सोमवार, 15 दिसंबर 2014

उपमन्‍यु तो मुखौटा, असली चेहरे सामने आना बाकी

मथुरा। 
किसी भी मामले का पूरा सच सामने लाने के लिए उस पर चढ़े मुखौटे का हटना जरूरी होता है। मुखौटे हमेशा सच्‍चाई को छुपाने में बड़ी भूमिका अदा करते हैं। मुखौटों को मोहरा बनाकर खेल खेलने वाले जानते हैं कि यदि एक बार सच्‍चाई सामने आ गई तो वो कहीं के नहीं रहेंगे इसलिए वो मुखौटों को बेनकाब होने से बचाने की कोशिश में अपना सब-कुछ दांव पर लगा देते हैं।
कमलकांत उपमन्‍यु पर बलात्‍कार के आरोप की पुष्‍टि एक लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद संभव है, और इस प्रक्रिया का हिस्‍सा चाहे-अनचाहे पीड़िता को भी बनना होगा। जाहिर है कि इस प्रक्रिया के पूरे होने में समय भी अच्‍छा-खासा जाया होगा किंतु इस बीच एक  बात जरूर खुलकर सामने आ गई कि कमलकांत उपमन्‍यु सिर्फ एक मुखौटा है और उसके पीछे एक-दो नहीं, तमाम चेहरे छिपे हैं। वो चेहरे जिनका सच यदि सामने आ गया तो कमलकांत उपमन्‍यु के अनेक संस्‍करण सामने खड़े दिखाई देंगे।
यही कारण है कि अब ये चेहरे कमलकांत उपमन्‍यु को बचाने के लिए ऐड़ी से चोटी तक का जोर लगा रहे हैं, बिना यह सोचे-समझे कि जिस समाज का वह हिस्‍सा हैं वही समाज उन पर थूक रहा है।
इनमें से कोई बिना उद्योग के उद्योगपति का तमगा प्राप्‍त है तो कोई लगभग अंगूठा टेक होते हुए शिक्षाविद् है, कोई पत्रकारिता की आड़ में मीडिया माफिया है तो कोई राजनीति के चोले में प्रतिष्‍ठा प्राप्‍त गुण्‍डा है। जो सब-कुछ होते हुए कुछ नहीं हैं लिहाजा समाजसेवी का तमगा लगाकर चलते हैं, वो भी इसमें शामिल हैं। पुलिस तथा प्रशासनिक अधिकारी हैं, बिल्‍डर हैं, सत्‍ता के दलाल हैं, भूमाफिया हैं, धर्म की दुकान चलाने वाले तथाकथित साधु-संतों से लेकर कथावाचक तक हैं, और जुडीशियरी को अपनी जेब में रखकर चलने का दावा करने वाले सफेदपोश लाइजनर भी हैं। बहुत लंबी लिस्‍ट है ऐसे लोगों की। यह लिस्‍ट कितनी लंबी हो सकती है, इसका अंदाज उन फोटोग्राफ्स को देखकर लगाया जा सकता है जिन्‍हें कमलकांत उपमन्‍यु ने अपने कार्यालय और सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक व गूगल प्‍लस की वॉल पर सजा रखा है।
नि:संदेह इनमें से कई चेहरे ऐसे भी हैं जिन्‍हें कमलकांत उपमन्‍यु ने अपने साथ खड़ा करके फोटो खिंचवाने पर बाध्‍य कर दिया और कई चेहरे ऐसे भी हैं जिनके लिए उसके साथ फोटो खिंचवाना मजबूरी था परंतु अधिकांश चेहरे उस कॉकस का हिस्‍सा हैं जिसका खुद कमलकांत एक मुखौटा था, या यूं कहें कि एक इकाई भर है।
कमलकांत उपमन्‍यु तो अपनी ही उस हवस का शिकार बन गया जिसे उसने महत्‍वाकांक्षाओं को पूरा करने का माध्‍यम बनाया था। अन्‍यथा वह अकेला नहीं है, एक पूरा रैकेट है जो बहुत लंबे समय से अपने काम को बखूबी अंजाम दे रहा है।
बेशक इस रैकेट के अपने तर्क हैं और इसमें शामिल तत्‍व यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि कमलकांत उपमन्‍यु को साजिश का शिकार बनाया जा रहा है किंतु ऐसे बेहिसाब तर्क हर उस शख्‍स के पास होते हैं जो कानून के शिकंजे में फंस जाता है।
आसाराम बापू हो या कथित संत रामपाल, नित्‍यानंद हो या पत्रकार तरुण तेजपाल...सबके पास अपने पक्ष में कहने को काफी कुछ होता है। यहां तक कि आतंकवादी और नक्‍सली भी अपने पक्ष में अनगिनित तर्क गढ़ लेते हैं और खुद को जायज ठहराने का पूरा प्रयास करते हैं परंतु सच्‍चाई को छिपा पाना संभव नहीं होता।
साम, दाम, दण्‍ड तथा भेद से अपने कर्मों पर पर्दा डालने की कोशिश अंत तक हर आरोपी करता है और यही उपमन्‍यु के मामले में भी किया जा रहा है।
वर्षों से एकत्र ताकत के बल पर यह कोशिश कितने दिन और जारी रहती है, इसका पता तो बाद में ही लगेगा किंतु नजीता बदल पाना अब संभव शायद ही हो क्‍योंकि कानूनी प्रक्रिया एक ठोस मुकाम हासिल कर चुकी है।
ये बात दीगर है कि दुराचार के मामले में 164 के बयान दो दिन पहले ही पूरे हो जाने के बाद आज उनकी नकल आईओ को लेनी थी लेकिन समाचार लिखे जाने तक आईओ नकल लेने कोर्ट नहीं पहुंची जबकि इस बावत प्रार्थना पत्र उसने शुक्रवार के दिन ही लगा दिया था।
पीड़िता के अधिवक्‍ता प्रदीप राजपूत ने बताया कि जब आईओ रीना से ऐसा किये जाने की वजह जानना चाही तो उसने यह कहकर फोन काट दिया कि मैं कुछ कहने अथवा बताने की स्‍थिति में नहीं हूं।
प्रदीप राजपूत ने कहा कि पुलिस का यह व्‍यवहार अप्रत्‍याशित है और वह इसके खिलाफ कोर्ट में अलग से आज शाम को ही प्रार्थना पत्र देंगे ताकि कोर्ट अपने स्‍तर से कार्यवाही आगे बढ़ा सके।
पूरे घटनाक्रम पर प्रदीप राजपूत का भी यही कहना है कि यदि इस मामले की जांच किसी निष्‍पक्ष एजेंसी से कराई जाए तो ऐसे-ऐसे चेहरे बेनकाब होंगे जिन्‍हें अब तक समाज में प्रतिष्‍ठा प्राप्‍त है और जो सभ्रांत होने का लबादा ओढ़े घूम रहे हैं। जो शेर की खाल में भेड़िये तो हैं ही, साथ ही एक कमलकांत उपमन्‍यु के फंसने पर अनेक कमलकांत उपमन्‍यु पैदा करने का माद्दा रखते हैं क्‍योंकि उन्‍हें अपने धंधे को सुचारू रुप से चलाने के लिए किसी न किसी कमलकांत उपमन्‍यु की दरकार हमेशा रहती है।
-लीजेण्‍ड न्‍यूज़ विशेष

