गुरुवार, 4 दिसंबर 2014

संजय का अब तक पता नहीं, पुलिस ने गठित की टीम, JSR के सबसे बड़े हिस्‍सेदार थे संजय-कन्‍हैया

मथुरा। 
2 दिसंबर की रात को होडल से लौटते वक्‍त लापता हुए जेआरएस ग्रुप के निदेशक संजय देशवानी का फिलहाल कोई पता न तो पुलिस को लग पाया है और ना ही संजय के परिजनों को कहीं से कोई सूचना मिली है।
इस बीच संजय के पुत्र केशव देशवानी द्वारा ग्रुप के ही छ: अन्‍य हिस्‍सोदारों को हत्‍या के उद्देश्‍य से अपहरण की आशंका में नामजद कराये जाने के बाद कल एसएसपी मंजिल सैनी तथा एसपी सिटी सिटी ने सभी आरोपियों को तलब कर देर रात तक पूछताछ की।
बताया जाता है कि पूछताछ के दौरान ग्रुप के हिस्‍सेदार सभी आरोपियों ने संजय के बारे में कोई भी जानकारी होने से इंकार किया।
ग्रुप के एक हिस्‍सेदार और आरोपी नवीन कात्‍याल ने एसपी सिटी को बताया कि 2 दिसंबर की शाम संजय उनके पास होडल आए थे और उसके बाद बस से लौटने की कहकर चले गये।
नवीन कात्‍याल के मुताबिक संजय देशवानी अपने कपड़े के कारोबार से होडल आने-जाने में बस का इस्‍तेमाल किया करते थे, अपनी कार का प्रयोग वह बहुत जरूरी होने पर ही करते थे।
पुलिस के सूत्रों से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार फिलहाल सभी नामजदों को पुलिस ने इस हिदायत के साथ छोड़ दिया है कि वह पुलिस को सहयोग करें तथा अपने स्‍तर से संजय का पता लगाने की कोशिश करें ताकि जल्‍द से जल्‍द इस मामले का पटाक्षेप हो सके।
इसके अलावा पुलिस ने संजय देशवानी का पता लगाने के लिए अपनी एक टीम गठित की है जो उनकी कॉल डीटेल तथा उनके अन्‍य व्‍यापारिक संबंधों के आधार पर उनका पता लगाने में जुटी है।
जहां तक सवाल संजय देशवानी और कन्‍हैया खत्री का जेएसआर ग्रुप में हिस्‍सेदारी को लेकर है तो ग्रुप के ही लोगों ने उनकी 50 प्रतिशत हिस्‍सेदारी होने की पुष्‍टि की है।
यही हिस्‍सेदारी संजय व कन्‍हैया ने ग्रुप के अन्‍य हिस्‍सेदारों को सरेंडर की थी और जिसे पैसों के अभाव में उन्‍होंने जयंती लाला के नाम से मशहूर जयंती अग्रवाल को बेच दी।
दरअसल, पूरे जेएसआर ग्रुप में जयंती लाला से पहले कुल सात हिस्‍सेदार हुआ करते थे।
इनमें सबसे बड़ी 25-25 प्रतिशत की हिस्‍सेदारी संजय देशवानी तथा कन्‍हैया खत्री के नाम थी जबकि नवीन कात्‍याल, सतपाल नागपाल, विजय गोयल तथा विकेश गोयल 10-10 प्रतिशत के भागीदार थे। इन सब के अलावा 10 प्रतिशत की हिस्‍सेदारी होडल के ही डीड रायटर (लिखिया) नरेश बंसल की थी जिनका अब तक इस पूरे घटनाक्रम में कहीं नाम नहीं आया है।
ग्रुप के सूत्र बताते हैं संजय व कन्‍हैया की हिस्‍सेदारी खरीदने के बाद जयंती लाला इस ग्रुप के सबसे बड़े शेयर होल्‍डर हो गये और अधिकांश फैसलों में उनका दखल हो गया।
सूत्रों के अनुसार जयंती लाला ने संजय व कन्‍हैया की कुल 50 प्रतिशत हिस्‍सेदारी में से साढ़े सैंतीस प्रतिशत का भुगतान कर दिया है और अब केवल साढ़े बारह प्रतिशत भुगतान शेष है।
ग्रुप के लोगों ने इस तरह की अफवाहों का खण्‍डन किया कि संजय ने अशोका सिटी के कुछ फ्लैटस का सौदा किया था और उनकी एडवांस रकम संजय ने ले रखी थी।
ग्रुप के ही लोगों का कहना था कि संजय या कन्‍हैया के पास ग्रुप की कोई रकम शेष नहीं है अलबत्‍ता जयंती लाला को उनका साढ़े बारह प्रतिशत शेष भुगतान करना है जो किसी कारणवश तय समय पर नहीं हो पाया और जिसे लेकर गलतफहमी पैदा हुई।
ग्रुप के लोगों की मानें तो उन्‍हें संजय के परिजनों से पूरी सहानुभूति है और वह चाहते हैं कि शीघ्र से शीघ्र संजय की सकुशल वापसी हो जाए।
उधर संजय के साथी और ग्रुप के दूसरे बड़े हिस्‍सेदार रहे कन्‍हैया खत्री ने बताया कि उन्‍हें अथवा संजय के परिजनों को अब तक संजय का कोई पता कहीं से नहीं लग पाया है और न इस संबंध में कोई सूचना मिली है। उनका कहना था कि पुलिस को कहीं से कोई सूचना मिली हो तो उसकी जानकारी फिलहाल हमारे पास नहीं है।
उनका कहना था कि सुबह सीओ सिटी अनिल यादव ने मुझे और संजय के पुत्र केशव को फोन पर कोतवाली आने के लिए सूचित किया था लिहाजा हम वहीं जा रहे हैं।
जेएसआर ग्रुप में हुए इस अप्रत्‍याशित घटनाक्रम को लेकर पुलिस, संजय के परिजन, कन्‍हैया खत्री तथा ग्रुप के बाकी हिस्‍सेदार तो परेशान हैं हीं, वो लोग भी काफी परेशान हैं जिन्‍होंने ग्रुप के किसी प्रोजेक्‍ट में निवेश कर रखा है या फ्लैट्स बुक करा रखे हैं।
उनकी परेशानी का कारण यह है कि उन्‍हें कोई पूरी सच्‍चाई बताने वाला नहीं है और वह छन-छन के आ रहीं तरह-तरह की खबरों पर ही निर्भर हैं।
उन्‍हें डर है कि ग्रुप के बीच कोई बड़ा विवाद होने की स्‍थिति में उनका पैसा न फंस जाए अथवा जिस एक अदद आशियाने का सपना देखा था, वह सपना बन कर ही न रह जाए।
-लीजेण्‍ड न्‍यूज़ विशेष     

