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बुधवार, 1 दिसंबर 2021
मथुरा की मशहूर यूनिवर्सिटी के कैंपस में HOD ने किया छात्र के साथ दुष्कर्म, कई घंटे हंगामे के बाद दर्ज हुई FIR
मथुरा में नेशनल हाईवे नंबर- 2 पर स्थित उत्तर प्रदेश की नामचीन यूनिवर्सिटी के एक HOD ने अपने ही छात्र से कैंपस के अंदर न केवल दुष्कर्म किया बल्कि जान से मारने की धमकी भी दी।इस सनसनीखेज वारदात की सूचना मिलने के बाद यूनिवर्सिटी पहुंचे पीड़ित के परिजनों ने कई घंटे जमकर हंगामा काटा, तब कहीं जाकर इलाका पुलिस द्वारा देर रात HOD के खिलाफ FIR दर्ज की गई। वो भी इस शर्त पर कि FIR में यूनिवर्सिटी के नाम का उल्लेख नहीं किया जाएगा।
बताया जाता है कि FIR दर्ज होने पर HOD को पुलिस ने तत्काल हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी थी।
थाना कोतवाली वृंदावन में दर्ज कराई गई FIR के अनुसार करीब 15 दिन पहले ही जिला हाथरस की तहसील सादाबाद के निवासी करीब 18 वर्षीय छात्र ने यहां B-Tech Civil में एडमिशन लिया था।
कल दिनांक 30 नवंबर की शाम लगभग 5.30 बजे इस छात्र को HOD अभितांसू पटनायक ने यूनिवर्सिटी कैंपस स्थित अपने आवास पर किसी टॉपिक के डाउट क्लीयर करने के बहाने बुलाया और फिर कमरे का दरवाजा बंद कर दुष्कर्म किया जबकि छात्र यथासंभव विरोध करता रहा। छात्र द्वारा विरोध किए जाने पर HOD ने उससे कहा कि तुझे पास होना है या नहीं।
तहरीर के मुताबिक अपने साथ किए गए इस घृणित कृत्य की जानकारी छात्र ने अपने एक साथी और मामा को दी, जिसके बाद छात्र के परिजनों को पता लगा।
चूंकि मथुरा स्थित यूनिवर्सिटी से हाथरस जनपद की तहसील सादाबाद बहुत अधिक दूर नहीं है इसलिए पीड़ित छात्र के परिजन कुछ ही देर में यूनिवर्सिटी जा पहुंचे और उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन से जवाब तलब करना शुरू कर दिया।
पीड़ित पक्ष के अनुसार उनके पहुंचने तक यूनिवर्सिटी के प्रबंधतंत्र ने आरोपी HOD के खिलाफ अपनी ओर से कोई कार्रवाई नहीं की थी लिहाजा परिजनों सहित छात्रों में भी रोष व्याप्त होना स्वभाविक था।
बताया जाता है कि कई घंटों तक यूनिवर्सिटी कैंपस में हंगामा होने के बाद देर रात एक बजे थाना कोतवाली वृंदावन में HOD अभितांसू पटनायक के खिलाफ आईपीसी की धारा 377 तथा 506 के तहत FIR दर्ज की गई, लेकिन वो भी इस शर्त पर कि पीड़ित परिवार तहरीर में यूनिवर्सिटी के नाम का उल्लेख नहीं करेगा।
पीड़ित परिवार का कहना है कि पुलिस ने देर रात आरोपी HOD अभितांसू पटनायक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी थी।
जो भी हो, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम से एक बात जरूर साफ होती है कि तमाम सुविधाओं और छात्र सुरक्षा का ढोल पीटने तथा ऊंची रैंक हासिल कर लेने वाले बड़े-बड़े विश्वविद्यालय वास्तव में छात्रों को सुविधा व सुरक्षा दोनों ही देने में असमर्थ हैं।