शुक्रवार, 12 दिसंबर 2014

उपमन्‍यु केस: पुलिस को कराने पड़े 164 के बयान

मथुरा। 
ऐसा लगता है कि एमबीए की छात्रा का यौन शोषण करने के आरोपी पत्रकार कमलकांत उपमन्‍यु के तथाकथित शुभचिंतक या तो बेहद मूर्ख हैं या फिर इतने अधिक चालाक कि वह उसके शुभचिंतक बनकर ही उसे पूरी तरह बर्बाद कर देना चाहते हैं ताकि फिर वह कभी पनप ही न सके।
उपमन्‍यु के इन शुभचिंतकों ने पहले तो जैसे ही यह भनक लगी कि पीड़ित लड़की पुलिस में जाने की तैयारी कर रही है, उसके परिजनों पर पेशबंदी में एफआईआर दर्ज कराने की सलाह दे डाली। फिर यह एफआईआर उपमन्‍यु के अपने ही चेलों से करवा दी ताकि जवाबदेही भी उसी की रहे।
हद तो तब हो गई जब उन्‍हीं शुभचिंतकों ने यह प्रचार भी कर दिया कि एफआईआर उपमन्‍यु को बचाने के लिए कराई गई है और इसीलिए एफआईआर के लिए दी गई तहरीर में उपमन्‍यु के खिलाफ साजिश रचे जाने का जिक्र भी कर दिया।
इन्‍हीं शुभचिंतकों ने एक अखबार की खबर में उपमन्‍यु के खिलाफ लिखे गये मुकद्दमे को क्रॉस केस घोषित करके रही-सही कसर पूरी कर दी ताकि वह आगे भी किसी से यह तक कह न सके कि पीड़िता के परिजनों पर मुकद्दमा कायम कराने में उसका कोई हाथ नहीं था।
अब खबर आई है कि उपमन्‍यु के पक्ष में उनके शुभचिंतकों ने करीब 3 सैकड़ा शपथपत्र इस आशय के एसएसपी को दिलवाये हैं कि उसे फंसाया गया है और वह तो बहुत इन्‍नोसेंट व्‍यक्‍ति है। इन शपथ पत्रों में एक शपथ पत्र पीड़िता के परिवार से ताल्‍लुक रखने वाली उस महिला का भी है जो पहले वीडियो कैमरे के सामने उपमन्‍यु पर बेहद घृणित आरोप लगा चुकी है। अब उसके शपथ पत्र की कितनी अहमियत होगी, इसका अंदाज उपमन्‍यु के शुभचिंतकों को छोड़कर कोई भी व्‍यक्‍ति लगा सकता है।
शपथपत्र दिलवाने वाले अक्‍ल के इन दुश्‍मनों ने इतना भी नहीं सोचा कि इस तरह तो वह लड़की व उसके परिजनों द्वारा कही जा रही उन बातों को तस्‍दीक ही कर रहे हैं कि कमलकांत उपमन्‍यु बेहद पॉवरफुल व्‍यक्‍ति है और वह कुछ भी करवा सकता है।
घोर आश्‍चर्य की बात है कि उपमन्‍यु के इन शुभचिंतकों में वकील भी हैं और पत्रकार भी, उद्योगपति भी हैं और टेक्‍नीकल एजुकेशन हब के मालिकान भी। वह खुद भी अपने आप को पत्रकार के साथ-साथ वकील लिखने लगा है।
घोर बुद्धिमानों की फौज और उसके मुखिया कमलकांत उपमन्‍यु ने 300 शपथपत्र एसएसपी को दिलवाने से पहले यह तो विचार किया होता कि इसी तरह यदि कोई दुराचार के आरोप से बच सकता तो तथाकथित संत आसाराम बापू भी आज जेल की सलाखों के पीछे नहीं होता।
आसाराम बापू तो अपने पक्ष में तीन लाख शपथपत्र दिलवा सकता था और जरूरत पड़ती तो यह संख्‍या 30 लाख भी हो सकती थी।
अक्‍ल के दुश्‍मन इन शुभचिंतकों को क्‍या यह नहीं मालूम कि इस तरह के चरित्र प्रमाण पत्रों को कोर्ट भी कोई मान्‍यता नहीं देतीं और इनका यही मैसेज जाता है कि आरोपी वाकई बहुत ताकतवर तथा धूर्त है।
एक ऐसे ही दूसरे तथाकथित संत रामपाल को अपनी निजी फौज और अनुयायी खड़े करके कानून से बड़ा साबित करना कितना मंहगा साबित हुआ, क्‍या यह भी उपमन्‍यु के शुभचिंतक भूल गये।
उपमन्‍यु की आस्‍तीन के सांपों को क्‍या वाकई यह नहीं मालूम कि उनका हर ऐसा कदम उपमन्‍यु के लिए नई मुसीबत बन रहा है क्‍योंकि इससे पीड़िता के आरोपों की पुष्‍टि होती जा रही है।
जहां तक सवाल एसएसपी मंजिल सैनी का अब तक उपमन्‍यु के पक्ष में खड़ी दिखाई देने का है तो वह भी उपमन्‍यु तथा स्‍वयं उनके अपने लिए परेशानी का सबब साबित होगा क्‍योंकि कोर्ट में केस जाने के बाद बहुत से प्रश्‍नों का जवाब उन्‍हें भी देना पड़ सकता है।
बताया जाता है कि बलात्‍कार जैसे गंभीर मामले में एसएसपी की उपमन्‍यु के प्रति अतिरिक्‍त सहानुभूति का इल्‍म शासन को भी हो चुका है और इसीलिए वह आज कोर्ट में 164 के तहत पीड़िता के बयान दर्ज कराने पर बाध्‍य हुई हैं अन्‍यथा कल तक तो वह दो-तीन दिन बाद बयान कराने की जिद पर अड़ी हुई थीं।
शासन के सूत्रों से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार कल जैसे ही खबरों तथा अन्‍य माध्‍यमों से सेक्रेट्री होम तथा डीजीपी को सारे घटनाक्रम का पता लगा वैसे ही उन्‍होंने जवाब तलब कर जल्‍द से जल्‍द बयान कराने और उसके बाद गिरफ्तारी सुनिश्‍चित करने को कहा जिससे पीड़िता या उसके परिवार पर दबाव बनाने का रास्‍ता बंद हो।
उल्‍लेखनीय है कि कल जब पीड़िता 161 के तहत अपने बयान दर्ज कराने एसएसपी ऑफिस पहुंची थी तो उसने एसएसपी से अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की थी, हालांकि एसएसपी ने उसके बाद भी उसे मात्र एक महिला सिपाही के साथ मेडीकल कराने जिला अस्‍पताल भेज दिया और कोर्ट में भी उसकी सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं किया।
बहरहाल, अब देखना यह है कि 161 के बयान, मेडीकल तथा अब 164 के बयान भी पूरे हो जाने के बाद एसएसपी मंजिल सैनी का अगला कदम क्‍या होता है... और क्‍या वह अब भी यही कहती रहेंगी कि जांच पूरी होने दीजिए, अगर उपमन्‍यु के खिलाफ लगाये गये आरोपों की पुष्‍टि होती है तो कार्यवाही जरूर होगी।
-लीजेण्‍ड न्‍यूज़ विशेष

