गुरुवार, 3 अप्रैल 2014

गे केस: खुली कोर्ट में सुनवाई को SC तैयार

उच्चतम न्यायालय समलैंगिकता को आपराधिक कृत्य करार देने वाले अपने फैसले के खिलाफ समलैंगिक अधिकार कार्यकर्ताओं की ओर से दायर सुधारात्मक याचिकाओं पर खुली अदालत में सुनवाई के लिए राजी हो गया है। प्रधान न्यायाधीश पी सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वे दस्तावेजों का निरीक्षण करेंगे और याचिका पर गौर करेंगे। इस पीठ के समक्ष यह मामला विभिन्न पक्षों की ओर से वरिष्ठ वकीलों ने उठाया था।
सुधारात्मक याचिका अदालत में किसी मामले से जुड़ी चिंताओं पर दोबारा विचार का अंतिम न्यायिक रास्ता है और सामान्यत: इस पर न्यायाधीश बिना किसी पक्ष को बहस की अनुमति दिए अपने कक्ष में सुनवाई करते हैं। याचिकाकर्ताओं में नाज़ फाउंडेशन नामक गैर सरकारी संगठन भी शामिल है, जो लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर (एलजीबीटी) समुदाय की ओर से कानूनी लड़ाई लड़ रहा है।
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि पिछले साल 11 दिसंबर को दिए गए फैसले में गलती है और वह पुराने कानून पर आधारित है। वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक देसाई ने पीठ को बताया, ‘‘फैसले को 27 मार्च 2012 को सुरक्षित रख लिया गया था लेकिन फैसला लगभग 21 महीने बाद सुनाया गया।
इस दौरान कानून में संशोधन समेत बहुत से बदलाव हुए और फैसला देते समय पीठ ने इनपर ध्यान नहीं दिया।’’ हरीश साल्वे, मुकुल रोहतगी, आनंद ग्रोवर जैसे वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ अन्य वकीलों ने भी देसाई का समर्थन किया और एक खुली अदालत में सुनवाई की अपील की।
-एजेंसी

ये क्‍या...आठ सीटों पर भाजपा के दो-दो प्रत्‍याशी!


