गुरुवार, 28 नवंबर 2013

इन्वेस्टिगेटिंग जर्नलिज्म के नाम पर..


इन्वेस्टिगेटिंग जर्नलिज्म के नाम पर अपनी दुकान चलाने वाले तरूण तेजपाल के पुराने पाप अब धीरे धीरे सामने आ रहे हैं। एक समाचार चैनल के मुताबिक तेजपाल और उसकी पत्नी गीतान बत्रा ने उत्तराखण्ड के नैनीताल में बड़े पैमाने पर जमीन और प्रोपर्टी मेे निवेश कर रखा है।
गेथिया गांव में तेजपाल ने टू चिमनी नाम से एक रिसार्ट खरीद रखा है। तेजपाल फैमिली के पास जो प्रोपर्टी है उनमें से इसकी कीमत सबसे ज्यादा है। बताया जा रहा है कि तेजपाल का रिसार्ट बिना लाइसेंस के चल रहा है। रिसार्ट नैनीताल से चालीस किलोमीटर दूर है।
रिसार्ट की कहानी 1999 में शुरू हुई। पहले तेजपाल ने इस जमीन पर रिहायशी मकान बनाया था। बाद में इसे रिसार्ट का रूप दिया गया। 2009 में तेजपाल ने पर्यटन विभाग से पेईंग गेस्ट रखने के लिए लाइसेंस लिया लेकिन तीन साल बाद यानि 2012 में लाइसेंस लैप्स हो गया। अब तक उसका नवीनीकरण नहीं कराया गया है।
तेजपाल उत्तराखण्ड में कई अन्य प्रोपर्टी का भी मालिक है। नैनीताल के जिला प्रशासन ने तेजपाल के पास जमीनों के रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं। नैनीताल के डिस्ट्रिक्ट लैण्ड रिकॉर्ड के मुताबिक तेजपाल के पास 14 नाली(एक नाली 240 स्कवायर यार्ड की होती है) लैण्ड है।
तेजपाल की पत्नी के नाम गेथिया में 5 नाली है। उत्तराखण्ड सरकार के लैण्ड एक्ट के मुताबिक बाहरी लोग 250 स्कवायर यार्ड से ज्यादा जमीन नहीं खरीद सकते। तेजपाल ने यह कहते हुए एक्ट से छूट चाही थी कि उसने 2003 से पहले जमीन खरीदी थी और लैण्ड एक्ट 2003 में लागू हुआ था।
-एजेंसी

