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शनिवार, 13 नवंबर 2021
312.50 करोड़ के फ्रॉड केस में “नयति” की चेयरपर्सन नीरा राडिया से EOW ने की 4 घंटे तक पूछताछ
312.50 करोड़ रुपए के कर्ज का गबन करने के मामले में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने गत 27 अक्टूबर को नयति हेल्थकेयर की चेयरपर्सन और प्रमोटर नीरा राडिया से करीब 4 घंटे कड़ी पूछताछ की है।दरअसल, नयति हेल्थकेयर के दो निदेशकों यतीश वहाल और सतीश कुमार नरुला को गत दिनों इस मामले में एक अन्य व्यक्ति राहुल सिंह के साथ गिरफ्तार किए जाने के बाद पुलिस ने राडिया को जांच में शामिल होने के लिए तलब किया था।
पिछले साल 4 नवंबर को पुलिस ने आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. राजीव कुमार शर्मा की शिकायत पर नारायणी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड, नीरा राडिया, उनकी बहन करुणा मेनन, सतीश नरुला और यतीश वहल पर धोखाधड़ी, अमानत में खयानत, खातों में हेराफेरी, फ्रॉड, धन के गबन समेत अन्य आरोपों के तहत एक FIR दर्ज की थी।
हालांकि नयति हेल्थकेयर के एक प्रवक्ता ने राडिया के खिलाफ आरोपों से इंकार करते हुए दावा किया था कि प्राथमिकी “निराधार” है और कंपनी बोर्ड हेराफेरी के आरोपों की जांच कर रहा है।
FIR के अनुसार आरोपियों ने दो अस्पतालों गुड़गांव में नयति मेडिसिटी और दिल्ली में विमहंस के लिए कर्ज लिया था, जहां डॉ. शर्मा “प्रमुख पदों” पर थे। शर्मा ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने नारायणी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से इन दो परियोजनाओं का धोखाधड़ी पूर्वक एक बड़ा हिस्सा हासिल कर लिया, जिसे बाद में नयति हेल्थकेयर एनसीआर नाम दिया गया।
शर्मा ने आरोप लगाया कि आरोपी ने अस्पताल को विकसित करने के लिए 312.50 करोड़ रुपये का कर्ज लिया और फिर निजी इस्तेमाल के लिए कर्ज का पैसा ट्रांसफर करने को ‘फर्जी खाते’ बनाए।
EOW के अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर आर के सिंह के अनुसार “यस बैंक से 312.50 करोड़ रुपये का ऋण प्राप्त करने के बाद अहलूवालिया कंस्ट्रक्शन के नाम से 208 करोड़ रुपये एक बैंक खाते में स्थानांतरित किए गए। जांच करने पर पता चला कि यह खाता अहलूवालिया कंस्ट्रक्शन के प्रमोटर राहुल सिंह यादव ने खोला था। खातों को वहाल और नरुला द्वारा अधिकृत किया गया था।”
पुलिस के अनुसार नीरा राडिया से उसने लगभग 50 प्रश्न पूछे। राडिया ने सभी सवालों के जवाब दिए लेकिन 312.50 करोड़ रुपये के कर्ज पर संतोषजनक जवाब नहीं दिया। पुलिस ने बताया कि आने वाले दिनों में नीरा राडिया को फिर तलब किया जाएगा।
गौरतलब है कि मथुरा में नीरा राडिया ने दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर- 2 पर नयति मल्टी सुपर स्पेशलिटी के नाम से एक हॉस्पिटल खोला था, जो पिछले करीब ढाई महीने से बंद पड़ा है। नीरा राडिया के इस हॉस्पिटल में प्रसिद्ध चार्टर्ड एकाउंटेंट दीनानाथ चतुर्वेदी के पुत्र राजेश चतुर्वेदी का नाम भी बतौर प्रमोटर्स शामिल है। हॉस्पिटल बंद होने के बाद से नयति के कर्मचारी अपने वेतन तक को तरस गए हैं जबकि हॉस्पिटल के प्रबंधतंत्र का कहना है कि मेंटिनेंस के चलते हॉस्पिटल को कुछ समय के लिए बंद किया गया है।