मंत्री बनते ही 500 गुना बढ़ गई इनकी दौलत!

लखनऊ। 
मंत्री बनने के बाद गायत्री प्रसाद प्रजापति अरबपति हो गए। उनकी संपत्ति 500 गुना से ज्यादा हो गई है। लोकायुक्त के पास की गई एक शिकायत में कहा गया है कि भूतत्व और खनिकर्म मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति ने जब विधानसभा चुनाव में नामांकन किया था तब उनकी संपत्ति 1.81 करोड़ रुपये थी। लोकायुक्त ने भी इसकी पुष्टि शुक्रवार को कर दी।
मंत्री बनने के बाद उन्होंने 942.57 करोड़ रुपये की संपत्ति खड़ी कर ली है। साक्ष्य के रूप में अमेठी, लखनऊ सदर और मोहनलालगंज में प्रजापति द्वारा अपने, अपने परिवारीजनों, रिश्तेदारों और करीबियों के नाम से जमीन की रजिस्ट्री के दस्तावेज लगाए गए हैं। लोक आयुक्त कार्यालय ने शिकायत दाखिल किए जाने की पुष्टि की है।
शिकायत प्रतापगढ़ के ओम शंकर द्विवेदी ने की है। शिकायत के साथ हाईकोर्ट के वकील अजय प्रताप सिंह राठौर ने अपना वकालतनामा लगाया है। उन्होंने 1725 पन्ने साक्ष्य के रूप में पेश किए हैं। शिकायतकर्ता के वकील का दावा है कि अभी तो केवल अमेठी, लखनऊ सदर व मोहनलालगंज में ही खरीदी गई जमीनों की रजिस्ट्री शिकायत के साथ संलग्न की गई है। जैसे-जैसे अन्य संपत्तियों का पता चलेगा, लोक आयुक्त को जानकारी दी जाएगी।
इस मामले को लेकर गायत्री प्रसाद प्रजापति ने अपनी सफाई पेश की है। प्रजापति का कहना है कि ये उनके राजनैतिक विरोधियों की साजिश है। लोग दूसरों की संपत्ति को भी मेरी बताकर आरोप लगा रहे हैं। अगर ये आरोप सही साबित हुए तो मैं राजनीति से सन्यास ले लूंगा।
शिकायतकर्ता का कहना है कि प्रजापति खुद तो एपीएल कार्डधारक हैं ही, जिनके नाम उन्होंने जमीनें खरीदी हैं, उनमें से भी कई एपीएल कार्डधारक हैं जिनकी सालाना आय 24 हजार रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। ऐसे में सवाल यह है कि इनके पास जमीनें खरीदने का पैसा कहां से आया?
लोक आयुक्त न्यायामूर्ति एन.के. मेहरोत्रा ने बताया कि भूतत्व एवं खनिकर्म मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति की शिकायत मिली है। दस्तावेज काफी हैं, अभी इसे देखा नहीं है। शिकायत का परीक्षण करने के बाद ही इस बारे में कु छ कहा जा सकता है।