तरुण तेजपाल के नए ई-मेल्‍स ने किया उन्‍हें और बेनकाब

नई दिल्‍ली। 
तहलका के एडिटर तरुण तेजपाल और उन पर आरोप लगाने वाली जूनियर कॉलीग की नई मेल्स लीक हो गई हैं। ये वे शुरुआती ई-मेल्स हैं, जिनमें दोनों उस घटना के बारे में बात कर रहे हैं। एक ब्लॉग पर वह मेल पब्लिश की गई है, जो तरुण तेजपाल ने पीड़ित पत्रकार को 19 नवंबर को भेजी थी। यह उस घटना के बाद की पहली ई-मेल है।
तरुण तेजपाल ने लड़की को भेजी मेल में माफी मांगते हुए कहा कि वह घटना हल्के-फुल्के और फ्लर्टी मूड में हुई थी और हो सकता है कि मैंने हालात को समझने में गलती की हो। मगर 20 नवंबर को तेजपाल की इस मेल का जवाब देते हुए लड़की ने तेजपाल को बुरी तरह से लताड़ा है।
घटना के बाद दोनों में क्या बात हुई थी, हम इसके अंश पेश कर रहे हैं। तेजपाल की मेल और उस पर लड़की के जवाब वाली मेल में दोनों के बीच जिन पॉइंट्स पर बात हुई, हम उन्हें एक साथ बातचीत के अंदाज में दे रहे हैं। इन ई-मेल्स में जिन बाकी लोगों का जिक्र किया गया था, उनके नाम हटा दिए गए हैं। पढ़ें:
उस रात हुई घटना के बारे में
तरुण तेजपाल: जहां तक उस मनहूस रात की बात है, तुम याद करो तो हम नशे में, हंसी-मजाक और फ्लर्टी अंदाज में इच्छाओं और सेक्स के बारे में बात कर रहे थे। हम उस तूफानी शाम को हुई मुलाकात को याद कर रहे थे, जब मैं ऑफिस में बादलों को देख रहा था। मैं यह भी बताना चाहता हूं कि एक मौके पर तुमने कहा था कि आप बॉस हैं। इस पर मैंने कहा कहा था कि इससे तब तो और भी अच्छी बात है। लेकिन उसी दौरान मैंने कहा था कि इससे मेरे और तुम्हारे बीच के किसी रिश्ते का कोई लेना-देना नहीं है।
पीड़ित लड़की: उस रात बातें न तो फ्लर्ट से भरी थीं और न नशे में की गई थीं। आप सेक्स और इच्छाओं के बारे में बात कर रहे थे, क्योंकि आप मुझसे बात करते वक्त अक्सर वही सब्जेक्ट चुनते हैं। अफसोस कि आपने कभी मेरे काम के बारे में बात नहीं की। और अगर आपने उसे पढ़ने के लिए वक्त निकाला होता, तो आपकी हिम्मत नहीं होती मेरा यौन उत्पीड़न करने की कोशिश करने की। आपको इस बात का भी अंदाजा होता कि इस सब के बाद मैं चुप बैठने वाली नहीं हूं। उस रात हमने किसी 'तूफानी शाम के बादलों' की चर्चा भी नहीं की थी। मैं तो आपके साथ अपनी उस पहली स्टोरी के बारे में बात करना चाहती थी, जो एक रेप से बचने वाली लड़की के बारे में आपके साथ लिखी थी। ##### ने मुझे आपके ऑफिस में बुलाया। मैं अंदर गई, जहां बत्ती बंद करके काउच पर बैठे हुए थे। मैंने लाइट ऑन करने को कहा था तो आपने मना कर दिया था। आप काउच पर लेटे रहे। मैं आपके सामने चेयर पर बैठी रही और उस लड़की की कहानी आपको सुनाई। आपने भी उस प्रफेशल वजह को ही याद किया था, न कि तूफान और बादलों को।
सहमति या असहमति के बारे में
