रविवार, 9 मार्च 2014

सीएम से मिलने को देनी पड़ती है घूस!

लखनऊ। 
सपा छोड़कर भाजपा में पहुंचे कीर्तिवर्धन सिंह ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री से मिलने के लिए घूस देनी पड़ती है। सूबे के कृषि मंत्री आनंद सिंह के पुत्र कीर्तिवर्धन ने यहां पत्रकारों से कहा कि सपा सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर है। सीएम से मिलने के लिए उन्हें हर बार निजी सचिव को पांच हजार रुपये घूस देने पड़ते थे।
हालांकि उन्होंने इसका खुलासा नहीं किया कि घूस किसे दी। पूर्व सांसद ने कहा कि गोवंश वध का विरोध कर आरोपियों को सजा दिलाने की मांग रखी तो उनका टिकट काट दिया गया था।
भाजपा में शामिल होने के बाद कृषि मंत्री आनंद सिंह के पुत्र कीर्तिवर्धन सिंह उर्फ राजा भइया पूरी तरह भगवा रंग में दिखे।
भाजपा कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों से मुखातिब होने के बाद उन्होंने पार्टी कार्यालय पर हुई पत्रकार वार्ता में सपा पर जमकर हमला बोला।
कीर्तिवर्धन ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में तीन दलों में शामिल होकर सबकी हालत जान ली है। कांग्रेस, बसपा, सपा तीनों ही जनता को बेवकूफ बना रहे हैं।
कहा, सपा में परिवारवाद इतना हावी है कि मुलायम सिंह यादव के परिवार का कोई ऐसा सदस्य नहीं है जो बालिग होने के बाद विधायक, सांसद या अन्य पद का लाभ न ले रहा हो।
उन्होंने कहा कि वह अकेले नहीं बल्कि सैकड़ों समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल हुए हैं। जो नहीं शामिल हो सके, वे भी जल्द ही शामिल हो जाएंगे।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जिले के लखनऊ मार्ग के निर्माण के लिए ऐसा नहीं है कि किसी ने सवाल नहीं उठाया।
इसके लिए वे स्वयं, उनके पिता कृषि मंत्री कुंवर आनंद सिंह, राज्यमंत्री योगेश प्रताप सिंह सहित कई नेता समय-समय पर आवाज उठाते रहे हैं लेकिन सपा में भ्रष्टाचार के चलते किसी की आवाज नहीं सुनी जा रही है।
उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि बाप व बेटे का ड्रामा चल रहा है और जनता पिस रही है।
मुलायम सिंह यादव मंच पर ही डांटते हैं तो आजम खां हंसते नजर आते हैं। अखिलेश यादव कहते हैं कि पिता हैं और उन्हें डांटने का हक है। उनकी ब्यूरोक्रेसी नहीं सुनती।
टिकट मिलने की बात पर उन्होंने कहा कि वह टिकट मिलने की शर्त में नहीं आए हैं। इस दौरान भाजपा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष रमाकांत तिवारी, जिलाध्यक्ष अकबाल बहादुर तिवारी, शेष नरायण मिश्र, सूर्यनारायन तिवारी, डॉ. वीरेंद्र गोस्वामी, विद्याभूषण द्विवेदी, नीरज मौर्य, घनश्याम पांडेय, अतुल श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।

गुरुवार, 6 मार्च 2014

सिर्फ भ्रष्‍ट और धोखेबाजों के लिए बनी 'खास आदमी पार्टी'

