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बुधवार, 2 जुलाई 2014

IPL की डील का खुलासा करने वाली थी सुनंदा इसलिए मार दी

नई दिल्ली। 
भाजपा के वरिष्ठ नेता और मशहूर वकील सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया है कि सुनंदा पुष्कर ने कहा था कि वह आईपीएल सौदों का खुलासा करेगी। सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा का नाम भी सामने आया था। सुनंदा पुष्कर की हत्या हुई थी। सुप्रीम कोर्ट को इसकी जांच करानी चाहिए। एक समाचार चैनल से बातचीत में स्वामी ने कहा कि सुनंदा पुष्कर की मौत के मामले की जांच को लेकर मैं सुप्रीम कोर्ट में जुलाई के अंत तक याचिका दाखिल करूंगा। कांग्रेस के सहयोगी दल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने भी सुनंदा पुष्कर की संदिग्ध मौत के मामले की विस्तृत जांच कराए जाने की मांग की है। एनसीपी नेता और वकील माजिद मेमन ने कहा कि सुनंदा पुष्कर की मौत के मामले की जांच होनी चाहिए और शशि थरूर को इसमें सहयोग करना चाहिए।
एम्स के फोरेंसिक विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता ने आरोप लगाया है कि उन पर गलत पोस्टमार्टम देने के लिए दबाव बनाया गया था। उन्होंने कहा कि पूर्व स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद और शशि थरूर के दबाव में पोस्टमार्टम रिपोर्ट बदली गई थी। गुप्ता के आरोपों पर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने एम्स के निदेशक से रिपोर्ट मांगी है।
सुधीर गुप्ता ने स्वास्थ्य मंत्रालय और मुख्त सतर्कता आयुक्त को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि वरिष्ठ अधिकारियों ने सुनंदा पुष्कर की संदिग्ध मौत को प्राकृतिक मौत बताने के लिए दबाव बनाया था। सुधीर गुप्ता के नेतृत्व वाली फोरेंसिक टीम ने ही सुनंदा पुष्कर का पोस्टमार्टम किया था। गुप्ता ने कैट में हलफनामा दाखिल किया है। इसमें गुप्ता ने दावा किया कि गुलाम नबी आजाद ने उन पर गैर पेशेवर तरीके से काम करने के लिए दबाव डाला ताकि मामले को रफा दफा किया जाए।
गुप्ता ने दावा किया है कि जब वह दबाव के आगे नहीं झुके और रिपोर्ट में यह बताया कि सुनंदा पुष्कर की मौत जहर के कारण हुई थी तो उन्हें निशाना बनाया गया। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि गुप्ता ने अपने प्रमोशन को लेकर पत्र लिखा था लेकिन मीडिया ने यह रिपोर्ट किया कि पत्र में कुछ विशेष आरोप हैं। मैंने एम्स के डायरेक्टर को रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है। गौरतलब है कि 18 जनवरी को दिल्ली के पांच सितारा होटल के एक कमरे में सुनंदा पुष्कर मृत पाई गई थी।
-एजेंसी

गुरुवार, 1 मई 2014

13 कं. पर किसी का रिटर्न तक दाखिल नहीं कर रहे वाड्रा

नई दिल्‍ली। 
विवादित जमीन सौदों के लेकर प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा पहले से ही घिरे हुए हैं। अब पता चला है कि मार्च 2011 से उन्होंने अपनी 13 कंपनियों का सालाना रिटर्न्स भी कॉर्पोरेट अफेयर्स मंत्रालय में दाखिल नहीं किए हैं जबकि ऐसा करना अनिवार्य हैं। संभावना जताई जा रही है कि रॉबर्ट वाड्रा जानकारी ने देकर अपनी कंपनियों के कुछ और डील्स के बारे में जानकारी मीडिया से छिपाना चाहते हैं।
गौरतलब है कि 2011 में ही वाड्रा के बिजनेस मॉडल और जमीन सौदों को लेकर पहली बार सवाल उठे थे। उस साल डीएलएफ से लोन लेकर हरियाणा में वाड्रा के जमीन खरीदने और राजस्थान में हजारों एकड़ जमीन हासिल करने को लेकर विवाद हुआ था। हालांकि, इन दोनों सौदों का जिक्र उन्होंने मार्च 2011 तक मंत्रालय को भेजे अपने फाइनैंशल स्टेटमेंट्स में किया है। इसके बाद उन्होंने एक बार भी मंत्रालय को ब्योरा नहीं भेजा है।
अंग्रेजी अखबार डीएनए ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि उसने कॉर्पोरेट अफेयर्स मंत्रालय में मौजूद 13 कंपनियों के दस्तावेजों की जांच की है और पाया कि उन्होंने पिछले दो सालों से सात कंपनियों के फाइनैंशल स्टेटमेंट्स नहीं जमा किए हैं। बाकी छह कंपनियां वाड्रा ने जुलाई से अगस्त 2012 के दौरान ही बनाईं लेकिन इनकी डील्स की जानकारियां भी मंत्रालय को नहीं दी गईं। सूत्रों का कहना है कि सभी छह कंपनियां ग्रामीण इलाकों में जमीन खरीदने के लिए बनाई गई थीं।
खास बात यह है कि पिछले दिनों अपने पति का मजबूती से बचाव कर चुकीं प्रियंका गांधी ने भी एक कंपनी को शुरू करने में उनको सहयोग दिया था। नवंबर 2007 में बनी ब्लू ब्रीज ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड में प्रियंका डायरेक्टर बनीं लेकिन 8 महीने में ही उन्होंने यह पद छोड़ा दिया। बाद में रॉबर्ट वाड्रा की मां मॉरीन वाड्रा डायरेक्टर बनाई गई थीं। ब्लू ब्रीज रिटर्न्स दाखिल कर रही है।
कॉर्पोरेट अफेयर्स मंत्रालय के नियमों के मुताबिक, वाड्रा लगातार दो साल से डिफॉल्ट कर रहे हैं और अगर वह तीसरे साल भी रिटर्न्स दाखिल नहीं करते हैं, तो मंत्रालय उन सभी कंपनियों के खिलाफ कार्यवाही कर सकता है जिसमें वह डायरेक्टर हैं। कंपनियों पर न्यूनतम 50 हजार रुपये या फाइनैंशल स्टेटमेंट दाखिल किए जाने तक प्रतिदिन 5 हजार रुपये की दर से जुर्माना लगाया जा सकता है। मंत्रालय के सूत्र ने बताया कि न्यूनतम जुर्माना तब लगाया जाता है जब कंपनी के पास रिटर्न न दाखिल करने की तर्कसंगत वजह हो।
मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी का कहना है, 'शायद मीडिया में कंपनियों के बिजनेस मॉडल और लैंड डील्स के बारे में और जानकारी आने से बचने के लिए वाड्रा ने फाइनैंशल स्टेटमेंट्स दाखिल करना बंद कर दिया है। उन्हें लगा होगा कि वह भारी जुर्माना देना अफोर्ड कर सकते हैं, लेकिन अपने बिजनेस प्लान्स की जानकारी लीक नहीं होने देना चाहते।'
-एजेंसी

