मंगलवार, 24 दिसंबर 2013

10 लाख करोड़ की फाइलों पर कुंडली मारे बैठी थीं जयंती

नई दिल्ली। 
पूर्व केन्द्रीय पर्यावरण और वन मंत्री जयंती नटराजन पर आरोप है कि उन्होंने दस लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं रोक रखी थीं जबकि इन्हें सभी तरह की मंजूरी मिल चुकी थी और उनके डेडलाइन भी तय कर दिए गए थे. वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के मुताबिक जयंती नटराजन ने बड़ी-बड़ी परियोजनाओं को उनके विभाग के ही पैनलों से तमाम तरह की मंजूरी मिलने के बाद भी रोके रखा. समझा जाता है कि इसी कारण उन्हें अपने पद से हाथ धोना पड़ा. राहुल गांधी ने शनिवार को फिक्की में कॉर्पोरेट्स की बैठक में इस बात का भरोसा दिलाया था कि परियोजनाओं में अब विलंब नहीं होगा.
लेकिन इसके पहले जयंती नटराजन को इस्तीफा देना पड़ा. ऐसा समझा जाता है कि एक ओर तो राहुल गांधी और उनकी पार्टी की सरकार देश में बड़ी-बड़ी परियोजनाओं को जल्द-से-जल्द मंजूरी दिलाने का प्रयास कर रही थी तो दूसरी ओर जयंती नटराजन फाइलों पर बैठी थीं. इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा.
काफी समय से पर्यावरण मंत्रालय पर इस बात के लिए उंगलियां उठती रहीं कि वहां फाइलों को लटकाया जाता है. दिसंबर के पहले हफ्ते में एक सरकारी आंतरिक आंकलन में पाया गया था कि 14 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं में से 5 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं ऐसी थीं कि जिनमें विलंब के लिए पर्यावरण मंत्रालय जिम्मेदार है. ये ऐसी परियोजनाएं थीं जिन्हें कैबिनेट कमेटी ऑफ इन्वेस्टमेंट तक की मंजूरी मिल चुकी थीं. इनके अलावा 4 लाख करोड़ रुपये की वैसी परियोजनाएं लटका दी गई थीं जिनके लिए डेडलाइन तय कर दी गई थी ताकि उनसे जुड़े मुद्दे सुलझा लिये जाएं. इसके अलावा और एक लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं पर्यावरण मंत्रालय ने रोक ली थीं. इनके बारे में गुजरात सरकार ने भी नाराजगी जताई थी.
सूत्रों ने बताया कि प्रधान मंत्री ने फरवरी महीने में ही कोयले की खदानों से संबिधित परियोजनाओं को जल्द-से-जल्द मंजूरी देने की बात कही थी, लेकिन इस पर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई और फाइलें लटकी रह गईं. कोयले की कमी से थर्मल पॉवर स्टेशनों में काम ठप सा हो गया है.
लेकिन जयंती नटराजन ने कहा कि उनके काम की प्रधानमंत्री ने भी सराहना की है और उनके कार्यकाल में कोई भी परियोजना नहीं लटकी रही. मैंने पार्टी के काम काज के लिए मंत्री पद छोड़ा है. इसके अलावा कोई और कारण नहीं है.
-एजेंसी