बहरहाल, ”2G स्पैक्ट्रम” घोटाला हो या “पनामा लीक्स” और पेंडोरा लीक मामला, नीरा राडिया का नाम हर एक से जुड़ा है जिससे इतना तो साफ होता है कि नयति के मालिकों में शुमार इस महिला की न तो नीयत ठीक है और न नेकी से इसका दूर-दूर तक कोई संबंध है।
यही कारण है कि आने वाला समय नीरा राडिया के लिए और मुश्किल भरा हो सकता है, साथ ही नीरा राडिया के नयति की नीयति भी यही समय तय करने वाला है।
-सुरेन्द्र चतुर्वेदी
राडिया की नीयत में खोट का ही नतीजा है ‘नयति’ का इस “नियति” को प्राप्त होना, 5 वर्ष पहले जता दी थी आशंका
28 फरवरी 2016 को देश के प्रमुख उद्योगपति रतन टाटा के हाथों जब “2G स्पैक्ट्रम” घोटाला फेम और “पनामा लीक्स” चर्चित महिला लाइजनर “नीरा राडिया” ने योगीराज भगवान श्रीकृष्ण की नगरी में ‘नयति’ के नाम से सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का उद्घाटन कराया था तो ऐसा लगा जैसे ईश्वर ने ब्रजवासियों की बात सुन ली क्योंकि मथुरा जनपद तब स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में काफी पिछड़ा हुआ था।
लेकिन कॉरपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया द्वारा समाजसेवा की आड़ लेकर कृष्ण नगरी में खोला गया ‘नयति’ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल बहुत जल्द नित-नए विवादों का केंद्र बन गया लिहाजा Legend News ने 23 जून 2016 को “नीरा राडिया के नयति की नीयत में ही खोट लगता है” शीर्षक से एक खबर प्रकाशित की।
इस खबर से बौखलाकर ‘नयति’ की ओर से उसकी लॉ फर्म ARCINDO Law Advotactes & Solicitors द्वारा लीगल नोटिस भी भेजा गया किंतु Legend News की और से जब इस लॉ फर्म को तथ्यों सहित जवाब दिया गया और किसी भी सूरत में कोई खंडन न छापने तथा केस लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार रहने को कहा गया तो ‘नयति’ के प्रबंधतंत्र को सांप सूंघ गया।
आखिर ‘नयति’ ने भविष्य में शिकायतें ठीक करने का आश्वासन देकर जैसे-तैसे अपनी साख बचाने में ही भलाई समझी।
बहरहाल, 5 साल पहले अपनी खबर के माध्यम से “लीजेण्ड न्यूज़” द्वारा लिखी गईं वो लाइनें अब सच साबित होती दिखाई दे रही हैं जिनमें आशंका जताई गई थी कि यही हाल रहा तो ‘नयति’ बहुत जल्द बंद हो जाएगा क्योंकि नयति के मालिकानों का मथुरा जैसे विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थान पर अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त हॉस्पिटल खोलने का मकसद चाहे जो भी हो, कम से कम जनसेवा तो नहीं लगता।
23 जून 2016 को लिखी गई इस पूरी खबर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं-
https://bhrashtindia.blogspot.com/2016/06/blog-post_23.html
अब नई खबर यह है कि “नयति हॉस्पिटल” में फिलहाल ताला डाल दिया गया है क्योंकि उस पर एक ओर जहां बिजली विभाग का 01 करोड़ 33 लाख रुपयों का भारी-भरकम बिल बकाया है वहीं दूसरी ओर स्टाफ को भी कई माह से वेतन नहीं दिया गया है। हालांकि हॉस्पिटल में ताला लगने का कारण ‘नियति’ का प्रबंधतंत्र कुछ और बता रहा है। उसका कहना है कि हॉस्पिटल में मरम्मत आदि का काम कराए जाने की वजह से उसे 3 महीने के लिए बंद किया गया है किंतु इस कथन में सच्चाई कम प्रतीत होती है क्योंकि नयति द्वारा बताए गए 3 माह के समय में से पूरे दो माह का समय बीत चुका है और हॉस्पिटल में ऐसी कोई गतिविधि नजर नहीं आ रही जिससे उसके दोबारा खुलने की संभावना महसूस होती हो।
