बुधवार, 13 नवंबर 2013

ऐसा व्‍यक्‍ति CBI जैसी संस्‍था का चीफ कैसे हो सकता है

सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा के क्रिकेट में सट्टेबाज़ी को क़ानूनी बनाने के मामले में बलात्कार का हवाला देने से विवाद खड़ा हो गया है. विभिन्न नारीवादी संगठनों और बुद्धजीवियों ने उनकी इस टिप्पणी की निंदा की है. द्रविड़ मंगलवार को दिल्ली में सीबीआई और राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा द्वारा आयोजित 'इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन इवॉल्विंग कॉंमन स्ट्रैटजीज़ टु कॉम्बैट करप्शन एंड क्राइम' में बोल रहे थे.
इसी मौक़े पर सिन्हा ने कहा, "क्रिकेट में सट्टेबाज़ी को क़ानूनी बनाने से कोई नुक़सान नहीं होगा क्योंकि ऐसा प्रतिबंध लगाने से कोई फ़ायदा नहीं जिसे लागू न किया जा सके."
सट्टेबाज़ी
सिन्हा ने कहा, "अगर आप सट्टेबाज़ी पर प्रतिबंध लागू नहीं कर सकते… तो कुछ वैसा ही कहना हो गया कि अगर आप बलात्कार को रोक नहीं सकते तो उसका मज़ा लीजिए."
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सीबीआई के प्रवक्ता ने रंजीत सिन्हा के बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा, "सिन्हा का बयान सट्टेबाज़ी के संदर्भ में दिया गया था, वो क्रिकेट में सट्टेबाज़ी को क़ानूनी बनाने के मसले पर बोल रहे थे."
सिन्हा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए आल इंडिया प्रोग्रेसिव वुमन्स एसोसिएशन (एआईपीडब्ल्यूए) की सचिव कविता कृष्णन ने कहा, "संदर्भ साफ़ नहीं है यह सवाल ही नहीं उठना चाहिए. सीबीआई चीफ़ सट्टेबाज़ी को रोक नहीं सकते तो उसे क़ानूनी बना देने की बात कर रहे थे. सीबीआई चीफ़ को बलात्कार और मज़ा के बीच फ़र्क़ नहीं पता है, वो सीबीआई जैसी महत्वपूर्ण संस्था का प्रमुख कैसे हो सकता है. सीबीआई निदेशक को अपने इस बयान के लिए तत्काल पद से हटाया जाना चाहिए."
राष्ट्रीय महिला आयोग की निदेशक ममता शर्मा के कार्यालय के अनुसार सीबीआई निदेशक का बयान का संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग उन्हें नोटिस भेजेगा.
-एजेंसी

मंगलवार, 12 नवंबर 2013

कश्मीर मसले का हल बंदूक से ही संभव

श्रीनगर 
सुरक्षा एवं विदेश मामलों पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के सलाहकार सरताज अजीज से मुलाकात के एक दिन बाद जम्मू एवं कश्मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली गिलानी ने आज कश्मीर मसले को लेकर एक बार फिर जहर उगला। जम्मू एवं कश्मीर पर अपने रुख को दोहराते हुए गिलानी ने कहा, ‘जम्मू एवं कश्मीर का स्थायी समाधान बंदूक से हो सकता है।’
रिपोर्टों के मुताबिक गिलानी ने एक स्थानीय समाचार चैनल से कहा, ‘ब्रिटीश शासन के खिलाफ जब भारत संघर्ष कर रहा था तो एक तरफ महात्मा गांधी का शांति का आंदोलन चल रहा था तो दूसरी ओर भगत सिंह थे जिन्होंने आजादी के लिए हिंसा के रास्ते को अपनाया। भारत आज भगत सिंह को शहीद के रूप में याद करता है।’
अलगाववादी नेता इसके पहले कह चुके हैं कि पाकिस्तान के साथ कश्मीर समस्या का हल निकालने के लिए बंदूक स्थायी समाधान हो सकता है।
गौरतलब है कि गिलानी और जेकेएलएफ के अन्य नेताओं ने रविवार को नई दिल्ली में अजीज से मुलाकात की। इन नेताओं ने अजीज से भारत-पाक संबंध, एलओसी पर स्थिति सहित जम्मू एवं कश्मीर के ताजा राजनीतिक हालात पर चर्चा की।
इस बैठक को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई। मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस बैठक को लेकर सरकार से सवाल किए।
-एजेंसी

