुलिस भी तब उनके खिलाफ कार्यवाही करती है जब उसे उनसे मिलने वाली महीनेदारी में कमी दिखाई देने लगती है।
प्रशासनिक अधिकारी ये कहकर पल्‍ला झाड़ लेते हैं कि खनन माफिया को पुलिस का संरक्षण प्राप्‍त है लिहाजा वो उन्‍हें पकड़ने में उनका सहयोग नहीं करती।
सच तो यह है कि पुलिस-प्रशासन और माफिया के संगठित गिरोह ने जिले के कोयला अलीपुर, करनावल और अगरपुरा जैसे खादर के क्षेत्र को जेसीबी मशाीनों से छलनी कर दिया है।
बाढ़ के पानी को रोकने में सहायक इन इलाकों में अब इतने गहरे-गहरे गड्ढे बन गए हैं कि कई-कई हाथी एक के ऊपर एक खड़े किए जा सकते हैं। कृषि कार्य में उपयोगी ट्रैक्‍टर-ट्रालियां यहां भोर होने से पहले खनन करने में लगा दी जाती हैं जिससे अधिकतम खुदाई की जा सके।
यमुना किनारे के किसानों ने अवैध खनन को ही अपनी आमदनी का मुख्‍य जरिया बना लिया है और वो इसलिए अपने खेत की मिट्टी का भी सौदा करने से नहीं हिचकिचाते। स्‍थिति यह है कि जिले में जितना खनन यमुना की बालू का हो रहा है, उतना ही खेतों का सीना भी बड़ी बेदर्दी से चीरा जा रहा है।
मजे की बात यह है कि जिन क्षेत्रों में बाकायदा जेसीबी के साथ सैकड़ों की संख्‍या में ट्रैक्‍टर-ट्रॉली लगाकर खनन किया जा रहा है, उनके बारे में भी शिकायत करने पर पुलिस-प्रशासन कहता है कि उनकी जानकारी में ऐसा कुछ नहीं है।
यह हाल तो तब है जबकि बिना सेटिंग किए जा रहे खनन को पुलिस द्वारा सड़क पर रोककर वसूली करते कभी भी देखा जा सकता है।
दिन-रात चल रहे अवैध खनन के इस खेल ने सरकार द्वारा बनाई जाने वाली कई सड़कों का तो सत्‍यानाश किया ही है, लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य पर भी प्रभाव डाला है क्‍योंकि दिन-रात उड़ने वाली रेत और धूल उन्‍हें गंभीर बीमारियों की सौगात दे रही है।
खनन माफिया के वाहन चूंकि हर वक्‍त बहुत जल्‍दी और तेजी में रहते हैं इसलिए उनके कारण आए दिन सड़क दुर्घटनाएं होना आम बात है।
राजस्‍व विभाग, खनन विभाग, पुलिस विभाग, परिवहन विभाग आदि सबकी चुप्‍पी यह बताती है कि कोई भी इस अवैध धंधे से होने वाली अतिरिक्‍त आमदनी का मोह त्‍यागने को तैयार नहीं है।
सच तो यह है कि यदा-कदा यदि इन्‍हें किसी शिकायत पर कार्यवाही करने को बाध्‍य होना भी पड़ता है तो ये अपने नेटवर्क के माध्‍यम से माफिया तक पहले ही सूचना भेज देते हैं नतीजतन शिकायतकर्ता सबके सामने झूठा साबित हो जाता है, साथ ही वह सबके निशाने पर भी आ जाता है। फिर एक लाइन से सबके सब शिकायतकर्ता से दुश्‍मनी निकालने में जुट जाते हैं ताकि दोबारा वह वैसी हिमाकत न करे।
यही कारण है कि वह शिकायतकर्ताओं को खुलेआम धमकी देने से बाज नहीं आते, यहां तक कि मीडिया को धमकाने से भी नहीं हिचकते क्‍योंकि उन्‍हें मालूम है कि उनके वर्चस्‍व को चुनौती देना इतना आसान नहीं है।
खनन माफिया के बुलंद हौसलों का अंदाज इस बात से भी लगाया जा सकता है कि यदि कभी कोई ईमानदार पुलिस या प्रशासनिक अधिकारी उसके काम में बाधक बने हैं तो उन्‍होंने उस पर प्राणघातक हमला करने में जरा भी देरी नहीं की।
समूचे उत्तर प्रदेश में रह-रहकर होने वाली ऐसी घटनाएं खनन माफिया के दुस्‍साहस की तस्‍दीक करती हैं।
विश्‍व के प्रमुख धार्मिक स्‍थानों में शुमार कृष्‍ण की जन्‍मभूमि मथुरा के एक ओर तो चूंकि यमुना बहती है और दूसरी ओर पवित्र अरावली पर्वत श्रृंखला है इसलिए खनन माफिया के लिए यह अन्‍य जिलों से कहीं अधिक मुफीद है। साथ ही मुफीद है, उन अफसरों के लिए भी जिनके लिए खनन माफिया किसी दुधारू गाय से कम नहीं।
अब देखना यह होगा कि भ्रष्‍टाचार एवं भ्रष्‍टाचारियों पर इन दिनों सख्‍त कार्यवाही करने में लगे योगी आदित्‍यनाथ कृष्‍ण की नगरी में चल रहे इस सुनियोजित अवैध धंधे की कड़ी तोड़ पाते हैं या पुलिस-प्रशासन और माफिया का संगठित गिरोह उन्‍हें फिर गुमराह करने में सफल हो जाता है।
-सुरेन्‍द्र चतुर्वेदी
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