तरुण तेजपाल: जब यह सब कुछ हुआ, उस दौरान मूड मस्ती और खुशमिजाजी भरा था। मुझे एक पल के भी नहीं लगा कि तुम नाराज हो। मुझे तब तक नहीं लगा कि यह सब तुम्हारी सहमति से नहीं हुआ, जब तक अगली रात #### ने मुझे नहीं बताया। मैं शॉक में था और पूरी तरह से हिल गया था। ऐसा इसलिए, क्योंकि तुम्हें लगा था कि मैंने तुम्हारे साथ जबर्दस्ती की है (जो कि मेरा इरादा नहीं था)। मैं शॉक में था क्योंकि मैंने अपनी बेटी की करीबी दोस्त के साथ गैरजिम्मेदाराना और बेवकूफी भरा कुछ किया था। उस वक्त मैं बहुत शर्मिंदा हुआ और अब भी शर्मिंदा हूं। (जो बात सच नहीं है वह ये कि मैंने कभी धमकी का एक शब्द नहीं कहा।)'
पीड़ित लड़की: मेरी अहमति इससे जाहिर होती है: जैसे ही आपने मुझ पर हाथ रखा, मैंने आपको रुकने के लिए कहा था। मैंने हर उस शख्स और उसूल की दुहाई दी, जो हमारे लिए अहमियत रखते थे (आपकी बेटी, पत्नी, शोमा, मेरे पापा)। मैंने यह भी कहा कि आप मेरे एम्प्लॉयर हैं। लेकिन आप सुन नहीं रहे थे। आप रुके नहीं और मेरा उत्पीड़न करते रहे। अगली रात भी आपने ऐसा ही किया। तहलका की एडिट मीटिंग्स में हमने उन पुरुषों की बात की है जो दरिंदे बन जाते हैं। आपने भी अपनी स्टोरीज़ में इसका जिक्र किया है। क्या यही है उस सब की हकीकत, न को न नहीं समझना?
आपने सिर्फ मुझे #### को इस घटना के बारे में बताने पर न सिर्फ डांटा था, बल्कि अगली सुबह टेक्स्ट मेसेज भी भेजा था जिसमें लिखा था, 'मुझे यकीन नहीं हो रहा कि तुमने उसे इतनी मामूली बात बता दीं।' 'तरुण, मुझे भरोसा नहीं होता कि तुम अपनी बेटी की दोस्त और उसकी उम्र की एम्प्लॉयी का उत्पीड़न के बारे में सोच भी सकते हो। क्या यह मामूली बात थी?
घटना के बारे में माफीनामा
तरुण तेजपाल: तुमने साफ कर दिया है कि मुझे समझने में ही गलती हुई। मैं तुम्हें आ रहे गुस्से और तुम्हें पहुंची ठेस को समझा हूं और इसपर कोई बात नहीं करूंगा। यह मेरी जिंदगी का सबसे बुरा पल है। जो कुछ हंसी-मजाक में हो रहा था, नहीं पता था कि उसका नतीजा इतना बुरा रहेगा। मुझे माफ कर दो और इसे भूल जाओ। मैं तुम्हारी मां से मिलूंगा और उनसे माफी मांगूंगाI तुम चाहोगी तो #### से भी माफी मांगने को तैयार हूं। मैं चाहता हूं कि तुम पहले की तरह ही तहलका के लिए काम करो और शोमा को रिपोर्ट करती रहो। तहलका और शोमा ने तुम्हें कभी निराश नहीं किया है। मेरी सजा मुझे मिल गई है और शायद मेरी जिंदगी के आखिरी दिन तक मुझे मिलती रहेगी।
पीड़ित लड़की: आपकी #### से माफी मांगने की इच्छा रखने से लग रहा है कि आप मुझे उसकी प्रॉपर्टी समझते हैं और खुद को उसके प्रति जवाबदेह मानते हैं। इससे तो आपकी उस पुरुषवादी सोच की बू आ रही है, जिसमें यह माना जाता है कि महिलाओं के शरीर पर पुरुषों का अधिकार है।
अगर आपको किसी से माफी मांगनी है, तो तहलका के उन कर्मचारियों से मांगिए, जिनके दिलों में आपने अपना सम्मान गिरा दिया है। प्लीज, आगे से मुझसे पर्सनल मेल करने की कोशिश मत करना। आपने यह अधिकार उसी वक्त खो दिया था, जब आपने मेरे विश्वास और शरीर पर हमला किया।

