गुरुवार, 19 दिसंबर 2013

करोड़ों खर्च करके डाली गई मेरे और अन्‍ना के बीच में दरार

नई दिल्ली। 
अन्ना हजारे के साथ अपने संबंधों में आई दरार को ‘मतभेद’ बताते हुए आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उनके ‘गुरु’ उनके दिल में हैं। हालांकि, निहित स्वार्थों वाली अनेक पार्टियों ने उनके बीच दरार पैदा करने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए हैं। केजरीवाल ने हालांकि माना कि लोकपाल विधेयक को लेकर हजारे के साथ उनका मतभेद है। उन्होंने कहा कि वह मानते हैं कि यह विधेयक 'कमजोर' है और मजबूत जनलोकपाल विधेयक के लिए संघर्ष करते रहेंगे।
आप नेता ने कहा कि कई पार्टियों की बड़ी ताकतें उनके और हजारे के बीच दरार पैदा करना चाहती हैं क्योंकि वे मानते हैं कि अगर केजरीवाल और हजारे ने हाथ मिला लिया तो यह परमाणु बम से भी ज्यादा खतरनाक हो जाएगा।
केजरीवाल ने एक टेलीविजन चैनल से कहा कि हरेक पार्टियों के सभी गलत लोगों ने अपने निहित स्वार्थों की वजह से हमें अलग करने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए हैं।
केजरीवाल ने कहा कि मैं व्यक्तिगत रूप से सरकार बनाने के खिलाफ था क्योंकि हमने बार बार कहा है कि हम कांग्रेस अथवा भाजपा को न तो समर्थन देंगे और न ही उनसे समर्थन लेंगे, लेकिन बाद में लोगों के एक वर्ग ने यह कहना शुरू कर दिया कि हमें सरकार बनानी चाहिए, जबकि दूसरा वर्ग इसका विरोध कर रहा था, इसलिए हमने इस बारे में फैसला लेने के लिए जनता के पास जाने का फैसला किया।
हालांकि उन्होंने कहा कि दिल्ली में सरकार बनाने का फैसला रविवार की रात को किया जाएगा और इसकी घोषणा सोमवार को होगी।
-एजेंसी

मंगलवार, 17 दिसंबर 2013

भारत में यूएस डिप्‍लोमेट्स के 'गे' पार्टनर को अरेस्‍ट करें

नई दिल्ली। 
अमेरिका में भारतीय राजनयिक देवयानी के साथ हुई बदसलूकी के विरोध में भारत का रुख कड़ा हो गया है। वहीं मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी भी इस मामले में पूरी तरह से सरकार के साथ है। बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि भारत सरकार को भारत में रह रहे अमेरिकी राजनयिकों के समलैंगिक साथियों को गिरफ्तार कर लेना चाहिए क्योंकि ये डिप्लोमेटिक कोड ऑफ कंडक्ट का साफ उल्लंघन है।
सिन्हा ने कहा कि दुनिया का कोई भी मित्र देश राजनयिकों के साथ इस तरह का सुलूक नहीं करता जैसा अमेरिका ने न्यूयॉर्क में भारत के काउंसलेट जनरल की हेड के साथ किया। अमेरिकी प्रशासन की इस कार्यवाही की निंदा करने के लिए शब्द पर्याप्त नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में धारा 377 को सही ठहराया है जिसके तहत भारत में समलैंगिक यौन संबंध अपराध करार दिए गए हैं। सिन्हा ने कहा कि भारत में रह रहे अमेरिकी राजनयिकों को भी किसी तरह की छूट नहीं दी जानी चाहिए और उन पर भी यहां का कानून लागू होना चाहिए।
सिन्हा ने कहा कि मुझे पता चला है कि भारत में रह रहे कई अमेरिकी राजनयिकों के समलैंगिक पार्टनर हैं, जिन्हें वीजा मिला हुआ है और जो यहीं रह रहे हैं। भारत सरकार को धारा 377 के तहत उनके वीजा रद्द कर देने चाहिए और उनके समलैंगिक साथियों को गिरफ्तार कर जेल में बंद कर देना चाहिए क्योंकि वे भारत के कानून का उल्लंघन कर रह हैं।
-एजेंसी