शनिवार, 21 दिसंबर 2013

पत्रकारों के लिए दूसरा सबसे खतरनाक देश है भारत

नई दिल्ली। 
भारत इस साल पत्रकारों की सुरक्षा के मामले में सीरिया के बाद दुनिया का दूसरा सबसे खतरनाक देश रहा है। ब्रिटेन स्थित संस्था इंटरनेशनल न्यूज सेफ्टी इंस्टीट्यूट द्वारा कल लंदन में जारी रिपोर्ट के मुताबिक भारत में इस साल 12 पत्रकारों सहित कुल 13 मीडिया कर्मी मारे गए हैं। इनमें से सात की हत्या की गई। दो पत्रकार उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर दंगों की खबर करते हुए मारे गए और चार की मौत काम के दौरान हुई दुर्घटनाओं में हुई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2013 में विश्व के 29 देशों में कुल 126 मीडियाकर्मी मारे गए हैं। यह संख्या पिछले साल के मुकाबले 17 प्रतिशत कम है। इसमें सबसे ज्यादा 19 पत्रकार सीरिया में जारी गृहयुद्ध की खबर करते हुए मारे गए हैं। पिछले साल सीरिया में 28 मीडियाकर्मी मारे गए थे लेकिन इस साल सीरिया में स्थानीय और विदेशी मीडियाकर्मियों के अपहरण की घटनाएं पिछले साल के मुकाबले बढ़ गई हैं।
-एजेंसी

गुरुवार, 19 दिसंबर 2013

एक और जज पर यौन शोषण का आरोप

नई दिल्ली। 
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश ए. के. गांगुली पर लगा यौन शोषण का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ है कि एक और जज का सेक्स स्कैण्डल सामने आया है। एक और लॉ इंटर्न ने जज पर यौन शोषण का आरोप लगाया है। लॉ इंटर्न ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पी. सदाशिवम से शिकायत की थी। दिल्ली के एक समाचार पत्र ने रिपोर्ट दी है कि चीफ जस्टिस से दो हफ्ते पहले शिकायत की गई थी। शिकायत उस वक्त की गई थी जब सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय समिति जस्टिस गांगुली पर लगे यौन शोषण के आरोपों की जांच कर रही थी। लॉ इंटर्न को बताया गया कि किसी भी पूर्व जज के खिलाफ ताजा शिकायत पर गौर नहीं किया जाएगा। जस्टिस गांगुली का मामला अकेला अपवाद है।
महिला लॉ इंटर्न ने अपने सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को हलफनामा सौंपा था। इसमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश पर यौन प्रताड़ना के आरोप लगाए गए हैं लेकिन पूर्ण कोर्ट मीटिंग ने इस तरह के अन्य मामलों को नहीं देखने का फैसला किया।
पूर्ण कोर्ट मीटिंग में सुप्रीम कोर्ट के सभी न्यायाधीश शामिल हुए। इसमें फैसला हुआ कि जस्टिस गांगुली के विवाद के बाद आई शिकायतों पर विचार नहीं किया जाएगा। 5 दिसंबर को पूर्ण कोर्ट मीटिंग पर नोटिस सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर पोस्ट किया गया। पूर्ण कोर्ट मीटिंग में कहा गया था कि मुख्य न्यायाधीश का रिटायर्ड जजों पर अधिकार क्षेत्र नहीं है।
एडिशनल सोलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह ने इस मामले पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया है। वहीं सुप्रीम कोर्ट के पीआरो राकेश शर्मा और महासचिव रविन्द्र मैथानी ने कहा कि उन्हें लॉ इंटर्न की ताजा शिकायत के बारे में कोई जानकारी नहीं है। जिस लॉ इंटर्न ने जस्टिस गांगुली पर आरोप लगाए थे उसने कहा था कि वह ऎसी चार लॉ इंटर्न को जानती है जिनका पूर्व जजों ने यौन शोषण किया।
-एजेंसी