'द्रोहकाल का पथिक' ने हंगामा मचाया

पूर्व सांसद राजेश रंजन ऊर्फ पप्पू यादव ने एक सनसनीखेज बयान देकर सियासी हलकों में तूफान खड़ा कर दिया है। पप्पू यादव ने यह तमाम खुलासे अपनी किताब `द्रोहकाल का पथिक` किया है। पप्पू यादव ने अपनी इस किताब में दावा किया है कि वर्ष 2008 के विश्वास मत से पहले यूपीए और एनडीए ने उनसे संपर्क साधा था। दोनों पार्टियां (कांग्रेस और बीजेपी) ने सांसदों को 40-40 करोड़ रुपये देने की पेशकश की थी। पप्पू के दावे के मुताबिक जुलाई 2008 में विश्वास मत के दौरान भी कांग्रेस और बीजेपी ने सांसदों के समर्थन के लिए 40 करोड़ रुपये देने की पेशकश की थी।
पप्पू के मुताबिक वर्ष 2001 में एनडीए सरकार के तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इंडियन फेडरल डेमोक्रेटिक पार्टी के तीन सांसदों को एनडीए का हिस्सा बनने के लिए पैसा दिया था।
पप्पू यादव के अनुसार सांसदों की कीमत को लेकर सौदेबाजी हुई थी। सांसद अनवारुल हक को एक एसेंट कार के साथ 1 करोड़ रुपये भी मिला। नागमणि को भी तत्काल 1 करोड़ रुपये दिए गए थे और बाद में राज्यमंत्री का पद देने का भरोसा दिलाया गया था। पप्पू के मुताबिक ये सौदेबाजी बीजेपी के यशवंत सिन्हा ने खुद की थी। हालांकि इस मसले पर यशवंत सिन्हा ने पप्पू यादव के इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है और उन्होंने कहा कि इस मामले पर टिप्पणी की जरूरत नहीं है। 
-एजेंसी

मंगलवार, 26 नवंबर 2013

मथुरा से BJP के उम्‍मीदवार होंगे सनी देओल!

मथुरा। 
(लीजेण्‍ड न्‍यूज़ विशेष)
2014 के चुनावी महासमर के लिए महाभारत नायक योगीराज श्रीकृष्‍ण की नगरी से भारतीय जनता पार्टी क्‍या कोई 'अमोघ अस्‍त्र' इस्‍तेमाल करने जा रही है ?
क्‍या भाजपा इस धर्म नगरी से फिल्‍म अभिनेता 'सनी देओल' को चुनाव मैदान में उतार रही है ?

भारतीय जनता पार्टी के ही उच्‍च पदस्‍थ सूत्रों का तो यही कहना है क्‍योंकि पार्टी अब कृष्‍ण की नगरी पर कोई कमजोर दांव खेलने के लिए तैयार नहीं है।
भाजपा हाईकमान के इस फैसले की सुगबुगाहट ने मथुरा के भाजपाइयों को सकते में ला दिया है, विशेष तौर पर उन्‍हें जो इस बार लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए अपनी पुख्‍ता दावेदारी जताते रहे हैं।
आखिर भाजपा हाईकमान ऐसा निर्णय क्‍यों ले रहा है और क्‍यों स्‍थानीय दावेदारों पर उसे भरोसा नहीं है, यह जानने के लिए मथुरा के पिछले और वर्तमान राजनीतिक हालातों को जानना जरूरी हो जाता है।
सर्वविदित है कि विश्‍व विख्‍यात धार्मिक नगरी मथुरा एक जाट बाहुल्‍य संसदीय क्षेत्र है लिहाजा यहां जाट मतदाता निर्णायक भूमिका अदा करते हैं।

