बुधवार, 11 मार्च 2026

विस्फोटक खुलासा: माफिया ने करोड़ों की सरकारी जमीन का कर दिया सौदा, नगर निगम अब केवल कागजों पर काबिज

 


 माफिया ने करोड़ों की सरकारी जमीन पर केवल कब्जा ही नहीं किया, बल्कि उसका कई हिस्‍सों में सौदा भी कर दिया और नगर निगम मथुरा-वृंदावन अब तक अपनी इस जमीन पर किए गए अवैध निर्माण को ध्वस्त कराने की दिखावटी कोशिश में लगा है ताकि लैंड एक्सचेंज के लिए लाए गए प्रस्ताव की पेशगी का हक अदा किया जा सके। 

वृंदावन के छटीकरा रोड पर स्‍थित सनसिटी अनंतम के लिए नगर निगम मथुरा-वृंदावन की बोर्ड बैठक में बार-बार लैंड एक्सचेंज का लाया गया प्रस्ताव भले ही अभी पास नहीं हुआ हो परंतु बिल्डर के रूप में सक्रिय माफिया ने न सिर्फ सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया बल्‍कि उसका सौदा भी कर दिया। 
बिल्डर के इस दुस्साहस का खुलासा तब हुआ जब सत्ताधारी दल भाजपा के ही कई निगम पार्षदों ने विभिन्न स्तर पर इसकी शिकायत की और सरकारी जमीन को खुर्द-बुर्द करने की जांच कराने के साथ इसके लिए जिम्मेदार पदाधिकारियों पर एक्शन लेने की मांग कर डाली। 
पार्षदों की मानें तो सनसिटी अनंतम के हक में लैंड एक्सचेंज का प्रस्ताव पास कराने पर नगर निगम मथुरा-वृंदावन इस कदर आमादा है कि अब उसके लिए दूसरी फर्मों के नाम का उपयोग किए जाने की तैयारी है जिससे सांप मर जाए और लाठी भी न टूटे। 
किन-किन भाजपा पार्षदों ने की है शिकायत? 
इस संबंध में एक शिकायत तो वार्ड नंबर 37 के भाजपा पार्षद राजीव कुमार सिंह ने 20 जनवरी 2026 को प्रदेश के नगर विकास मंत्री से की है। भाजपा पार्षद ने मंत्री महोदय को लिखा है कि नगर निगम मथुरा-वृंदावन के अंतर्गत सनसिटी अनंतम के लिए लैंड एक्सचेंज का प्रस्‍ताव पास हुए बिना सरकारी जमीनों का विक्रय तथा उन पर विकास कार्य करने एवं अन्य फर्जी कंपनियों का समावेश करने की तत्काल जांच कराकर प्रभावी कार्रवाई की जाए।  
भाजपा पार्षद ने लिखा है कि कृपया कार्यकारिणी की बैठक दिनांक 28.09.2022 के प्रस्ताव संख्‍या 9 एवं बोर्ड बैठक 15.11.2022 के प्रस्ताव संख्‍या 12 का अवलोकन करें जिसमें सनसिटी हाईटेक और उसकी सहायक कंपनी मै. अश्वमेघा कॉलोनाइजर्स का नाम सुनिश्‍चित किया गया था किंतु बोर्ड बैठक दिनांक 09.10.2025 के प्रस्ताव संख्‍या 2 को देखें तो उसमें सनसिटी हाईटेक प्रा. लि. के अलावा अक्षज रियलटर्स प्रा. लि. एवं सनसिटी इन्‍फ्रा रियलटर्स प्रा. लि. व सनसिटी प्रॉजेक्ट्स जैसी नई कंपनियों के नाम जोड़ दिए गए। 
तीन वर्ष पहले के प्रस्ताव में जहां मुख्‍य कंपनी की मात्र एक सहायक कंपनी थी, वहीं 2025 के प्रस्ताव में मुख्‍य कंपनी का बदल जाना और तीन नई कंपनियों का उदय हो जाना जाहिर कराता है कि इस सबके पीछे सरकारी जमीन को हस्तांतरित करने की कोई बड़ी साजिश रची जा रही है। 
भाजपा पार्षद राजीव कुमार सिंह ने अपने शिकायती पत्र में सवाल उठाया है कि अभी जबकि लैंड एक्सचेंज का प्रस्ताव पास ही नहीं हुआ तो सनसिटी अनंतम ने कैसे तो निगम की जमीन पर निर्माण कार्य शुरू कराया और कैसे उस जमीन का सौदा किया? 
