शुक्रवार, 20 जून 2014

ऑगस्टा वेस्टलैंड घोटाले में दो राज्‍यपालों से पूछताछ होगी

नई दिल्‍ली। 
सीबीआई डायरेक्टर रणजीत सिन्हा ने पहली बार माना है कि ऑगस्टा वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर की खरीद से जुड़े घोटाले में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल एम. के. नारायणन और गोवा के राज्यपाल बी. वी. वांचू से पूछताछ हो सकती है। जांच एजेंसी अगले कुछ दिनों में इन दोनों से पूछताछ कर सकती है। अगर ऐसा होता है, तो बीजेपी सरकार को इन राज्यपालों का इस्तीफा लेने का बेहतर मौका मिल जायेगा।
सिन्हा ने बताया कि जांच एजेंसी पहले ही दोनों राज्यपालों के लिए सवाल तैयार कर चुकी है और जल्द ही अधिकारियों की एक टीम को पूछताछ के लिए भेजा जाएगा। उन्होंने बताया, 'ऑगस्टा वेस्टलैंड घोटाले में जांच को और नहीं रोका जा सकता। पूछताछ इस महीने के आखिर तक होगी। हम राज्यपालों से पूछताछ गवाह के तौर पर कर रहे हैं और हमें इसके लिए सरकार से मंजूरी लेने की कोई जरूरत नहीं है।'
यह पूछे जाने पर क्या सीबीआई की योजना दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और केरल की गवर्नर शीला दीक्षित से भी पूछताछ करने की है, सिन्हा का कहना था कि ऐसी कोई योजना फिलहाल नहीं है। शीला दीक्षित का नाम दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) घोटाले में आया है, जिसकी जांच भी सीबीआई के जिम्मे है। उन्होंने बताया, 'हमारे पास अब तक तत्कालीन मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई सामग्री नहीं है लेकिन जांच अब भी जारी है।'
मुख्यमंत्री होने के नाते शीला दीक्षित दिल्ली जल बोर्ड की चेयरपर्सन भी थीं। सीबीआई ने दिल्ली जल बोर्ड में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप प्रॉजेक्ट के सिलसिले में पिछले साल 3 शुरूआती जांच की थी। इस मामले में दिल्ली जल बोर्ड ने दिल्ली में बेरोकटोक पानी की सप्लाई के लिए यूरोपीय फर्म से समझौता किया था।
नारायणन, वांचू और दीक्षित को कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए-2 सरकार में गवर्नर बनाया गया था। बीजेपी की अगुवाई वाली मौजूदा सरकार 7 राज्यपालों को हटाना चाहती है। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल शेखर दत्त पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं और कुछ ने जल्द ही ऐसा करने के संकेत दिए हैं।
होम मिनिस्ट्री के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि अगर सीबीआई इस घोटाले में नारायणन और वांचू से पूछताछ करती है तो दोनों के लिए संवैधानिक स्थिति को सही ठहरना मुश्किल हो जाएगा। एक सीनियर अधिकारी ने बताया, 'इस हाई ऑफिस की गरिमा को कायम रखने के लिए इन लोगों को पूछताछ होने से पहले ही खुद से इस्तीफा दे दिया जाना चाहिए।'
यूपीए-1 सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रह चुके नारायणन ने इस्तीफा देने के संकेत दिए हैं जबकि एसपीजी के पूर्व हेड वांचू इस मामले पर चुप हैं। हालांकि, सीबीआई अधिकारियों ने साफ किया है कि पूछताछ की टाइमिंग का सरकार और राज्यपालों के बीच चल रहे टकराव से कोई लेना-देना नहीं है।
-एजेंसी