गुरुवार, 11 दिसंबर 2014

IPL स्‍पॉट फिक्‍सिंग: धोनी ही हैं संदिग्‍ध Individual No 2

मुंबई। 
आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में मुख्य संदिग्ध गुरुनाथ मयप्पन टीम इंडिया और आईपीएल टीम चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के होटल के कमरे में रोज जाते थे। मामले की जांच कर रही मुद्गल कमेटी की रिपोर्ट में जिस ‘Individual No 2’ का जिक्र है, वह कोई और नहीं बल्कि कप्तान धोनी हैं।
बता दें कि 5000 पन्नों की मुद्गल कमेटी की रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है। सिर्फ जस्टिस मुद्गल द्वारा तैयार 29 पेज की सिनॉप्सिस संबंधित लोगों को दी गई है। इसमें क्रिकेटर्स के नाम का जिक्र नंबर से है।
जस्टिस मुकुल मुद्गल की ओर से अप्वाइंट किए गए जांच कर्ता बीबी मिश्रा की चार महीने लंबी चली जांच की रिपोर्ट में पता चला है कि ‘Individual No 2’ के कमरे में सीधी पहुंच रखने वाला कोई एक शख्स था, तो वे थे गुरुनाथ मयप्पन। धोनी बीसीसीआई की एंटी करप्शन यूनिट की पाबंदियों की वजह से हर रोज सभी से उस होटल के बिजनेस सेंटर में मिलते थे, जहां टीम ठहरी होती थी। हालांकि, जांचकर्ताओं ने पाया कि मयप्पन धोनी के कमरे तक सीधी पहुंच रखते थे। वह रोजाना, यहां तक कि आईपीएल 6 के मैचों के दौरान भी धोनी से सीधे संपर्क में होते थे।
होटल स्टाफ से पूछताछ में हुआ खुलासा
कई टीम अधिकारी, खिलाड़ी और होटल स्टाफ से पूछताछ के बाद जांचकर्ता इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं। मयप्पन की धोनी के कमरे तक सीधी पहुंच सिर्फ इस वजह से थी क्योंकि उन्हें चेन्नई सुपर किंग्स के मालिक के तौर पर सभी से मिलाया गया था।
कोर्ट में दी थी अजीबोगरीब दलील
सुप्रीम कोर्ट में आईपीएल फिक्सिंग मामले में चल रही सुनवाई में बीसीसीआई के निर्वाचित प्रमुख और मयप्पन के रिश्तेदार एन श्रीनिवासन के वकील ने दलील दी थी कि मयप्पन को सट्‌टेबाजी में बड़ा नुकसान हुआ है। वकील के मुताबिक, अगर मयप्पन के पास अंदर की खबर होती तो उन्हें नुकसान नहीं होता लेकिन मुद्गल कमेटी के लिए जांच करने वाले मिश्रा की रिपोर्ट में पता चला है कि धोनी और मयप्पन रोजाना दो से तीन बार मिलते थे। मुद्गल कमेटी ने भले ही यह पाया हो कि मयप्पन वास्तव में सीएसके के अधिकारी थे और सट्‌टेबाजी में शामिल थे, श्रीनिवासन और टीम सीएसके ने जोर देकर कहा था कि मयप्पन का टीम के मामलों से कोई मतलब नहीं है और उन्हें टीम स्ट्रैटिजी की कोई जानकारी नहीं है।
-एजेंसी

बुधवार, 10 दिसंबर 2014

अपने ही बिछाये जाल में फंस गये उपमन्‍यु !

