बुधवार, 12 जनवरी 2022

कुछ तो बड़ा संकेत दे रहा है यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का बार-बार श्रीकृष्ण जन्मभूमि पहुंचना


 भारतीय जनता पार्टी सहित सभी हिंदूवादी संगठनों का कभी ये नारा हुआ करता था- “राम, कृष्‍ण, विश्‍वनाथ…तीनों लेंगे एकसाथ”।

हिंदूवादी दलों के इस नारे पर तब विपक्ष भी तंज कसता था क्‍योंकि राम मंदिर का ही विवाद सुलझने में नहीं आ रहा था, तो श्रीकृष्‍ण जन्‍मभूमि तथा काशी विश्‍वनाथ की बात अतिशयोक्ति लगती थी।
लंबी कानूनी लड़ाई के बाद जब तक अयोध्‍या में राम मंदिर के निर्माण का रास्‍ता साफ हुआ, तब तक भाजपा को एकबात पूरी तरह समझ में आ चुकी थी कि कानूनी लड़ाई लड़कर वह अपने नारे को कभी सार्थक नहीं कर सकती।
इसके अलावा अब वो स्‍थितियां-परिस्‍थितियां भी नहीं रहीं कि धर्म व आस्‍था से जुड़े किसी केस का निपटारा कराने के लिए साल-दर-साल अदालतों का मुंह देखा जाए।
संभवत: इसीलिए अयोध्‍या का फैसला आने से पहले ही नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व वाली भाजपा की सरकार ने काशी विश्‍वनाथ और ज्ञानवापी मस्‍जिद के विवाद को हल करने का ऐसा नायाब तरीका खोज लिया जिससे ‘सांप मर जाए और लाठी भी न टूटे’ वाली कहावत चरितार्थ होती हो।
काशी चूंकि प्रधानमंत्री मोदी का संसदीय क्षेत्र था इसलिए इस ड्रीम प्रोजेक्‍ट को निर्धारित समय के अंदर पूर्ण कराने में यूपी के सीएम योगी आदित्‍यनाथ ने भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ी नतीजतन देखते ही देखते एक भव्‍य विश्‍वनाथ कॉरीडोर सबके सामने है।
मोदी-योगी की जुगलबंदी ने एक बड़ी लाइन खींचकर काशी विश्‍वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्‍जिद के विवाद को इतना छोटा कर दिया कि उसका कोई महत्‍व ही नहीं रह गया। न अयोध्‍या की तरह मस्‍जिद की तरफ आंख उठाकर देखने की जरूरत पड़ी और न अदालती नतीजे का इंतजार करना पड़ा।
कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि मोदी सरकार ने बड़े सलीके से राम मंदिर निर्माण से पहले काशी विश्‍वनाथ का मुद्दा हल कर लिया।
जाहिर है कि अब सबका फोकस मथुरा स्‍थित श्रीकृष्‍ण जन्मभूमि बनाम शाही मस्‍जिद ईदगाह विवाद पर है। इसे लेकर हाल में दायर हुए वादों की बात यदि छोड़ भी दी जाए तो सन् 1967 से यह विवाद न्‍यायालय में लंबित है। यानी पिछले 54 वर्षों से ये मामला विचाराधीन है।
इन हालातों में यदि ये कहा जाए कि काशी विश्‍वनाथ कॉरिडोर की तरह मथुरा में भी एक भव्‍य श्रीकृष्‍ण जन्‍मभूमि कॉरिडोर बनाकर कृष्‍ण जन्‍मभूमि व शाही मस्‍जिद ईदगाह के विवाद की न सिर्फ हवा निकाली जा सकती है बल्‍कि उसे इतना बौना बनाया जा सकता है कि वह अपना महत्‍व ही खो दे, तो कुछ गलत नहीं होगा।
यह इसलिए भी संभव है कि कटरा केशवदेव के दायरे में बनी शाही मस्‍जिद ईदगाह पर किसी भी किस्‍म के निर्माण अथवा जीर्णोद्धार को लेकर कानूनी बंदिशें पहले से लागू हैं जबकि श्रीकृष्‍ण जन्‍मभूमि को विस्‍तार देने में ऐसी कोई बाधा नहीं है।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की मथुरा के संदर्भ में पिछले दिनों से लगातार की जा रही बयानबाजी यह बताती है कि कुछ तो ऐसा है जो भाजपा सरकार सोचे बैठी है और जिससे “राम, कृष्‍ण, विश्‍वनाथ…तीनों लेंगे एकसाथ” का नारा फलीभूत किया जा सकता है।
कल यानि 19 दिसंबर 2021 को भी मथुरा में अपनी जनसभा करने आए सीएम योगी आदित्‍यनाथ जिस तरह अचानक बिना तय कार्यक्रम के श्रीकृष्‍ण जन्‍मस्‍थान जा पहुंचे उससे साफ संकेत मिलता है कि उनके दिमाग में कुछ तो बड़ा चल रहा है।
योगी आदित्‍यनाथ का बहुत कम समय के अंतराल में श्रीकृष्‍ण जन्‍मस्‍थान पर यह पांचवा दौरा था, इस कारण भी चर्चाएं होना स्‍वाभाविक हैं। बेशक अभी चुनावों की विधिवत घोषणा का लोगों को इंतजार है किंतु फिजा में तैर रही बयार इसकी पुष्‍टि कर रही है कि दुंदुभि बज चुकी है, बस औपचारिकता शेष है।
यही कारण है कि सीएम योगी के कृष्‍ण जन्‍मस्‍थान दौरे की टाइमिंग से इस आशय के संकेत मिल रहे हैं। अब देखना कुछ बाकी है तो केवल यह कि इसका ऐलान कब तथा किस रूप में किया जाता है।
-सुरेन्‍द्र चतुर्वेदी