शुक्रवार, 13 जून 2014

LTC घोटाले में 6 राज्यसभा सांसदों के खिलाफ केस दर्ज

नई दिल्ली। 
CBI ने एलटीसी घोटाले में शुक्रवार को राज्यसभा के 6 सांसदों के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का केस दर्ज किया। इस घोटाले में पहली बार केस दर्ज हुआ है। CBI ने तीन मौजूदा और तीन पूर्व राज्यसभा सांसदों के खिलाफ धारा 420 और 13 (1) डी के तहत केस दर्ज किया गया है। सांसदों के ठिकानों पर छापे भी मारे गए हैं। जिन तीन मौजूदा सांसदों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है उनमें डी. बंधोपाध्याय (तृणमूल कांग्रेस), ब्रजेश पाठक (बसपा) और लाल मिंग लियाना (एमपीएफ) शामिल है। जिन तीन पूर्व सांसदों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है उनमें जेपीएन सिंह (भाजपा), रेणु बाला (बीजू जनता दल) और महमूद एल. मदनी (राष्ट्रीय जनता दल) शामिल है।
सभी सांसदों ने फर्जी टिकटें और बोर्डिंग पास बनवाए और अपने दौरों के लिए भुगतान लिया। हैरानी की बात यह है कि सांसदों ने यह एक बार नहीं बल्कि तीन-चार बार किया। टैक्स चुकाने पर ही सांसदों को कंपेनियन टिकट दिए जाते हैं। नवंबर 2013 में इस तरह के मामले में सीबीआई ने जदयू सांसद अनिल शर्मा के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।
-एजेंसी

सोमवार, 2 जून 2014

इंडिया बुल्‍स चला रहा था एक्‍स कमिश्‍नर के यहां सेक्‍स रैकेट

मुंबई। 
मुंबई पुलिस की सोशल सर्विस ब्रांच ने अंधेरी इलाके के एक फ्लैट में छापा मारकर सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ करने का दावा किया है। इस मामले में एक शख्स को गिरफ्तार किया है, जबकि दो महिलाओं को देह व्यापार के दलदल से निकालकर शेल्टर हाउस में भेज दिया गया है। यह फ्लैट मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्‍नर और बीजेपी सांसद सत्यपाल सिंह का है। जिस सोसायटी में छापेमारी की गई उसमें कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के फ्लैट हैं।
सत्यपाल सिंह ने कहा है कि उन्होंने फ्लैट किराए पर इंडिया बुल्स को दे दिया था और काफी समय से उस फ्लैट में गए भी नहीं हैं। मुंबई पुलिस के प्रवक्ता और पुलिस उपायुक्त महेश पाटिल ने बताया कि फ्लैट में देह व्यापार की शिकायत मिली थी जिसके बाद छापा मारा गया। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए शख्स का नाम वकील शाह है और वह कंपनी का ही कर्मचारी है। सोशल सर्विस ब्रांच ने आगे की जांच के लिए केस वर्सोवा पुलिस को सौंप दिया है।
इस बारे में संपर्क किए जाने पर सत्यपाल सिंह ने मीडिया को बताया, 'मैंने करीब चार साल पहले इंडिया बुल्स को फ्लैट किराए पर दिया था और कॉन्ट्रैक्ट सितंबर में खत्म होने वाला है। मैं कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने पर विचार कर रहा हूं। इसके अलावा कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के उल्लंघन के लिए कंपनी पर केस भी करूंगा।' इंडिया बुल्स के प्रवक्ता ने कहा, 'आरोपी शाह गेस्ट हाउस का केयरटेकर है और हमें उसकी करतूतों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उसे नौकरी से निकाल दिया गया।'
-एजेंसी
 

रविवार, 1 जून 2014

मामला देश के काले धन का: बड़े कांटे हैं इस राह में...