मथुरा। 
लगता है कि पत्रकार कमलकांत उपमन्‍यु अपने ही बिछाये हुए जाल में फंस गये हैं। उपजा के प्रद्रेश उपाध्‍यक्ष, ब्रज प्रेस क्‍लब के अध्‍यक्ष तथा मथुरा की छावनी परिषद् के पूर्व अध्‍यक्ष कमलकांत उपमन्‍यु ने पेशबंदी के लिए जिन लोगों का इस्‍तेमाल कर यौन उत्‍पीड़न पीड़िता के परिजनों पर दो मुकद्दमे कायम कराये हैं, उन दोनों के वादी उनके अपने ही चेले हैं और इसीलिए उन्‍होंने अपनी तहरीर में उपमन्‍यु के ऊपर बलात्‍कार का मुकद्दमा दर्ज कराने की साजिश का ज़िक्र किया।
उपमन्‍यु के बिछाये हुए जाल का खुलासा किसी और ने नहीं, फोटो खिंचाने के उनके उस जुनून ने ही कर दिया जिसके चलते वह हर दिन प्रमुख अखबारों की सुर्खियों का हिस्‍सा बनते रहे।
अब ज़रा इस खबर के साथ लगे फोटो पर गौर कीजिए। फोटो में चश्‍मा लगाये कमलकांत उपमन्‍यु के दाईं ओर (नीले घेरे में) खड़े व्‍यक्‍ति का नाम शिव कुमार शर्मा है और उसके बगल में लाल घेरे के अंदर खड़े व्‍यक्‍ति का नाम मुकेश शर्मा है। नटवर नगर निवासी ये दोनों वही लोग हैं जिन्‍होंने बलात्‍कार पीड़िता के परिजनों पर मुकद्दमे दर्ज कराये हैं।
ये फोटो तब का है जब कमलकांत के साथ ये दोनों लोग कहीं बाहर घूमने गये थे।
जाहिर है कि कमलकांत उपमन्‍यु का न केवल इनसे पुराना याराना है बल्‍कि इतने घनिष्‍ठ संबंध हैं कि साथ आना-जाना भी लगा रहता है। इस बात की पुष्‍टि इनके वो दूसरे फोटो भी करते हैं जिसमें शिव कुमार शर्मा की पुत्री व अन्‍य परिजन कमलकांत के साथ उत्‍तरांचल के एक धार्मिक स्‍थल की यात्रा करने गये थे और वहां धार्मिक क्रिया-कलापों एवं दान-पुण्‍य में सहभागिता करते दिखायी दे रहे हैं।
ऐसे में शिव कुमार शर्मा तथा मुकेश शर्मा द्वारा यौन उत्‍पीड़न की शिकार युवती के परिजनों पर अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराने तथा उनमें कमलकांत उपमन्‍यु को किसी साजिश में फंसाने की आशंका ज़ाहिर करने का मकसद कोई भी समझ सकता है।
ये बात अलग है कि जो बात कोई सामान्‍य से सामान्‍य बुद्धि वाला व्‍यक्‍ति भी समझ सकता है, उसे न तो जिले की पुलिस कप्‍तान मंजिल सैनी ने समझा और न उनकी उस पुलिस ने जिसे जांच कर कार्यवाही करने का आदेश दिया गया था। स्‍पष्‍ट है कि कोई जांच की ही नहीं गई और बिना जांच किये ही पीड़िता के परिजनों पर दोनों मुकद्दमे दर्ज कर लिये गये।
उल्‍लेखनीय है कि इनमें से पहला मुकद्दमा भैंस बांधने को लेकर मारपीट करने का है तो दूसरा मुकद्दमा एक नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ करने तथा शिकायत करने पर तेजाब फेंककर जला देने की धमकी देने का है।
इन मुकद्दमों का सच और उसके पीछे छिपा मकसद सामने आने के बाद अब पीड़िता की तहरीर पर एसएसपी मंजिल सैनी की कथित जांच का सच भी सामने आ गया है और उस उद्देश्‍य का भी खुलासा हो गया है जिसके लिए वह यौन उत्‍पीड़न की शिकार युवती को न्‍याय दिलाने में अब तक हील-हुज्‍जत कर रही हैं।
पुलिस कप्‍तान साहिबा क्‍या अब भी यह कहेंगी कि कमलकांत उपमन्‍यु के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने में उन्‍होंने अनावश्‍यक देरी नहीं की और पीड़िता के परिजनों पर दो-दो मुकद्दमे दर्ज कराने के पीछे एकमात्र मकसद उन्‍हें भयभीत करना तथा कमलकांत उपमन्‍यु को उन पर दबाव बनाने के लिए मौका देना ही था।
आश्‍चर्य होता है इस बात पर कि एक युवा महिला पुलिस अधिकारी किसी दूसरी युवती के साथ हुए अत्‍याचार को लेकर इतनी संवेदनाहीन हो जाए और आरोपी को बचाने के लिए उसका पूरा-पूरा साथ दे।
यही नहीं, एफआईआर दर्ज हो जाने के बावजूद अब तक न तो पीड़िता के बयान दर्ज़ कराये गये और न मेडीकल कराना जरूरी समझा।
पीड़िता के अधिवक्‍ता प्रदीप राजपूत का कहना है कि इस नये खुलासे के बाद भी पत्रकार कमलकांत उपमन्‍यु की गिरफ्तारी न होना साफ करता है कि जांच अधिकारी व इलाका पुलिस एसएसपी के दबाव में है और इस कारण उसे पीड़ित पक्ष पर दबाब बनाने का पूरा अवसर मिल रहा है।
-लीजेण्‍ड न्‍यूज़ विशेष

मंगलवार, 9 दिसंबर 2014

कैसे कोई बन जाता है कमलकांत उपमन्‍यु?