“योगीराज श्रीकृष्‍ण” की जन्‍मभूमि से “सीएम योगी” के चुनाव लड़ने की चर्चाएं!


 इन दिनों योगीराज श्रीकृष्‍ण की जन्‍मभूमि से सीएम योगी आदित्‍यनाथ के चुनाव लड़ने की राजनीतिक हलकों में खूब चर्चा हो रही है। पांच राज्‍यों में होने वाले चुनावों से पहले इस तरह की चर्चा होने का एक प्रमुख कारण उनका राम, कृष्‍ण और विश्‍वनाथ की भूमि पर विशेष फोकस होना बताया जा रहा है।

चूंकि राम जन्‍मभूमि पर सर्वोच्‍च न्‍यायालय का आदेश आने के बाद वहां मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो चुका है, और काशी विश्‍वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन इसी महीने की 13 तारीख को पीएम मोदी करने जा रहे हैं इसलिए कहा जा रहा है कि अब कृष्‍ण जन्‍मभूमि यानी मथुरा पर पूरा ध्‍यान केंद्रित है।
कृष्‍ण जन्‍मस्‍थान क्षेत्र में बनी मथुरा की शाही मस्‍जिद ईदगाह के अंदर बाबरी ध्‍वंस के दिन 06 दिसंबर को लड्डू गोपाल का जलाभिषेक करने की घोषणा के बाद हालांकि पुलिस-प्रशासन ने अपनी सारी ताकत झोंक कर स्‍थिति को संभाल लिया किंतु इस बीच प्रदेश के उप मुख्‍यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान यह बताते रहे कि मथुरा स्‍थित कृष्‍ण जन्‍मभूमि का मुद्दा अब उनकी प्राथमिकता है और वह धर्म व आस्‍था के मामले में कोई समझौता नहीं करेंगे।
उप मुख्‍यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इन बयानों को आम जनता योगी सरकार की मंशा ही मान रही है, हालांकि पुलिस-प्रशासन हमेशा की तरह अपना काम करता दिखाई दे रहा है।
दरअसल, कुछ समय से एक प्रश्‍न इस आशय का उठाया जाने लगा है कि क्या रामनगरी अयोध्‍या तथा बाबा विश्‍वनाथ की नगरी काशी की अपेक्षा कृष्‍ण की नगरी मथुरा को योगी सरकार कम तरजीह दे रही है और इसीलिए मथुरा का विकास उसकी गरिमा के अनुरूप अब तक नहीं हो पाया है।
इसी संदर्भ में मथुरा के लोग भी उत्तर प्रदेश तीर्थ विकास परिषद् के कामकाज सहित उसके लिए नियुक्त अधिकारियों की नेकनीयती पर शंका कर रहे हैं, जिससे संदेश अच्‍छा नहीं जा रहा।
जाहिर है कि चुनावी मौसम में यह संदेश प्रदेश स्‍तर पर नुकसान पहुंचा सकता है क्‍योंकि इसका सीधा संबंध धर्म से है और धर्म की ध्‍वजा फिलहाल भाजपा ने ही उठा रखी है।
ऐसा कोई संदेश न जाए और इसका कोई खामियाजा न भुगतना पड़े इसलिए सीएम योगी आदित्‍यनाथ को मथुरा से लड़ाने पर विचार किए जाने की खबरें आ रही हैं।
भाजपा का शीर्ष नेतृत्‍व जानता है कि योगी को मथुरा से चुनाव लड़ाकर पूरे प्रदेश ही नहीं, देशभर तक यह बात पहुंचाई जा सकती है कि अयोध्‍या तथा काशी की तरह मथुरा भी भाजपा के शीर्ष एजेंडे का हिस्‍सा है और वह इसके विकास में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।
इस सबके अलावा यूं भी भाजपा मथुरा की 4 जीती हुई सीटों में से कोई सीट गंवाना नहीं चाहेगी। इसलिए संभव है कि योगी जी को यहां से चुनाव लड़ाने पर विचार किया जा रहा हो।
गौरतलब है कि आरएसएस ने मथुरा की कुल 5 विधानसभा सीटों में से 3 सीटों पर प्रत्‍याशी बदलने का मशविरा दिया था, जिसका सीधा अर्थ यह था कि सिटिंग विधायकों के बूते 2017 को दोहराना आसान नहीं होगा।
अब देखना यह है कि राम, कृष्‍ण, विश्‍वनाथ तीनों के पावन धामों को एक ही चश्‍मे से देखने का दावा करने वाली भाजपा क्या वाकई मथुरा को लेकर गंभीर है या फिलहाल होहल्‍ला मचाकर इसे होल्‍ड पर रखना चाहती है।
-सुरेन्‍द्र चतुर्वेदी