नई दिल्‍ली। 
मोदी सरकार ने ब्लैक मनी की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) बनाने का ऐलान कर दिया है। एसआईटी के प्रमुख सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एम. वी. शाह को बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट के ही पूर्व जज अरिजीत पासायत एसआईटी के वाइस चेयरमैन होंगे। सदस्यों के रूप में सीबीआई, रॉ, आईबी, ईडी, सीबीडीटी के टॉप अफसर रहेंगे। एसआईटी यह पता लगाएगी कि देश में कितनी ब्लैक मनी है और साथ ही इसे वापस लाने के तरीकों पर सरकार को सुझाव भी देगी। यहां अहम सवाल यह है कि एसआईटी के अधिकारों का दायरा क्या होगा? क्या इसके जरिये विदेशों में जमा भारतीयों का कालाधन वापस लाया जा सकेगा? इस बारे बता रहे हैं जोसफ बर्नाड
क्या है मामला
स्विस बैंक, जर्मनी, सिंगापुर से लेकर मॉरिशस में भारतीयों की ब्लैक मनी होने की खबरें हैं लेकिन अभी तक किसी भी विदेशी या भारतीय एजेंसी के पास यह पुख्ता जानकारी नहीं है कि भारतीयों की कितनी ब्लैक मनी विदेशों में है। सुप्रीम कोर्ट में वकील राम जेठमलानी के अनुसार, कई भारतीय एजेंसियों ने इस बारे में स्टडी की है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारतीयों की करीब 1500 अरब डॉलर (करीब 90 लाख करोड़ रुपये) की ब्लैक मनी विदेशों में है, जो हमारी कुल जीडीपी 1800 अरब डॉलर से कुछ ही कम है।
एसआईटी के मायने
सुप्रीम कोर्ट के कहने पर ही एसआईटी का गठन किया गया है। यह टीम यह पता करेगी कि ब्लैक मनी देश में कितनी है, कितनी विदेशों में जा रही है और किस रूट से जा रही है। ब्लैक मनी के बाहर जाने का एक रास्ता हवाला कारोबार भी है। यदि कोई स्विस बैंक में पैसे जमा कराता है, तो वह किस तरह हुआ है। क्या इसकी जानकारी इनकम टैक्स विभाग को है? यदि नहीं है, तो उस पर टैक्स चोरी का मामला भी बनता है।
अधिकारों पर नजरें
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है, अहम बात यह है कि एसआईटी को कितने अधिकार दिए जाते हैं। क्या एसआईटी को किसी के खिलाफ वित्तीय आपराधिक मामला दर्ज करने, सरकार से पूछे बगैर दूसरे देशों की जांच एजेंसियों के साथ सीधे बात करने, उनसे ब्योरा लेने और उस पर कार्यवाही करने का अधिकार दिया जाता है? क्या इसे शेयर मार्केट रेग्युलेटर की तरह ब्लैक मनी के मामले बैंक खाते बंद करने या संपत्ति सील करने का अधिकार मिलता है? मार्केट एक्सपर्ट सुशील अग्रवाल का कहना है कि ब्लैक मनी या टैक्स चोरी का मामला काफी संवेदनशील होता है। इसमें जल्द कार्यवाही करने की जरूरत होती है। यदि एसआईटी को पूरी तरह से स्वतंत्र नहीं बनाया गया तो रिजल्ट ज्यादा पॉजिटिव नहीं हो सकता।
जुटाएंगे सारा ब्यौरा
एसआईटी के प्रमुख एम. वी. शाह के मुताबिक भारत और दूसरे देशों में कहां-कहां और कितनी ब्लैक मनी है, यह जानने के लिए छह महीने लग सकते हैं। इसका मतलब है कि एसआईटी पहले तो ब्लैक मनी से जुड़े आंकड़े जमा करेगी। इसके बाद इसकी रिपोर्ट सरकार को दी जाएगी और फिर इसको किस तरह से देश में लाया जाए, इसके तरीकों पर विचार होगा।
क्या है मुश्किलें
स्विस प्रशासन को पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने ब्लैक मनी को लेकर चार चिट्ठियां लिखीं। जबाव मिला कि स्विस प्रशासन ने फैसला किया है कि 2011 के बाद के भारतीयों के खाते के बारे में सूचना दी जाएगी। वह भी इस शर्त पर कि भारत सरकार को लिखित रूप से यह आग्रह करना होगा कि उसे इसकी सूचना चाहिए। इसके अलावा यदि किसी भी देश की सरकार को किसी भी व्यक्ति के बारे में शक है कि उसका खाता स्विस बैंक में है तो सरकार को पहले उस व्यक्ति के खि‌लाफ आपराधिक मामला दर्ज करना होगा, तभी उस व्यक्ति के बारे में कोई जानकारी दी जाएगी। जर्मनी ने हाल ही में विदेशी बैंकों में जमा ब्लैक मनी को लेकर कुछ जानकारियां जमा की हैं, लेकिन इसके आंकड़ों को लेकर कुछ संदेह है।
कई हैं कानूनी पेच
भारत दो तरीकों से ब्लैक मनी को वापस ला सकता है। पहला, उसे इन लोगों के खिलाफ वित्तीय आपराधिक मामला दर्ज करना होगा और साबित करना होगा कि यह ब्लैक मनी है यानि इस पर टैक्स नहीं दिया गया है। दूसरा, उन लोगों के नाम सार्वजनिक करने होंगे और स्विस प्रशासन को तकनीकी रूप से यह बताना होगा कि जो धन उसके पास जमा है, वह ब्लैक मनी के दायरे में आता है। ऐसे में सरकार को वह धन जब्त करने का हक है।
क्या सरकार ऐसा कर पाएगी?
मार्केट एक्सपर्ट के. के. मदान का कहना है कि अमेरिका तक यह कर नहीं पाया, भारत के लिए यह करना और मुश्किल होगा। साल 2008 में जब अमेरिका में इकॉनमिक स्लोडाउन था, तब उसने स्विस प्रशासन से उन धनी अमेरिकियों के नाम मांगे थे, जिनकी ब्लैक मनी स्विस बैंकों में जमा है। लिस्ट मिली, पर अमेरिका ने उनके खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी मार्केट में नकदी का अभाव है। वे अपना धन स्विस बैंकों से निकालकर अमेरिकी मार्केट में लगाएं, जब मनी फ्लो बढ़ जाए तो नकदी वापस निकाल लें। अमेरिका ने साफ तौर पर कहा कि कानूनी पेच इतने ज्यादा हैं कि स्विस बैंकों में जमा ब्लैक मनी है, इसे साबित करने में ही काफी वक्त खराब हो जाएगा और फिर लोगों पर वित्तीय आपराधिक केस चलाना पड़ेगा। लिहाजा उसने दूसरा रास्ता अपनाया।
-एजेंसी