यूं तो राजनेता किसी संभावित प्रश्‍न का जवाब देना उचित नहीं समझते लेकिन संभावनाएं उनसे उत्‍तर की दरकार रखती हैं लिहाजा यदि वो संतुष्‍ट नहीं करते तो खुद-ब-खुद उत्‍तर तलाश लेती हैं।
राजनीति के इस संक्रमण काल में चूंकि राजनीतिक दलों की बाजीगरी के लिए असीमित संभावनाएं भरी पड़ी हैं और संविधान उनकी इन संभावित बाजीगरी के आगे लगभग नतमस्‍तक है लिहाजा आमजन इस बाजीगरी का आंकलन अपने स्‍तर से करने लगता है।
16 वीं लोकसभा के लिए 10 अप्रैल से शुरू हो रहे चुनावों में किसके सिर जीत का सेहरा बंधने वाला है और किसके हाथों की लकीरें उसे सत्‍ता के शीर्ष पर काबिज कराती हैं, यह तो 16 मई के बाद ही पता लग पायेगा अलबत्‍ता एक बात जो पता लग चुकी है, वह यह है कि सत्‍ता की चाहत के इस खेल में यदि जादुई अंकों की जरूरत पड़ी तो राष्‍ट्रीय लोकदल जैसे छोटे दलों की लॉटरी निकल पड़ेगी।
कहने को राष्‍ट्रीय लोकदल आज की तारीख तक यूपीए का हिस्‍सा है और कांग्रेस के सहयोग से उसके युवराज जयंत चौधरी कृष्‍ण की नगरी में दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं परंतु नतीजे आने पर वह यूपीए का भाग रहेंगे या नहीं, इसकी गारंटी वह स्‍वयं नहीं दे सकते।
सब जानते हैं कि जिस तरह आज वह कांग्रेस की वैसाखी के सहारे चुनाव मैदान में हैं, उसी तरह पिछला चुनाव उन्‍होंने भाजपा के कांधों का सहारा लेकर लड़ा था। रालोद के युवराज तो अपना पहला लोकसभा चुनाव जीत गए परंतु भाजपा के नेतृत्‍व वाला एनडीए संख्‍याबल से हार गया।
जाहिर है कि एनडीए की सत्‍ता बनती न देख रालोद ने तुरंत कांग्रेस के नेतृत्‍व वाले यूपीए में घुसपैठ की जुगत भिड़ानी शुरू कर दी किंतु उस समय यूपीए ने सत्‍ता पर काबिज होने लायक सीटों की जुगाड़ कर ली थी।
समय के साथ केन्‍द्र के कांग्रेस नेतृत्‍व पर भ्रष्‍टाचार तथा महंगाई न रोक पाने के आरोप जब लगने लगे और यूपीए के घटक दल कांग्रेस को आंखें दिखाने लगे तो कांग्रेस ने खतरे को भांपकर समय रहते अपना गणित फिट करना जरूरी समझा। कांग्रेस के इस गणित को फिट करने में रालोद से बेहतर और कौन हो सकता था नतीजतन उसके मुखिया चौधरी अजीत सिंह को केन्‍द्र में मंत्रीपद से नवाज़ कर दोनों ने अपनी-अपनी जरूरतें पूरी कर लीं।
अब मथुरा की जनता के जेहन में यह सवाल पैदा होना लाजिमी है कि इस बार अगर जयंत चौधरी फिर जीत जाते हैं लेकिन केन्‍द्र में यूपीए की सरकार बनने के आसार दिखाई नहीं देते तो भी क्‍या रालोद यूपीए का हिस्‍सा बना रहेगा?
यही वो संभावित प्रश्‍न है जिसका उत्‍तर देने को कोई तैयार नहीं, लेकिन उत्‍तर तो चाहिए क्‍योंकि उत्‍तर न मिलने पर तमाम प्रतिप्रश्‍न खड़े हो जाते हैं।
ज़रा सोचिए कि यदि केन्‍द्र में यूपीए की सरकार बनने की संभावना नहीं रहती और भाजपा के नेतृत्‍व वाली एनडीए को भी स्‍पष्‍ट बहुमत नहीं मिलता (जिसकी कि संभावनाएं काफी हैं) तो भी क्‍या रालोद, यूपीए का हिस्‍सा बना रहेगा?
रालोद के मुखिया चौधरी अजीत सिंह का ट्रैक रिकॉर्ड देखें तो साफ पता लगता है कि वह ऐसी स्‍थिति में एनडीए का हिस्‍सा बनते कतई देर नहीं लगायेंगे। इसके लिए सौदेबाजी में नफा-नुकसान का बेहतर आंकलन करना उन्‍हें आता है और निश्‍चित ही वह अपने लिए फायदे का सौदा करेंगे।
तो क्‍या यह मान लिया जाए कि मथुरा ही क्‍यों, पश्‍चिमी उत्‍तर प्रदेश की जिन आठ सीटों पर रालोद, कांग्रेस के सहयोग से चुनाव लड़ रही है... वहां परोक्ष तौर पर भाजपा के ही दो-दो प्रत्‍याशी चुनाव मैदान में हैं।  एक उसके अपने सिंबल पर और दूसरा रालोद के रूप में। क्‍योंकि फिर चाहे भाजपा का प्रत्‍याशी जीते या रालोद का, अंतत: जरूरत पड़ने पर वह गिरेगा तो भाजपा की ही झोली में।
रालोद के लिए ऐसा करना इसलिए और आसान हो जाता है क्‍योंकि उसका दायरा बहुत छोटा है तथा जब चाहे व जहां चाहे पलटी मारने में उसके सामने कोई समस्‍या खड़ी नहीं होती।
अगर ऐसी परिस्‍थितयां बनती हैं तो बेशक भाजपा भी इसके लिए कम जिम्‍मेदार नहीं होगी परंतु उसकी चिंता करता कौन है। सत्‍ता पर काबिज होने को लालयित जो भाजपा आज सब कुछ ग्राह्य बना चुकी है, उसे जरूरत के समय रालोद से परहेज क्‍यों होने लगा। फिर पिछले ही चुनावों में रालोद उसका साथी भी रहा है। दोनों दल एक-दूसरे की फितरतों से भली प्रकार वाकिफ हैं।
रहा सवाल उस जनता का जो आज एक को रालोद-कांग्रेस का संयुक्‍त उम्‍मीदवार मानकर मतदान करेगी और उन पार्टी कार्यकर्ताओं का जो अपने आलाकमान के आदेश-निर्देशों का सिर झुकाकर पालन करेंगे, तो उनकी फ़िक्र है किसे।
यहां तो फ़िक्र सिर्फ कुर्सी की है, वह चाहे जिन हथकंडों से मिलती हो।
तो दोस्‍तो! तैयार रहिए नतीजों के बाद राजनीतिक दलों की असली और बड़ी बाजीगरी देखने के लिए। आप मतदान चाहे जिसके पक्ष में करें लेकिन आपका जनप्रतिनिधि उसी दल का होगा, जिसकी सरकार बनेगी।
मथुरा सहित रालोद के हिस्‍से वाली  पश्‍चिमी उत्‍तर प्रदेश की आठ सीटों के बावत आप यूं भी समझ सकते हैं कि यहां हर सीट पर भाजपा के दो-दो प्रत्‍याशी चुनाव मैदान में हैं।
तय समझिए कि सरकार बनने के बाद आपके पास दोहराने को केवल यही रह जायेगा कि 'कोऊ नृप होए, हमें का हानि'।