6 December 2021: पैरा मिलिट्री फोर्स के हवाले होगा “मथुरा” का श्रीकृष्‍ण जन्‍मस्‍थान क्षेत्र, ढिलाई के मूड में नहीं है जिला प्रशासन

 छह दिसंबर को लेकर पुलिस-प्रशासन पूरी तरह चौकस नजर आ रहा है। परिंदा पर न मार सके, ऐसा सुरक्षा खाका यलो जोन में खींचा गया है। आगरा मंडल से आने वाला फोर्स आज (शुक्रवार) शाम से अपने प्वाइंटों पर मुस्तैद हो जाएगा। मंडलायुक्त अमित गुप्ता और आईजी नचिकेता झा ने मथुरा के पुलिस अफसरों के मंथन करके सख्ती से निपटने के लिए कहा गया है। हालांकि धार्मिक संगठन और सामाजिक संगठनों ने ईदगाह पर संकल्प यात्रा व जलाभिषेक करने का एलान स्थगित कर दिया है, बावजूद इसके पुलिस-प्रशासन कतई भी ढिलाई के मूड में नहीं है। मंडलायुक्त और आईजी ने मथुरा आकर मथुरा के डीएम नवनीत सिंह चहल, एसएसपी डॉक्टर गौरव ग्रोवर, एसपी सिटी मार्तंड प्रकाश सिंह, एसपी सुरक्षा आनंद कुमार आदि अफसरों के संग मंथन करके पूरी तरह से सतर्क और सजग रहते हुए सख्ती बरतने के लिए कहा है। छह दिसंबर को लेकर पुलिस और पैरा मिलिट्री फोर्स शुक्रवार की शाम को मथुरा पहुंच जाएगा।

आगरा मंडल ने आने वाले फोर्स की बीती रात ही ड्यूटियां निश्चित कर दी गईं। हर हाल में पुलिस सख्ती से निपटने के लिए तैयार है। एसपी सिटी मार्तंड प्रकाश सिंह ने बताया कि शुक्रवार की शाम से फोर्स ड्यूटी पर मुस्तैद नजर आएगा।
जुमे की नमाज को लेकर भी पुलिस की सख्ती
जुमे की नमाज को लेकर भी पुलिस-प्रशासन पूरी तरह से सतर्क और सजग दिखा। चप्पे-चप्पे पर पुलिस और पीएसी के जवानों को लगाया गया था। खुद एसएसपी डॉक्टर गौरव ग्रोवर ने कमान संभाली। सुबह से पुलिस-प्रशासन के अफसरों का जमावड़ा डीग गेट पर होगा।
पूर्वमंत्री ठा. तेजपाल सिंह ने यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या के श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर बयान पर आपत्ति जताते हुए शांत माहौल में जहर घोलने वाला करार दिया है। पूर्वमंत्री का कहना है कि योगीराज श्रीकृष्ण ने पूरी दुनिया को शांति का संदेश दिया। उसी की नगरी के शांत माहौल को बिगाड़ने के लिए यूपी सरकार के उपमुख्यमंत्री फिजूल का बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृष्ण की नगरी में सभी भाईचारे और सौहार्दपूर्ण तरीके से रह रहे हैं। शांतिप्रिय जिला है। इस जिले की शांतिभंग करने पर भाजपा पूरी तरह से उतारू है। पूर्वमंत्री ने जनपद की जनता से शांति बनाए रखते हुए सौहार्दपूर्ण तरीके से रहने की अपील की है।
सख्ती से निपटने को पुलिस तैयार
माहौल बिगाड़ने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा। सोशल मीडिया पर भी पूरी निगाह रखी जा रही है। हर हाल में माहौल का शांत बनाए रखा जाएगा। -डॉ. गौरव ग्रोवर, SSP

बुधवार, 1 दिसंबर 2021

मथुरा की मशहूर यूनिवर्सिटी के कैंपस में HOD ने किया छात्र के साथ दुष्कर्म, कई घंटे हंगामे के बाद दर्ज हुई FIR


 मथुरा में नेशनल हाईवे नंबर- 2 पर स्‍थित उत्तर प्रदेश की नामचीन यूनिवर्सिटी के एक HOD ने अपने ही छात्र से कैंपस के अंदर न केवल दुष्‍कर्म किया बल्‍कि जान से मारने की धमकी भी दी।