करोड़ों खर्च करके डाली गई मेरे और अन्‍ना के बीच में दरार

नई दिल्ली। 
अन्ना हजारे के साथ अपने संबंधों में आई दरार को ‘मतभेद’ बताते हुए आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उनके ‘गुरु’ उनके दिल में हैं। हालांकि, निहित स्वार्थों वाली अनेक पार्टियों ने उनके बीच दरार पैदा करने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए हैं। केजरीवाल ने हालांकि माना कि लोकपाल विधेयक को लेकर हजारे के साथ उनका मतभेद है। उन्होंने कहा कि वह मानते हैं कि यह विधेयक 'कमजोर' है और मजबूत जनलोकपाल विधेयक के लिए संघर्ष करते रहेंगे।
आप नेता ने कहा कि कई पार्टियों की बड़ी ताकतें उनके और हजारे के बीच दरार पैदा करना चाहती हैं क्योंकि वे मानते हैं कि अगर केजरीवाल और हजारे ने हाथ मिला लिया तो यह परमाणु बम से भी ज्यादा खतरनाक हो जाएगा।
केजरीवाल ने एक टेलीविजन चैनल से कहा कि हरेक पार्टियों के सभी गलत लोगों ने अपने निहित स्वार्थों की वजह से हमें अलग करने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए हैं।
केजरीवाल ने कहा कि मैं व्यक्तिगत रूप से सरकार बनाने के खिलाफ था क्योंकि हमने बार बार कहा है कि हम कांग्रेस अथवा भाजपा को न तो समर्थन देंगे और न ही उनसे समर्थन लेंगे, लेकिन बाद में लोगों के एक वर्ग ने यह कहना शुरू कर दिया कि हमें सरकार बनानी चाहिए, जबकि दूसरा वर्ग इसका विरोध कर रहा था, इसलिए हमने इस बारे में फैसला लेने के लिए जनता के पास जाने का फैसला किया।
हालांकि उन्होंने कहा कि दिल्ली में सरकार बनाने का फैसला रविवार की रात को किया जाएगा और इसकी घोषणा सोमवार को होगी।
-एजेंसी

मंगलवार, 17 दिसंबर 2013

भारत में यूएस डिप्‍लोमेट्स के 'गे' पार्टनर को अरेस्‍ट करें

नई दिल्ली। 
अमेरिका में भारतीय राजनयिक देवयानी के साथ हुई बदसलूकी के विरोध में भारत का रुख कड़ा हो गया है। वहीं मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी भी इस मामले में पूरी तरह से सरकार के साथ है। बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि भारत सरकार को भारत में रह रहे अमेरिकी राजनयिकों के समलैंगिक साथियों को गिरफ्तार कर लेना चाहिए क्योंकि ये डिप्लोमेटिक कोड ऑफ कंडक्ट का साफ उल्लंघन है।
सिन्हा ने कहा कि दुनिया का कोई भी मित्र देश राजनयिकों के साथ इस तरह का सुलूक नहीं करता जैसा अमेरिका ने न्यूयॉर्क में भारत के काउंसलेट जनरल की हेड के साथ किया। अमेरिकी प्रशासन की इस कार्यवाही की निंदा करने के लिए शब्द पर्याप्त नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में धारा 377 को सही ठहराया है जिसके तहत भारत में समलैंगिक यौन संबंध अपराध करार दिए गए हैं। सिन्हा ने कहा कि भारत में रह रहे अमेरिकी राजनयिकों को भी किसी तरह की छूट नहीं दी जानी चाहिए और उन पर भी यहां का कानून लागू होना चाहिए।
सिन्हा ने कहा कि मुझे पता चला है कि भारत में रह रहे कई अमेरिकी राजनयिकों के समलैंगिक पार्टनर हैं, जिन्हें वीजा मिला हुआ है और जो यहीं रह रहे हैं। भारत सरकार को धारा 377 के तहत उनके वीजा रद्द कर देने चाहिए और उनके समलैंगिक साथियों को गिरफ्तार कर जेल में बंद कर देना चाहिए क्योंकि वे भारत के कानून का उल्लंघन कर रह हैं।
-एजेंसी