नौकरशाहों के खिलाफ अभियोजन में मंजूरी जरूरी नहीं

नई दिल्‍ली। 
सीबीआई को अदालती निगरानी वाले भ्रष्टाचार के बावत वरिष्ठ नौकरशाहों के खिलाफ अभियोजन में केन्द्र सरकार की मंजूरी की कोई जरूरत नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी कि इसने एजेंसी को मजबूत किया है जिससे वह सरकार से पूर्व मंजूरी लिए बिना अधिकारियों के खिलाफ जांच कर सकती है.
न्यायमूर्ति आर. एम. लोधा की अध्यक्षता में तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ ने केन्द्र की मंजूरी के इंतजार के बगैर कोलगेट में कथित रूप से संलिप्त नौकरशाहों के खिलाफ अभियोजन के लिए सीबीआई का मार्ग प्रशस्त कर दिया है.
खंडपीठ ने कहा, ‘जब कोई मामला भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत अदालत की निगरानी में हो तो दिल्ली विशेष पुलिस संस्थापन (डीएसपीई) कानून की धारा 6ए के तहत मंजूरी आवश्यक नहीं है.’
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार के सभी मामलों में वरिष्ठ नौकरशाहों के खिलाफ जांच के लिए आवश्यक मंजूरी के केंद्र के रख पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि इस प्रकार का वैधानिक प्रावधान कोलगेट जैसे मामलों मे अदालती निगरानी वाली जांच में न्यायिक शक्ति को कम करेगा.
उसने केंद्र के इस दावे को दरकिनार कर दिया था कि डीएसपीई कानून की धारा 6ए के तहत संयुक्त सचिव स्तर के दर्जे या उससे ऊपर के दर्जे के अधिकारियों के खिलाफ जांच करने के लिए सक्षम प्राधिकरण की मंजूरी की आवश्यकता होती है.
-एजेंसी

रविवार, 15 दिसंबर 2013

जूते गांठकर जीवन यापन कर रहा है पूर्व विधायक का बेटा

बिलासपुर। 
कहते हैं कि राजनीति में आने वाले लोगों के पीछे लक्ष्मी खुद-ब-खुद चली आती हैं, लेकिन 1957 में हिमाचल प्रदेश असेंबली में विधायक रह चुके सरदारू राम को ऐसा नहीं लगता है. सरदारू राम ने अपना जीवन सादगी से जिया. मोची बनकर काम करते हुए उनका निधन हो गया था. उनके निधन के बाद उनके बेटे मीनू राम भी मोची के तौर पर काम करते हैं और अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं.
मीनू राम ने बताया, 'अपना और अपने परिवार का पेट पालने के लिए मैं करीब 50 सालों से जूते सी रहा हूं. यही एकमात्र विरासत मेरे विधायत पिता छोड़कर गए हैं. हमारे लिए सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं है न ही कोई पेंशन मिलती है.'
65 साल के मीनू राम ने बताया कि शिमला से करीब 135 किमी की दूरी पर बिलासपुर की भगेड़ चौक पर वो बैठते हैं और रोज करीब कुछ सौ रुपये कमा लेते हैं. सरदारू राम ने 1957 में विधायक के तौर पर शपथ ली थी लेकिन 1962 में अपनी सीट से हारने के बाद उन्हें वापस मोची बनना पड़ा था.
मीनू राम के दो बेटे और दो भाई हैं. चारों मजदूरी करते हैं. ये परिवार कच्चे मकान में रहता है जिसे सरदारू राम ने बनवाया था. 1957 में झंडूटा चुनाव-क्षेत्र से जीतकर सरदारू राम स्टेट असेंबली में पहुंचे थे. लेकिन 1962 में हारने के बाद उनके पास अपने पुराने काम पर लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था.
सरदारू राम की मृत्यु 1972 में हुई और विधायक के परिवार को मिलने वाली पेंशन के अभाव में उन्हें अपने बेटे को अपना काम सौंप कर जाना पड़ा. आज हिमाचल प्रदेश के 68 विधायकों में से 44 करोड़पति हैं जबकि बाकी भी पैसों में खेल रहे हैं. ब्रिज बिहारी लाल बुतैल राज्य के सबसे अमीर विधायक हैं जिनके पास करीब 169 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी है.
-एजेंसी

गुजरात दंगों में PMO से हुए पत्राचार का नहीं होगा खुलासा

नई दिल्ली। 
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने 2002 में हुए गुजरात दंगों के 11 साल बाद भी उस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और राज्य के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुए पत्र व्यवहार का खुलासा करने से इंकार कर दिया है. पीएमओ ने एक आरटीआई आवेदन का जवाब देते हुए पारदर्शिता संबंधी खंड 8-1(एच) का हवाला दिया जो उस सूचना को देने से छूट देता है जिससे अपराधियों के खिलाफ जांच या संदेह या अभियोग की प्रक्रिया बाधित हो.
इस जवाब ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या मोदी और तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी के बीच हुए पत्र व्यवहार में दंगाइयों या सामूहिक हत्या के जिम्मेदार लोगों के बारे में कोई जानकारी है.
आरटीआई आवेदन में पीएमओ और गुजरात सरकार के बीच 27 फरवरी 2002 से 30 अप्रैल 2002 तक राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर हुए सभी पत्र व्यवहार की प्रतियों की मांग की गई थी.
आवेदन में वाजपेयी और मोदी के बीच उस दौरान हुए पत्र व्यवहार की भी प्रतियां मांगी गई थीं, जब राज्य में माहौल तनावपूर्ण था.
देश के शीर्ष कार्यालय ने सूचना देने से इंकार करते हुए इसके पीछे के कारण के बारे में जानकारी नहीं दी जबकि दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि इस खंड के तहत सूचना देने से इंकार करने का अकाट्य कारण बताया जाना चाहिए.
न्यायमूर्ति रवींद्र भट्ट ने कहा था कि यह साफ है कि जांच प्रक्रिया की मौजूदगी मात्र को सूचना देने से इंकार करने का आधार नहीं बनाया जा सकता है. सूचना रखने वाले प्राधिकरण को संतोषजनक कारण बताना चाहिए कि जानकारी को उजागर करने से जांच प्रक्रिया कैसे बाधित होगी.
-एजेंसी