इस सनसनीखेज वारदात की सूचना मिलने के बाद यूनिवर्सिटी पहुंचे पीड़ित के परिजनों ने कई घंटे जमकर हंगामा काटा, तब कहीं जाकर इलाका पुलिस द्वारा देर रात HOD के खिलाफ FIR दर्ज की गई। वो भी इस शर्त पर कि FIR में यूनिवर्सिटी के नाम का उल्‍लेख नहीं किया जाएगा।
बताया जाता है कि FIR दर्ज होने पर HOD को पुलिस ने तत्‍काल हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी थी।
थाना कोतवाली वृंदावन में दर्ज कराई गई FIR के अनुसार करीब 15 दिन पहले ही जिला हाथरस की तहसील सादाबाद के निवासी करीब 18 वर्षीय छात्र ने यहां B-Tech Civil में एडमिशन लिया था।
कल दिनांक 30 नवंबर की शाम लगभग 5.30 बजे इस छात्र को HOD अभितांसू पटनायक ने यूनिवर्सिटी कैंपस स्‍थित अपने आवास पर किसी टॉपिक के डाउट क्‍लीयर करने के बहाने बुलाया और फिर कमरे का दरवाजा बंद कर दुष्‍कर्म किया जबकि छात्र यथासंभव विरोध करता रहा। छात्र द्वारा विरोध किए जाने पर HOD ने उससे कहा कि तुझे पास होना है या नहीं।
तहरीर के मुताबिक अपने साथ किए गए इस घृणित कृत्‍य की जानकारी छात्र ने अपने एक साथी और मामा को दी, जिसके बाद छात्र के परिजनों को पता लगा।
चूंकि मथुरा स्‍थित यूनिवर्सिटी से हाथरस जनपद की तहसील सादाबाद बहुत अधिक दूर नहीं है इसलिए पीड़ित छात्र के परिजन कुछ ही देर में यूनिवर्सिटी जा पहुंचे और उन्‍होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन से जवाब तलब करना शुरू कर दिया।
पीड़ित पक्ष के अनुसार उनके पहुंचने तक यूनिवर्सिटी के प्रबंधतंत्र ने आरोपी HOD के खिलाफ अपनी ओर से कोई कार्रवाई नहीं की थी लिहाजा परिजनों सहित छात्रों में भी रोष व्‍याप्‍त होना स्‍वभाविक था।
बताया जाता है कि कई घंटों तक यूनिवर्सिटी कैंपस में हंगामा होने के बाद देर रात एक बजे थाना कोतवाली वृंदावन में HOD अभितांसू पटनायक के खिलाफ आईपीसी की धारा 377 तथा 506 के तहत FIR दर्ज की गई, लेकिन वो भी इस शर्त पर कि पीड़ित परिवार तहरीर में यूनिवर्सिटी के नाम का उल्‍लेख नहीं करेगा।
पीड़ित परिवार का कहना है कि पुलिस ने देर रात आरोपी HOD अभितांसू पटनायक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी थी।
जो भी हो, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम से एक बात जरूर साफ होती है कि तमाम सुविधाओं और छात्र सुरक्षा का ढोल पीटने तथा ऊंची रैंक हासिल कर लेने वाले बड़े-बड़े विश्‍वविद्यालय वास्‍तव में छात्रों को सुविधा व सुरक्षा दोनों ही देने में असमर्थ हैं।
यही नहीं, जब कभी कोई बात छात्रों और स्‍टाफ के बीच आती है तो यूनिवर्सिटी का प्रबंधतंत्र हरसंभव प्रयास स्‍टाफ को बचाने का ही करता है और अंत तक सारा दोष छात्र या उसके परिजनों के सिर मढ़ने की कोशिश में लगा रहता है।
बहरहाल, पीड़ित परिवार का कहना है कि वो इस मामले में यूनिवर्सिटी के प्रबंधतंत्र से कोई समझौता नहीं करेंगे और चूंकि छात्र के साथ दुष्‍कर्म यूनिवर्सिटी के कैंपस में हुआ है इसलिए जांच के दौरान यूनिवर्सिटी के नाम का खुलासा करवाकर रहेंगे अन्‍यथा इसके लिए जिस स्‍तर तक जाना होगा जाएंगे, ताकि फिर कभी कोई शिक्षक इस तरह का दुस्‍साहस न कर सके तथा गुरू-शिष्‍य के रिश्‍ता कलंकित न हो।
-Legend News

मंगलवार, 23 नवंबर 2021

हिंदू और हिंदुत्‍व: एक नेता ने कही… दूसरे नेता ने मानी… दोनों हैं ज्ञानी…बस इतनी ही है कहानी…बाकी सब बेमानी


 

पिछले दिनों अपनी पार्टी के ‘एक नेता’ की ‘किताब’ के समर्थन में ‘दूसरे नेता’ ने जुबानी जमा खर्च करते हुए ‘कुतर्क’ पेश किया कि हिंदू और हिंदुत्‍व यदि एक ही हैं तो इनके नाम अलग-अलग क्यों हैं।

