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सोमवार, 23 जून 2014

टैक्‍स चोरी को 'भारत रत्‍न' का झूठ: मैं क्रिकेटर नहीं, एक्‍टर हूं

नई दिल्‍ली। 
क्रिकेट के भगवान की उपाधि प्राप्‍त सचिन तेंदुलकर को लेकर एक RTI के जरिए ये सवाल पूछा गया है कि मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर एक्टर हैं या क्रिकेटर। जिसका जवाब प्रथम अपीलीय प्राधिकार (सीपीआईओ) ने दिया है। सीपीआईओ ने कहा है कि इस सवाल का जवाब आयकर विभाग केंद्र की ओर से दिया जा चुका है जिसमें सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा गया था कि आयकर रिटर्न संबंधी सूचना निजी है। उसे तब तक सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, जब तक कि जनहित का बड़ा मसला शामिल न हो। उधर आरटीआई कार्यकर्ता इस फैसले के खिलाफ मुख्य सूचना आयोग में अपील करने की तैयारी कर रहा है।
सचिन के मामले में यह आरटीआई सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्राणेश की ओर से उस आधार पर की गई थी, जिसमें आयकर बचाने के लिए सचिन ने अपना मुख्य काम क्रिकेट खेलना नहीं, बल्कि एक्टिंग बताया था।
यह आरटीआई राष्ट्रपति भवन भेजी गई थी और वहां से जवाब मुहैया कराने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय और राजस्व विभाग भेज दी गई। मंत्रालय ने इसके बाद आरटीआई को जवाब देने के लिए आयकर विभाग को भेज दिया। आयकर विभाग ने टैक्स संबंधी सूचना को निजी करार देते हुए सूचना मुहैया कराने से इंकार कर दिया।
आरटीआई कार्यकर्ता ने इसके खिलाफ सीपीआईओ के समक्ष अपील की लेकिन सीपीआईओ ने इसका निपटारा करते हुए कहा कि आरटीआई से जुड़े सवाल का जवाब दिया जा चुका है। हालांकि सचिन की ओर से एक्टर होने के दावे की पुष्टि मुंबई में आयकर विभाग के सहायक आयुक्त के सामने की गई अपील करती है। इसमें खुद तेंदुलकर ने 2008 में यह दावा करते हुए किया था कि उनका मुख्य कार्य एक्टिंग है, क्रिकेट खेलना नहीं।
सचिन की ओर से यह अपील अक्टूबर, 2003 में आयकर रिटर्न भरने के बाद समीक्षा अधिकारी की ओर से उनके एक्टर होने के दावे को खारिज किए जाने के बाद दायर की गई थी। दरअसल आयकर अधिनियम की धारा 80-आरआर के तहत एक्टर होने पर उन्होंने एक कलाकार होने के आधार पर छूट का दावा किया था। समीक्षा अधिकारी की ओर से एक्टर होने का दावा खारिज होने पर उन्हें छूट नहीं मिलती।
ऐसे में उनकी अपील पर आयकर विभाग के सहायक आयुक्त ने सचिन के एक्टर होने के दावे को स्वीकार कर लिया लेकिन विभाग ने इसके बाद हाईकोर्ट में अपील की या नहीं, इस बारे में विभाग के अधिकारियों ने चुप्पी साध ली थी। इसके बाद ही ये आरटीआई दायर हुई।
-एजेंसी

बुधवार, 21 मई 2014

सारे नियम ताक पर रख कर सचिन को दिया भारत रत्‍न

नई दिल्ली। 
देश के सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल एक आरटीआई से मांगी गई जानकारी के दौरान यह खुलासा हुआ है कि देश के हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद की फाइल सरकारी मंत्रालयों में कई महीनों तक घूमती रही। ठीक उसी वक्त पूर्व भारतीय क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर की भारत रत्न से जुड़ी फाइल की एंट्री हुई और उन्हें भारत रत्न का सम्मान दिए जाने पर केंद्र सरकार ने अंतिम मुहर लगा दी।
आरटीआई से यह खुलासा हुआ है कि सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न देने के लिए सभी नियमों को ताक पर रख दिया गया। ध्यानचंद को भारत रत्न दिए जाने से जुड़ी फाइल सरकारी मंत्रालयों में चार महीनों तक घूमती रही। इसी बीच सचिन तेंदुलकर के फाइल की एंट्री हुई और वह देश के सबसे बड़े सम्मान यानी भारत रत्न लेने के मामले में बाजी मार गए क्योंकि इसके लिए सभी नियमों को दरकिनाकर कर दिया गया था। गौरतलब है कि 2014 में चार फरवरी को राज्य सभा सांसद सचिन तेंदुलकर को भारत के सर्वोच्‍च नागरिक सम्‍मान 'भारत रत्‍न' से नवाजा गया था। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सचिन तेंदुलकर को यह सम्मान प्रदान किया था।
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर भारत सरकार ने 2013 में ध्यान चंद को भारत रत्न देने की पूरी तैयारी कर ली थी तो फिर उसे अचानक क्यूं बदल दिया गया? खेल मंत्रालय ने ध्यान चंद को भारत रत्न देने की सिफारिश की थी लेकिन खेल मंत्रालय को भारत सरकार ने यह नहीं बताया कि उसकी सिफारिश को क्यों नामंजूर किया गया। यह भी बड़ा सवाल है कि कैसे जानबूझकर ध्यान चंद के उस फाइल की अनदेखी होती रही जो देश के सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न से जुड़ी फाइल थी।
सचिन ने पिछले साल नवंबर 2013 में मुबंई में वेस्‍टइंडीज के खिलाफ अपना अंतिम 200वां टेस्‍ट खेलकर संन्‍यास ले लिया था। सचिन क्रिकेट की दुनिया में रिकॉर्डों के बादशाह कहे जाते हैं। सचिन ने अपने करियर में कुल 200 टेस्ट मैच खेले। उन्होंने टेस्ट मैचों में 53.78 की औसत से कुल 15921 रन बनाए हैं। टेस्ट क्रिकेट में उनका उच्चतम स्कोर 248 रन है, जो उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ ढाका में बनाए थे। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 51 शतक और 68 अर्धशतक जमाए हैं। इसी तरह वनडे क्रिकेट में उन्होंने कुल 463 मैच खेले हैं। वनडे की 452 पारियों में उन्होंने 44.83 की औसत से 18426 रन बनाए हैं। इसमें 49 शतक और 96 अर्धशतक शामिल हैं।
दूसरी तरफ हॉकी के जादूगर कहे जानेवाले ध्यान चंद ने भारत के लिए तीन ओलिंपिक गोल्ड मेडल जीते थे- 1928 (ऐम्सटर्डम), 1932 (लॉस एंजिलिस), और 1936 (बर्लिन)। हॉकी के इस महान खिलाड़ी ने सन 1979 में दुनिया को अलविदा कह दिया था। ध्यान चंद ने आजादी के पहले वाले भारत में इस खेल के प्रति भारतीयों में एक जुनून पैदा कर दिया था।
-एजेंसी
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