सोमवार, 26 मई 2014

बड़ा खुलासा: माफिया डॉन "दाऊद" से मिली दीपिका

नई दिल्‍ली। 
बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण ने गुप्त रूप से माफिया सरगना और 1993 के सीरियल बम धमाकों के आरोपी दाऊद इब्राहिम से मुलाकात की थी। दीपिका ने दाऊद से हॉलीवुड मूवी में पैसा लगाने के लिए कहा था। फिल्म में दीपिका हॉलीवुड अभिनेता टॉम क्रूज के अपोजिट भूमिका निभाएंगी। बांग्लादेश के साप्ताहिक समाचार पत्र "वीकली ब्लिट्स डॉट नेट" ने यह खबर दी है। समाचार पत्र के मुताबिक दाऊद का दोस्त अजीज मोहम्मद भाई भी उस बैठक में मौजूद था।
दीपिका प्रस्तावित फिल्म के निर्देशक के साथ दुबई में मिलने के लिए सहमत हो गई थी। फिल्म की कहानी भारतीय मूल की अमरीकी लड़की की है,जो सीआईए की एजेंट के रूप में एक खतरनाक मिशन पर जाती है। फिल्म की शूटिंग भारत,लेबनान और अमरीका में होगी। फिल्म में दीपिका एक जिहादी ग्रुप में शामिल हो जाती है और वह संगठन के टॉप नेता की हत्या कर देती है।
सूत्रों के मुताबिक दाऊद इब्राहिम फिल्म में पैसा लगाने से हिचक रहा था लेकिन अजीज भाई ने उसे मना लिया। इसके बाद दाऊद इब्राहिम ने हॉलीवुड में दीपिका पादुकोण के लिए दरवाजे खोल दिए। वीकली ब्लिट्ज ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि प्रस्तावित मूवी के निर्देशक को फिल्म के अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। निर्देशक को उम्मीद है कि दुनिया भर के दर्शक दीपिका और टॉम क्रूज के बीच की कैमेस्ट्रिी को स्वीकार कर लेंगे। फिल्म हिंदी और अंग्रेजी भाषा में रिलीज होगी।
-एजेंसी