जो भी हो, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि ‘नियति’ आज जिस दशा को प्राप्त है उसके पीछे तमाम लोगों की बद्दुआओं के साथ-साथ मालिकानों की ‘बदनीयती’ एक बड़ा कारण है अन्यथा ऐसा न होता कि अनेक शिकायतों के बावजूद ‘नयति’ के प्रबंधतंत्र पर किसी पीड़ित के आंसुओं का कोई प्रभाव न पड़ता और वो वर्षों तक मनमानी करते हुए हॉस्पिटल को सिर्फ और सिर्फ पैसा कमाने का जरिया बनाए रखते।
-सुरेन्द्र चतुर्वेदी
शनिवार, 7 नवंबर 2020
नीरा राडिया के नयति हेल्थकेयर पर 300 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का मामला दर्ज
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मामला दर्ज कर दो फर्मों के खिलाफ जांच शुरू की है, जिसमें नयति हेल्थकेयर (Nayati Healthcare) भी शामिल है, जिसकी चेयरपर्सन और प्रमोटर नीरा राडिया हैं। गुरुग्राम की हेल्थ फर्म के साथ-साथ ईओडब्ल्यू की एफआइआर में दर्ज एक अन्य कंपनी नारायणी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड पर 300 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है जो एक ऋण के माध्यम से प्राप्त की गई थी। नयति और नारायणी पर गुरुग्राम और विमहंस हॉस्पिटल दिल्ली के प्रिमामेद हॉस्पिटल परियोजनाओं (Primamed Hospital Projects) में 2018-2020 के बीच 312.50 करोड़ रुपये की राशि के गबन और जालसाजी का आरोप लगाया गया है।दिल्ली के ऑर्थोपेडिक सर्जन राजीव के शर्मा ने यह शिकायत दर्ज की है। सूत्रों के अनुसार फर्मों ने विभिन्न प्रसिद्ध ठेकेदारों के नाम पर फर्जी खाते खोलकर और इन खातों में सीधे लोन मनी ट्रांसफर करके लोन से करोड़ों का गबन किया। राजीव शर्मा ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि 400 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण और इक्विटी मनी को बेशर्मी से निकाल दिया गया है जबकि गुरुग्राम अस्पताल के बिल्डिंग की हालत पहले से भी बदतर हो गई है।
इस संबंध में अन्य जांच की प्रक्रिया अभी है जारी
नयति हेल्थकेयर ने बाद में इस मामले को लेकर एक बयान जारी किया। डॉ. शर्मा बोर्ड के सदस्य होने के नाते कंपनी के सभी कार्यों के लिए एक पार्टी और हस्ताक्षरकर्ता थे। मतभेदों के कारण जो गतिविधियों के एक फोरेंसिक ऑडिट के संचालन के लिए पीछा किया गया था। डॉ. राजीव शर्मा के तहत पिछला प्रबंधन, गलतबयानी और दुर्भावना के कुछ मामले सामने आए। इन मुद्दों को डॉ. शर्मा के साथ उठाया गया था और विधिवत रूप से पुलिस को एक शिकायत (SIC) के रूप में सूचित किया गया था। इस संबंध में अन्य जांच की प्रक्रिया अभी जारी है।
-एजेंसियां
मंगलवार, 26 मई 2020
डूबने के कगार पर ‘नयति’, वेंटिलेटर तक पहुंचा ‘नीरा राडिया’ का मल्टी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल
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| 28 फरवरी 2016 को नयति हॉस्पिटल का उद्घाटन करते उद्योगपति रतन टाटा, साथ हैं चेयरपरसन नीरा राडिया |
बहुत दिन नहीं हुए जब देश के प्रमुख उद्योगपति रतन टाटा ने ”2G स्पैक्ट्रम” घोटाला फेम और ”पनामा लीक्स” चर्चित महिला लाइजनर ”नीरा राडिया” के हॉस्पिटल ‘नयति’ का मथुरा में भव्य उद्घाटन किया था।राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर- 2 के किनारे बने इस हॉस्पिटल के प्रमोटर्स में चार्टर्ड एकाउंटेंट दीनानाथ चतुर्वेदी के पुत्र राजेश चतुर्वेदी का नाम भी शामिल है। दीनानाथ चतुर्वेदी मूल रूप से मथुरा के ही निवासी हैं।