यही नहीं, जब कभी कोई बात छात्रों और स्टाफ के बीच आती है तो यूनिवर्सिटी का प्रबंधतंत्र हरसंभव प्रयास स्टाफ को बचाने का ही करता है और अंत तक सारा दोष छात्र या उसके परिजनों के सिर मढ़ने की कोशिश में लगा रहता है।
बहरहाल, पीड़ित परिवार का कहना है कि वो इस मामले में यूनिवर्सिटी के प्रबंधतंत्र से कोई समझौता नहीं करेंगे और चूंकि छात्र के साथ दुष्कर्म यूनिवर्सिटी के कैंपस में हुआ है इसलिए जांच के दौरान यूनिवर्सिटी के नाम का खुलासा करवाकर रहेंगे अन्यथा इसके लिए जिस स्तर तक जाना होगा जाएंगे, ताकि फिर कभी कोई शिक्षक इस तरह का दुस्साहस न कर सके तथा गुरू-शिष्य के रिश्ता कलंकित न हो।
-Legend News
सोमवार, 14 जनवरी 2019
मथुरा में #metoo: यूनिवर्सिटी, कॉलेज और तकनीकी शिक्षण संस्थाओं में हो रहा है महिलाओं का “यौन शोषण”
मथुरा। यौन शोषण के खिलाफ महिलाओं के एक वर्ग द्वारा शुरू किया गया #metoo अभियान बेशक बॉलीवुड एवं राजनीति सहित कॉर्पोरेट जगत में भी काफी चर्चित रहा तथा कई नामचीन हस्तियों को बेनकाब करने में कामयाब हुआ, किंतु उन स्थानों से फिलहाल दूर है जिन्हें शिक्षा का मंदिर कहा जाता है और जिनके ऊपर देश का भविष्य कहे जाने वाले युवाओं को तैयार करने की जिम्मेदारी है।
यही कारण है कि धार्मिक नगरी के रूप में विश्व विख्यात मथुरा के कई निजी शिक्षण संस्थानों में महिला कर्मचारियों सहित छात्राओं तक का यौन शोषण किए जाने की जानकारी मिली है।
विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मथुरा-भरतपुर रोड पर स्थित शिक्षा के कुछ ऐसे ही मंदिरों में महिला कर्मचारियों तथा छात्राओं के यौन शोषण का खेल लंबे समय से चल रहा है।
बताया जाता है कि कई-कई शिक्षण संस्थाओं का संचालन करने वाले एक ऐसे ही व्यक्ति की किसी पीड़ित फीमेल कर्मचारी ने ही पिछले दिनों वीडियो क्लिप तैयार की है।
कॉलेज की इस फीमेल कर्मचारी का कहना है कि वह संस्थान में कार्यरत दूसरी महिलाओं तथा छात्राओं के सहयोग से शीघ्र ही शिक्षण संस्थान के मालिक का घिनौना चेहरा सामने लाएगी और कानूनी कार्यवाही करेगी ताकि शिक्षा व्यवसाइयों का पर्दाफाश हो सके।
इस महिला का यह भी कहना है कि वह अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न के अलावा दूसरी महिलाओं और छात्राओं के साथ लंबे समय से किए जा रहे दुष्कर्म को भी सार्वजनिक करेगी जिससे कि शिक्षा व्यवसाई को किसी एक महिला पर कीचड़ उछालने का मौका न मिले।
पीड़ित महिला का दावा है कि मथुरा-भरतपुर रोड पर शिक्षण संस्थाएं चलाने वाले इस व्यक्ति को संस्थान खुलने से लेकर बंद होने तक अपने कार्यालय में एक खास महिला कर्मचारी के साथ बैठेे देखा जा सकता है। यह वही महिला है जिसके इस शिक्षा व्यवसाई से संबंध संदिग्ध बताए जाते हैं और जिसे लेकर उसके सभी शिक्षण संस्थानों में चर्चा का बाजार गर्म रहता है।
संस्थान के सूत्र बताते हैं कि कर्मचारियों और शिक्षकों के साथ-साथ छात्र-छात्राओं के बीच भी संचालक के रंगीन मिजाज एवं रंगरेलियां मनाने के किस्से चर्चित हैं किंतु आदत से मजबूर संचालक पर फिलहाल कोई असर होता दिखाई नहीं देता।