शनिवार, 19 अप्रैल 2014

वॉल स्ट्रीट तक पहुंचने के लिए वाड्रा को दी भाजपा ने बधाई

नई दिल्ली। 
सोनिया गांधी के दामाद और प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा पर बीजेपी का हमला आज भी जारी है. आज बीजेपी नेताओं अरुण जेटली और रविशंकर प्रसाद ने वाड्रा के कारोबार को वाड्रा मॉडल का नाम दे दिया. आपको बता दें कि शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में द वॉल स्ट्रीट ने खुलासा किया था कि दसवीं पास कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद और प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा के पास 2012 में सवा तीन सौ करोड़ की जमीन जायदाद थी.
अरुण जेटली ने अपने ब्लॉग में लिखा है- राबर्ट वाड्रा को बधाई हो. द वॉल स्ट्रीट जनरल तक पहुंच गए. बिजनेस एनालिस्ट को वाड्रा बिजनेस मॉडल पर रिसर्च पेपर तैयार करना चाहिए. बिना पूंजी लगाए बिजनेस शुरू किया. राजनीतिक पूंजी से लोन और एडवांस आए. लोन से बाजार मूल्य से कम दाम में प्रापर्टी खरीदी.
ब्लॉग में आगे यूपीए सरकार पर निशाना साधते हुए जेटली ने लिखा है- सरकार के संरक्षण में बहुत सारे लोग ऐसे सौदे करना चाहेंगे. इससे गंभीर सवाल खड़े होंगे. इसलिए तो द वॉल स्ट्रीट ने ये किया.
अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट में ने अनुमान लगाया गया है कि साल 2012 तक रॉबर्ट वाड्रा ने 72 करोड़ रुपये की जमीन बेच कर मुनाफा कमाया था और अब भी करीब 253 करोड़ रुपये की जमीन के रॉबर्ट वाड्रा मालिक हैं. आपको बता दें कि ये सारे आंकड़े 2012 तक के हैं, उसके बाद से रॉबर्ट वाड्रा की कंपनियों के दस्तावेज सरकारी वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं हैं.
साल 1997 में रॉबर्ट वाड्रा की शादी प्रियंका गांधी से हुई थी. साल 2004 में कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए ने सत्ता संभाली थी. उस वक्त तक रॉबर्ट वाड्रा एक छोटा से एक्सपोर्ट का बिजनेस चलाते थे. पर साल 2007 में रॉबर्ट वाड्रा ने रियल एस्टेट के बिजनेस में कदम रखा. करीब एक लाख की पूंजी के साथ शुरू हुआ बिजनेस सात साल में करोड़ों में पहुंच गया है तरक्की की ये कहानी कांग्रेस शासित राज्यों में लिखी गई.
द वॉल स्ट्रीट जनरल ने जिन सौदों का जिक्र किया है उसमें शामिल हैं-
साल 2008- स्काई लाइट ने गुड़गांव में साढ़े तीन एकड़ जमीन खरीदी करीब 7.5 करोड़ में खरीदी और ढाई महीने में लैंड यूज बदल कर डीएलएफ को ये जमीन 58 करोड़ में बेच दी. अखबार ने इस सौदे को लेकर अशोक खेमका के तबादले और दूसरी अनियमितताओं का जिक्र भी किया है.
साल 2008-09- स्काई लाइट हॉस्पिटेलिटी ने 31 करोड़ में दिल्ली में डीएलएफ के एक होटल में 50 फीसदी की हिस्सेदारी खरीदी थी जबकि साल 2012 में इसकी कीमत हो गई 198 करोड़.
साल 2010- जनवरी 2010 में वाड्रा ने 94 एकड़ जमीन 42 लाख में खरीदी. कुछ ही वक्त बाद केंद्र सरकार की तरफ से सोलर पार्क में निवेश करने पर टैक्स रियायत देने का ऐलान किया गया. एक साल में राजस्थान सरकार ने भी ऐसी ही रियायत दी. नतीजा हुआ जमीनें करीब दस गुना महंगी हो गईं.
साल 2009-12- राजस्थान में वाड्रा की कंपनियों ने तीन साल में 2000 एकड़ जमीन खरीदी. जिसमें करीब एक तिहाई 700 एकड़ जमीन बेच कर करीब 16 करोड़ कमा लिए. जो जमीन पर खर्च करने का तीन गुना था. कांग्रेस इस मामले में रॉबर्ट वाड्रा का बचाव करती आ रही थी अब कांग्रेस का कहना है कि अगर कुछ गलत लगता है तो जांच होनी चाहिए.
द वॉल स्ट्रीट रिपोर्टर ने रॉबर्ट के प्रवक्ता से इस बारे में बात की तो उनके प्रवक्ता ने कहा कि ये वाड्रा को बदनाम करने की साजिश है. वाड्रा के प्रवक्ता ने कहा कि राजनीतिक कारणों से बदनाम करने की साजिश चल रही है. वाड्रा के पास जमीन खरीदने और बेचने का अधिकार है. उन्होंने किसी से अनुचित लाभ नहीं लिया. रॉबर्ट वाड्रा ने जो भी किया वो कानून के मुताबिक किया. इससे ज्यादा कुछ नहीं कहना है.
-एजेंसी