नौकरशाहों के खिलाफ अभियोजन में मंजूरी जरूरी नहीं

नई दिल्‍ली। 
सीबीआई को अदालती निगरानी वाले भ्रष्टाचार के बावत वरिष्ठ नौकरशाहों के खिलाफ अभियोजन में केन्द्र सरकार की मंजूरी की कोई जरूरत नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी कि इसने एजेंसी को मजबूत किया है जिससे वह सरकार से पूर्व मंजूरी लिए बिना अधिकारियों के खिलाफ जांच कर सकती है.
न्यायमूर्ति आर. एम. लोधा की अध्यक्षता में तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ ने केन्द्र की मंजूरी के इंतजार के बगैर कोलगेट में कथित रूप से संलिप्त नौकरशाहों के खिलाफ अभियोजन के लिए सीबीआई का मार्ग प्रशस्त कर दिया है.
खंडपीठ ने कहा, ‘जब कोई मामला भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत अदालत की निगरानी में हो तो दिल्ली विशेष पुलिस संस्थापन (डीएसपीई) कानून की धारा 6ए के तहत मंजूरी आवश्यक नहीं है.’
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार के सभी मामलों में वरिष्ठ नौकरशाहों के खिलाफ जांच के लिए आवश्यक मंजूरी के केंद्र के रख पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि इस प्रकार का वैधानिक प्रावधान कोलगेट जैसे मामलों मे अदालती निगरानी वाली जांच में न्यायिक शक्ति को कम करेगा.
उसने केंद्र के इस दावे को दरकिनार कर दिया था कि डीएसपीई कानून की धारा 6ए के तहत संयुक्त सचिव स्तर के दर्जे या उससे ऊपर के दर्जे के अधिकारियों के खिलाफ जांच करने के लिए सक्षम प्राधिकरण की मंजूरी की आवश्यकता होती है.
-एजेंसी

रविवार, 15 दिसंबर 2013

जूते गांठकर जीवन यापन कर रहा है पूर्व विधायक का बेटा

बिलासपुर। 
कहते हैं कि राजनीति में आने वाले लोगों के पीछे लक्ष्मी खुद-ब-खुद चली आती हैं, लेकिन 1957 में हिमाचल प्रदेश असेंबली में विधायक रह चुके सरदारू राम को ऐसा नहीं लगता है. सरदारू राम ने अपना जीवन सादगी से जिया. मोची बनकर काम करते हुए उनका निधन हो गया था. उनके निधन के बाद उनके बेटे मीनू राम भी मोची के तौर पर काम करते हैं और अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं.
मीनू राम ने बताया, 'अपना और अपने परिवार का पेट पालने के लिए मैं करीब 50 सालों से जूते सी रहा हूं. यही एकमात्र विरासत मेरे विधायत पिता छोड़कर गए हैं. हमारे लिए सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं है न ही कोई पेंशन मिलती है.'
65 साल के मीनू राम ने बताया कि शिमला से करीब 135 किमी की दूरी पर बिलासपुर की भगेड़ चौक पर वो बैठते हैं और रोज करीब कुछ सौ रुपये कमा लेते हैं. सरदारू राम ने 1957 में विधायक के तौर पर शपथ ली थी लेकिन 1962 में अपनी सीट से हारने के बाद उन्हें वापस मोची बनना पड़ा था.
मीनू राम के दो बेटे और दो भाई हैं. चारों मजदूरी करते हैं. ये परिवार कच्चे मकान में रहता है जिसे सरदारू राम ने बनवाया था. 1957 में झंडूटा चुनाव-क्षेत्र से जीतकर सरदारू राम स्टेट असेंबली में पहुंचे थे. लेकिन 1962 में हारने के बाद उनके पास अपने पुराने काम पर लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था.
सरदारू राम की मृत्यु 1972 में हुई और विधायक के परिवार को मिलने वाली पेंशन के अभाव में उन्हें अपने बेटे को अपना काम सौंप कर जाना पड़ा. आज हिमाचल प्रदेश के 68 विधायकों में से 44 करोड़पति हैं जबकि बाकी भी पैसों में खेल रहे हैं. ब्रिज बिहारी लाल बुतैल राज्य के सबसे अमीर विधायक हैं जिनके पास करीब 169 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी है.
-एजेंसी
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