शुक्रवार, 22 नवंबर 2013

नायकी के नकाब में खलनायक

(लीजेण्‍ड न्‍यूज़ विशेष) 
अपने चरित्र से इतनी बेईमानी तो फिल्‍मी पर्दे के खलनायक भी नहीं करते जितनी तरुण तेजपाल ने 'पत्रकारिता' के 'असल किरदार' में कर डाली। तरुण तेजपाल की करतूत जनसामान्‍य से कहीं बहुत अधिक घिनौनी इसलिए है क्‍योंकि उन्‍होंने न सिर्फ एक सम्‍मानित पेशे को बदनाम किया है बल्‍कि उन मानदंडों को भी प्रभावित किया है जिनके चलते तमाम युवक-युवतियां उन्‍हें अपना आदर्श मानकर पत्रकारिता का पेशा अपनाने में खुद को गौरवान्‍वित महसूस करते थे।
तरुण तेजपाल ने हालांकि समूची पेशेवर चालाकी का इस्‍तेमाल करते हुए अपना अपराध इस आशय से स्‍वीकार किया था कि अपनी नायक वाली छवि को बचा ले जायेंगे लेकिन वह उसमें सफल नहीं हुए। उल्‍टे हुआ ये कि उनके मित्र और प्रसिद्ध गीतकार जावेद अख्‍तर को भी उनके बचाव में कल लिखा अपना ट्वीट आज डिलीट करना पड़ा। जावेद अख्‍तर को यूं भी आजकल हर मुद्दे पर ट्वीट करने की बहुत जल्‍दी रहती है। ऐसा लगता है जैसे वह फ्लाइट पकड़ने को बैठे हों और इसलिए बिना सोचे-समझे कुछ भी लिख मारते हों ताकि टि्वटर पर गैर हाजिरी न लग जाए। उनके जैसे तथाकथित बड़े लोगों की दुनिया में ट्वीट करना शायद सर्वाधिक जरूरी मान लिया गया है।
बहरहाल, तरुण तेजपाल के उस दुस्‍साहस की तारीफ अवश्‍य करनी पड़ेगी जिसके तहत उन्‍होंने इतनी घिनौनी हरकत करने के बावजूद अपने लिए सजा भी खुद मुकर्रर कर डाली। मुज़रिम की मुंसिफी का इससे निकृष्‍ट उदाहरण हाल-फिलहाल शायद ही कोई दूसरा सामने आया हो।
सच तो यह है कि जिस तरह का घटनाक्रम तरुण तेजपाल की आपराधिक स्‍वीकारोक्‍ति के बाद सामने आया है और जिस तरह तहलका की प्रबंधक संपादक उनके कुकृत्‍य को हलका करने में लगी हैं, उससे साफ जाहिर है कि तरुण तेजपाल अकेले नहीं हैं। तहलका की टीम में और भी लोग हैं जो उनकी जैसी मानसिकता रखते हैं और एक-दूसरे के पूरक हैं। हो सकता है यह लोग पूर्व में किए गये अपने कुकृत्‍यों पर पर्दा डालने के लिए परस्‍पर सहयोग करते रहे हों। निश्‍चित ही तरुण तेजपाल का यह पहला कारनामा नहीं होगा। उनका दुस्‍साहस बताता है कि वह इससे पहले भी कई बार ऐसी घिनौनी हरकत कर चुके होंगे।
कड़वा सच यह भी है कि मीडिया का एक बड़ा वर्ग ऐसे तमाम सफेदपोश सुनामधन्‍य तरुण तेजपालों से भरा पड़ा है। यह बात अलग है कि उनके कारनामे अभी सार्वजनिक नहीं हो पा रहे।
मीडिया से मीडिएटर तक का सफर इतना छोटा है कि उसे कब कौन पूरा कर ले, कहना मुश्‍किल है।
और एक बार जब मीडिया से मीडिएटर के बीच की बारीक सी रेखा को कोई पार कर जाता है तो उसके चारित्रिक पतन की कोई सीमा निर्धारित करना असंभव है।
इसमें कोई दो राय नहीं कि राजनीति के बाद यदि कोई दूसरा ऐसा पेशा है जिसमें बहुत तेजी के साथ हर किस्‍म की गिरावट आई है तो वह पत्रकारिता ही है। जनता के बीच अपनी साख खोने में राजनीतिज्ञों को फिर भी कुछ वक्‍त लगा लेकिन पत्रकारिता में तरुण तेजपालों की अच्‍छी-खासी तादाद के रहते पत्रकारों की साख बर्बाद होने में उतना भी वक्‍त नहीं लगेगा।
बेहतर होगा कि समय रहते इस बात को खुद पत्रकार समझ लें अन्‍यथा नेताओं की तरह उन्‍हें किसी व्‍यवस्‍था से सुरक्षा नहीं मिलने वाली। और तब क्‍या होगा, इसका अहसास ही रूह कंपा देने को काफी है।