बुधवार, 16 अप्रैल 2014

फर्जी ब्रेथ टेस्ट रिपोर्ट बनवाकर उड़ान

डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन ने गांधी परिवार के सदस्यों को लेकर उड़ान भरने वाली कंपनी को पायलटों की फर्जी ब्रेथ टेस्ट रिपोर्ट बनाने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। डीजीसीए ने पाया कि उड़ान भरने से पहले होने वाले पायलट्स के ब्रेथ ऐनलाइजर (BA) टेस्ट की रिपोर्ट फर्जी भरी जा रही थी। जिन लोगों को SPG सुरक्षा मिली होती है, उन्हें लेकर उड़ान भरने से पहले हर बार यह टेस्ट कराना जरूरी होता है। इस टेस्ट के जरिए पता चलता है कि कहीं पायलट ने शराब तो नहीं पी है। इस तरह से देखा जाए तो गांधी परिवार के सदस्यों की जान खतरे में हो सकती थी।
ताजा वाकया सोमवार 14 अप्रैल का है, जब राहुल गांधी ने जीएमआर के लग्जरी फैल्कन 2000-Lx में दिल्ली से भुवनेश्वर के लिए उड़ान भरी थी। लापरवाही बरतने पर रेग्युलेटर ने 3 महीने के लिए जीएमआर एविएशन के 11 पायलट्स के फ्लाइंग लाइसेंस सस्पेंड कर दिए हैं और 6 कैबिन क्रू मेंबर्स को बर्खास्त कर दिया है। जिन पायलट्स ने अक्सर सोनिया और राहुल गांधी को लेकर उड़ान भरी थी, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा गया है कि उनके लाइसेंस क्यों न 5 साल के लिए सस्पेंड कर दिए जाएं।
डीजीसीए ने कंपनी के डॉक्टर के खिलाफ भी एफआईआर करवाई है। डॉक्टर पर आरोप है कि उन्होंने BA टेस्ट्स के फर्जी रेकॉर्ड बनाए जबकि टेस्ट की मशीन ही खराब थी। एक सीनियर डीजीसीए ऑफिसर ने बताया, 'हम दिल्ली मेडिकल काउंसिल को उनका लाइसेंस रद्द करने के लिए लिख रहे हैं।' कर्मशल फ्लाइट्स के लिए कभी-कभार उड़ान से पहले BA टेस्ट कराया जाता है लेकिन जिन लोगों को SPG सुरक्षा मिली होती है, उन्हें लेकर उड़ने से पहले पायलट्स को हर बार टेस्ट करवाना पड़ता है।
अधिकारी ने बताया, 'हमने जीएमआर एविएशन के मार्च 12 से अप्रैल 14 तक के फ्लाइंग रेकॉर्ड्स की जांच की तो पाया कि उड़ान भरने से पहले किए गए मेडिकल जांच में BA टेस्ट फर्जी थे। इस दौरान BA टेस्ट करने वाले मशीन खराब थी।'
डीजीसीए ने यह भी पाया कि कांग्रेस नेता कमल नाथ की कंपनी स्पैन एविएशन और पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के परिवार की कंपनी ऑरबिट एविएशन भी लगातार प्री-फ्लाइट BA टेस्ट नहीं करवा रही है। उनके डॉक्टर भी 3 महीनों के लिए सस्पेंड कर दिए गए हैं।
-एजेंसी