शुक्रवार, 13 दिसंबर 2013

विधायक जी बोले...लाश ठिकाने लगवा देंगे

आजमगढ़। 
उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार के एक विधायक ने ठेका न मिलने पर एक पंचायत ‌‌अधिकारी को जान से मारने की धमकी दी है। धमकी में उन्होंने पंचायत ‌‌अधिकारी से कहा कि उनके आदमी तुम्हारी हत्या कर लाश ठिकाने लगा देंगे। पंचायत ‌‌अधिकारी ने जिले के आला अधिकारियों के साथ-साथ मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव को पत्र भेज कर कार्यवाही की मांग की है। यह मामला आजमगढ़ जिले की जीयनपुर नगर पंचायत का है। आरोपी विधायक अभय नारायण पटेल सगड़ी विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हैं।
सपा विधायक का कहना है कि पंचायत ‌‌अधिकारी के स्थानांतरण के लिए उन्होंने नगर विकास मंत्री आजम खां को पत्र लिखा था। मामले की जांच शुरू होते ही पंचायत ‌‌अधिकारी अनाप-शनाप आरोप लगा रहे हैं।
'लाश ठिकाने लगा देंगे'
पंचायत ‌‌अधिकारी धुरंधर सिंह मूलरूप से देवरिया जिले के लार कस्बे के निवासी हैं। उनके शिकायती पत्र के अनुसार आठ दिसंबर को तबीयत खराब होने पर वह इलाज कराने के लिए अपने घर गए थे। इस बीच रात आठ बजे सपा विधायक अभय नारायण पटेल का उनके मोबाइल पर फोन आया।
आरोप है कि अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए विधायक ने कहा, 'मेरे आदमियों को ठेका नहीं दिया। अब तुम्हें यहां रहने नहीं दिया जाएगा। मेरे आदमी तुम्हारी हत्या कर लाश ठिकाने लगा देंगे।'
इससे भयभीत पंचायत ‌‌अधिकारी ने पत्र में कहा कि जीयनपुर में अब नौकरी करने लायक नहीं रह गया है। विधायक किसी भी समय हत्या करवा सकते हैं।
आरोप बेबुनियाद
विधायक अभय नारायण पटेल का कहना है कि जीयनपुर की जनता की शिकायत पर उन्होंने इस साल 22 मई को पंचायत ‌‌अधिकारी के स्थानांतरण के लिए नगर विकास मंत्री आजम खां को पत्र लिखा था। इस संबंध में जांच की जा रही है।
पटेल ने बताया कि आठ दिसंबर को उन्होंने पंचायत ‌‌अधिकारी को फोन किया तो वह गाली-गलौज करने लगे। कहा कि कौन बोल रहे हैं। मैंने कहा विधायक अभय नारायण बोल रहा हूं। तब पंचायत ‌‌अधिकारी माफी मांगने लगे। विधायक ने कहा कि जांच शुरू होने से बौखलाए पंचायत ‌‌अधिकारी मेरे खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं।
-एजेंसी

5 करोड़ लेकर दरोगा ही बचा रहा था नारायण साईं को

अहमदाबाद। 
गुजरात पुलिस ने क्राइम ब्रांच के सब-इंस्पेक्टर सीएम कुंभानी को गिरफ्तार किया है। कुंभानी पर नारायण साईं की मदद करने का आरोप है। प्राप्त जानकारी के अनुसार कुंभानी के घर से ‍पुलिस ने 5 करोड़ रुपए और आठ मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। कुंभानी ने नारायण साईं को भागने में मदद की थी। कुंभानी की मदद की वजह से ही नारायण लंबे समय तक पुलिस की गिरफ्त स दूर रहने में कामयाब रहा था।
पता चला है कि कुंभानी पुलिस की रणनीति की पूरी जानकारी नारायण साईं के सेवक को देता था, जिसके माध्यम से जानकारी नारायण तक पहुंचती थी और जब पुलिस संभावित ठिकानों पर छापेमारी करती तो उसके हाथ कुछ नहीं लगता है।
चूंकि नारायण को पुलिस कार्यवाही की पहले ही जानकारी मिल जाती थी, अत: पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह अपने ठिकाने बदल लेता था। इस मदद के बदले कुंभानी को 5 करोड़ रुपए मिले थे। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों गिरफ्तार नारायण अभी सूरत पुलिस के ही कब्जे में है।
इसके साथ ही पुलिस ने नारायण साईं के खिलाफ एक और एफआई दर्ज कर ली है। नारायण ने पूछताछ में सनसनीखेज खुलासा किया है कि कुल 30 करोड़ रुपए रिश्वत के रूप में दिए जाने थे। यह पैसा साईं के सभी मददगारों के बीच बंटना था।
-एजेंसी
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...