सूत्रों के अनुसार महिला कर्मचारियों और छात्राओं के यौन शोषण का यह मामला सिर्फ शिक्षण संस्थाओं के अंदर तक ही सीमित नहीं है, इसके बाहर भी शिक्षा व्यवसाइयों द्वारा उनका विभिन्न काम कराने के लिए उपयोग किया जाता है।
वैसे महिला कर्मचारियों एवं छात्राओं के साथ किए जा रहे खेल में मथुरा-भरतपुर रोड पर संचालित शिक्षण संस्थान के मालिक की संलिप्तता का यह एकमात्र मामला भी नहीं है। कई दूसरे शिक्षण संस्थान संचालक भी ऐसे घिनौने कृत्य कर रहे हैं जिनमें डीम्ड यूनिवर्सिटी तक चलाने वालों के नाम शामिल हैं।
एक मामला तो पिछले दिनों अदालत तक जा पहुंचा था और फिलहाल वहां लंबित है। दूसरे मामले में स्कूल के संचालक की गिरफ्तारी हो चुकी है।
इसके अतिरिक्त आश्चर्यचकित कर देने वाला एक अन्य मामला 14 जनवरी 2008 के दिन तब सामने आया था जब शहर के एक नामचीन होटल के अंदर न्यायपालिका से जुड़े चार अधिकारी अलग-अलग कमरों में चार छात्राओं के साथ पकड़े गए थे।
ये छात्राएं भी एक स्थानीय तकनीकी शिक्षण संस्था में अध्ययनरत थीं और इन्होंने पूछताछ के दौरान बाकायदा पुलिस को बताया कि शिक्षण संस्था के मालिक ने उन्हें करियर बनाने का आश्वासन देकर अधिकारियों को “एंटरटेन” करने के लिए बाध्य किया था।
मामला न्यायपालिका से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने उसे रफा-दफा तो कर दिया परंतु तत्कालीन जिला जज को मौके पर बुलाने के बाद, जिससे संशय की कोई गुजाइश न रहे।
जिला जज ने जनवरी 2008 को एक पत्र भेजकर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तथा रजिस्ट्रार को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया और शिक्षण संस्थान के उस मालिक का नाम भी उजागर किया जिसके बारे में छात्राओं ने स्पष्ट जानकारी दी थी।
हमेशा की तरह हालांकि शिक्षण संस्था के मालिक ने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर मामले को दबवा दिया परंतु तत्कालीन जिला जज का इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं रजिस्ट्रार को भेजा गया पत्र असलियत सामने लाने के लिए काफी है।
ऐसी ही एक डीम्ड यूनिवर्सिटी के युवा संचालक को तो कुछ समय पूर्व उनकी पत्नी ने ही संस्थान की महिला कर्मचारी के साथ देर शाम ऑफिस में रंगरेलियां मनाते रंगेहाथ पकड़ लिया था।
बताया जाता है कि यूनिवर्सिटी के मालिक की इस घिनौनी हरकत से यूनिवर्सिटी के सभी मेल व फीमेल कर्मचारी वाकिफ हैं किंतु नौकरी पर आंच आने के डर से मुंह नहीं खोलते। यूनिवर्सिटी के दिन-प्रतिदिन गंदे होते माहौल के कारण गत दिनों कुछ लोग दूसरे संस्थानों में व्यवस्था होते ही यहां से जॉब छोड़कर जा चुके हैं।
सूत्र बताते हैं कि शिक्षा मंदिरों के संचालक और हवस के इन पुजारियों का भांडा फूटने में अब ज्यादा समय नहीं लगेगा क्योंकि पीड़िताओं ने अब बदनामी की परवाह किए बिना उनके कुकृत्य सामने लाने का मन बना लिया है।