शनिवार, 12 अप्रैल 2014

जीजाजी से अदानी के रिश्‍ते जाहिर, बैकफुट पर आई कांग्रेस

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा एक बार फिरचर्चा में हैं। ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी के साथ नजर आ रहे हैं। ये तस्वीरें तब की हैं, जब रॉबर्ट वाड्रा अडाणी ग्रुप के एयरक्राफ्ट पर सवार होकर अडानी के प्रॉजेक्ट देखने गुजरात के कच्छ गए थे। गौरतलब है कि पिछले दिनों कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बीजेपी के पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी को अडाणी ग्रुप से रिश्तों को लेकर निशाने पर लिया था।
इस तस्वीर के सामने आने के बाद कांग्रेस बैकफुट पर आती दिख रही है। रॉबर्ट वाड्रा और गौतम अडाणी की यह तस्वीर साल 2009 की है। उस वक्त वाड्रा तब गुजरात के मूंदड़ा में अडाणी पोर्ट और अडाणी पावर प्लांट को देखने आए थे। वाड्रा और गौतम अडाणी एकसाथ अडाणी के प्राइवेट एयरक्राफ्ट में ही वहां पहुंचे थे। इससे पहले कांग्रेस भी कई मौकों पर नरेंद्र मोदी पर आरोप लगा चुकी है कि वह अडाणी ग्रुप के प्लेन से यात्रा करते हैं।
पिछले दिनों उदयपुर में हुई रैली में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी नरेंद्र मोदी को घेरते हुए कहा था, 'बीजेपी में आडवाणी बाहर और अदाणी अंदर।' राहुल गांधी ने मोदी और अडाणी ग्रुप की करीबियों का जिक्र करते हुए कहा था कि एक शख्स को गुजरात सरकार ने करोड़ों एकड़ जमीन मुफ्त में दे दी। अब जो तस्वीरें सामने आई है, उसमें रॉबर्ड वाड्रा और गौतम अडाणी एक साथ दिख रहे हैं। एक तस्वीर में दोनों बैठकर कुछ बात कर रहे हैं और दूसरी तस्वीर में वॉक करते दिख रहे हैं।
सबसे पहले अरविंद केजरीवाल ने साल 2012 में नरेंद्र मोदी और अडाणी ग्रुप के रिश्ते पर सवाल उठाए थे। उसके बाद से मोदी को घेरने के लिए वह लगातार इस मुद्दे को उठाते रहे हैं लेकिन पिछले दिनों कांग्रेस ने भी इस बात को लेकर मोदी पर निशाना साधना शुरू किया था मगर इस तस्वीर के सामने आने के बाद वह बैकफुट पर आती नजर आ रही है।
-एजेंसी