पहली नजर के प्‍यार की तरह समझें तो इन ‘दूसरे नेताजी’ की बात विद्योत्तमा और कालीदास के बीच हुए कथित शास्‍त्रार्थ से उपजे ज्ञान सरीखी लगती है किंतु गहराई में झांकें तो साफ-साफ दिखाई देता है कि ये भी आलू से सोना निकालने की तकनीक सा कोई ऐसा कारनामा था जिसे स्‍क्रिप्‍ट राइटर की शह पर पार्टी के राष्‍ट्रीय ट्रेनिंग कैंप में कार्यकर्ताओं के समक्ष परोस दिया गया ताकि बात निकले तो दूर तक जाए और उसे कार्यकर्ता भी इसी ‘ज्ञानमार्ग’ पर आगे बढ़ा सकें क्योंकि एक ने कही… दूसरे ने मानी… दोनों ज्ञानी।
लेकिन परेशानी तब खड़ी हो गई जब कार्यकर्ताओं के इस कैंप में किसी नौसिखिए चाटुकार ने मंच की ओर कुछ गंभीर प्रश्‍न उछाल दिए।
प्रश्‍न कुछ यूं थे कि सर… हिंदू व हिंदुत्‍व की तरह यदि गांधी, नेहरू एवं वाड्रा भी अलग-अलग हैं तो फिर ये एक क्यों हैं? फिरोजी पीछे कैसे छूट गए, और क्या कोई फिरोजी अब तक शेष है?
नेहरू, गांधी कैसे हो गए…और वाड्रा अब तक गांधी कैसे बने हुए हैं?
बहुत कन्‍फ्यूजन है सर… कुछ स्‍पष्‍ट कीजिए…हिंदू और हिंदुत्‍व की तरह कुछ इन पर भी प्रकाश डालिए।
ये भी बताइए कि नेहरू कब विलुप्‍तप्राय हुए और देखते-देखते विलुप्‍त कैसे हो गए, उन्‍हें बचाने का कोई प्रयास किसी स्‍तर पर क्यों नहीं किया गया?
क्या इस देश में अब भी कोई नेहरू शेष है, और है तो वो कहां पाया जाता है?
भविष्‍य में वाड्रा बचेंगे या नहीं, और उन्‍हें संरक्षित करने का गांधियों द्वारा क्या कोई उपाय किया जा रहा है?
साथ ही सर ये भी बताइए कि पप्‍पू और मूर्ख अगर एक दूसरे के पर्यायवाची हैं तो इनके नाम अलग-अलग क्यों हैं, यदि ये अलग-अलग शब्‍द हैं तो इन्‍हें कब से तथा क्यों एक ही मान लिया गया?
गधे को वैशाखनंदन क्यों कहा जाता है और उसका ‘वैशाख’ से क्या ताल्‍लुक है?
चाटुकार की चपलता भांप नेताजी ने तत्‍काल प्रभाव से पाला बदला और कहने लगे, मैंने उपनिषद् भी पढ़े हैं इसलिए मुझसे तर्क मत कीजिए। यहां आप तर्क करने नहीं ‘कुतर्क’ सुनने के लिए लाए गए हैं।
चूंकि कार्यकर्ता नया-नया था और चाटुकारिता में पूरी तरह दक्ष नहीं हो सका था अत: उसकी जिज्ञासा इतने से शांत नहीं हुई।
उसने पिछले प्रश्‍नों का उत्तर न मिलने की झुंझलाहट में एक और प्रश्‍न दाग दिया। पूछ लिया- सर… सर… आपने तो उपनिषद् पढ़े ही हैं, तो इतना ही बता दीजिए कि क्या वो सिर्फ पढ़ने से समझ में आ जाते हैं?
क्या कोई भी किताब जिसे हम पढ़ते हों, वो समझ में आ जाती है, और आ जाती है तो बहुत से लोगों को पांच दशक तक पढ़ने के बावजूद ‘पॉलिटिकल साइंस’ समझ में क्यों नहीं आई?
नेता जी अब तक समझ चुके थे कि उनकी समझदानी में इतने सारे सवाल एकसाथ नहीं समा सकते। वो हिंदू और हिंदुत्‍व की किसी स्‍क्रिप्‍ट राइटर द्वारा मनगढ़ंत व्‍याख्‍या तो उछाल सकते हैं लेकिन उससे उपजे प्रश्‍नों को नहीं झेल सकते इसलिए उन्‍होंने डाइस पर साथ बैठे पूर्ण दक्ष चाटुकार के कान में कोई मंत्र फूंका।
फिर धीरे से शर्ट के ऊपर पहना हुआ जनेऊ ठीक किया और उठ खड़े हुए किसी ऐसे नए मुद्दे को हथियाने जिससे पार्टी के पेड़ की उस साख पर आरी चलाई जा सके जिससे अब तक लटक कर काम चला पा रहे हैं।
-सुरेन्‍द्र चतुर्वेदी

शनिवार, 13 नवंबर 2021

चुनाव से पहले चुभता सवाल: क्या “राम नगरी” और “कृष्‍ण नगरी” में भेदभाव बरत रही है योगी सरकार?