अब बताते हैं कि खोटी नीयत के चलते ‘नयति’ ही अपनी ‘नियति’ के करीब है और वेंटिलेटर पर पहुंच चुका है।
रविवार 28 फरवरी 2016 को नयति के उद्घाटन समारोह में पद्म विभूषण रतन टाटा ने कहा था कि इसके पीछे व्यक्तिगत बलिदान के साथ समाज सेवा का एक जुनून है और सच्ची चाहत है।
नयति हेल्थकेयर की चेयरपरसन नीरा राडिया ने भी कहा था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को उनके क्षेत्र में ही विश्वस्तरीय स्वास्थ्य देखभाल की सुविधा प्रदान करने का अवसर हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
हमारा उद्देश्य छोटे शहरों में मरीजों को उपचार की सुविधा प्रदान कर आम लोगों पर बीमारी की वजह से पड़ने वाले शारीरिक, भावनात्मक और आर्थिक बोझ को कम करना है।
नयति द्वारा विधिवत् काम शुरू कर देने के बाद पता लगा कि मथुरा के लोगों की सेवा करने तथा उन्हें अत्याधुनिक सुविधाएं मुहैया कराने के प्रचार सहित खोले गए इस हॉस्पिटल में चिकित्सा काफी महंगी है और जनसामान्य के लिए तो वहां उपचार कराना संभव ही नहीं है।
देखते-देखते नयति से ऐसी खबरें भी बाहर आने लगीं कि वहां लोगों से पैसे वसूलने के लिए वो सारे हथकंडे अपनाए जा रहे हैं, जिनके लिए दूसरे मशहूर अस्पताल पहले से बदनाम हैं।
मसलन मरीज की नाजुक स्थिति का हवाला देकर मोटी रकम जमा करा लेना, विशेषज्ञ चिकित्सकों की आड़ में मनमानी फीस वसूलना, पैसा जमा करने में जरा सी भी देरी हो जाने पर मरीज व उसके परिजनों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करना तथा कैजुअलिटी हो जाने पर पूरा बिल वसूल किए बिना ‘लाश’ तक पर कब्जा कर लेना आदि।
मात्र चार साल में नयति और उसकी खोटी नीयत एक-दूसरे के पूरक बन गए, नतीजतन आए दिन झगड़े होना और बात पुलिस-प्रशासन तक पहुंचना आम बात हो गई।
हालांकि ऊंची पहुंच और मथुरा से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक शासन एवं प्रशासन में गहरी पैठ होने के कारण पीड़ितों को हर बार मुंह की खानी पड़ी।
नीरा राडिया के हाईप्रोफाइल स्टेटस का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रमुख मीडिया संस्थान भी उसके या नयति के खिलाफ एक शब्द लिखने अथवा बोलने की हिमाकत नहीं करते।
मौके-बेमौके प्रमुख अखबारों में नयति के छपने वाले बड़े-बड़े विज्ञापन और उसकी प्रशंसा में लिखे जाने वाले समाचार यह समझाने के लिए काफी हैं कि कोई ऐरा-गैरा तो क्या, विशिष्ट कहलाने वाले लोग भी नयति की शान में गुस्ताखी करने वाला समाचार नहीं छपवा सकते।
बेशक कुछ मीडियाकर्मी समय-समय पर नयति के कारनामों को उजाकर करने की हिम्मत दिखाते रहे हैं किंतु उन्हें उसकी कीमत कभी लीगल नोटिस के जरिए तो कभी ब्लैकमेलर प्रचारित करके चुकानी पड़ी है।
मीडिया को साधने वाले नयति के जनसंपर्क विभाग की बात करें तो हर विवाद में हॉस्पिटल प्रशासन ही सही होता है और शिकायतकर्ता तथा पीड़ितों के परिजन गलत। शायद ही कभी किसी मामले में नयति के प्रबंधतंत्र ने ये स्वीकार किया हो कि चूक उनसे भी हो सकती है।