तालिबान नेता से चिदंबरम की बातचीत पर मचा बवाल

नई दिल्‍ली 
अफगान तालिबान के नेता मुल्ला अब्दुल सलाम जईफ की वित्‍तमंत्री पी चिदंबरम से मुलाकात पर विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के सलाहकार सरताज अजीज को जम्मू कश्मीर के अलगाववादियों से मिलने देने और जईफ से वित्तमंत्री की मुलाकात की कड़ी आलोचना की। चिदंबरम के साथ रविववार को गोवा के एक कार्यक्रम में जईफ उनके साथ दिखे थे। तालिबान नेता के साथ चिदंबरम की मुलाकात सोशल मीडिया पर भी चर्चा में है। सवाल पूछे जा रहे हैं कि आखिर किस नीति के तहत जईफ को वीजा दिया गया। कहीं जईफ से चिदंबरम की बातचीत 2014 में अफगानिस्‍तान से अमेरिकी सेना की वापसी से जुड़ी तो नहीं है।
माना जा रहा है कि अमेरिकी सैन्‍य वापसी के बाद तालिबान अफगानिस्‍तान की सत्‍ता के केंद्र में होगा। अफगान तालिबान का सरगना मुल्‍ला उमर इस संबंध में अफगान सरकार से सीधे संपर्क में है। पाकिस्‍तानी मीडिया में अफगान तालिबान के नंबर दो नेता मुल्‍ला अब्‍दुल गनी बारादर को तुर्की या सऊदी अरब भेजे जाने की चर्चा की है। बारादर को पाकिस्‍तान ने उस वक्‍त गिरफ्तार किया था, जब वह अफगानिस्‍तान के राष्‍ट्रपति हामिद करजई के साथ शांति वार्ता कर रहा था। सूत्रों के अनुसार, अमेरिका के दबाव में पाकिस्‍तान बारादर को तुर्की या सऊदी अरब भेजने पर विचार कर रहा है।
अफगानिस्‍तान में तालिबान के शासन के दौरान जईफ पाकिस्‍तान में राजदूत रहे थे। जईफ को अफगान तालिबान के सरगना मुल्‍ला उमर का बेहद करीबी माना जाता है। अफगानिस्‍तान पर अमेरिकी हमले के बाद 2005 तक अमेरिका ने जईफ को गुआंतनामो बे जेल में रखा था। जईफ ने जेल में अमेरिका की ओर से दी गई यातनाओं पर एक किताब भी लिखी। शांति वार्ता को बढ़ावा देने के लिए संयुक्‍त राष्‍ट्र ने पहल की थी, जिसके तहत जईफ का नाम आतंकवादियों की लिस्ट से हटा लिया गया था।

