मुंबई। महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में इस साल
के शुरुआती तीन महीनों के दौरान 168 किसानों की मौत हुई। ग्यारह जिलों वाले
विदर्भ में राज्य की दो तिहाई खनिज संपदा और तीन चौथाई वन संपदा है। इसके
बावजूद इस इलाके में गरीबी और कुपोषण का स्थायी आश्रय बना हुआ है।
किसानों की हक की लड़ाई लड़ने वाले संगठन विदर्भ जनांदोलन समिति के अध्यक्ष किशोर तिवारी ने कहा कि पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक इस साल 31 मार्च तक 168 किसानों ने आत्महत्या की है। उन्होंने कहा कि इस हिसाब से हर महीने 56 किसान असमय मौत के मुंह में जा रहे हैं। इससे इस क्षेत्र में कई सालों से जारी कृषि संकट और प्रशासनिक उदासीनता उजागर होती है।
किसानों की हक की लड़ाई लड़ने वाले संगठन विदर्भ जनांदोलन समिति के अध्यक्ष किशोर तिवारी ने कहा कि पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक इस साल 31 मार्च तक 168 किसानों ने आत्महत्या की है। उन्होंने कहा कि इस हिसाब से हर महीने 56 किसान असमय मौत के मुंह में जा रहे हैं। इससे इस क्षेत्र में कई सालों से जारी कृषि संकट और प्रशासनिक उदासीनता उजागर होती है।