बहरहाल, हाल ही में नयति के अमानवीय आचरण से जुड़े ऐसे दो मामले फिर सामने आए हैं जिनमें मरीजों को जान गंवानी पड़ी है किंतु नयति ने इन दोनों मामलों में भी खुद को सही ठहराते हुए सारा दोष पीड़ित परिजनों के सिर थोप दिया है।
हॉस्पिटल से जुड़े अत्यंत भरोसमंद सूत्रों का कहना है कि सेवा की आड़ में मनमानी करने के नयति के रवैए की एक बड़ी वजह उसका जहाज डूबने की नौबत आना है।
सूत्रों के अनुसार नयति अब अपना ही बोझ ढो पाने में खुद को असहाय महसूस कर रहा है। कई बड़े डॉक्टर पिछले कुछ समय के अंदर नयति छोड़कर जा चुके हैं। स्टाफ को समय से वेतन न मिलना तथा तय वेतन में से कटौती करना आम बात हो गई है।
पांच साल से भी कम समय में ‘नयति’ की यह ‘नियति’ बताती है कि नीरा राडिया और उसके लोग चाहे कैसे भी दावे करें परंतु आम आदमी उसकी नीयत पहचान चुका है। यही कारण है कि किसी मरीज के ठीक होने का समाचार जहां नयति के प्रशासन को प्रेस विज्ञप्ति भेजकर छपवाना पड़ता है वहीं विवाद होने पर साम, दाम दण्ड भेद की नीति अपनाकर समाचारों को छपने से रोकना पड़ जाता है।
आगे आने वाले समय में नयति किस गति को प्राप्त होगा, इस बात को यदि ‘नियति’ पर छोड़ दिया जाए तो जरूरी है कि उसकी शुरूआत से लेकर अब तक उसके हर क्रिया-कलाप को जांच के दायरे में लाया जाए और पता किया जाए कि आखिर क्यों अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित कृष्ण की नगरी के इस हॉस्पिटल में जितने लोगों को जीवनदान नहीं मिला, उससे अधिक लोगों को अकाल मौत प्राप्त हुई?
नयति की स्थापना से लेकर अब तक वहां हुई मौतों का आंकड़ां यदि देखा जाए तो बहुत सी बातें खुद-ब-खुद साफ हो जाती हैं।
इस सबके बावजूद चूंकि कानूनी पहलुओं के लिए सबूतों की दरकार होती है इसलिए जरूरी है कि नयति के कारनामों की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराने की पुरजोर मांग ब्रजवासियों के स्तर से की जाए अन्यथा यदि नीरा राडिया का जहाज डूब भी गया तो चार वर्ष से अधिक समय में किए गए उसके कृत्यों का हिसाब अधूरा रह जाएगा।
ब्रजवासियों को चाहिए कि बाकायदा अभियान चलाकर नयति की नीयत सार्वजनिक करें और विभिन्न कारणों से आवाज उठाने में असमर्थ रहे लोगों को न्याय दिलाएं ताकि फिर कोई नीरा राडिया कृष्ण की नगरी के नागरिकों की भावनाओं का इतनी बेहरहमी के साथ दोहन न कर सके।
-सुरेन्द्र चतुर्वेदी
शुक्रवार, 10 जनवरी 2020
नीरा राडिया के ‘नयति’ ने ‘लीजेंड न्यूज़’ को दिया था लीगल नोटिस, जब करारा जवाब मिला तो चुप्पी साध ली
वैसे तो कॉरपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया द्वारा समाजसेवा की आड़ लेकर कृष्ण नगरी मथुरा में खोला गया ‘नयति’ सुपर स्पेशलिटी नामक हॉस्पिटल अपने शुरूआती दिनों से ही विवादित रहा है, किंतु इन दिनों उसकी चर्चा उस घटना के कारण हो रही है जिसका सीधा संबंध सत्ताधारी दल भाजपा के मथुरा महानगर अध्यक्ष विनोद अग्रवाल से है।
नीरा राडिया और राजेश चतुर्वेदी के ‘नयति’ हॉस्पिटल में विनोद अग्रवाल के साथ हुई इस घटना के लिए कौन जिम्मेदार है, इसका नतीजा निकालने से पहले उन परिस्थितियों पर गौर किया जाना जरूरी हो जाता है जिन परिस्थितियों में कोई भी व्यक्ति हॉस्पिटल जाता है अथवा उसे जाना पड़ता है।
इसके अलावा किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए यह जानना भी अति आवश्यक है कि कारण जो हों परंतु ‘नयति’ लगातार विवादों में क्यों रहता है ?