सोमवार, 31 मार्च 2014

फिक्‍सिंग ही नहीं IT की भी जांच के घेरे में हैं माही-साक्षी

नई दिल्ली। 
टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी एक और विवाद में घिरते दिख रहे हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट रीयल्टी कंपनी आम्रपाली ग्रुप के चेयरमैन अनिल शर्मा की ओर से धोनी को मिले 75 करोड़ रुपये के चार पोस्ट डेटेड चेकों की जांच कर रहा है। डिपार्टमेंट की रांची यूनिट इस बात की जांच कर रही है कि ये चेक टैक्स के दायरे में आते हैं या नहीं।
आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में उनका नाम घसीटे जाने की वजह से धोनी पहले से ही परेशान हैं। मीडिया में यह रिपोर्ट आई थी कि इससे खिन्न होकर उन्होंने चेन्नै सुपरकिंग्स की कप्तानी छोड़ने की पेशकश कर डाली है, हालांकि बाद में उनके प्रवक्ता ने इसका खंडन किया था। ऐसे में चेक का मामला उनकी परेशानी बढ़ा सकता है।
जानकारी के मुताबिक, अनिल शर्मा की ओर से धोनी को चारों चेक वित्त वर्ष 2011-12 में जारी किए गए थे और इन्‍हें 2014 में कैश कराया जाना था। धोनी आम्रपाली ग्रुप के ब्रैंड ऐम्बैस्डर भी हैं जबकि उनकी पत्नी साक्षी सिंह रावत आम्रपाली माही डिवेलपर्स में 25% की हिस्सेदार हैं। आम्रपाली माही डिवेलपर्स, आम्रपाली ग्रुप और धोनी का जाइंट वेंचर है।
आम्रपाली के सूत्रों ने बताया कि मीडिया रिपोर्ट्स और पिछले साल अगस्त में कंपनी के दिल्ली और उत्तर प्रदेश स्थित ऑफिसों पर छापे के बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने चेकों को लेकर ब्योरा मांगा है। नाम न जाहिर करने की शर्त पर कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि अधिकारियों को बुलाकर पूछताछ की गई है और जांच डिपार्टमेंट की रांची यूनिट को सौंप दी गई है। इस मामले में विभाग जल्द ही धोनी का पक्ष भी जानेगा।
चेकों को लेकर धोनी और आम्रपाली ग्रुप की अलग-अलग बात कही है। धोनी के प्रवक्ता ने कहा कि आम्रपाली माही डिवेलपर्स में धोनी ने जो निवेश किया है, ये चेक बतौर उसकी सिक्‍यॉरिटी दिए गए। आम्रपाली ग्रुप ने कहा कि आम्रपाली माही डिवेलपर्स को रांची में एक क्रिकेट अकादमी बनानी थी और ये चेक उसी काम की गारंटी के लिए दिए गए थे लेकिन काम शुरू न हो पाने की वजह कप्तान ने इन्हें लौटा दिया। हालांकि, जब आम्रपाली के प्रवक्‍ता से पूछा गया कि चेक आम्रपाली माही डेवलपर्स के बजाय धोनी के नाम पर क्‍यों जारी किया गया तो वह जवाब नहीं दे सके।
धोनी के प्रवक्ता अरुण पांडे ने बताया, 'मुझे धोनी के वित्तीय मामलों की जानकारी नहीं है लेकिन जहां तक मुझे ध्यान है ये चेक धोनी को आम्रपाली में किए गए निवेश की सिक्यॉरिटी के तौर पर दिए गए थे।
-एजेंसी