गुरुवार, 20 फ़रवरी 2014

दरअसल, कहानी तो अब शुरू हो रही है

( लीजेण्‍ड न्‍यूज़ विशेष)
2014 के लिए दुंदुभि बज चुकी है, शंखनाद होने को है। राजनीति के बयानवीरों ने शब्‍दों के इतने तीक्ष्‍ण विषवाण छोड़ना शुरू कर दिया है जिन्‍हें सुनकर लगता है कि वह सारी जंग अपने मुंह से ही जीत लेंगे। एक-दूसरे को मर्यादा का पाठ पढ़ाने वाले खुद किसी मर्यादा में रहने को तैयार नहीं हैं। वह कब मर्यादा लांघ जाते हैं, इसका शायद उन्‍हें अहसास तक नहीं होता।
नेताओं ने 'राजनीति' से 'नीति' को कब काटकर अलग कर दिया और कब चुनावी प्रक्रिया को केवल 'राज' पाने का हथियार बना डाला, इसका अंदाज आमजन को लगा ही नहीं। वह तो इस भुलावे में रहा कि 'राजनीति' का नीति व नैतिकता से अब भी कोई वास्‍ता जरूर होगा।
बहरहाल, सवा अरब की आबादी वाले इस मुल्‍क की जनता को हमेशा की तरह यह उम्‍मीद है कि 2014 में कुछ नया होगा। कुछ ऐसा होगा जो आशा की किरण जगायेगा और देश की दशा सुधारने में सहायक होगा।
दरअसल, आम आदमी पार्टी के अचानक हुए उदय ने 2014 के लोकसभा चुनावों को खास बना दिया है। बेशक वह अभी अपने शैशवकाल में है और इसलिए उसके भविष्‍य पर टिप्‍पणी करना बेमानी है परंतु एक काम उसने जो किया है वह यह कि गंदगी से पटे पड़े राजनीति के तालाब में जैसे कंकड़ फेंक दिया हो। गंदगी के बीच बचे हुए थोड़े-बहुत पानी में इस कंकड़ से तरंगें उठने लगीं हैं। आमजन के मन में भी कहीं उम्‍मीद की कोई किरण पैदा हुई है कि हो न हो, बदलाव की शुरूआत यहीं से हो जाए। संभव है आज जो चिंगारी पैदा हुई है, कल वही शोला बनकर भारत के आम नागरिक को स्‍वतंत्रता का सच्‍चा अहसास करा पाए।
इस बीच तेलंगाना को लेकर जिस तरह लोकसभा और राज्‍यसभा में माननीयों ने अपने आचरण का प्रदर्शन किया, उससे एक बात पूरी तरह साफ हो गई कि जनता उनके बावत चाहे जो सोचती रहे लेकिन वह किसी तरह सुधरने को तैयार नहीं हैं। तब भी नहीं, जब आमजन यह मानने लगा हो कि माननीय का तमगा प्राप्‍त यह वर्ग ही हकीकत में देश के माथे पर कलंक बन चुका है और इसका इलाज करना अब जरूरी हो गया है।
इधर सुप्रीम कोर्ट ने जैसे ही राजीव गांधी की हत्‍या के दोषियों की फांसी को उम्रकैद की सजा में तब्‍दील किया, वैसे ही तमिलनाडु की मुख्‍यमंत्री जे. जयलिलता ने 2014 के लिए सबसे बड़ा चुनावी हथियार आजमा डाला। जयललिता ने तीसरे मोर्चे को सीढ़ी बनाकर प्रधानमंत्री की कुर्सी पर काबिज होने की अपनी इच्‍छा तो पहले ही जाहिर कर दी है, अब उसके लिए हर प्रकार का हथकंडा अपनाने की मंशा से भी अवगत करा दिया है।
जयललिता की इस नई चुनावी बिसात पर कांग्रेस का आगबबूला होना स्‍वाभाविक था और इसीलिए खुद राहुल गांधी तक ने कह डाला कि अगर देश के पूर्व प्रधानमंत्री को न्‍याय नहीं मिल सकता तो आम आदमी न्‍याय की उम्‍मीद कैसे कर सकता है।
राहुल गांधी का दुख तो समझ में आता है लेकिन यह बात उन्‍हें भी समझनी होगी कि जयललिता जो कुछ कर रही हैं, यह उसी घिनौने राजनीतिक खेल का हिस्‍सा है जिसकी शुरूआत कांग्रेस ने खुद की थी।
कांग्रेस का हर निर्णय कुछ इसी तरह की घिनौनी राजनीति के इर्द-गिर्द रहता है। याद कीजिए प्रियंका और सोनिया का नलिनी को लेकर उठाया गया कदम जिससे साफ होता है कि वह भी राजीव के सभी हत्‍यारों को फांसी से बचाना चाहती थीं।
अगर वह वाकई यही चाहती थीं तो आज जयललिता के निर्णय पर इतनी हायतौबा किसलिए। क्‍या इसलिए कि राजीव के हत्‍यारों को माफी दिलवाकर जो श्रेय सोनिया एंड कंपनी खुद लेना चाहती थी, उस पर जयललिता ने एक झटके में न सिर्फ पानी फेर दिया बल्‍कि चुनावी गणित फिट करके उसका पूरा लाभ उठाने की भी रणनीति बना डाली।
अब जयललिता के दोनों हाथ में लड्डू हैं। केन्‍द्र यदि राजीव के हत्‍यारों को रिहा करने की इजाजत देता है तो उसका चुनावी लाभ अम्‍मा को इसलिए मिलेगा कि उसकी पहल उन्‍होंने की और यदि नहीं देता है तो भी उन्‍हें इसलिए लाभ मिलेगा कि उन्‍होंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की। इसके ठीक उलट कांग्रेस दोनों स्‍थितियों में खाली हाथ रहेगी और यही माना जायेगा कि उसने जो कुछ किया, सिर्फ मजबूरी में किया।
कांग्रेस के पास इस बात का भी कोई जवाब नहीं है कि यदि वह राजीव के हत्‍यारों को माफी देने के पक्ष में नहीं थी तो दस सालों से क्‍या कर रही थी। केंद्र में अपनी सरकार के होते क्‍यों नहीं वह राष्‍ट्रपति से उस पर कोई फैसला करा पाई। दया याचिकाओं पर निर्णय लेने के राष्‍ट्रपति के अधिकार को किसी समय-सीमा में बांधने की बात यदि फिलहाल छोड़ भी दी जाए तो भी क्‍या कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट के रुख से स्‍पष्‍ट नहीं हो रहा था कि वह राजीव गांधी की हत्‍या के दोषियों को राहत दे सकता है।
कांग्रेस अगर चाहती तो सुप्रीम कोर्ट के रुख को भांपकर राष्‍ट्रपति से तत्‍काल कोई फैसला करने का अनुरोध कर सकती थी लेकिन उसने ऐसा कुछ नहीं किया और केवल तमाशबीन बनी रही।
जाहिर है कि उसकी अपनी नीयत भी पूरे मामले को राजनीतिक हानि-लाभ के तराजू में तौलने की थी लेकिन अब बाजी हाथ से निकलती देख हवा का रुख बदलने की कोशिश की जा रही है।
सच तो यह है कि सत्‍ता पर काबिज रहने और काबिज होने के पूरे खेल का न कोई नियम रह गया है, न कोई नीति। जो कुछ है सब अनीति ही अनीति है।
अनीति के इस खेल का अब वो दौर आ गया है जब खिलाड़ी खुद मोहरा बनने लगे हैं। शह और मात के लिए नियमों को ताक पर रखने का ही परिणाम है कि प्‍यादा भी वजीर को चुनौती दे रहा है।
चुनौती तो आमजन के सामने भी है लेकिन वह इस बात से खुश है कि अब तक आग लगाकर दूर से तमाशा देखने वाले, खुद तमाशा बन रहे हैं। जो अब तक मचान पर बैठकर शिकार करते रहे, वह अपनी ही नीतियों का शिकार हो रहे हैं। बकरी को बांधकर शेर को ललचाने की परंपरा घातक होती जा रही है।
बेहतर होगा कि समय रहते राजनीति और चुनावी खेल के नियमों में परिवर्तन कर लिया जाए वर्ना वो दिन दूर नहीं जब शिकारी, शिकार का निवाला बन जायेगा और उसके सारे हथियार धोखा दे जायेंगे।
2014 भले ही पूरी व्‍यवस्‍था को परिवर्तित न कर पाए लेकिन उसके लिए रास्‍ता बनाने का ज़रिया जरूर बनेगा क्‍योंकि 66 सालों की तथाकथित स्‍वतंत्रता से लोगों का भरोसा उठने लगा है और वो समझने लगे हैं कि 15 अगस्‍त 1947 को जो परिवर्तन हुआ था, वह भी एक छलावा था।
उधार के संविधान और उसके आधार पर बने कानून ने सिर्फ सूरतों में रद्दोबदल किया, सीरतों में नहीं लिहाजा आज के शासकों तथा बीते हुए कल के शासकों में कोई फर्क दिखाई नहीं देता।
चूंकि 66 साल एक आदमी की औसत उम्र भी है इसलिए मान लेना चाहिए कि 1947 में फिरंगियों से मिली स्‍वतंत्रता और उनसे विरासत में मिले संविधान प्रदत्‍त अधिकार एवं कर्तव्‍यों की भी मियाद पूरी हो चुकी है।
अब उस नई सोच के हिसाब से संविधान गढ़ना होगा जो स्‍वतंत्रता के साथ-साथ अपने अधिकार एवं कर्तव्‍यों को पहले से कहीं अच्‍छी तरह समझने लगा है और जो राजनीति, राजनेताओं, चुनावी खेल तथा सत्‍ता हथियानों के लिए अपनाये जाने वाले हथकंडों से वाकिफ हो चुका है।
आउटडेटेड हो चुकी स्‍वतंत्रता और बेमानी हो चुकी राजनीति को राजनीतिक दल समय रहते समझ लें तो ठीक अन्‍यथा समय तो सब समझा ही देगा। इंतजार कीजिए.....कहानी अभी खत्‍म नहीं हुई। सच तो यह है कि कहानी यहां से शुरू हो रही है।