 











भगवान विष्‍णु के आठवें पूर्ण अवतार महाभारत नायक योगीराज श्रीकृष्‍ण की पावन जन्‍मस्‍थली मथुरा को लेकर गरुण पुराण में कहा गया है- “अयोध्‍या, मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी, कांची, अवंतिका (उज्‍जैन), पुरी, द्वारावती चैव सप्‍तैता मोक्षदायिका”।

गर्ग संहिता में कहा गया है कि पुरियों की रानी कृष्णापुरी ‘मथुरा’ बृजेश्वरी है, तीर्थेश्वरी है, यज्ञ तपोनिधियों की ईश्वरी है, यह मोक्ष प्रदायिनी धर्मपुरी मथुरा नमस्कार योग्य है।
पद्म पुराण के अनुसार- काश्यात्यो यद्यपि सन्ति पुर्यस्तासां हु मध्ये मथुरैव धन्या। तां पुरी प्राप्त मथुरांमदीयां सुर दुर्लभाम्।।
ऋग्वेद की एक ऋचा में ब्रज के बाबत इन्द्र कहते हैं “अहो मधुपुरी धन्या, वैकुण्ठाच्च गरीयसी। बिना कृष्ण प्रसादेन, क्षणमेकं न तिष्ठति।।’”
अर्थात् मधुपुरी (मथुरा) धन्य और वैकुण्ठ से भी श्रेष्ठ है, वैकुण्ठ में तो मनुष्य अपने पुरुषार्थ से पहुंच सकता है पर यहां श्रीकृष्ण की आज्ञा के बिना कोई एक क्षण भी ठहर नहीं सकता।’
सोलह कला अवतार भगवान श्रीकृष्‍ण की जिस जन्‍मभूमि मथुरा की महिमा और महत्ता से हमारे तमाम धर्मग्रन्‍थ भरे पड़े हैं, उस पवित्र ब्रज भूमि के वासी आज यह प्रश्‍न पूछने को क्यों मजबूर हैं कि क्या योगी आदित्‍यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ”राम नगरी” और कृष्‍ण नगरी” में भेदभाव बरत रही है?
दरअसल, योगी सरकार ने पिछले दिनों कृष्‍ण की इस नगरी के कुल 72 वार्डों में से मात्र 22 वार्डों को तीर्थस्‍थल घोषित किया है जबकि मथुरा का तो कण-कण आज भी श्रीकृष्‍ण की उपस्‍थिति का अहसास कराता है।
ब्रज रज की महिमा का उल्‍लेख करते हुए लिखा गया है कि “मुक्‍ति कहे गोपाल से, मेरी मुक्‍ति बताय, ब्रज रज उड़ मस्‍तक लगे तो मुक्‍ति मुक्‍त है जाय”।
यानी बारबार जन्‍म और मरण के बंधन को तोड़ने वाली ‘मुक्‍ति’ को भी ब्रज की रज ही मुक्‍ति प्रदान कर सकती है।
सौभाग्‍य से उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री एक योगी हैं और वो गोरखनाथ पीठ के महंत भी हैं लिहाजा धर्म के बारे में उनके ज्ञान पर उंगली नहीं उठाई जा सकती, किंतु ऐसा लगता है कि मथुरा को लेकर राजनैतिक कारणों से उन्‍हें भ्रमित किया जा रहा है।
योगी जी को यह समझना होगा कि ब्रज ‘चौरासी कोस’ में फैला है और इस संपूर्ण चौरासी कोस की यात्रा का केन्‍द्रबिंदु ‘मथुरा’ है, जहां से ‘अंतग्रही’ करके ब्रजयात्रा का शुभारंभ किया जाता है। प्रतिवर्ष इसके लिए लाखों लोग देशभर से आते हैं।
भौगोलिक दृष्‍टि से बेशक आज इस यात्रा के बहुत से पड़ाव पड़ोसी राज्‍य राजस्‍थान की सीमा में आते हैं किंतु जो हिस्‍से यूपी की सीमा में हैं, वो निर्विवाद हैं इसलिए उन्‍हें टुकड़ों में बांटकर तीर्थस्‍थल घोषित करना समझ से परे है।
हालांकि योगी आदित्‍यनाथ की सरकार से पहले भी राजनीतिक जगत में मथुरा उपेक्षित ही थी लेकिन पहले केंद्र में मोदी सरकार और फिर राज्‍य में योगी सरकार बन जाने के बाद ब्रजवासियों को उम्‍मीद थी कि अब शायद कृष्‍ण नगरी का विकास उसकी प्रतिष्‍ठा व गरिमा के अनुरूप होगा, परन्‍तु ऐसा होते दिखाई नहीं दे रहा।
बाहरी कलाकारों पर लाखों रुपया खर्च करके कभी ‘होली उत्‍सव’ तो कभी ‘ब्रज रज उत्‍सव’ मना लेने से मथुरा का विकास नहीं हो सकता। मथुरा का संपूर्ण विकास तभी संभव है जब किसी सरकार के मन में राजनीति से परे इसके विकास की ईमानदार इच्‍छा हो और वो इसके लिए वो ऐसे लोगों को जोड़े जो ब्रजभूमि की समस्‍याओं से भलीभांति परिचित हों तथा निस्‍वार्थ भाव रखते हुए सरकार का मार्गदर्शन कर सकें अन्‍यथा ”तमाशे” चाहे जितने ही क्‍यों न कर लिए जाएं, मूर्धन्‍यों का मखौल इसी प्रकार उड़ता रहेगा।