रविवार, 30 मार्च 2014

60 सालों का सबसे बड़ा करप्‍शन स्‍कैंडल

बीजिंग। 
चीनी अधिकारियों ने चीन के पूर्व मुख्य सुरक्षा अधिकारी झोऊ योंगकांग के रिश्तेदारों से 14.5 बिलियन डॉलर (तकरीबन 800 अरब रुपए) की संपत्ति जब्त की है। इसे पिछले छह दशकों में अब तक का सबसे बड़ा करप्शन स्कैंडल बताया जा रहा है। झोऊ के 300 से ज्यादा रिश्तेदारों, राजनैतिक सहयोगियों और स्टाफ सदस्यों को पिछले चार हफ्तों की पूछताछ के बाद हिरासत में लिया गया है। स्कैंडल की जांच में शामिल अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर सूत्रों ने समाचार एजेंसी को यह बताया।
पिछले साल जांच शुरू किए जाने के बाद 71 वर्षीय झोऊ को उनके घर में नजरबंद किया गया था। साल 1949 में कम्युनिस्ट पार्टी के सत्ता में आने के बाद पहली बार भ्रष्टाचार के इतने बड़े मामले में कोई वरिष्ठ राजनेता फंसा है।
नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर चीनी राजनीति के एक सक्रिया नेता ने बताया, "इस घटना ने चीन की छवि को धूमिल किया है। यह देश पर लगा बदनुमा दाग है।"
चीन की सरकार ने अभी तक झोऊ के बारे में कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। यह भी मालूम नहीं चला है कि झोऊ के रिश्तेदारों में से किसी ने कोई वकील किया है या नहीं।
साल 2007 में पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी ज्वाइन करने से पहले झोऊ, पब्लिक सिक्युरिटी विभाग में सिक्युरिटी चीफ के पद पर थे। साल 2012 में वह 18वीं पार्टी कांग्रेस से रिटायर हुए और उन्हें आखिरी बार चाइना यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम के एलुमनी प्रोग्राम में देखा गया।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार के एंटी करप्शन निगरानी दल ने कई बैंक अकाउंट्स को सीज किया है, जिनमें 37 बिलियन युआन जमा थे। इसके अलावा बीजिंग, शंघाई सहित पांच प्रांतों में स्थित घरों में मारे गए छापे में 51 बिलियन युआन वैल्यू के डोमेस्टिक और ओवरसीज बॉंड्स जब्त किए गए।
जांचकर्ताओं को 1.7 बिलियन युआन वैल्यू के 300 अपार्टमेंट्स और बंगलों की जानकारी भी मिली है। 1 बिलियन युआन कीमत की प्राचीन वस्तुएं और 60 से ज्यादा गाड़ियां जब्त की गई हैं। महंगी शराब, सोना, चांदी और विदेशी करंसी भी जब्त की गई।
जब्त की गई संपत्ति की कुल वैल्यू 90 बिलियन युआन है। माना जा रहा है कि जब्त की गई संपत्ति की कीमत को जनता के सामने कम करके बताया जा रहा है, ताकि सरकार को कम शर्मिंदगी झेलनी पड़े।
-एजेंसी