मंगलवार, 3 दिसंबर 2013

सोनिया, सुषमा और मायावती: सबकी सब बोलती हैं झूठ

नई दिल्‍ली। 
सोनिया गांधी से लेकर सुषमा स्वराज, मायावती और भी कई नामचीन नेता चुनाव आयोग झूठी जानकारियां दे रहे हैं। अपने चुनावी नामांकन में कई सारे नेताओं ने अपनी संपति का ब्यौरा उनके असल वर्तमान मूल्य से बहुत ही कम बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने मार्च, 2003 में अपने एक आदेश में कहा था कि चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों को अपनी संपति का पूरा ब्यौरा देना होगा, जिसमें उन्हें संपत्ति की वास्तविक कीमत के साथ वर्तमान कीमत भी बताना होगा।
इस आदेश के बाद भी कांग्रसे से लेकर बीजेपी और बीएसपी से लेकर सीपीएम तक के नेता अपनी संपति की गलत जानकारी दे रहे हैं।
कई नेताओं ने अपनी संपत्‍ति की अधूरी तो कई ने वर्तमान बाजार के हिसाब से कम जानकारी दी है।
कुछ उदाहरण नीचे दिए गए हैं
सोनिया गांधी: 2004 और 2009 के चुनावों के दाखिल की संपति के ब्यौरे में सोनिया ने महरौली स्थित डेरा मंडी और सुलतानपुर गांव में अपनी जमीन की कीमत 2.19 लाख रुपये बताई है। उसी स्‍थान पर बीएसपी के उम्मीदवार कंवर सिंह तंवर ने 2008 के विधानसभा चुनाव में लगभग उतनी ही जमीन की कीमत 18.37 करोड़ रुपये बताई है।
सुषमा स्वराजः लोकसभा में विपक्षी की नेता सुषमा स्वराज और उनके पति स्वराज कौशल ने दिल्ली के जंतर-मंतर में एक-एक फ्लैट खरीदा लेकिन उसकी बुकिंग कीमत तो बताई लेकिन वास्तविक कीमत वह छुपा गईं। साथ ही मुंबई के घर का उन्होंने क्षेत्रफल नहीं बताया।
मायावतीः दिल्ली के कनॉट प्लेस में दो दुकानों की मालकिन मायवती ने अपनी दोनों दुकानों की कीमत वर्तमान बाजार मूल्य से कम बताई है। साथ ही चाणक्यपुरी स्थित अपने घर की ‌कीमत उन्होंने 61.86 करोड़ बताई जबकि जानकार इसे 429 करोड़ तक की बता रहे हैं।
राजनाथ सिंहः 2009 में दी गई जानकारी के अनुसार लखनऊ के गोमती नगर में अपने घर की कीमत उन्होंने 55 लाख बताई, लेकिन उन्होंने उस घर का एरिया नहीं बताया। जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश और चुनाव आयोग के गाइडलाइन के अनुसार एरिया बताना जरूरी है।
इसी तरीके से कांग्रेस की मीरा कुमार, शीला दीक्षित, अशोक गहलोत, सुशील कुमार‌ शिंदे तो सीपीआई के सुधाकर रेड्डी, एनसीपी के तारिक अनवर, बीएसपी के सतीश चंद्र मिश्र ने भी चुनाव आयोग या तो कुछ छुपा लिया है या फिर गलत जानकारी दी है।
-एजेंसी