2014 के लोकसभा चुनावों से पहले मथुरा में अपनी चुनावी सभा के दौरान प्रधानमंत्री पद के उम्‍मीदवार नरेन्‍द्र मोदी ने साबरमती की भांति यमुना को प्रदूषण मुक्‍त कराने वादा किया था किंतु 7 साल बाद भी कृष्‍ण की पटरानी कहलाने वाली कालिंदी (यमुना) प्रदूषण से मुक्‍ति का इंतजार कर रही है। वो भी तब जबकि यमुनोत्री के उद्गम स्‍थल के बाद मथुरा ही यमुना का एकमात्र प्रसिद्ध तीर्थस्‍थल है।
यहां विश्राम घाट पर यम और यमुना (भाई-बहिन) के मंदिर हैं और ऐसी मान्‍यता है कि यमद्वितिया (भैया दौज) के दिन यदि भाई-बहिन हाथ पकड़कर यमुना स्‍नान करते हैं तो उन्‍हें यम के फांस से मुक्‍ति मिलती है। इसीलिए इस पर्व पर यहां देशभर से लाखों श्रद्धालु स्‍नान करने आते हैं।
मथुरा जनपद के कोसी क्षेत्र अंतर्गत कोकिलावन में शनिदेव का कृष्‍णकालीन मंदिर है और यहां भी प्रति शनिवार और मंगलवार दूर-दूर से यात्रा करके बड़ी संख्‍या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कृष्‍ण की आल्‍हादिनी शक्‍ति राधा ने भी इसी मथुरा के रावल में जन्‍म लिया था। बरसाना भी राधा (लाड़िली जू) का भव्‍य मंदिर है जहां प्रतिवर्ष राधाअष्‍टमी घूमधाम से मनाई जाती है।
ये तो उदाहरण मात्र हैं अन्‍यथा मथुरा का चप्‍पा-चप्‍पा तीर्थस्‍थल है, फिर उसे हिस्‍सों में बांटकर तीर्थस्‍थल घोषित करने की कोशिश सिवाय राजनीतिक प्रपंच के और कुछ नहीं हो सकता।
कहने के लिए बॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री हेमा मालिनी यहां से लगातार दूसरी बार लोकसभा पहुंची हैं और स्‍थानीय विधायक श्रीकांत शर्मा तथा लक्ष्‍मीनारायण चौधरी योगी सरकार में कबीना मंत्री हैं।
मथुरा के मेयर का पद भी भाजपा के पास है और जिले की पंचायत पर भी भाजपा का कब्‍जा है, बावजूद इसके यमुना में प्रदूषण कम होने की बजाय बढ़ता जा रहा है।
यमुना को प्रदूषण मुक्‍त और मथुरा का उसकी गरिमा के अनुरूप विकास कराने के केंद्र तथा राज्‍य सरकार के दावे उतने ही खोखले साबित हो रहे हैं, जितने कि पूर्ववर्ती सरकारों में साबित हुए थे।
आश्‍चर्य इस बात पर है कि यमुना को प्रदूषण मुक्‍त किए जाने में बड़ी भूमिका निभाने वाले राज्‍य हरियाणा में भी भाजपा की सरकार है लेकिन पता नहीं क्‍यों यमुना की दयनीय दशा में कोई सुधार न हुआ है और न होता दिखाई दे रहा है।
एकबार फिर उत्तर प्रदेश में चुनाव होने जा रहे हैं और योगी सरकार धर्म की ध्‍वजा के बूते दोबारा सत्ता पर काबिज होने का सपना संजोए बैठी है। श्रीराम भी भगवान विष्‍णु के अवतार थे और श्रीकृष्‍ण भी… फिर दोनों की जन्‍मस्‍थलियों में इतना भेदभाव क्‍यों, यह पूछने का अधिकार तो कृष्‍ण जन्मभूमि के वासियों का बनता ही है।
चूंकि चुनाव लगभग सिर पर आ चुके हैं और आचार संहिता लागू होने में थोड़ा ही समय बचा है तो यह प्रश्‍न और भी प्रासांगिक हो जाता है। बस जरूरत है तो इस बात की कि राजनीति से अधिक धर्म को समझने वाले योगी आदित्‍यनाथ ब्रजवासियों की भावना को भी समझें और समय रहते उसके अनुरूप निर्णय लें तो बेहतर होगा। उनके लिए भी और उनकी पार्टी के लिए भी, अन्यथा चुनाव हर पांच साल बाद होने ही हैं।
बेशक तीर्थस्‍थल के रूप में संपूर्ण मथुरा किसी नई पहचान की मोहताज नहीं है और टुकड़ों में बांटकर की जा रही घोषणाओं से उसकी महत्‍ता कम नहीं होगी परंतु इतना जरूर होगा कि राजनीति व नेकनीयती का फर्क सामने आ जाएगा।
हो सकता है कि यह फर्क इस बार नहीं तो अगली बार अपना असर दिखाए, क्‍योंकि बात निकली है तो दूर तक जाएगी ही।
-सुरेन्‍द्र चतुर्वेदी 

