religious leader लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
religious leader लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 24 जून 2013

तमाशा देखने वालो, तमाशा खुद न बन जाना

ऐसा लगता है जैसे उत्‍तराखंड के तीर्थयात्री, सैलानी एवं पर्यटक ही नहीं, पूरा देश ही अनाथ हो चुका है। उत्‍तराखंड की विभीषिका ने तो उसे केवल रेखांकित किया है।
(लीजेण्‍ड न्‍यूज़ विशेष)
इस देश में साधु-संतों की जमात लाखों में है, भागवताचार्य भी हजारों की संख्‍या में हैं, रामायणियों की तादाद कोई कम नहीं।
टेलीविजन पर दिखाई देने वाले कुल करीब दो सैंकड़ा चैनल्‍स में से एक चौथाई पर ऐसे ही धार्मिक तत्‍वों का आधिपत्‍य देखा जा सकता है, जो चौबीसों घण्‍टे धर्म का मर्म समझा कर या यूं कहें कि उसकी दुहाई देकर अपनी दुकान बेहतरीन तरीके से चला रहे हैं।

इसी अनुपात में मठाधीश, उनके मठ, मंदिर और आश्रमों की भरमार है।
बात-बात पर फतवा जारी करने वाले मुल्‍ला तथा मौलवियों से लेकर प्रतिष्‍ठित मस्‍जिदों की खासी संख्‍या है और ईसाई मिशनरीज भी हर गली व कूचे में मिल जायेंगे।
सामाजिक व धार्मिक संस्‍थाएं इतनी हैं, जितने कि सरकारी शिक्षण संस्‍थान नहीं होंगे। और ये सब भी अपनी-अपनी कमाई के लिए टेलीविजन पर पूरी तरह सक्रिय हैं।
इस सब के बावजूद उत्‍तराखंड में आई भयंकर आपदा के शिकार लोगों की मदद को कोई सामने नहीं आया।
बेशक ऐसी आपदाओं से निपटने की जिम्‍मेदारी सरकारों की है और उन्‍हें इसके माकूल इंतजाम करने चाहिए लेकिन मानवता के नाते तथा धार्मिक एवं सामाजिक कर्तव्‍यों के चलते क्‍या इनकी कोई जिम्‍मेदारी नहीं बनती।
यही हाल उन नामचीन उद्योगपतियों का है जो आए दिन विश्‍व के सर्वाधिक पैसे वालों की सूची में नाम दर्ज कराकर देश को धन्‍य करते हैं।

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...