नई दिल्‍ली। 
एक ऐसे वक़्त में जब भारत के सभी राजनीतिक दल ख़ुद को ईमानदार और सच्चा साबित करने में लगे हैं, एक ऐसी पार्टी भी है जो भ्रष्ट और धोखेबाज़ लोगों को ही अपना सदस्य बना रही है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ इस पार्टी का नाम है ख़ास आदमी पार्टी (ख़ाप) और इसकी स्थापना की है नरेश सिंह भदौरिया ने. लोकसभा चुनावों से पहले इस तरह की पार्टी बनाने का मक़सद मनोरंजन के साथ ही मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था पर कटाक्ष करना भी है.
भदौरिया इससे पहले पोल खोल पार्टी भी बना चुके हैं और अब तक राजनाथ सिंह, अटल बिहारी वाजपेयी, विनय कटियार और नवजोत सिंह सिद्दू के ख़िलाफ़ चुनाव भी लड़ चुके हैं.
पिछले चुनावों के दौरान मिले समर्थन से उत्साहित भदौरिया इस बार अमेठी से चुनाव लड़ने का इरादा रखते हैं. इस सीट से आम आदमी पार्टी ने कुमार विश्वास को अपना उम्मीदवार बनाया है. इस सीट से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी सांसद हैं.
भदौरिया ने अमेठी में चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया है. पीटीआई के मुताबिक़ इस दौरान पार्टी के कार्यकर्ता जो बैनर लेकर चल रहे थे, उस पर लिखा था, "केवल भ्रष्ट, घोटालेबाज़, धोखेबाज़ लोग ही इस पार्टी की सदस्यता ले सकते हैं."
भदौरिया ने पीटीआई को बताया कि उनका मक़सद भ्रष्टाचार की ओर लोगों का ध्यान खींचना है. उनके मुताबिक़, "मेरे लिए चुनाव परिणाम मायने नहीं रखते हैं क्योंकि मेरा मक़सद जीतना नहीं है, लेकिन मैं लोगों का ध्यान मुद्दों पर खींचना चाहता हूं."
ख़ाप का यह भी कहना है कि वो आम आदमी पार्टी को छोड़कर दूसरे राजनीतिक दलों के साथ चुनावी गठजोड़ करना चाहती है.
पीटीआई के मुताबिक़ ख़ाप का दावा है कि आम आदमी पार्टी को छोड़कर दूसरे राजनीतिक दलों से इस पार्टी के विचार और सिद्धांत काफ़ी मिलते हैं.
ख़ाप ने आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल को प्रमुख प्रतिस्पर्धी बताते हुए कहा है कि उसे केवल पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और जानेमाने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे से ही डर है.
भदौरिया पेशे से वकील हैं. पीटीआई से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, "हमें गंभीरता से नहीं लिया जाता लेकिन पिछले चुनावों में हमें हज़ारों वोट मिले हैं."
-एजेंसी

'सुभारती' में पाक जिंदाबाद के नारे: जांच शुरू

मेरठ स्थित सुभारती यूनिवर्सिटी के 67 कश्मीरी छात्रों को निलंबित किए जाने के बाद राज्य सरकार ने पूरे मामले की न्यायिक जांच शुरू कर दी है. इन छात्रों द्वारा पिछले रविवार को भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के दौरान स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय में कुछ कश्मीरी छात्रों के पाकिस्तान का समर्थन करने के बाद तनाव पैदा हो गया था.
मेरठ के जिला अधिकारी पंकज यादव ने बताया है कि जांच का ज़िम्मा अतिरिक्त सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा गया है जो पंद्रह दिनों के अन्दर अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे.
इस निजी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर मंज़ूर अहमद ने कश्मीरी छात्रों के निलंबन को जायज़ ठहराते हुए कहा, "छात्रों की तरफ से इस तरह का आचरण स्वीकार्य नहीं है."
उनका कहना था कि कुछ कश्मीरी छात्रों ने न केवल पाकिस्तान के पक्ष में नारे लगाए, बल्कि हॉस्टल की संपत्ति को भी नुक़सान पहुंचाया.
वह कहते हैं कि इस तरह की हरक़त से विश्वविद्यालय परिसर में तनाव उत्पन्न हो गया था क्योंकि कई छात्रों नें उनका विरोध करना शुरू कर दिया.
विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि पाकिस्तान का समर्थन करने वाले सिर्फ़ 10-12 छात्र ही रहे होंगे, मगर हॉस्टल में रह रहे बाक़ी छात्रों ने किसी का नाम नहीं बताया इसलिए सामूहिक कार्यवाही की गयी है.
इस विश्वविद्यालय में कश्मीरी छात्रों की संख्या 300 के आसपास है. जिस घटना की बात की जा रही है, वह सिर्फ मदन ढींगरा हॉस्टल की है जबकि दूसरे हॉस्टलों में भी कश्मीरी छात्र रहते हैं.
घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में ही विरोध प्रदर्शन होने लगे और शायद यही वजह है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने बाक़ी कश्मीरी छात्रों से अपने हॉस्टलों में ही रहने को कहा है.
इन हॉस्टलों की सुरक्षा भी बढ़ा दी गयी है. स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार आर. के. गर्ग ने किसी भी कश्मीरी छात्र से मिलने के लिए अनुमति देने से यह कहते हुए मना कर दिया कि इससे तनाव बढ़ सकता है.
कुछ छात्रों ने बताया कि घटना के बाद बाक़ी कश्मीरी छात्र अपने-अपने हॉस्टल में ही रह रहे हैं क्योंकि उनसे कहा गया है कि माहौल शांत होने तक कक्षाओं में नहीं जाएँ.
विश्वविद्यालय ने घटना की जांच के लिए अलग से एक कमेटी का गठन किया है जिसका नेतृत्व प्रोफ़ेसर जी के बंसल कर रहे हैं.
मेरठ के जिला अधिकारी का मानना है कि निलंबित किये गए सभी 67 कश्मीरी छात्र दोषी नहीं हैं. वह कहते हैं, "पता चल रहा है कि कुछेक छात्रों ने ऐसा किया. मगर सज़ा हॉस्टल में रह रहे सभी 67 छात्रों को मिली. हम सुनिश्चित करेंगे कि निर्दोष छात्रों के भविष्य पर इसका असर नहीं पड़े.''
वहीँ विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों ने बताया कि घटना में बेशक चंद कश्मीरी छात्रों का हाथ रहा हो मगर इसके लिए सभी कश्मीरी छात्रों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है. उनका यह भी मानना है कि जिन छात्रों ने क्रिकेट मैच के दौरान पाकिस्तान के पक्ष में नारे लगाए, उनके ख़िलाफ़ कार्यवाही होनी चाहिए.
-लीजेण्‍ड न्‍यूज़