गुरुवार, 21 नवंबर 2013

यौन हमले में गोवा के CM ने तरुण तेजपाल पर कसा शिकंजा

नई दिल्‍ली। 
अपनी खोजी पत्रकारिता से देश में धूम मचाने वाले तरुण तेजपाल खुद मुश्किलो में घिर गए हैं। "तहलका" मैग्जीन के मुख्य संपादक तरुण तेजपाल पर अपनी बेटी की दोस्त के ऊपर यौन हमले का आरोप लगा है। गोवा के सीएम मनोहर पार्रिकर ने कहा है कि इस मामले में जांच शुरू हो गई है।
उन्होंने कहा कि अगर घटना गोवा की है तो इसकी एफआईआर भी गोवा में ही दर्ज होनी चाहिए। इसके अलावा गोवा पुलिस ने उस फाइव स्टार होटल से सीसीटीवी फुटेज मांगे हैं, जहां यह घटना घटी।
गौरतलब है कि गोवा में हुए तहलका मैगजीन के एक इवेंट के दौरान यह घटना घटी है।
इस आरोप के बाद उन्होंने छह महीने के लिए मैग्जीन से इस्तीफा प्रबंध संपादक को भेज दिया है। तेजपाल पर यौन हमले का आरोप लगाने वाली महिला मैग्जीन के लिए काम करती है और उनकी बेटी की दोस्त भी है। वहीं, पीड़िता के करीबी दोस्त ने तहलका के उसे दावे को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि वह मैग्जीन की ओर से उठाए कदम से संतुष्ट है। पीड़िता की महिला मित्र ने आरोप लगाया की उस पर यौन हमला किया गया था और वह पूरी तरह टूट चुकी है व भावनात्मक रूप से डरी हुई है।
मित्र ने बताया कि यह घटना कुछ दिनों तक लगातार चलती रही और पीड़िता उनसे हर बार यही कहती थी कि वह लगभग उनकी बेटी की उम्र की है। पीड़िता की "नहीं" को नजरअंदाज किया गया।

रविवार, 17 नवंबर 2013

भारत रत्‍न 'सचिन'..... या भारत रत्‍न 'कांग्रेस'