राजीव कुमार सिंह के इस शिकायती पत्र पर वार्ड नंबर 16 के पार्षद गुलशन, गऊघाट क्षेत्र की पार्षद नीलम गोयल, वार्ड नंबर 31 के पार्षद मुन्ना मलिक तथा वार्ड नंबर 68 के पार्षद  कुलदीप पाठक ने भी हस्ताक्षर किए हैं। 
इसी संदर्भ में एक अन्य शिकायत वार्ड नंबर 17 के पार्षद ब्रजेश खरे ने मंडलायुक्त (आगरा मंडल) से की है। जिस पर वार्ड नंबर 56 के पार्षद कुंजबिहारी भारद्वाज, वार्ड नंबर 60 के पार्षद नीरज वशिष्‍ठ, वार्ड नंबर 46 के पार्षद चौधरी राजवीर सिंह ने भी अपने हस्ताक्षर किए हैं। 
इस पत्र में पार्षदों ने अवगत कराया है कि नगर निगम मथुरा-वृंदावन की दिनांक 09.10.2025 को संपन्न हुई बोर्ड बैठक प्रस्‍ताव संख्‍या 03 के द्वारा द्वारिकादास जीवराजका मैमोरियल ट्रस्ट एवं हरिनिवास खेतान मैमोरियल ट्रस्ट के हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए तथ्‍यों को छिपाकर नगर निगम की बेशकीमती जमीन को लैंड एक्सचेंज के नाम पर खुर्द-बुर्द किया गया है जिसकी उच्‍च स्‍तरीय जांच कराना अत्यंत आवश्‍यक है। 
इन पार्षदगणों ने स्‍पष्‍ट तौर पर लिखा है कि इस प्रक्रिया के तहत निगम की जमीन और उसके बदले निगम को मिलने वाली जमीन के दामों में 'जमीन-आसमान' का अंतर है जिससे प्रतीत होता है कि सारा खेल किसी खास मकसद से तथा निजी स्‍वार्थों की पूर्ति के लिए खेला जा रहा है। वो भी तब जबकि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साफ-साफ निर्देश हैं कि निकायों की जमीन संरक्षित की जाए और उन जमीनों पर आय के स्‍त्रोत विकसित कर नगर निगमों को आमनिर्भर बनाए जाए। 
यमुना के प्रदूषण की मुक्ति के नाम पर भी बड़ा घोटाला किए जाने की तैयारी में है नगर निगम मथुरा-वृंदावन 
इस सबके अलावा नगर निगम मथुरा-वृंदावन यमुना को प्रदूषण मुक्त कराने के नाम पर भी एक और बड़ा घोटाला करने की तैयारी में है। 
न‍िगम के ही सूत्रों से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार इसके लिए 'वेल्‍युसेंट फाउंडेशन' (Valucent Foundation) नाम की किसी संस्‍था या फर्म के साथ निगम ने पिछले महीने बाकायदा एक एमओयू भी साइन किया है जिससे सब-कुछ जायज ठहराया जा सके लेकिन निगम की नीयत में खोट का अंदाज इस बात से ही लगाया जा सकता है कि निगम ने न तो अब तक इस एमओयू को सार्वजनिक किया है और न इसके बारे में निगम का कोई अधिकारी या कर्मचारी मुंह खोलने को तैयार है। यहां तक कि पार्षद भी इसकी पूरी जानकारी पाने में अब तक सफल नहीं हुए हैं। 
सूत्रों का कहना है कि इसी महीने होने वाली बोर्ड बैठक में इसका भी प्रस्‍ताव पास कराने की कोशिश की जाएगी क्योंकि सनसिटी अनंतम की तरह निगम इसमें अपनी छीछालेदर नहीं कराना चाहता। 
जो भी हो, इतना तो तय है कि नगर निगम में व्‍याप्त भ्रष्टाचार, मथुरा को लेकर इस लोकोक्‍ति को सार्थक जरूर करता है कि 'मथुरा तीन लोक से न्‍यारी'। 
क्‍योंकि दर्जनों बार मथुरा आ चुके सूबे के ईमानदार सीएम योगी आदित्यनाथ को न तो अब तक यहां के भ्रष्‍टाचार की भनक लगी है और न अपनी ही पार्टी के पार्षदों के शिकायती पत्रों का संज्ञान लिया गया है। 
-सुरेन्‍द्र चतुर्वेदी

 
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