मथुरा। 
पत्रकार कमलकांत उपमन्‍यु के खिलाफ दर्ज हुआ यौन उत्‍पीड़न का मामला भले ही अभी पुलिस की जांच का मोहताज हो किंतु इस मामले से एक बात जरूर स्‍पष्‍ट हो जाती है कि कैसे किसी अखबार का एक मामूली सा संवाद्दाता देखते-देखते करोड़ों का आसामी बन जाता है और कैसे पुलिस, प्रशासन, बड़े मीडियाकर्मी, व्‍यापारी, उद्योगपति, नेता एवं तथाकथित समाजसेवी न सिर्फ उसकी चाटुकारिता में दिन-रात एक कर देते हैं बल्‍कि एकतरफा हिमायत लेकर उसे बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं।
सबसे पहले बात करें यदि एसएसपी मंजिल सैनी की तो उन्‍होंने पीड़िता के भाई पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर देने वाले नटवर नगर निवासी शिव कुमार शर्मा से यह तक पूछना जरूरी नहीं समझा कि कमलकांत उपमन्‍यु से उसका क्‍या वास्‍ता है और क्‍यों वह अपनी तहरीर में इस बात का जिक्र कर रहा है कि उक्‍त लोग कमलकांत उपमन्‍यु के खिलाफ रेप की एफआईआर कराने का षड्यंत्र रच रहे हैं। उन्‍हें कैसे पता लगा कि कमलकांत उपमन्‍यु के खिलाफ साजिश के लिए वह उनके द्वारा एफआईआर कराने का इंतजार कर रहे हैं।
यदि मान लिया जाए कि कमलकांत उपमन्‍यु के खिलाफ दुराचार जैसे गंभीर मामले में एफआईआर दर्ज कराने की ऐसी कोई साजिश रची जा रही थी तो उससे कमलकांत उपमन्‍यु क्‍यों अनभिज्ञ थे और क्‍यों उन्‍होंने खुद इस बावत कोई प्रार्थनापत्र पुलिस को नहीं दिया। वो भी तब जबकि शिव कुमार शर्मा को उनके खिलाफ रची जा रही साजिश का पता लग चुका था।
शिव कुमार शर्मा द्वारा दिए गये इस प्रार्थना पत्र पर एसएसपी ने 2 दिसंबर के दिन ही एसओ हाईवे को इस आशय के आदेश दे दिये थे कि वह जांच कर कार्यवाही करें तो फिर एफआईआर तब क्‍यों दर्ज की गई जब कमलकांत उपमन्‍यु के खिलाफ यौन उत्‍पीड़न का मामला दर्ज किया जा चुका था।
यहां एक सवाल यह और खड़ा होता है कि जब एसएसपी ने शिव कुमार शर्मा के प्रार्थना पत्र पर जांच के आदेश देकर कार्यवाही करने का लिखित आदेश दिया था और ऐसा ही आदेश कमलकांत उपमन्‍यु के खिलाफ यौन उत्‍पीड़न के आरोप संबंधी दिये गये प्रार्थना पत्र पर 3 दिसंबर को दिया गया था तो फिर दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कैसे कर ली गई। वो भी कई दिनों के अंतर से। यदि शिव कुमार शर्मा की तहरीर में लगाये गये आरोप सही थे तो कमलकांत उपमन्‍यु के खिलाफ यौन उत्‍पीड़न का केस कैसे दर्ज कर लिया गया और यदि कमलकांत उपमन्‍यु के ऊपर लगाये गये आरोप जांच के बाद सही पाये जाने पर एफआईआर दर्ज हुई है तो अब तक 164 में पीड़िता के बयान तथा उसका मेडीकल क्‍यों नहीं कराया गया जिससे जांच आगे बढ़ सके।
एसएसपी मंजिल सैनी अब भी यह कैसे कह रही हैं कि पत्रकार पर यौन उत्‍पीड़न के आरोपों की जांच के बाद आगे कार्यवाही की जायेगी।
क्‍या एसएसपी किसी को यह बताने का कष्‍ट करेंगी कि कितने मामलों में वह या उनकी पुलिस एफआईआर दर्ज हो जाने के बाद जांच के उपरांत कार्यवाही करने की सुविधा देती है।
कहीं ऐसा तो नहीं कि एसएसपी महोदया ही इस पूरे प्रकरण में एक तीर से दो शिकार करने का खेल, खेल रही हों ताकि सांप मर जाए और लाठी भी न टूटे क्‍योंकि एसएसपी से आरोपी पत्रकार कमलकांत उपमन्‍यु की निकटता तो उसके द्वारा सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर उनके साथ लगाये गये उन फोटोग्राफ से साबित हो जाती है जिसमें एसएसपी उसके साथ उसके घर में पूजा करती दिखाई दे रही हैं।
अब रहा सवाल मीडिया जगत का, जो पहले तो इस पूरे प्रकरण पर चुप्‍पी साधे बैठा था लेकिन कमलकांत उपमन्‍यु के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद जब अमर उजाला ने खबर प्रकाशित की तो उसने एकतरफा रिपोर्टिंग करके एक ओर जहां नैतिकता को पूरी तरह ताक पर रख दिया वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट के उन आदेश-निर्देशों की खुली अवहेलना करनी शुरू कर दी जो यौन उत्‍पीड़न के केस में दिये हुए हैं।
आगरा से प्रकाशित प्रमुख अखबार हिंदुस्‍तान ने तो यह लिखकर कि ''क्रॉस केस में उपजा उपध्‍यक्ष को फंसाने पर एसएसपी ने जताया रोष,'' अपना व एसएसपी दोनों का मकसद साफ कर दिया है। हिंदुस्‍तान अखबार एक पक्षीय रिपोर्टिंग करने के चक्‍कर में यह तक भूल गया कि उसने इस तरह की खबर लिखकर पीड़िता सहित उसके पूरे परिवार की पहचान उजागर कर दी और इससे लड़की व उसके परिवार को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। साथ ही उसकी यह रिपोर्टिंग सर्वोच्‍च न्‍यायालय के आदेश-निर्देशों की अवहेलना तथा अवमानना की श्रेणी में आती है।
