income tax department. लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
income tax department. लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 31 मार्च 2014

फिक्‍सिंग ही नहीं IT की भी जांच के घेरे में हैं माही-साक्षी

नई दिल्ली। 
टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी एक और विवाद में घिरते दिख रहे हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट रीयल्टी कंपनी आम्रपाली ग्रुप के चेयरमैन अनिल शर्मा की ओर से धोनी को मिले 75 करोड़ रुपये के चार पोस्ट डेटेड चेकों की जांच कर रहा है। डिपार्टमेंट की रांची यूनिट इस बात की जांच कर रही है कि ये चेक टैक्स के दायरे में आते हैं या नहीं।
आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में उनका नाम घसीटे जाने की वजह से धोनी पहले से ही परेशान हैं। मीडिया में यह रिपोर्ट आई थी कि इससे खिन्न होकर उन्होंने चेन्नै सुपरकिंग्स की कप्तानी छोड़ने की पेशकश कर डाली है, हालांकि बाद में उनके प्रवक्ता ने इसका खंडन किया था। ऐसे में चेक का मामला उनकी परेशानी बढ़ा सकता है।
जानकारी के मुताबिक, अनिल शर्मा की ओर से धोनी को चारों चेक वित्त वर्ष 2011-12 में जारी किए गए थे और इन्‍हें 2014 में कैश कराया जाना था। धोनी आम्रपाली ग्रुप के ब्रैंड ऐम्बैस्डर भी हैं जबकि उनकी पत्नी साक्षी सिंह रावत आम्रपाली माही डिवेलपर्स में 25% की हिस्सेदार हैं। आम्रपाली माही डिवेलपर्स, आम्रपाली ग्रुप और धोनी का जाइंट वेंचर है।
आम्रपाली के सूत्रों ने बताया कि मीडिया रिपोर्ट्स और पिछले साल अगस्त में कंपनी के दिल्ली और उत्तर प्रदेश स्थित ऑफिसों पर छापे के बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने चेकों को लेकर ब्योरा मांगा है। नाम न जाहिर करने की शर्त पर कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि अधिकारियों को बुलाकर पूछताछ की गई है और जांच डिपार्टमेंट की रांची यूनिट को सौंप दी गई है। इस मामले में विभाग जल्द ही धोनी का पक्ष भी जानेगा।
चेकों को लेकर धोनी और आम्रपाली ग्रुप की अलग-अलग बात कही है। धोनी के प्रवक्ता ने कहा कि आम्रपाली माही डिवेलपर्स में धोनी ने जो निवेश किया है, ये चेक बतौर उसकी सिक्‍यॉरिटी दिए गए। आम्रपाली ग्रुप ने कहा कि आम्रपाली माही डिवेलपर्स को रांची में एक क्रिकेट अकादमी बनानी थी और ये चेक उसी काम की गारंटी के लिए दिए गए थे लेकिन काम शुरू न हो पाने की वजह कप्तान ने इन्हें लौटा दिया। हालांकि, जब आम्रपाली के प्रवक्‍ता से पूछा गया कि चेक आम्रपाली माही डेवलपर्स के बजाय धोनी के नाम पर क्‍यों जारी किया गया तो वह जवाब नहीं दे सके।
धोनी के प्रवक्ता अरुण पांडे ने बताया, 'मुझे धोनी के वित्तीय मामलों की जानकारी नहीं है लेकिन जहां तक मुझे ध्यान है ये चेक धोनी को आम्रपाली में किए गए निवेश की सिक्यॉरिटी के तौर पर दिए गए थे।
-एजेंसी