मंगलवार, 4 मार्च 2014

CM हुड्डा की दूसरी पत्‍नी आई सामने

चण्‍डीगढ़। 
इंडियन नेशनल लोकदल (आईएनएलडी) के वरिष्ठ नेता और विधायक अभय सिंह चौटाला ने हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर एक पत्नी के रहते दूसरी शादी करने और दूसरी शादी से रजत नाम का एक 20 वर्षीय बेटा होने का दावा किया है। चौटाला ने यह मामला सोमवार को हरियाणा विधानसभा की प्रेस गैलरी में उठाते हुए हुड्डा की दूसरी पत्नी होने का दावा करने वाली शशि के द्वारा देहरादून के फैमिली कोर्ट के सामने हिंदू मैरेज ऐक्ट के तहत दायर कराई गई शिकायत के दस्तावेज का ब्योरा भी दिया।
इससे पहले सोमवार को हरियाणा विधानसभा में शून्यकाल शुरू होते ही आईएनएलडी के रामपाल माजरा ने यह मामला उठाया लेकिन स्पीकर कुलदीप शर्मा ने इसे सदन की कार्यवाही से निकाल दिया। दूसरी तरफ, हुड्डा ने इस मामले पर कुछ भी नहीं कहा है लेकिन उनके समर्थकों की ओर से इसे चरित्र हनन का मामला बताया गया है।
अभय चौटाला ने दावा किया कि उनके पास इसका अदालती हलफनामा है, जिसमें देहरादून के प्रेम नगर की रहने वाली शशि ने 13 दिसंबर 2013 को देहरादून फैमिली कोर्ट में 11 नवंबर 1992 को हुए उनके विवाह को बहाल किए जाने की गुहार लगाई है। चौटाला ने बताया कि शपथ पत्र के मुताबिक '1988-89 में शशि युवा कांग्रेस की सदस्य थीं और भूपेंद्र सिंह हुड्डा उस समय विपक्षी पार्टी में एक वरिष्ठ नेता थे। भूपेंद्र सिंह ने शशि को राजनीति में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और दोनों का मिलना-जुलना शुरू हो गया। भूपेंद्र सिंह ने विवाह करने का वायदा करके शशि को अपने प्रभाव में लिया और नई दिल्ली के जनपथ होटल में उससे संबंध बनाए। बाद में शशि को पता चला कि भूपेंद्र सिंह शादीशुदा हैं और उनकी पत्नी आशा जीवित है और एक बेटा भी है।
शशि ने अदालत में दायर मामले में कहा कि जब उसने भूपेंद्र सिंह से इस धोखाधड़ी के संबंध में बात की तो राजनीतिक भविष्य का वास्ता देकर और उन्होंने कहा कि आशा से उनका तलाक होने वाला है। उसके बाद भूपेंद्र सिंह ने घरवालों पर दबाव डालकर शशि का विवाह किसी अन्य व्यक्ति के साथ करा दिया, पर वह शादी नहीं चली। शशि ने अपनी शिकायत में कहा कि भूपेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी को तलाक दे दिया है लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं कर सकता। 11 नवंबर, 1992 को भूपेंद्र सिंह ने दिल्ली में शशि के साथ बिरादरी के रीति-रिवाज के अनुसार विवाह कर लिया। शशि ने अपनी शिकायत में बताया कि 1 फरवरी, 1994 को भूपेंद्र सिंह से शशि को एक बेटा हुआ, जिसका नाम रजत है। याचिका में शशि ने अपना मौजूदा पता प्रेम नगर, देहरादून का दिया है।
अभय सिंह चौटाला ने कहा कि वैसे वह किसी के पारिवारिक मामलों में दखल नहीं देते लेकिन एक विधायक के नाते उनके पास ये दस्तावेज आए हैं, यह बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने मांग की कि कांग्रेस तुरंत मुख्यमंत्री हुड्डा को पद से हटाए और सच्चाई सामने लाने के लिए डीएनए टेस्ट कराए।
इन आरोपों का मुख्यमंत्री ने सीधे जवाब नहीं दिया, लेकिन उनके समर्थक और हरियाणा विधानसभा के पूर्व स्पीकर डॉ. रघुवीर सिंह कादियान और विधायक भारत भूषण बत्रा ने प्रेस गैलरी में पत्रकारों को बताया कि यह सीधे-सीधे मुख्यमंत्री का चरित्र हनन है। महिला ने देहरादून की अदालत में 17 दिसंबर, 2013 को हिंदू मैरिज ऐक्ट के तहत अर्जी दायर की थी। अदालत ने सुनवाई के लिए 24 जनवरी, 2014 तय कर दी। पर इससे पहले ही महिला ने अदालत में पेश होकर शपथ पत्र देकर अर्जी वापस लेने का आग्रह किया। इसे अदालत ने मंजूर करते हुए अर्जी निरस्त कर दी थी। इन लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि महिला विपक्ष के इशारे पर काम कर रही है।
-एजेंसी