दरअसल, इसके पीछे हॉस्पिटल संचालकों की हर किसी को दबाब में रखने की मानसिकता है। फिर चाहे वह किसी मरीज के परिजन हों या तीमारदार, अथवा उन्हें देखने के लिए हॉस्पिटल पहुंचने वाले नाते-रिश्तेदार, दोस्त और परिचित।
‘नयति’ के संचालकों की दबाव बनाकर अपने पक्ष में करने की नीति का ही हिस्सा है मीडिया से जुड़े लोगों को भी साम-दाम-दंड और भेद के जरिए अपने अनुकूल लिखने को मजबूर करना।
नयति ने यही हथकंडा वर्ष 2018 में ‘लीजेंड न्यूज़’ पर तब अपनाया जब Legendnews.in द्वारा 23 जून 2016 को ”नीरा राडिया के ”नयति” की ”नीयत” में ही खोट लगता है” शीर्षक से एक खबर प्रकाशित की गई।
पूरी खबर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कीजिए-
https://bhrashtindia.blogspot.com/2016/06/blog-post_23.html
Legendnews.in पर यह खबर प्रकाशित होने के पूरे दो वर्ष बाद यानी 01 जुलाई 2018 को नीरा राडिया के ‘नयति’ की ओर से उसकी लॉ फर्म ARCINDO Law Advotactes & Solicitors द्वारा यह लीगल नोटिस भेजा गया-
मथुरा में नीरा राडिया के प्रभाव का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि तमाम स्थानीय अधिवक्ता ”नयति” के इस लीगल नोटिस का जवाब तक देने को तैयार नहीं थे।
आखिर युवा और तेज-तर्रार वकील प्रशांत सरीन ने Legendnews.in में प्रकाशित समाचार को बारीकी से पढ़कर जब ARCINDO Law Advotactes & Solicitors काउंटर जवाब दिया तो जैसे सांप सूंघ गया, क्योंकि ‘नयति’ का नोटिस न सिर्फ तथ्यों से परे था बल्कि इस मंशा के साथ भेजा गया था कि लीजेंड न्यूज़ उसका खंडन करके ‘नयति’ की प्रशंसा में समाचार प्रकाशित करने लगे जैसा कि कई तथाकथित बड़े अखबार कर भी रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम का एक रोचक पहलू यह रहा कि लीजेंड न्यूज़ की ओर से एडवोकेट प्रशांत सरीन द्वारा ‘नयति’ की लॉ फर्म को नोटिस का जवाब देते ही नीरा राडिया के अनेक शुभचिंतक संपर्क साधने में जुट गए जिससे मामला ”रफा-दफा” किया जा सके।
आखिर किसी तरह बात बनती न देख भविष्य में शिकायतें ठीक करने का आश्वासन देकर काम चला लिया।
बहरहाल, कलेंडर में तारीखें बदलती रहीं किंतु ‘नयति’ की ‘नीयत’ में बदलाव होता दिखाई नहीं दे रहा। आज भी कोई महीना तो क्या, कोई सप्ताह भी शायद ही ऐसा बीतता हो जब ‘नयति’ से जुड़े विवाद सामने न आते हों। ये विवाद बदसलूकी से लेकर लंबा-चौड़ा बिल बनाने सहित अन्य कई तरह के होते है।आश्चर्य की बात यह है कि विवाद किसी किस्म का हो और किसी स्तर से हो लेकिन गलती हमेशा दूसरे पक्ष की होती है। ‘नयति’ हमेशा उसी तरह पाक-साफ होता है जिस तरह उसकी संचालक नीरा राडिया ‘पाक-साफ’ हैं।
-Legend News
http://legendnews.in/nayati-of-neera-radia-gave-a-legal-notice-to-legend-news-when-the-reply-was-given-it-was-silent/
नीरा राडिया और राजेश चतुर्वेदी के ‘नयति’ हॉस्पिटल में विनोद अग्रवाल के साथ हुई इस घटना के लिए कौन जिम्मेदार है, इसका नतीजा निकालने से पहले उन परिस्थितियों पर गौर किया जाना जरूरी हो जाता है जिन परिस्थितियों में कोई भी व्यक्ति हॉस्पिटल जाता है अथवा उसे जाना पड़ता है।
इसके अलावा किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए यह जानना भी अति आवश्यक है कि कारण जो हों परंतु ‘नयति’ लगातार विवादों में क्यों रहता है ?