शनिवार, 4 जनवरी 2014

टू-व्‍हीलर्स पर रखकर ही करोड़ों के सेब बेच लिए वीरभद्र ने

नई दिल्‍ली। 
रिश्वत लेने के आरोपों से घिरे हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की परेशानियां और बढ़ने वाली हैं। उनके खिलाफ जांच में यह बात सामने आई है कि अपने बगान के करोड़ों रुपये के सेब की उन्होंने टू-वीलर्स और तेल टैंकर से ढुलाई करवा ली। यह ठीक वैसा ही हास्यास्पद मामला है, जिस तरह से बिहार में चारा घोटाले की जांच में यह बात सामने आई थी कि सांड़ों को स्कूटर से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया गया था।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने एक बार फिर वीरभद्र सिंह के उस दावे की जांच में तेजी ला दी है, जिसमें उन्होंने 3 सालों में बागवानी से होने वाली आय 6.56 करोड़ रुपये दिखाई थी। एक इंग्लिश न्यूज़ पेपर ने लिखा है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने वीरभद्र सिंह और इंश्योरेंस एजेंट आनंद चौहान को अलग-अलग नोटिस भेजे हैं। नोटिस में वीरभद्र सिंह की बागवानी से हुई आय के बारे में सवाल उठाए गए हैं।
कहा जाता है कि आनंद चौहान ही मुख्यमंत्री के श्रीखंड वाले बागानों की देखरेख करता था। जून 2008 में वीरभद्र और आनंद चौहान ने एक एमओयू साइन किया था। इस एमओयू के तहत चौहान को वीरभद्र के बागान की देखभाल करनी थी। यह भी तय किया गया था कि चौहान को बागान से होने वाली आमदनी वीरभद्र और उनके परिवार की तरफ से एलआईसी या म्यूचुअल फंड्स में इन्वेस्ट करनी होगी।
चौहान ने क्लेम किया है कि उसने वीरभद्र सिंह के बागान के सेब यूनिवर्सल ऐपल असोसिएट के चुन्नीलाल को बेचे हैं। चुन्नीलाल नाम के शख्स ने टैक्स अथॉरिटीज़ को उन 18 गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन नंबर दिए हैं, जिनकी मदद से वीरभद्र के बागानों से सेब ढोए गए थे। जब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इन नंबरों की जांच की तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। मालूम हुआ कि इनमें से दो नंबर- HP 06 0768 और HP 06 1123 तो स्कूटर के हैं। एक अन्य नंबर HP 63 4975 तेल टैंकर का है। एक नंबर तो ऐसा है जो किसी को अलॉट ही नहीं हुआ। इनमें से कुछ नंबर ऐसे 'ट्रिपर' वीकल्स के हैं, जो यूज नहीं किए गए।
ऐसे में एक ऑफिशल ने आरोप लगाया, 'इन नंबरों को देखकर साफ लगता है कि चुन्नीलाल को कोई सेब नहीं बेचे गए। इसका मतलब है कि वीरभद्र सिंह ने बागवानी से जो आमदनी दिखाई है, वह झूठी है।'
इसी हफ्ते की शुरुआत में राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर वीरभद्र सिंह पर रिश्वत लेने और केंद्रीय इस्पात मंत्री रहते हुए एक स्टील कंपनी से पैसे लेने का आरोप लगाया था। 2 मार्च, 2012 को वीरभद्र सिंह ने 3 फाइनैंशल इयर्स के लिए इनकम टैक्स रिटर्न्स फाइल किए थे। उन्होंने बताया था कि बगवानी के जरिए उन्हें 2009-10 में 2.12 करोड़, 2010-11 में 2.80 करोड़ और 2011-12 में 1.55 करोड़ की आमदनी हुई है। उन्होंने क्लेम किया था कि 105 बीघा में फैले सेब के बागान से उन्हें आमदनी हुई है इसलिए वह इनकम टैक्स रिटर्न्स में रिविज़न करना चाहते हैं।
अखबार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने साल 2010-11 में हुई वीरभद्र सिंह की आमदनी का आंकलन करने का काम दोबारा शुरू कर दिया है। हालांकि वीरभद्र सिंह के करीबियों का कहना है कि उनकी जानकारी में ऐसी कोई बात नहीं आई है।
-एजेंसी
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...