मथुरा से प्रकाशित एक अन्‍य दैनिक कल्‍पतरू एक्‍सप्रेस ने तो नैतिकता व पत्रकारिता के नियमों सहित कानून को भी धता बताते हुए ''दूसरे पक्ष पर भी छेड़छाड़ व मारपीट के दो मुकद्दमे'' शीर्षक से बॉक्‍स के अंदर एक खबर प्रकाशित की है। इस तरह उसने तो पीड़ित लड़की के भाई को दूसरा पक्ष ही बता डाला है।
गौरतलब है कि यौन उत्‍पीड़न की शिकार किसी युवती अथवा महिला की पहचान सार्वजनिक नहीं की जा सकती और इसलिए खबर में उनके काल्‍पनिक नाम-पते लिखे जाते हैं लेकिन इन अखबारों ने पीड़िता के भाई व पिता का नाम तथा पता लिखकर उसकी व उसके पूरे परिवार की पहचान उजागर कर दी है। 
इस संबंध में पूछे जाने पर पीड़िता के अधिवक्‍ता प्रदीप राजपूत ने कहा कि वह पीड़िता और उसके परिवार की पहचान उजागर करने वाले अखबारों के संपादक, ब्‍यूरो प्रमुख एवं संवाद्दाताओं के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने जा रहे हैं क्‍योंकि उनकी इस हरकत से पीड़िता व उसके परिवार को जान-माल का खतरा उत्‍पन्‍न हो गया है। विशेष रूप से अखबारों की यह हरकत इसलिए पीड़िता व उसके परिवार को बड़ी हानि पहुंचा सकती है क्‍योंकि अब तक आरोपी पत्रकार पुलिस की गिरफ्त से बाहर है और वह तथा उसके दबंग गुर्गे पीड़िता के परिवार पर लगातार समझौता करने का दबाव बना रहे हैं।
अधिवक्‍ता प्रदीप राजपूत ने बताया कि वह इस संबंध में एसएसपी से भी मिलकर शिकायत करेंगे और पूछेंगे कि पीड़िता व उसके परिवार की पहचान उजागर करने वाले अखबारों के खिलाफ क्‍या कदम उठाने जा रही हैं।
कुल मिलाकर अखबारों की रिपोर्टिंग तथा पुलिस के रवैये से निश्‍चित तौर पर एक बात तो साफ हो जाती है कि यौन उत्‍पीड़न के आरोप में कमलकांत उपमन्‍यु के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो जाने के कारण पुलिस और मीडिया ही नहीं, शहर के कई उद्योगपति, व्‍यापारी, नेता और अन्‍य तमाम तथाकथित सभ्रांत तत्‍व अपनी-अपनी रोटी सेक रहे हैं। कोई उपमन्‍यु का हिमायती बनकर अपना मकसद पूरा कर रहा है तो कोई उसके विरोध में खड़ा होकर। जैसे पूरा शहर दो खेमों में बंटकर रह गया है।
एक खेमे की मानें तो कमलकांत उपमन्‍यु को जीरो से हीरो बनाने में शहर के ऐसे ही तथाकथित सभ्रांत और विभिन्‍न व्‍यवसायों से जुड़े सफेदपोश माफियाओं का हाथ रहा है जिन्‍होंने उसे अपने लिए हथियार के रूप में इस्‍तेमाल किया तथा उसकी कमजोरियों का फायदा उठाया।
इस खेमे की मानें तो यह मामला सिर्फ एक लड़की के यौन उत्‍पीड़न या कमलकांत उपमन्‍यु तक सीमित नहीं है। इसकी यदि निष्‍पक्ष जांच हो तो सफेदपोश अपराधियों का बहुत बड़ा रैकेट सामने आ सकता है। ऐसा रैकेट जिसमें पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर जुडिशियरी के दलाल और भूमाफिया व शिक्षा माफिया तक शामिल हैं। ऐसे-ऐसे लोग इस रैकेट का हिस्‍सा हैं जिन्‍होंने अपने ही परिवार की महिलाओं तक को नहीं छोड़ा और उन्‍हें अपने काम कराने का जरिया बना रखा है।
दूसरा खेमा कहता है कि कमलकांत उपमन्‍यु की शौहरत व कम समय में अर्जित की गई दौलत को देखकर कुछ लोग उससे ईर्ष्‍या रखते हैं और इसी ईर्ष्‍या के चलते उसे निशाना बनाया गया है।
इन सबके अलावा एक वर्ग ऐसा भी है जो जानना चाहता है कि बिना किसी बिजनेस के आखिर कमलकांत उपमन्‍यु करोड़ों का आसामी कैसे बन गया और उसकी आमदनी का जरिया क्‍या है।
इन लोगों का स्‍वाभाविक प्रश्‍न यह भी है कि क्‍या जर्नलिज्‍म वाकई इतनी दौलत कमाने का माध्‍यम बन सकती है, वो भी तब जबकि कोई किसी ऐसे अखबार का मात्र रिपोर्टर हो जिसकी जिले में सैंकड़ों प्रतियां भी सर्कुलेट न होती हों।
यह लोग चाहते हैं कि वह और उससे जुड़े तमाम लोगों का सच एक बार सामने जरूर आए ताकि इस तिलिस्‍मी दुनिया से वह भी वाकिफ हों। वह जान सकें कि क्‍यों अखबार किसी खास पत्रकार को हर दिन कवरेज देते रहे हैं और क्‍यों वह पत्रकार समाज के हर ताकतवर वर्ग को अपनी ताबेदारी में खड़ा दिखाना चाहता है। आखिर क्‍या है ऐसा कि मंजिल सैनी जैसी महिला एसएसपी हो या बी चंद्रकला जैसे महिला डीएम, जिले का प्रभार संभालने के साथ उसके निजी कार्यक्रमों में शिरकत करने के लिए उसकी चौखट के अंदर तक जा पहुंचती हैं। यह जानते व समझते हुए कि उनकी नौकरी उन्‍हें यह सब करने की इजाजत नहीं देती।
यह जानते हुए कि महिला अधिकारी होने के नाते उनकी इस मामले में कुछ अतिरिक्‍त जिम्‍मेदारी बनती है और उनकी गतिविधियों पर उनके अधीनस्‍थों सहित जनपद भर के लोगों की नजर टिकी होती है।
कमलकांत उपमन्‍यु या पीड़िता के भाई पर लगे आरोपों का सच देर-सबेर सामने आयेगा ही, लेकिन इस पूरे प्रकरण में कोई न कोई सूत्रधार ऐसा अवश्‍य है जिसका बेनकाब होना सबके हित में जरूरी हो गया है।
-लीजेण्‍ड न्‍यूज़ विशेष