मंगलवार, 25 मार्च 2014

हर सिक्‍के के दो पहलू होते हैं

पॉर्न को लेकर समाज में बहुत अच्छे विचार नहीं हैं। इसे अश्लीलता और मानसिक विकृति के साथ जोड़ कर देखा जाता है। लेकिन जिस तरह से हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, ठीक उसी तरह पॉर्न भी हमेशा गलत ही हो, यह जरूरी नहीं। एक नए रिसर्च में पॉर्न के पॉज़िटिव पहलूओं पर ध्यान दिलाया गया है। साथ ही इसमें बताया गया है कि पॉर्न अडिक्शन जैसा कुछ भी नहीं होता।
पॉर्न देखने वाले लोगों के लिए रिसर्च में कहा गया है कि यह सेक्शुअल रिलेशन को ज्यादा मजबूत बनाता है। अपने पार्टनर के साथ पॉर्न देखने वाले लोग सेक्स लाइफ में ज्यादा संतुष्ट और खुश रहते हैं। साथ ही इससे एक्सट्रा मैरिटल अफेयर के भी होने का चांस भी घटता है।
स्प्रिंगर जर्नल में छपी रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार सेक्शुअल रिलेशन में एक समय के बाद आने वाली नीरसता को भी पॉर्न के माध्यम से कम या खत्म किया जा सकता है। रिसर्च में इसे पार्टनर के बीच की ऐसी कड़ी बताया गया है जो रिश्ते को बनाए रखता है और गरमाहट भी प्रदान करता है।
पॉर्न देखने वाले लोगों को लेकर एक भ्रम यह भी समाज में है कि वे इसके अडिक्शन का शिकार हो जाते हैं। रिसर्च में इसे एक भ्रम ही बताया गया है और कहा गया है कि सही मायने में ऐसा कुछ भी नहीं होता।
सेक्स से जुड़े अपराधों के रोकथाम और कमी के बारे में भी इस रिसर्च में चौंकाने वाले बातें बताई गईं हैं। रिसर्च के अनुसार ऐसे सेक्स ऐक्टिविटी, जिन्हें हम गैर-कानूनी या असामाजिक मानते हैं (रेप, एनल सेक्स, हस्तमैथुन आदि) को पॉर्न के जरिए कम किया जा सकता है। सेक्स संबंधी मानसिक कुंठा को कम करने का रास्ता है पॉर्न।
-एजेंसी