रविवार, 10 नवंबर 2013

दंगा पीड़ितों पर दबाव: मुआवजा लो लेकिन घर मत जाओ

लखनऊ 
मुजफ्फरनगर के दर्जनों दंगा पीड़ितों ने कल लखनऊ में विरोध मार्च निकाला। उनका कहना था कि उन पर 5 लाख मुआवजे के बदले अपनी जमीन-जायदाद को छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा है, और अपने गांव वापस लौटने से मना किया जा रहा है। वहीं अधिकारियों का कहना है कि पीड़ितों को आर्थिक मदद इसीलिए दी जा रही है ताकि वह कहीं भी बस सकें।
दंगा पीड़ित सलीम अहमद ने बताया कि 'जिला प्रशासन हम पर एक हलफनामा साइन करने के लिए दबाव बना रहा है, जिसमें लिखा हुआ है कि आर्थिक मदद पाने के बाद हमें राहत कैंपों को तो छोड़ना होगा मगर हम अपने गांव वापस नहीं लौट सकते।' सलीम अहमद 50 अन्य लोगों के साथ अपनी मांगों को सरकार के सामने रखने लखनऊ आए थे।
गौरतलब है कि मुजफ्फरनगर दंगे उत्तर प्रदेश के इतिहास के सबसे भयावह दंगों में से एक थे। इन दंगों में 65 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 60,000 लोग बेघर हो गए थे। दंगों से प्रभावित हजारों लोग कैंपों में बदतर जिंदगी जीने को मजबूर हैं। कई लोग सरकार की मदद से असंतुष्ट हैं और उन्हें 5 लाख रुपयों की सहायता कम लग रही है। अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ एक राहत कैंप में रह रहे एक दंगा पीड़ित ने बताया, 'मेरी बीवी के साथ गैंगरेप किया गया और हमारा घर जला दिया गया। मुआवजे के अलावा सरकार को हमें घर और नौकरी भी देनी चाहिए।'
एक और दंगा पीड़ित का कहना था कि उसकी पत्नी के साथ रेप करने वालों ने केस वापस लेने के लिए धमकाया था। पीड़ित महिला ने कहा कि 'हमने दंगों में अपना सब कुछ गंवा दिया। हमें पांच लोगों के परिवार का पालन-पोषण करना है, जिनमें दो बच्चे भी हैं।' एक अन्‍य दंगा पी़ड़ित ने कहा कि घर खो देने के अलावा उसके दो बच्चे भी दंगों के दौरान अपंग हो गए, जिसे कि पैसों से सही नहीं किया जा सकता। कुछ दंगा पीड़ितों ने बताया कि उनके घर वाले अब तक गायब हैं।
वकील असद हयात, जिन्होंने दंगों की सीबीआई जांच के लिए जनहित याचिका दायर की है, ने कहा कि सरकार ने सिर्फ 9 गांवों के परिवारों के लिए मुआवजे का ऐलान किया है जबकि 162 गांवों के परिवार कैंपों में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि 'कुछ लोगों को अचल संपत्ति के नुकसान के लिए मुआवजे मिल रहे हैं मगर पीड़ितों के चुनाव और उनको मुआवजा देने के लिए कोई ढंग का नियम नहीं है। न सिर्फ यह रकम कम है, बल्कि अभी भी बहुत सारे पीड़ितों की पहचान होनी बाकी है।'
रिहाई मंच के प्रवक्ता शाहनवाज आलम, राजीव यादव के साथ सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पांडेय के नेतृत्व में इन दंगा पीड़ितों की जनसुनवाई के लिए जयशंकर प्रसाद सभागार में शनिवार को कार्यक्रम आयोजित किया था। इस कार्यक्रम के लिए प्रशासन से अनुमति भी ले ली गई थी लेकिन कार्यक्रम शुरू होता इससे पहले उन्हें बताया गया कि प्रशासन ने कार्यक्रम की अनुमति निरस्त कर दी और इसके बदले उन्हें एक विरोध मार्च निकालने की अनुमति दी थी।
-एजेंसी

हद कर दी आपने: पद्म पुरस्‍कारों के लिए भी सिफारिशें

नई दिल्ली 
इस देश में भाई-भतीजावाद किस कदर हावी है और किस तरह लोग अपनी प्रतिष्‍ठा व मान-मर्यादा का भी ख्‍याल रखे बिना अपनों के लिए सिफारिशें करते हैं, इसका ताजा उदाहरण है इस वर्ष पद्म पुरस्कारों के लिए की गई सिफारिशों की सूची। गृह मंत्रालय की ओर से एक आरटीआई आवेदन के जवाब में सार्वजनिक की गई 1300 नामों की सिफारिशें करने वाली सूची के अनुसार कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा, केन्‍द्रीय मंत्री राजीव शुक्ला, सांसद टी. सुब्बरामी रेड्डी, शास्त्रीय गायक पंडित जसराज आदि ने इस पुरस्कार के लिए कई-कई नामों की सिफारिशें की थीं।
भारत रत्न से सम्मानित पार्श्व गायिका लता मंगेशकर ने पद्म पुरस्कारों के लिए जिन नामों की सिफारिश की थी उनमें उनकी बहन ऊषा मंगेशकर, पार्श्व गायक सुरेश वाडेकर और सामाजिक कार्यकर्ता राजमल पारख का नाम था। पद्म विभूषण से सम्मानित सरोद वादक उस्ताद अमजद अली ने छह नामों की सिफारिश की थी जिनमें उनके बेटों अमान और अयान के साथ हिन्दुस्तानी शास्त्रीय गायक कौशिकी चक्रवर्ती, तबला वादक विजय घाटे, कला प्रोत्साहक सूर्य कृष्णमूर्ति उर्फ नटराज कृष्णमूर्ति और सितार वादक निलाद्री कुमार के नाम सम्मलित थे। पूर्व सपा नेता अमर सिंह ने लोकसभा सदस्य जयाप्रदा को यह पुरस्कार देने की सिफारिश की थी।
हालांकि, इस साल घोषित पद्म पुरस्कारों की सूची में ऊषा मंगेशकर, अमान या अयान जगह नहीं बना पाए। विख्यात शास्त्रीय गायक पंडित जसराज ने पद्म पुरस्कारों के लिए नौ नाम, राजीव शुक्ला ने पांच, मोतीलाल वोरा ने आठ, गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने रंगमंच से जुडे दो लोगों, विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने दो और कांग्रेस सांसद विजय दरडा ने तीन नामों की सिफारिश की थी।
-एजेंसी