सोमवार, 3 मार्च 2014

हम पनडुब्‍बियों पर नहीं, बम पर तैरते हैं सर...कुछ कीजिए

मुंबई। 
आईएनएस सिंधुरत्न हादसे की जांच में एक और खुलासा हुआ है। इस हादसे में महज 96 घंटे पहले लेफ्टिनेंट मनोरंजन कुमार ने वेस्टर्न कमांड के कुछ अफसरों से कहा था कि सिंधुरत्न और इसकी सहयोगी पनडुब्बियों को ऑपरेट करना 'बम पर तैरने जैसा है'। इन्हीं अफसरों में से एक ने इस बात खुलासा किया है।
22 फरवरी को नेवल ऑफिसर्स मेस में ले. मनोरंजन की इस अफसर से आखिरी बार बात हुई थी। अफसर ने मनोरंजन से हुई बातचीत का ब्यौरा ई-मेल के जरिये अपने साथियों से साझा की है। इसके मुताबिक ले. मनोरंजन यह जानते हुए भी कि पनडुब्बी को ऑपरेट करना खतरे से खाली नहीं है, अपनी ड्यूटी पर गए। क्योंकि उनके पास कोई और रास्ता नहीं था।
इस अफसर ने मनोरंजन के हवाले से 'हेडलाइंस टुडे' को बताया, 'सर, हम बम पर तैरते हैं। इन पनडुब्बियों की बैटरी इतनी पुरानी हो चुकी हैं कि दस गुना मेहनत के बाद भी इनसे दस गुना गैस निकलता है। हाइड्रोजन बर्नर भी काम नहीं कर रहे हैं।' जब इस अफसर ने ले. मनोरंजन से पूछा कि उसने इस मसले को कमांड के सामने क्यों नहीं उठाया तो मनोरंजन का जवाब था, 'सर, यह सभी को पता है। कमांडरों की कॉन्फ्रेंस में भी यह मुद्दा उठा था।'
गौरतलब है कि नेवी की पनडुब्बी आईएनएस सिंधुरत्न मुंबई के पास समुद्र के पास 26 फरवरी को हादसे में मनोरंजन के साथ लेफ्टिनेंट कमांडर कपीश मुवाल शहीद हो गए थे।
-एजेंसी

शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2014

शौक बड़ी चीज: माल्या ने खरीदा 4 करोड़ का घोड़ा

नई दिल्ली। 
एक विज्ञापन टीवी पर अक्सर दिखाई दे जाता है कि 'शौक बड़ी चीज है'। लगता है कि विजय माल्या ने इस 'गुरुमंत्र' को आत्मसात कर लिया है। एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के मुताबिक उन्होंने एक घोड़ा खरीदा है जिसकी कीमत करीब चार करोड़ रुपये है। हालांकि कहा ये भी जा रहा है कि इसकी कीमत चार करोड़ से भी ज्यादा हो सकती है। इस घोड़े का नाम है एयर सपोर्ट।
उनकी एयरलाइन्स कंपनी डूबे तो डूबे लेकिन माल्या को क्या? कर्मचारियों को बेशक सैलेरी ना मिले, वो आत्महत्या के लिए मजबूर हो जाएं लेकिन भला शौक पर किसका बस चलता है।
21 साल की उम्र से घोड़ों की दौड़ का शौक पाले हुए हैं माल्या। खबर के मुताबिक माल्या की गिनती भारत के शीर्ष तीन, घोड़ा मालिकों और ब्रीडर्स में होती है। माल्या के अलावा पूनावाला परिवार और एमएएम रामास्वामी भी शीर्ष तीन में हैं।
1992 में माल्या ने एक 250 साल पुराना ऐतिहासिक स्टड फार्म खरीदा था जो 450 एकड़ में फैला हुआ है। माना जा रहा है कि इस घोड़े को वहीं रखा जाएगा और ब्रीडिंग के काम में लिया जाएगा।
एयर सपोर्ट नाम का ये घोड़ा अभी तक वर्जीनिया डर्बी समेत पांच रेस जीत चुका है।
कुछ वक्त ही बीता है जब माल्या ने बैंगलौर आईपीएल टीम के लिए युवराज सिंह को 14 करोड़ में खरीदा था। 

मोदी मोह के चलते जनरल पर कसा सीबीआई का शिकंजा

नई दिल्ली। 
पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत) वी के सिंह के उस आरोप के सत्यापन के लिए सीबीआई उनके द्वारा सौंपी गयी एक ऑडियो रिकॉर्डिंग की फॅारेंसिक जांच फिर से करायेगी जिसमें उन्होंने कहा था कि टाट्रा ट्रकों की आपूर्ति को मंजूर करने की एवज में थलसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें कथित तौर पर रिश्वत की पेशकश की थी।
सीबीआई सूत्रों ने कहा कि एजेंसी उस सीडी की फॉरेंसिक जांच फिर से कराना चाहती है जिसमें वी के सिंह को 14 करोड़ रुपए की कथित रिश्वत की पेशकश के समय की बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग है। सूत्रों ने कहा कि पहले की गयी जांच में सीडी से कुछ भी सामने नहीं आ पाया था।
सीडी में रिकॉर्ड की गयी चीजें सुनना संभव नहीं हो सका। इसके बाद उसे फॉरेंसिक जांच के लिए केंद्रीय फॉरेंसिक एवं वैज्ञानिक प्रयोगशाला (सीएफएसएल) भेज दिया गया। सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘हमने फिर से फॉरेंसिक जांच कराने के लिए सीडी को सीएफएसएल भेज दिया है।’’ फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने तत्कालीन थल सेनाध्यक्ष द्वारा मुहैया कराए गए रिकॉर्डिंग उपकरण से डाटा हासिल करने की कोशिश की थी।
इस सीडी में वह बातचीत रिकॉर्ड की गयी थी जिसमें थलसेना के वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत) तेजिंदर सिंह ने वी के सिंह को 600 टाट्रा ट्रकों की आपूर्ति मंजूर करने की एवज में 14 करोड़ रुपए की कथित रिश्वत की पेशकश की थी पर पाया कि उपकरण का डाटा ‘‘करप्ट’’ है यानी उसे सुना नहीं जा सकता।
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