सोमवार, 2 दिसंबर 2013

ब्रिटेन की महारानी से ज्यादा पैसे वाली हैं सोनिया गांधी

नई दिल्ली। 
कांग्रेस की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ-2 से भी अमीर है। यह खुलासा अंग्रेजी अखबार हफिंगटन पोस्ट वर्ल्ड ने किया है। अखबार ने दुनियाभर के 20 सबसे ज्यादा अमीर नेताओं की सूची जारी की है। इसमें सोनिया गांधी ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ, ओमान के सुल्तान, मोनाको के राजकुमार और कुवैत के शेख से भी अमीर है। इस सूची में सोनिया को 12वां स्थान मिला है।
सूची में सक्रिय राजा, राष्ट्रपति, सुल्तान और महारानियों को शामिल किया गया है। इस सूची में ज्यादात्तर पुरूषों का कब्जा है। अखबार ने सोनिया गांधी की कुल संपत्ति दो बिलियन अमरीकी डॉलर आंकी है। इसमें सबसे ज्यादा अमीर नेता मिडल इस्ट के शामिल हैं। सोनिया गांधी और ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ-2 की संपत्ति में 400 ले 500 मिलियन अमरीकी डॉलर का फर्क है। सोनिया, महारानी से काफी अमीर हैं।
इस सूची में पहला स्थान रूस के राष्ट्रपति ब्लादमीर पुतिन को मिला है जिनका कुल संपत्ति 40 बिलियन अमरीकी डॉलर आंकी गई है। इनके बाद दूसरा नंबर थाइलैंड के राजा भूमिबोल अदुल्यादेज का है जिनकी कुल संपत्ति 30 बिलियन अमरीकी डॉलर है।
एसोशिएसन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स की वेबसाइट नेशनल इल्केशन वाच के मुताबिक सोनिया गांधी की कुल संपत्ति 1.38 करोड़ रूपए की है। वेबसाइट के मुताबिक सोनिया के पास न ही अपनी कार और न ही भारत में अपना घर है।
-एजेंसी

रविवार, 17 नवंबर 2013

सचिन का सम्मान या ध्यानचंद का अपमान

इंदौर। 
अगर ध्यानचंद को भारत रत्न देना ही नहीं था तो फिर इसका भरोसा क्यों दिया गया। क्यों पिछले छह महीनों से प्रधानमंत्री कार्यालय इस बात का भरोसा दिला रहा था कि जल्द ही दद्दा ध्यानचंद को भारत रत्न से सम्मानित कर दिया जाएगा। अचानक से सचिन तेंदुलकर का नाम आया और उन्हें सम्मानित करने की घोषणा भी कर दी गई। आखिर लोकतंत्र में व्यवस्थाओं के भी कुछ मायने होने चाहिए या नहीं। जब दद्दा को सम्मान दिए जाने की फाइल पहले से चल रही है तो फिर उनसे पहले किसी और को सम्मान देने के मायने क्या हैं, यह अपमान नहीं तो क्या है?
यह दर्द और गुस्सा है दद्दा ध्यानचंद के बेटे अशोक ध्यानचंद का। पेशेवर हॉकी खिलाड़ी रहे अशोक कहते हैं कि सचिन को सम्मान देना था तो सरकार दे, उससे कोई आपत्ति नहीं है लेकिन उससे पहले से दद्दा का नाम चल रहा था और पीएमओ ने इसके लिए भरोसा भी दिलाया था तो फिर उन्हें क्यों नहीं दिया गया।
उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति उठाई कि जब दद्दा का नाम पहले से था तो उनका हक पहले था न कि सचिन का। अगर दद्दा ध्यानचंद को भारत रत्न नहीं देना था तो फिर सरकार ने इतनी नौटंकी की क्यों। पीएमओ साफ हमें नो बोल देता तो कम से कम हमें तसल्ली हो जाती। हम मान लेते कि दद्दा के खेल और देश के सम्मान को बढ़ाने में कोई कमी बाकी रह गई होगी।
उन्होंने कहा कि हम सरकारी प्रक्रिया के सहारे छह महीनों से बैठे हुए हैं। आज मान लिया कि सम्मान सरकारी और ओहदेदारों से ताल्लुकातों से ही मिलते हैं। हमने ओहदेदारों से ताल्लुकात नहीं बनाए, दद्दा ने भी नहीं बनाए, इसीलिए आज किनारे किए गए हैं।
उन्होंने तंज कसा कि दद्दा कभी फाइव स्टार के प्रतिनिधि नहीं रहे। वह गरीब खिलाड़ियों के प्रतिनिधि के तौर पर जिंदगी भर रहे और जिंदगी के बाद भी गरीब खिलाड़ियों के लिए एक मिशाल हैं। ऎसे में मीडिया का एक तबका फाइव स्टार के प्रतिनिधियों को ही जगह देता है। ऎसे में दद्दा हिंदुस्तान की आवाज बनकर ही पीछे ही रह गए।
-एजेंसी

शनिवार, 20 जुलाई 2013

फूड सीक्‍यूरिटी बिल पर कांग्रेस-सपा में डील फाइनल

नई दिल्ली। खबरें मिल रही हैं कि खाद्य सुरक्षा बिल संसद में पास करवाने के लिए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह के बीच डील फाइनल हो गई है। इस बिल का अब तक विरोध कर रही सपा ने यू-टर्न लेते हुए अब इसका समर्थन करने का फैसला किया है।
सूत्रों की मानें तो कांग्रेस ने इसके बदले में सीबीआई के मुलायम सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामसे में क्लोजर रिपोर्ट लगाने का भरोसा दिया है।
इन खबरों के बीच यह भी उल्लेखनीय है कि केंद्र ने एक दिन पहले ही उत्तर प्रदेश की आर्थिक सहायता बीस फीसदी बढ़ा दी है। मुलायम के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में याचिकाकर्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी का कहना है कि कांग्रेस के एक बडे़ नेता ने उन्हें बताया है कि सीबीआई इस केस में अब क्लोजर रिपोर्ट फाइल करने जा रही है।