क्रिकेट के 'भगवान' की कसम, मुझे जितनी खुशी सचिन तेंदुलकर को 'भारत रत्‍न' देने से नहीं हुई उससे कहीं अधिक खुशी इस बात से हुई कि किसी खिलाड़ी को 'पहला' भारत रत्‍न कांग्रेस के नेतृत्‍व वाली सरकार ने दिया। कुछ और देर कर दी होती तो पता नहीं यह श्रेय मिल पाता या नहीं। लोकसभा चुनाव नजदीक हैं।
अब कोई किसी खिलाड़ी को भारत रत्‍न देता रहे लेकिन कांग्रेस के नाम बने इस रिकॉर्ड को नहीं तोड़ पायेगा।
इससे पहले कांग्रेस ने सचिन तेंदुलकर के रूप में किसी खिलाड़ी को राज्‍यसभा का सदस्‍य बनवाने की पहल की थी। यह भी एक रिकॉर्ड है।
पहल करने और रिकॉर्ड बनाने में कांग्रेस का यूं भी कोई जवाब नहीं। इस मामले में कांग्रेस के सामने सचिन कहीं नहीं टिकते।
देश को पहली बार कांग्रेस ने स्‍वतंत्रता दिलवाई। दूसरी बार कौन दिलवायेगा, नहीं मालूम।
कांग्रेस ने देश को पहला प्रधानमंत्री, पहला राष्‍ट्रपति और यहां तक कि पहली सरकार दी।
कांग्रेस ने पहली बार किसी सरदार को प्रधानमंत्री बनवाया। कांग्रेस ने ही पहली बार किसी सरदार को राष्‍ट्रपति बनवाया और पहली बार किसी सरदार को योजना आयोग का उपाध्‍यक्ष बनाया।
कांग्रेस ने पहली बार देश को महिला प्रधानंत्री देने का गौरव उपलब्‍ध कराया और पहली बार 'आपातकाल' से परिचित कराया।
पहल करने के मामले में कांग्रेस के नाम अनगिनित रिकॉर्ड हैं।
पहली बार उसने किसी ऐसे व्‍यक्‍ति को प्रधानमंत्री के पद पर काबिज किया जो कभी कहीं से अब तक लोकसभा का कोई चुनाव नहीं लड़ा।
पहली बार कांग्रेस के किसी युवराज ने देश के प्रधानमंत्री को सार्वजनिक रूप से 'नॉनसेंस' कहकर गौरवान्‍वित किया और पहली बार ही कांग्रेस ने रिमोट के जरिए केंद्र की सरकार संचालित करने का प्रयोग किया जो सफल रहा।
कांग्रेसी शासनकाल के अभी करीब साढ़े  5 महीने बाकी हैं, इसलिए काफी संभावना है कि वह पहल करने के और कई रिकॉर्ड बना डाले। मसलन वह भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और भाजपा नेता अटलबिहारी वाजपेयी को इसलिए भारत रत्‍न दे सकती है क्‍योंकि भाजपा ने ऐलान कर दिया है कि कांग्रेस द्वारा उन्‍हें भारत रत्‍न न दिए जाने की सूरत में वह केंद्र में अपनी अगली सरकार बनने पर उन्‍हें भारत रत्‍न दे डालेगी।
यहां सवाल किसी प्रधानमंत्री को भारत रत्‍न देने का नहीं, पहल करने के उस रिकॉर्ड का है जिसे कांग्रेस किसी दूसरे के नाम नहीं होने देना चाहती।
वह नहीं चाहती कि विपक्षी पार्टी के किसी नेता (चाहे वह प्रधानमंत्री ही क्‍यों न रहा हो) को भारत रत्‍न देने की पहल करने का श्रेय कोई दूसरा लूट ले जाए।
कांग्रेस यह भी नहीं चाहती कि पहल करने के उसके रिकॉर्ड को कोई दूसरा बीट करे लिहाजा उसने अपराधियों को राजनीति में संरक्षण देने वाला कानून लाने की पहल की। अब चाहे कोई ऐसा कानून ही क्‍यों न बना ले पर कानून बनाने की पहल करने का रिकॉर्ड कांग्रेस के नाम ही रहेगा।
कांग्रेस के नाम पहल करने की फेहरिस्‍त में एक और रिकॉर्ड इस आशय का है कि एक ईमानदार कहलाने वाले प्रधानमंत्री सर्वाधिक भ्रष्‍ट सरकार को सफलतापूर्वक दस सालों तक चलाते रहे तथा कोयले की खान में घुसकर भी बेदाग निकल पाये।
अगर कोई यह कहे कि उन्‍होंने यह कारनामा सीबीआई के बल पर किया है तो इसके लिए भी वह तारीफ के हकदार हैं क्‍योंकि सीबीआई को सरकारी तोते का सर्वोच्‍च न्‍यायालय से खिताब दिलवाने की पहल उन्‍होंने ही की है। इससे पहले लोग चाहे जो समझते रहे हों, पर सरकारी ठप्‍पा कोई नहीं लगवा पाया।
बहरहाल, अगर हम कांग्रेस की पहल से बने सभी रिकॉर्ड्स की बात करें तो 25 सचिन तेंदुलकर मिलकर भी उन्‍हें नहीं तोड़ पायेंगे इसलिए मुझे सचिन तेंदुलकर को मिले भारत रत्‍न से कई गुना अधिक प्रसन्‍नता इस बात की हुई कि तमाम रिकॉर्ड्स की उपलब्‍धियों के बीच कांग्रेस ने किसी खिलाड़ी को भारत रत्‍न देने की पहल कर रिकॉर्ड बखूबी अपने नाम कर लिया और इस तरह एक कांग्रेसी राज्‍यसभा सदस्‍य को मिले भारत रत्‍न से भी खुद को विभूषित करने में सफल रही। जय हिंद!  जय भारत!
-यायावर
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