जो भी हो, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि एक विश्व विख्यात धार्मिक नगरी से एजुकेशन हब के रूप में पहचान बनाने वाली कृष्ण की नगरी आज शिक्षा के मंदिरों में किए जा रहे यौन शोषण के लिए भी बदनामी हासिल करने लगी है और इसकी चर्चा कॉलेज एवं यूनिवर्सिटी कैंपस की दीवारों से बाहर तक हो रही है।
इन हालातों में यदि कभी किसी सफेदपोश शिक्षा व्यवसाई का घृणित चेहरा अचानक सामने आ जाए तो आश्चर्य नहीं क्योंकि दुष्कर्म किया भले ही बंद कमरों में जाता हो परंतु उसकी दुर्गंध को ज्यादा दिनों तक दबाए रखना संभव नहीं होता।
-सुरेन्द्र चतुर्वेदी
यही कारण है कि धार्मिक नगरी के रूप में विश्व विख्यात मथुरा के कई निजी शिक्षण संस्थानों में महिला कर्मचारियों सहित छात्राओं तक का यौन शोषण किए जाने की जानकारी मिली है।
विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मथुरा-भरतपुर रोड पर स्थित शिक्षा के कुछ ऐसे ही मंदिरों में महिला कर्मचारियों तथा छात्राओं के यौन शोषण का खेल लंबे समय से चल रहा है।
बताया जाता है कि कई-कई शिक्षण संस्थाओं का संचालन करने वाले एक ऐसे ही व्यक्ति की किसी पीड़ित फीमेल कर्मचारी ने ही पिछले दिनों वीडियो क्लिप तैयार की है।
कॉलेज की इस फीमेल कर्मचारी का कहना है कि वह संस्थान में कार्यरत दूसरी महिलाओं तथा छात्राओं के सहयोग से शीघ्र ही शिक्षण संस्थान के मालिक का घिनौना चेहरा सामने लाएगी और कानूनी कार्यवाही करेगी ताकि शिक्षा व्यवसाइयों का पर्दाफाश हो सके।
इस महिला का यह भी कहना है कि वह अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न के अलावा दूसरी महिलाओं और छात्राओं के साथ लंबे समय से किए जा रहे दुष्कर्म को भी सार्वजनिक करेगी जिससे कि शिक्षा व्यवसाई को किसी एक महिला पर कीचड़ उछालने का मौका न मिले।
पीड़ित महिला का दावा है कि मथुरा-भरतपुर रोड पर शिक्षण संस्थाएं चलाने वाले इस व्यक्ति को संस्थान खुलने से लेकर बंद होने तक अपने कार्यालय में एक खास महिला कर्मचारी के साथ बैठेे देखा जा सकता है। यह वही महिला है जिसके इस शिक्षा व्यवसाई से संबंध संदिग्ध बताए जाते हैं और जिसे लेकर उसके सभी शिक्षण संस्थानों में चर्चा का बाजार गर्म रहता है।
संस्थान के सूत्र बताते हैं कि कर्मचारियों और शिक्षकों के साथ-साथ छात्र-छात्राओं के बीच भी संचालक के रंगीन मिजाज एवं रंगरेलियां मनाने के किस्से चर्चित हैं किंतु आदत से मजबूर संचालक पर फिलहाल कोई असर होता दिखाई नहीं देता।
सूत्रों के अनुसार महिला कर्मचारियों और छात्राओं के यौन शोषण का यह मामला सिर्फ शिक्षण संस्थाओं के अंदर तक ही सीमित नहीं है, इसके बाहर भी शिक्षा व्यवसाइयों द्वारा उनका विभिन्न काम कराने के लिए उपयोग किया जाता है।
वैसे महिला कर्मचारियों एवं छात्राओं के साथ किए जा रहे खेल में मथुरा-भरतपुर रोड पर संचालित शिक्षण संस्थान के मालिक की संलिप्तता का यह एकमात्र मामला भी नहीं है। कई दूसरे शिक्षण संस्थान संचालक भी ऐसे घिनौने कृत्य कर रहे हैं जिनमें डीम्ड यूनिवर्सिटी तक चलाने वालों के नाम शामिल हैं।