सोमवार, 8 दिसंबर 2014

पत्रकार उपमन्‍यु के खिलाफ बलात्‍कार का केस दर्ज

मथुरा। 
उत्‍तर प्रदेश जर्नलिस्‍ट एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्‍यक्ष, ब्रज प्रेस क्‍लब के अध्‍यक्ष तथा छावनी परिषद् मथुरा के पूर्व उपाध्‍यक्ष पत्रकार कमलकांत उपमन्‍यु पर एमबीए पास एक लड़की ने अपने साथ दुराचार तथा यौन उत्‍पीड़न सहित अपने परिचितों को जान से मारने की धमकी देने जैसे संगीन आरोप लगाये हैं।
पीड़ता का आरोप है कि कमलकांत उपमन्‍यु वर्ष 2013 में उसके घर के पास ही जब अपना एक दूसरा घर बनवा रहा था तब उसने उसके परिवार से संबंध बना लिये। इसके बाद वह उनके साथ जयपुर घूमने चला गया और वहीं उसने सर्वप्रथम अप्राकृतिक यौन संबंध स्‍थापित किये तथा मुंह खोलने पर पूरे परिवार को बर्बाद करने की धमकी दी।



पीड़िता के अनुसार इसके बाद उसके साथ तब से लेकर अब तक कमलकांत उपमन्‍यु खुद तो जबरन दुराचार करता ही रहा, इसके अतिरिक्‍त अन्‍य लोगों से भी संबंध बनवाने की कोशिश करने लगा। 
कमलकांत उपमन्‍यु के हनुमान नगर स्‍थित घर के निकट ही रहने वाली इस लड़की के अनुसार अपने साथ काफी समय तक हुए इस अत्‍याचार की तहरीर उसने 3 दिसंबर की दोपहर को ही एसएसपी ऑफिस पहुंचकर दे दी थी। तहरीर देने के बाद एसएसपी मंजिल सैनी ने उन्‍हें शाम को मिलने के लिए कहा और जब वह शाम को पहुंची तो उसकी तहरीर पर जांच के आदेश कर दिए।
लड़की और उसके परिजनों का कहना है कि जांच के नाम पर पुलिस ने कमलकांत उपमन्‍यु को मेरे ऊपर हर तरह से दबाव बनाने, मुझे डराने व धमकाने तथा तहरीर वापस लेने के लिए बाध्‍य करने का पूरा अवसर दिया किंतु जब मैंने पुलिस की इस हरकत से राष्‍ट्रीय महिला आयोग को अवगत कराया तथा उन्‍हें एसएसपी मंजिल सैनी तथा पत्रकार कमलकांत उपमन्‍यु की निकटता के साक्ष्‍य उपलब्‍ध कराते हुए शिकायती पत्र भेजा और न्‍याय न मिलने की स्‍थिति में संसद पर आत्‍मदाह कर लेने का एसएमएस प्रसारित किया तब 6 दिसंबर की शाम बमुश्‍किल कमलकांत उपमन्‍यु के खिलाफ थाना हाईवे में आईपीसी की धारा 376 व 506 मुकद्दमा अपराध संख्‍या 944/ 2014 के तहत एफआई आर दर्ज की गई।
पीड़ित लड़की के अधिवक्‍ता प्रदीप राजपूत ने इस संबंध में बताया कि खुद एक महिला होने के बावजूद एसएसपी मंजिल सैनी द्वारा कमलकांत उपमन्‍यु को लगातार बचाने के प्रयासों की वजह उनके कमलकांत से निकट संबंध होना बताया जाता है।
उन्‍होंने बताया कि बहुजन समाज पार्टी की ओर से लोकसभा का चुनाव लड़ चुके कमलकांत उपमन्‍यु ने सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक की अपनी प्रोफाइल वॉल पर जो सैंकड़ों फोटो लगा रखे हैं, उनमें एसएसपी मंजिल सैनी को भी उसके साथ खड़े हुए तथा उसके निजी पारिवारिक कार्यक्रम में शिरकत करते हुए देखा जा सकता है।
अधिवक्‍ता प्रदीप राजपूत ने बताया कि पीड़ता ने कमलकांत उपमन्‍यु व एसएसपी की निकटता साबित करने वाले वह फोटो मीडिया को भी प्रकाशित करने के उद्देश्‍य से भेजे हैं ताकि आमजनता को पता लग सके कि क्‍यों एक महिला एसएसपी एक युवती के साथ दुराचार के आरोपी का खुलेआम पक्ष लेकर उसे बचा रही हैं।
अधिवक्‍ता प्रदीप राजपूत का कहना है कि कमलकांत उपमन्‍यु के खिलाफ मुकद्दमा दर्ज भले ही कर लिया गया है किंतु पुलिस अब तक उसके घर दबिश देने भी नहीं पहुंची जिस कारण वह खुलेआम अपने हनुमान नगर स्‍थित घर पर न केवल पंचायत कर रहा है बल्‍कि लड़की व उसके परिजनों को बदनाम करने में लगा है।
उन्‍होंने बताया कि कल भी पूरे दिन लड़की के घर पर कमलकांत उपमन्‍यु की ओर से कई नेता और पत्रकार समझौते के लिए दबाव डालने पहुंचे थे और जब लड़की के परिवार ने समझौता करने से स्‍पष्‍ट इंकार कर दिया तो ऊंच-नीच समझाने की आड़ में धमकी देकर चले आए।
एडवोकेट प्रदीप राजपूत ने यह भी बताया कि वह आज इस बारे में एसएसपी से मिलकर उन्‍हें अवगत करायेंगे, साथ ही जल्‍द से जल्‍द पीड़ित लड़की के सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराने, उसका मेडिकल करवाने तथा आरोपी को शीघ्र गिरफ्तार करने की मांग करेंगे।
इस संबंध में आरोपी पत्रकार कमलकांत उपमन्‍यु से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई पर उनसे संपर्क स्‍थापित नहीं हो सका।
-लीजेण्‍ड न्‍यूज़ विशेष
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