चंदे में धंधा: गिरफ्तार होगी तीस्‍ता और उसका पति जावेद

अहमदाबाद। 
गुजरात की अहमदाबाद सेशन कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड और उनके पति जावेद आनंद की अग्रिम जमानत याचिका ख़ारिज कर दी है. अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने आगे की जानकारी देते हुए बताया है कि वे इस मामले में गुलबर्ग सोसाइटी के बाकी निवासियों का बयान लेंगे और इसके बाद तीस्ता और अन्य को गिरफ़्तार करने के बारे में फ़ैसला लेंगे.
अहमदाबाद की क्राइम ब्रांच शाखा ने तीस्ता शीतलवाड़, उनके पति जावेद आनंद और स्वर्गीय कांग्रेस सांसद एहसान जाफ़री के बेटे तनवीर के खिलाफ एफ़आईआर दर्ज की है.
कोर्ट ने जमानत याचिका ख़ारिज करते हुए कहा कि तीस्ता और अन्य चार अभियुक्तों पर प्रत्यक्ष जांच की जाएगी.
अभियोग पक्ष के विशेष वकील अजय चोकसी ने बताया, "जज ने कहा कि तीस्ता और अन्य पर लगे आरोप प्रत्यक्ष तौर पर जाँच के लायक हैं और ऐसा नज़र आता है कि केस में सबूतों को मिटाने की कोशिश की गयी है. इसलिए इन्हें अग्रिम जमानत नहीं मिल सकती."
अजय चोकसी ने बताया कि अदालत ने उन्हें उपस्थित होने का आदेश दिया है.
विशेष अभियोग पक्ष वकील चोकसी बताते हैं, "कोर्ट ने कहा कि तीस्ता और अन्य अभियुक्तों ने सुप्रीम कोर्ट में अपने खिलाफ लगे आरोपों को ख़ारिज करने के लिए जो याचिका दाखिल की है उसमें केस से जुड़ी सभी जानकारी नहीं दी है."
साल 2002 के दंगा पीड़ितों ने तीस्ता सीतलवाड और अन्य के ख़िलाफ़ उनके नाम पर विदेशी चंदा लेने और उसके दुरुपयोग का आरोप लगाया है.
गुजरात के अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी में हुई आगजनी और हमले में 69 लोग मारे गए थे. इसी आगजनी में फ़िरोज़ सईद ख़ान पठान ने अपने परिवार के तीन लोगों को खो दिया था. उनकी शिकायत पर क्राइम ब्रांच ने यह मामला दर्ज किया है.
तीस्ता एवं अन्य लोगों पर भरोसा तोड़ने, धोखाधड़ी, और आपराधिक साजिश के आरोप लगे हैं. इस मामले की जाँच अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ़ पुलिस एनके पटेल कर रहे हैं.
क्राइम ब्रांच के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ़ पुलिस एनके पटेल ने बीबीसी को बताया, “तीस्ता और अन्य पर आरोप है कि उन्होंने गुलबर्ग सोसाइटी और दूसरे दंगों में प्रभावित व्यक्तियों की तस्वीरें और वीडियो अपनी वेबसाइट पर लगाकर लोगों से दान देने की अपील की.”
शिकायत करने वाले फ़िरोज़ सईद ख़ान पठान ने शिकायत की थी कि दंगे में प्रभावित लोगों की तस्वीरों और वीडियो से तीस्ता की संस्था 'सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस' (सीजेपी) और 'सबरंग' को करोड़ों रुपये का दान मिला था.
पटेल ने बताया, “पठान ने आरोप लगाया है कि तीस्ता और अन्य अभियुक्तों ने वर्ष 2007 से 2011 के बीच दान की रक़म में से एक करोड़ 51 लाख रुपये का अपने निजी कामों के लिए इस्तेमाल किया है.
उन्होंने आगे कहा, "पठान के मुताबिक यह रुपया दंगा पीड़ितों की मदद के लिए और गुलबर्ग सोसाइटी में एक संग्रहालय बनाने के लिए इकट्ठा किया गया था.”

सोमवार, 24 मार्च 2014

पोर्न देखने में भी भारतीय हैं विश्‍व में नंबर वन

भारतीयों द्वारा इंटरनेट पर वेबसाइट्स देखने की आई रिपोर्ट ने सबको चौंका कर रख दिया है। इस रिपोर्ट में भारत में 2013 के दौरान सबसे ज्यादा एक्सेस की गई 100 वेबसाइट्स का नाम बताया गया है। लेकिन इसमें चौंकाने वाली बात ये है इन टॉप 100 मोस्ट वीवीड वेबसाइट्स में 6 पोर्न साइट्स हैं। अगर इसकी तुलना अमरीका से की जाए तो यह उससें कहीं ज्यादा है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में सबसे ज्यादा देखी जाने वाली पोर्न वेबसाइट एक्सवीडियो डॉट कॉम है जो 100 में से 13वें नम्बर पर है। भारत में इस वेबसाइट को एक्सेस करने का आंकड़ा 20.78 फीसदी रहा जबकि अमरीका में यह 4.1 फीसदी रहा।
इतना ही नहीं, इस वेबसाट के अलावा भारतीय बहुत सारी पोर्न वेबसाइट्स देखने में अव्वल रहे जिनमें एक्सएन डॉट कॉम 100 सबसे ज्यादा देखी वेबसाइट्स में 33वें नम्बर रही।
बताया गया है कि पोर्न देखने के इस बढ़ते आंकड़े का कारण मोबाइल फोन्स हैं। लोग ऐसी वेबसाइट्स ज्यादातर सस्ती कीमत में उपलब्ध मोबाइल फोन्स पर एक्सेस करते हैं। रिपोर्ट में भारतीयों द्वारा सबसे ज्यादा एक्सेस की गई वेबसाइट फेसबुक डॉट कॉम, गूगल डाट सीओ डाट इन, गूगल डॉट कॉम तथा यूटयूब रही।
-एजेंसी
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