एक मामला तो पिछले दिनों अदालत तक जा पहुंचा था और फिलहाल वहां लंबित है। दूसरे मामले में स्कूल के संचालक की गिरफ्तारी हो चुकी है।
इसके अतिरिक्त आश्चर्यचकित कर देने वाला एक अन्य मामला 14 जनवरी 2008 के दिन तब सामने आया था जब शहर के एक नामचीन होटल के अंदर न्यायपालिका से जुड़े चार अधिकारी अलग-अलग कमरों में चार छात्राओं के साथ पकड़े गए थे।
ये छात्राएं भी एक स्थानीय तकनीकी शिक्षण संस्था में अध्ययनरत थीं और इन्होंने पूछताछ के दौरान बाकायदा पुलिस को बताया कि शिक्षण संस्था के मालिक ने उन्हें करियर बनाने का आश्वासन देकर अधिकारियों को “एंटरटेन” करने के लिए बाध्य किया था।
मामला न्यायपालिका से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने उसे रफा-दफा तो कर दिया परंतु तत्कालीन जिला जज को मौके पर बुलाने के बाद, जिससे संशय की कोई गुजाइश न रहे।
जिला जज ने जनवरी 2008 को एक पत्र भेजकर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तथा रजिस्ट्रार को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया और शिक्षण संस्थान के उस मालिक का नाम भी उजागर किया जिसके बारे में छात्राओं ने स्पष्ट जानकारी दी थी।
हमेशा की तरह हालांकि शिक्षण संस्था के मालिक ने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर मामले को दबवा दिया परंतु तत्कालीन जिला जज का इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं रजिस्ट्रार को भेजा गया पत्र असलियत सामने लाने के लिए काफी है।
ऐसी ही एक डीम्ड यूनिवर्सिटी के युवा संचालक को तो कुछ समय पूर्व उनकी पत्नी ने ही संस्थान की महिला कर्मचारी के साथ देर शाम ऑफिस में रंगरेलियां मनाते रंगेहाथ पकड़ लिया था।
बताया जाता है कि यूनिवर्सिटी के मालिक की इस घिनौनी हरकत से यूनिवर्सिटी के सभी मेल व फीमेल कर्मचारी वाकिफ हैं किंतु नौकरी पर आंच आने के डर से मुंह नहीं खोलते। यूनिवर्सिटी के दिन-प्रतिदिन गंदे होते माहौल के कारण गत दिनों कुछ लोग दूसरे संस्थानों में व्यवस्था होते ही यहां से जॉब छोड़कर जा चुके हैं।
सूत्र बताते हैं कि शिक्षा मंदिरों के संचालक और हवस के इन पुजारियों का भांडा फूटने में अब ज्यादा समय नहीं लगेगा क्योंकि पीड़िताओं ने अब बदनामी की परवाह किए बिना उनके कुकृत्य सामने लाने का मन बना लिया है।
जो भी हो, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि एक विश्व विख्यात धार्मिक नगरी से एजुकेशन हब के रूप में पहचान बनाने वाली कृष्ण की नगरी आज शिक्षा के मंदिरों में किए जा रहे यौन शोषण के लिए भी बदनामी हासिल करने लगी है और इसकी चर्चा कॉलेज एवं यूनिवर्सिटी कैंपस की दीवारों से बाहर तक हो रही है।
इन हालातों में यदि कभी किसी सफेदपोश शिक्षा व्यवसाई का घृणित चेहरा अचानक सामने आ जाए तो आश्चर्य नहीं क्योंकि दुष्कर्म किया भले ही बंद कमरों में जाता हो परंतु उसकी दुर्गंध को ज्यादा दिनों तक दबाए रखना संभव नहीं होता।
-सुरेन्द्र चतुर्वेदी
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