शुक्रवार, 8 नवंबर 2013

26 लाख का ट्रक भारतीय सेना के लिए एक करोड़ में खरीदा

नई दिल्ली 
पूर्व आर्मी चीफ जनरल वी. के. सिंह ने हथियारों की खरीद-फरोख्त को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सिंह ने कहा कि देश में हथियार लॉबी काफी ताकतवर हो गई है। उन्होंने कहा कि हथियार लॉबी देश में सिस्टम का एक हिस्सा बन चुकी है। टाट्रा ट्रक करार मुद्दे पर सिंह ने कहा कि यह बड़ी हैरत की बात है कि जो ट्रक चेक गणराज्य में 26 लाख रुपए में उपलब्ध था, उसे भारत में 1 करोड़ में बेचा गया।
सिंह ने एक इंग्लिश न्यूज़ चैनल से कहा कि उन्होंने टाट्रा ट्रकों की खरीद को मंजूरी देने के एवज में 14 करोड़ रुपए की घूस की पेशकश के बारे में रक्षा मंत्री से चर्चा की थी।
अपनी आत्मकथा 'करेज ऐंड कनविक्शन' का हवाला देते हुए सिंह ने कहा, 'हथियार लॉबी अब काफी ताकतवर है। जहां तक हथियार डीलरों की बात है, वे सिस्टम का हिस्सा बन चुके हैं।' अपनी किताब में सिंह ने लिखा है कि उन्होंने घूस की पेशकश के बारे में रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी को बताया था और उनसे सावधान रहने को कहा था।
चैनल द्वारा यह सवाल किए जाने पर कि क्या जम्मू-कश्मीर के नेताओं को आर्मी द्वारा धन देने के अपने बयान पर वह अब भी कायम हैं, इस पर सिंह ने कहा कि वह पहले ही इस मुद्दे पर सफाई दे चुके हैं।
सिंह ने कहा, 'मैंने कभी नहीं कहा कि आर्मी नेताओं को पैसे देती है। मैंने सिर्फ इतना कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्थिरता की प्रक्रिया में कुछ पैसे खर्च किए जाते हैं।'
-एजेंसी

गुरुवार, 7 नवंबर 2013

भारत में 103 अरबपति, वैश्विक सूची में छठे स्थान पर

लंदन 
भारत में फ्रांस, सउदी अरब, स्विट्जरलैंड और हांगकांग से अधिक अरबपति हैं. अति धनाढ्य लोगों की संख्या की दृष्टि से देश विश्व में छठे नंबर पर है. देश में अकेले मुंबई में 30 अरबपति हैं जो देश की वित्तीय राजधानी कहा जाता है. मुंबई ‘अरबपतियों के शहर’ की सूची में वैश्विक में पहले पांच शहरों में है. इस सूची में न्यूयार्क शीर्ष स्थान पर है जहां 96 अरबपति हैं.
शीर्ष पांच शहरों में शामिल हांगकांग, मास्को और लंदन में क्रमश: 75, 74 और 67 अरबपति रहते हैं. भारत में जुलाई 2012 से जून 2013 के बीच अरबपतियों की संख्या घटी है लेकिन 103 अरबपतियों के साथ शीर्ष देशों की सूची में छठे स्थान पर है. इस सूची में सबसे ऊपर अमेरिका हैं जहां 515 अरबपति रहते हैं और यह तादाद चीन के 157 अरबपतियों के मुकाबले तिगुनी है.
जर्मनी, अमेरिका और रुस पांच शीर्ष देशों में शामिल हैं जहां क्रमश: 148, 135 और 108 अरबपति हैं. वेल्थ-एक्स और यूबीएस अरबपति जनगणना रपट 2013 के मुताबिक भारत के अरबपतियों की तादाद 5.5 प्रतिशत घटकर 103 रह गई और अरबपतियों की कुल संपत्ति 10 अरब डालर घटकर 180 अरब डालर रह गई.
-एजेंसी
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