रविवार, 25 मई 2014

भ्रष्टाचार के आरोप में UPTU के रजिस्ट्रार से सभी काम छीने

लखनऊ। 
उत्तरप्रदेश प्राविधिक विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) के रजिस्ट्रार यूएस तोमर को पद से हटा कर उनसे सभी कामकाज छीन लिए गए हैं. उन्हें 44 इंजीनियरिंग कॉलेजों की संबद्धता से जुड़े केस में पहली नजर में दोषी पाया गया है. हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में गठित जांच कमेटी द्वारा की जा रही जांच प्रभावित न हो, इसलिए यह कदम उठाया गया है. कुलपति डॉ. आरके खांडल ने जांच पूरी होने तक तोमर को सभी कार्यों से अलग करने के आदेश जारी कर दिए हैं. फिलहाल, उन्हें यूपीटीयू की आर्किटेक्चर फैकल्टी से संबद्ध किया गया है. वे प्रतिदिन यहीं पर अपनी उपस्थिति दर्ज करेंगे और बिना निर्देश मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे. उन पर सत्र 2014-15 में संबद्धता के लिए फर्जी वेबसाइट बनाकर कॉलेजों से ऑनलाइन आवेदन लेने और बैंक में अपने स्तर पर ही खाता खोलने का आरोप लगाया गया है.
गौरतलब है कि यूपीटीयू ही ऐसी यूनिवर्सिटी है, जहां यूएस तोमर रजिस्ट्रार पद पर लंबे समय से काम कर रहे हैं. यह पहला मौका है जब किसी कुलपति ने उनके खिलाफ इतनी सख्त कार्रवाई की है. यूपीटीयू के कुलपति डॉ. आरके खांडल का कहना है कि तोमर अगर पद पर बने रहे तो जांच प्रभावित हो सकती है. ऐसे में उन्हें कार्यों से मुक्‍त रखने का फैसला किया गया है.
बीते शैक्षिक सत्र 2013-14 में 44 इंजीनियरिंग कॉलेजों को संबद्धता देने के मामले में उन पर 'बड़ा खेल' करने का आरोप लगाया गया है. इसके कारण करीब 4500 स्टूडेंट्स का भविष्य फंसा हुआ है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार संबद्धता की जो प्रक्रिया 15 मई तक पूरी होनी थी उसे नियम विरुद्ध निर्धारित तारीख के बाद करने की कोशिश की गई. कुलपति ने इस मामले को तब पकड़ा जब संबद्धता कमेटी के सामने रिपोर्ट रखी गई थी. इस प्रकरण में यूपीटीयू प्रशासन की खासी किरकिरी हुई है.
इसके अलावा उन पर 2014-15 में संबद्धता के लिए फर्जी वेबसाइट बनाकर आवेदन लेने और कुलपति से निर्देश लिए बिना ही बैंक में खाता खोलने का भी आरोप है. मामले की गंभीरता को देखते हुए कुलपति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज आलोक कुमार सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन कर दिया था. शनिवार को रजिस्ट्रार यूएस तोमर से जांच पूरी होने तक कार्य से अलग रहने के आदेश जारी कर दिए गए.
विवि प्रशासन का कहना है कि इससे पहले संबद्धता मामले की जांच के लिए सतर्कता आयोग के पूर्व अध्यक्ष एसएन झा और अरुणाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. जीएन पांडेय की दो सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी. इस कमेटी ने 21 जनवरी 2014 को अपनी जो रिपोर्ट दी है उसमें साफ लिखा है कि रजिस्ट्रार यूएस तोमर ने जांच में कोई सहयोग नहीं किया और साक्ष्य भी उपलब्ध नहीं करवाए. अब जो तीन सदस्यीय कमेटी तो बन गई है उसमें जांच प्रभावित न हो इसीलिए उन्हें पद से हटाया गया है.
-एजेंसी

बुधवार, 21 मई 2014

टी-20 विश्व कप में ACSU अफसरों पर बड़ा खुलासा

नई दिल्ली। 
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद् को शर्मनाक स्थिति का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि उसकी भ्रष्टाचार रोधी और सुरक्षा इकाई (एसीएसयू) के एक शीर्ष अधिकारी के बांग्लादेश में इस साल विश्व टी20 प्रतियोगिता के दौरान भारतीय सट्टेबाज के साथ कथित संपर्क का खुलासा हुआ है.
ढाका के टेलीविजन चैनल ‘बांग्ला ट्रिब्यून’ ने आडियो टेप जारी किया है जिसमें भारत से आईसीसी के एसीएसयू अधिकारी और कथित सट्टेबाज के बीच इस साल बांग्लादेश में विश्व ट्वेंटी20 के दौरान कथित बातचीत का जिक्र है.
चैनल ने दावा किया कि इस सट्टेबाज को ढाका पुलिस ने गिरफ्तार किया था लेकिन बाद में आईसीसी एसीएसयू अधिकारी के आग्रह पर उसे रिहा कर दिया गया जिसने अधिकारियों से कहा कि वह उसका मुखबिर है.
चैनल ने कहा, ‘‘आडियो रिकार्ड के आधार पर अप्रैल में सट्टेबाज को गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद उसने क्रिकेट मैच फिक्सिंग पर अहम सूचना मुहैया कराई.’’ एसीएसयू अधिकारी ने इस कथित बातचीत पर प्रतिक्रिया देने से इंकार करते हुए कहा कि ऐसे मुद्दे पर प्रतिक्रिया देना आईसीसी का काम है. इस मामले में आईसीसी ने अब तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है.
इस बातचीत में एसीएसयू अधिकारी सट्टेबाज को सतर्क रहने और तुरंत बांग्लादेश छोड़ने के लिए कह रहा है क्योंकि उसकी उपस्थिति का पता चल चुका है.
अधिकारी साथ ही सट्टेबाज को कह रहा है कि उसकी मौजूगदगी ने सारा मामला बिगाड़ दिया है और उसका बचाव करना मुश्किल होगा.
-एजेंसी
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...