बुधवार, 12 जून 2013

अमरीकी कं. से 1.1 मिलियन डॉलर ठग लिए टाइटलर ने

नई दिल्ली । कांग्रेसी नेता जगदीश टाइटलर अब नई मुश्किल में घिर गए हैं। अमरीका की एक दूरसंचार कंपनी ने एफबीआई से शिकायत की है कि टाइटलर ने उससे 1.1 मिलियन डॉलर ठग लिए। यह ठगी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी का नाम लेकर की गई।
एक समाचार पत्र के मुताबिक इसी सोमवार को की गई शिकायत में टीसीएम मोबाइल एलएलसी ने कहा कि उसकी सहायक कंपनी कोरविप ने संयुक्त उपक्रम में प्रवेश किया था। टाइटलर के बेटे सिद्धार्थ और हथियारों के दलाल अभिषेक वर्मा ग्रामीण भारत के लिए सेल्युलर सर्विस शुरू करना चाहते थे। इसके लिए दोनों संयुक्त उपक्रम को प्रमोट कर रहे थे।

मंगलवार, 30 अक्टूबर 2012

दबाया गया राजीव गांधी की हत्या का सबूत

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या से जुड़े अहम सबूत को दबा दिया गया था। यह दावा किया है मामले की जांच से जुड़े अधिकारी के रागोथामन ने। उन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि उस समय के आईबी चीफ एमके नारायणन ने राजीव गांधी की हत्या से जुड़े वीडियो को दबाए रखा। इस वीडियो में मानव बम धुन को दिखाया गया है,जो श्रीपेरम्बदुर में राजीव गांधी के पहुंचने से पहले मौजूद थी।
उन्होंने बताया कि वीडियो के गायब होने के मामले की प्राथमिक जांच हो चुकी है। विशेष जांच टीम के प्रमुख डीआर कार्तिकेयन ने पश्चिम बंगाल के मौजूदा गर्वनर नारायणन को छोड़ दिया। हाल ही में प्रकाशित पुस्तक "राजीव गांधी की हत्या की साजिश-सीबीआई की फाइलों के हवाले" में दावा किया गया है कि राजीव गांधी की हत्या के बाद आईबी के वीडियोग्राफर को जो टेप मिला था उसे एसआईटी के साथ कभी शेयर नहीं किया गया। गौरतलब है कि 21 मई 1991 को राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी।

गुरुवार, 11 अक्टूबर 2012

..तो वाड्रा मामले पर इसलिए चुप हैं मोदी जी

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार गांधी परिवार पर हमला बोल रहे हैं लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद पर लगे आरोपों पर वे चुप हैं। ऎसे में सवाल उठता है कि आखिर मोदी चुप क्यों हैं। एक समाचार पत्र के मुताबिक मोदी की इस चुप्पी की वजह है उनकी सरकार की ओर से डीएलएफ को सस्ती दर पर दी गई जमीन। समाचार पत्र के मुताबिक 2007 में गुजरात सरकार ने डीएलएफ को गांधीनगर में सस्ती रेट पर एक लाख स्कवेयर मीटर लैण्ड दी थी।
गुजरात कांग्रेस के सभी सांसदों और विधायकों ने पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को जून 2011 में एक ज्ञापन सौंपा था। इसमें कहा गया था कि बिना नीलामी के डीएलएफ को जमीन दे दी गई।

रविवार, 26 अगस्त 2012

सोशल मीडिया से घबराई सरकार

सभी सरकारी विभागों के लिए दिशा-निर्देश जारी
केंद्र सरकार ने सभी सरकारी विभागों द्वारा सोशल मीडिया के उपयोग हेतु दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनमें कहा गया है कि सार्वजनिक उपक्रमों समेत सभी सरकारी विभागों से जुड़े व्यक्ति सोशल वेबसाइटों पर "गोपनीय" तथा "अप्रमाणित" सूचना पोस्ट न करें।
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ३8 पृष्ठों के दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा कि भारत में फेसबुक के 4 करोड़ तथा टि्‌वटर के 1.6 करोड़ उपयोगकर्ता हैं। इसके कारण सोशल मीडिया जनमत बनाने तथा व्यापक जनसमर्थन जुटाने के लिए प्रभावशाली मंच बनकर उभरा है।

गुरुवार, 28 जून 2012

नेहरू की विरासत को समर्पित ....''जब जनता की सहनशक्‍ित जवाब दे....

आज कुछ लिखने से पहले मैं आपको यह बता देना चाहता हूं कि ना तो मैं निराशावादी हूं और ना ही किसी राजनीतिक दल या उसके किसी नेता विशेष से मेरा लगाव है।
मैं खालिस पत्रकार हूं और उस नाते हर वक्‍त देश, समाज और आम नागरिक की तकलीफों के बावत सोचता रहता हूं।
बेशक आज पत्रकारिता भी ऐसे रास्‍ते पर चल पड़ी है, जहां आम लोगों का भरोसा उसके ऊपर से उठने लगा है लेकिन उम्‍मीद अभी बाकी है।

मंगलवार, 5 जून 2012

गडकरी का सोनिया से एक सवाल

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने सोनिया गांधी की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए उनसे एक अहम सवाल किया है.
नागरिक समाज के विरूद्ध सोनिया गांधी की टिप्पणियों पर भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने आज पलटवार करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष से सवाल किया कि क्या काले धन को स्वदेश वापस लाने की मांग करना राष्ट्र-विरोधी है ?

गुरुवार, 31 मई 2012

हंगामा है क्‍यूं बरपा....

CAG की रिपोर्ट को आधार बनाकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर टीम अन्‍ना के सदस्‍यों ने भ्रष्‍टाचार में संलिप्‍तता का संदेह क्‍या जताया, हंगामा खड़ा हो गया।
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