(लीजेण्ड न्यूज़ विशेष) राजनीति का अपराधीकरण तो एक लंबे समय से चर्चा में है और उसे लेकर न्यायपालिका भी चिंतित है पर राजनीति का एक अन्य नापाक गठजोड़ न चर्चा में है, न उसके लिए कोई चिंतित है जबकि वह देश व समाज की बर्बादी का बड़ा कारण बना हुआ है। जी हां! यह गठजोड़ है तथाकथित धर्मगुरुओं एवं राजनीति का। इस नापाक गठजोड़ की गहराई का अंदाज यदि लगाना हो तो भगवान कृष्ण की जन्मस्थली मथुरा और उसके आस-पास आकर देखिये। वृंदावन, महावन, कोकिलावन, गोवर्धन, गोकुल, नंदगांव, बरसाना, बल्देव आदि अनेक स्थानों पर चारों ओर राजनीति और धर्म के नापाक गठजोड़ से उपजा धंधा फलता-फूलता नजर आयेगा। कहते हैं कि किसी भी पापकर्म के लिए धर्म और धार्मिक स्थानों से बड़ी कोई आड़ नहीं होती। तथाकथित धर्मगुरू इस आड़ का आधार होते हैं। फिर मथुरा तो विश्व पटल पर अपनी विशिष्ट धार्मिक छवि के कारण ही पहचाना जाता है और उसकी इस छवि के अनुरूप यहां नामचीन धर्मगुरुओं, संत-महंतों, भागवताचार्यों एवं मठाधीशों की लंबी फेहरिस्त है। धर्म की आड़ में कई दशकों से जड़ जमाये बैठे ये धंधेबाज कानून-व्यवस्था को खुली चुनौती दे रहे हैं और इनके द्वारा अर्जित अकूत संपत्ति बड़े विवादों का कारण बनी हुई है लेकिन कोई कुछ नहीं कर पा रहा क्योंकि इस संपत्ति में राजनेताओं की साइलेंट हिस्सेदारी है। बात शुरू करते हैं
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रविवार, 18 अगस्त 2013
गुरुवार, 28 फ़रवरी 2013
ब्रज के तीन अभागे संत !
(लीजेण्ड न्यूज़ विशेष)
योगीराज भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली, ब्रजभूमि तथा ब्रजवासियों के लिए कार्ष्णि गुरू शरणानंद, साध्वी ऋतंभरा और कृपालु महाराज जैसे धर्मगुरू क्या अब एक बोझ बन गये हैं ?
इन साधुवेशधारी तथाकथित धर्मगुरूओं द्वारा बड़े-बड़े मठ, मंदिर एवं आश्रमों के जरिये ब्रजभूमि में वास करके क्या सिर्फ और सिर्फ अपनी दुकानें चलाई जा रही हैं ?
कृष्ण की पटरानी कहलाने वाली यमुना के अस्तित्व पर ही ब्रजमण्डल में गहरा प्रश्नचिन्ह अंकित हो जाने के बावजूद यमुना को लेकर शुरू किये गये आंदोलन से गुरू शरणानंद, ऋतंभरा और कृपालु की उदासीनता क्या यही दर्शाती है ?
योगीराज भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली, ब्रजभूमि तथा ब्रजवासियों के लिए कार्ष्णि गुरू शरणानंद, साध्वी ऋतंभरा और कृपालु महाराज जैसे धर्मगुरू क्या अब एक बोझ बन गये हैं ?
इन साधुवेशधारी तथाकथित धर्मगुरूओं द्वारा बड़े-बड़े मठ, मंदिर एवं आश्रमों के जरिये ब्रजभूमि में वास करके क्या सिर्फ और सिर्फ अपनी दुकानें चलाई जा रही हैं ?
कृष्ण की पटरानी कहलाने वाली यमुना के अस्तित्व पर ही ब्रजमण्डल में गहरा प्रश्नचिन्ह अंकित हो जाने के बावजूद यमुना को लेकर शुरू किये गये आंदोलन से गुरू शरणानंद, ऋतंभरा और कृपालु की उदासीनता क्या यही दर्शाती है ?
गुरुवार, 12 जुलाई 2012
सवाल अनेक पर जवाब किसी का नहीं
मैं नहीं समझ पा रहा हूं कि भारत
तब अधिक गौरवशाली था जब गरीबी के बावजूद उसकी सांस्कृतिक समृद्धि का सारी
दुनिया लोहा मानती थी या आज अधिक गौरवशाली है जब उसकी गिनती विश्व के
भ्रष्टतम देशों में की जाती है ?
कुछ समय पहले तक भारत को सपेरों और साधु-सन्यासियों का देश कहा जाता था । गरीब देश कहा जाता था । नेता कहते हैं कि भारत ने बहुत तरक्की की है । अब दुनिया का कोई देश भारत को सपेरों का देश नहीं कहता ।
कुछ समय पहले तक भारत को सपेरों और साधु-सन्यासियों का देश कहा जाता था । गरीब देश कहा जाता था । नेता कहते हैं कि भारत ने बहुत तरक्की की है । अब दुनिया का कोई देश भारत को सपेरों का देश नहीं कहता ।
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