दरअसल, इसके पीछे हॉस्पिटल संचालकों की हर किसी को दबाब में रखने की मानसिकता है। फिर चाहे वह किसी मरीज के परिजन हों या तीमारदार, अथवा उन्हें देखने के लिए हॉस्पिटल पहुंचने वाले नाते-रिश्तेदार, दोस्त और परिचित।
‘नयति’ के संचालकों की दबाव बनाकर अपने पक्ष में करने की नीति का ही हिस्सा है मीडिया से जुड़े लोगों को भी साम-दाम-दंड और भेद के जरिए अपने अनुकूल लिखने को मजबूर करना।
नयति ने यही हथकंडा वर्ष 2018 में ‘लीजेंड न्यूज़’ पर तब अपनाया जब Legendnews.in द्वारा 23 जून 2016 को ”नीरा राडिया के ”नयति” की ”नीयत” में ही खोट लगता है” शीर्षक से एक खबर प्रकाशित की गई।
पूरी खबर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कीजिए-
https://bhrashtindia.blogspot.com/2016/06/blog-post_23.html
Legendnews.in पर यह खबर प्रकाशित होने के पूरे दो वर्ष बाद यानी 01 जुलाई 2018 को नीरा राडिया के ‘नयति’ की ओर से उसकी लॉ फर्म ARCINDO Law Advotactes & Solicitors द्वारा यह लीगल नोटिस भेजा गया-
मथुरा में नीरा राडिया के प्रभाव का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि तमाम स्थानीय अधिवक्ता ”नयति” के इस लीगल नोटिस का जवाब तक देने को तैयार नहीं थे।
आखिर युवा और तेज-तर्रार वकील प्रशांत सरीन ने Legendnews.in में प्रकाशित समाचार को बारीकी से पढ़कर जब ARCINDO Law Advotactes & Solicitors काउंटर जवाब दिया तो जैसे सांप सूंघ गया, क्योंकि ‘नयति’ का नोटिस न सिर्फ तथ्यों से परे था बल्कि इस मंशा के साथ भेजा गया था कि लीजेंड न्यूज़ उसका खंडन करके ‘नयति’ की प्रशंसा में समाचार प्रकाशित करने लगे जैसा कि कई तथाकथित बड़े अखबार कर भी रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम का एक रोचक पहलू यह रहा कि लीजेंड न्यूज़ की ओर से एडवोकेट प्रशांत सरीन द्वारा ‘नयति’ की लॉ फर्म को नोटिस का जवाब देते ही नीरा राडिया के अनेक शुभचिंतक संपर्क साधने में जुट गए जिससे मामला ”रफा-दफा” किया जा सके।
आखिर किसी तरह बात बनती न देख भविष्य में शिकायतें ठीक करने का आश्वासन देकर काम चला लिया।
बहरहाल, कलेंडर में तारीखें बदलती रहीं किंतु ‘नयति’ की ‘नीयत’ में बदलाव होता दिखाई नहीं दे रहा। आज भी कोई महीना तो क्या, कोई सप्ताह भी शायद ही ऐसा बीतता हो जब ‘नयति’ से जुड़े विवाद सामने न आते हों। ये विवाद बदसलूकी से लेकर लंबा-चौड़ा बिल बनाने सहित अन्य कई तरह के होते है।आश्चर्य की बात यह है कि विवाद किसी किस्म का हो और किसी स्तर से हो लेकिन गलती हमेशा दूसरे पक्ष की होती है। ‘नयति’ हमेशा उसी तरह पाक-साफ होता है जिस तरह उसकी संचालक नीरा राडिया ‘पाक-साफ’ हैं।
-Legend News
http://legendnews.in/nayati-of-neera-radia-gave-a-legal-notice-to-legend-news-when-the-reply-was-given-it-was-silent/
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