312.50 करोड़ के फ्रॉड केस में “नयति” की चेयरपर्सन नीरा राडिया से EOW ने की 4 घंटे तक पूछताछ


 312.50 करोड़ रुपए के कर्ज का गबन करने के मामले में दिल्‍ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने गत 27 अक्‍टूबर को नयति हेल्थकेयर की चेयरपर्सन और प्रमोटर नीरा राडिया से करीब 4 घंटे कड़ी पूछताछ की है।

दरअसल, नयति हेल्थकेयर के दो निदेशकों यतीश वहाल और सतीश कुमार नरुला को गत दिनों इस मामले में एक अन्‍य व्‍यक्‍ति राहुल सिंह के साथ गिरफ्तार किए जाने के बाद पुलिस ने राडिया को जांच में शामिल होने के लिए तलब किया था।
पिछले साल 4 नवंबर को पुलिस ने आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. राजीव कुमार शर्मा की शिकायत पर नारायणी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड, नीरा राडिया, उनकी बहन करुणा मेनन, सतीश नरुला और यतीश वहल पर धोखाधड़ी, अमानत में खयानत, खातों में हेराफेरी, फ्रॉड, धन के गबन समेत अन्य आरोपों के तहत एक FIR दर्ज की थी।
हालांकि नयति हेल्थकेयर के एक प्रवक्ता ने राडिया के खिलाफ आरोपों से इंकार करते हुए दावा किया था कि प्राथमिकी “निराधार” है और कंपनी बोर्ड हेराफेरी के आरोपों की जांच कर रहा है।
FIR के अनुसार आरोपियों ने दो अस्पतालों गुड़गांव में नयति मेडिसिटी और दिल्ली में विमहंस के लिए कर्ज लिया था, जहां डॉ. शर्मा “प्रमुख पदों” पर थे। शर्मा ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने नारायणी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से इन दो परियोजनाओं का धोखाधड़ी पूर्वक एक बड़ा हिस्सा हासिल कर लिया, जिसे बाद में नयति हेल्थकेयर एनसीआर नाम दिया गया।
शर्मा ने आरोप लगाया कि आरोपी ने अस्पताल को विकसित करने के लिए 312.50 करोड़ रुपये का कर्ज लिया और फिर निजी इस्तेमाल के लिए कर्ज का पैसा ट्रांसफर करने को ‘फर्जी खाते’ बनाए।
EOW के अतिरिक्त पुलिस कमिश्‍नर आर के सिंह के अनुसार “यस बैंक से 312.50 करोड़ रुपये का ऋण प्राप्त करने के बाद अहलूवालिया कंस्ट्रक्शन के नाम से 208 करोड़ रुपये एक बैंक खाते में स्थानांतरित किए गए। जांच करने पर पता चला कि यह खाता अहलूवालिया कंस्ट्रक्शन के प्रमोटर राहुल सिंह यादव ने खोला था। खातों को वहाल और नरुला द्वारा अधिकृत किया गया था।”
पुलिस के अनुसार नीरा राडिया से उसने लगभग 50 प्रश्न पूछे। राडिया ने सभी सवालों के जवाब दिए लेकिन 312.50 करोड़ रुपये के कर्ज पर संतोषजनक जवाब नहीं दिया। पुलिस ने बताया कि आने वाले दिनों में नीरा राडिया को फिर तलब किया जाएगा।
गौरतलब है कि मथुरा में नीरा राडिया ने दिल्‍ली-आगरा राष्‍ट्रीय राजमार्ग नंबर- 2 पर नयति मल्टी सुपर स्पेशलिटी के नाम से एक हॉस्पिटल खोला था, जो पिछले करीब ढाई महीने से बंद पड़ा है। नीरा राडिया के इस हॉस्पिटल में प्रसिद्ध चार्टर्ड एकाउंटेंट दीनानाथ चतुर्वेदी के पुत्र राजेश चतुर्वेदी का नाम भी बतौर प्रमोटर्स शामिल है। हॉस्पिटल बंद होने के बाद से नयति के कर्मचारी अपने वेतन तक को तरस गए हैं जबकि हॉस्पिटल के प्रबंधतंत्र का कहना है कि मेंटिनेंस के चलते हॉस्पिटल को कुछ समय के लिए बंद किया गया है।
बहरहाल, ”2G स्‍पैक्‍ट्रम” घोटाला हो या “पनामा लीक्‍स” और पेंडोरा लीक मामला, नीरा राडिया का नाम हर एक से जुड़ा है जिससे इतना तो साफ होता है कि नयति के मालिकों में शुमार इस महिला की न तो नीयत ठीक है और न नेकी से इसका दूर-दूर तक कोई संबंध है।
यही कारण है कि आने वाला समय नीरा राडिया के लिए और मुश्‍किल भरा हो सकता है, साथ ही नीरा राडिया के नयति की नीयति भी यही समय तय करने वाला है।
-सुरेन्‍द्र चतुर्वेदी
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