JSR ग्रुप के निदेशक संजय देशवानी के अपहरण में ग्रुप के जयंती लाला सहित 6 हिस्‍सेदार नामजद

मथुरा। 
रियल एस्‍टेट कंपनी जेएसआर ग्रुप के निदेशक संजय देशवानी के कल रात से गायब होने के मामले में आज नया मोड़ तब आ गया जब उनके पुत्र केशव देशवानी ने कंपनी के ही आधा दर्जन हिस्‍सेदारों के खिलाफ अपने पिता को अगवा करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करा दी।
आज सुबह केशव देशवानी ने जेएसआर ग्रुप के एक बड़े हिस्‍सेदार जयंती लाला, उनके बेटे हेमंत, विजय गोयल, विकेश गोयल, नवीन कात्‍याल तथा सतपाल नागपाल को कोतवाली में तहरीर देकर नामजद कराया।
ग्रुप के एक अन्‍य हिस्‍सेदार कन्‍हैया खत्री ने इस बारे में लीजेण्‍ड न्‍यूज़ को जानकारी देते हुए बताया कि मैंने और संजय ने कुछ समय पूर्व होडल निवासी तथा ग्रुप के पार्टनर विजय गोयल, विकेश गोयल, नवीन कात्‍याल तथा सतपाल नागपाल को अपना हिस्‍सा सरेण्‍डर किया था। इन लोगों ने हमारे हिस्‍से की कुछ रकम देने के बाद शेष भुगतान समय-समय पर करते हुए दिसंबर 2014 तक पूरा भुगतान करने का वायदा किया था किंतु फिर भुगतान देने में आनाकानी करने लगे।
कन्‍हैया खत्री के मुताबिक उन्‍होंने जब इस बारे में अपने स्‍तर से जानकारी की तो मालूम हुआ कि विजय गोयल, विकेश गोयल, नवीन कात्‍याल तथा सतपाल नागपाल ने हमारा हिस्‍सा जयंती लाला को बेच दिया है।
कन्‍हैया ने बताया कि जब हमने जयंती लाला से संपर्क किया तो उन्‍होंने और उनके लड़के हेमंत ने हमें धमकियां देना शुरू कर दिया और दोबारा तकादा करने पर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी।
कन्‍हैया खत्री का कहना था कि इसके बाद मुझे व संजय देशवानी को लगातार प्रत्‍यक्ष व अप्रत्‍यक्ष रूप से धमकियां मिलने लगीं और हमारा पीछा किया जाने लगा जिसकी जानकारी संजय ने अपने परिजनों से भी की और अपने साथ कुछ अनहोनी होने का अंदेशा जताया।
कन्‍हैया के अनुसार जयंती लाला न केवल आर्थिक रूप से काफी सक्षम हैं बल्‍कि राजनीतिक रूप से भी काफी प्रभावशाली हैं और प्रदेश की प्रमुख राजनीतिक हस्‍तियों से उनके गहरे ताल्‍लुकातों की जानकारी सभी को है।
उन्‍होंने कहा कि जयंती लाला के प्रभाव का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि जो व्‍यक्‍ति कभी एक सरकारी विभाग में मामूली सा कर्मचारी हुआ करता था आज वह करोड़पति नहीं, अरबपतियों की सूची में शामिल किया जाता है।
जयंती लाला ने जेएसआर ग्रुप की हिस्‍सेदारी के अलावा कई अन्‍य कारोबारों में भी अच्‍छा खासा पैसा निवेश कर रखा है जिसमें रियल एस्‍टेट के अतिरिक्‍त विभिन्‍न सरकारी विभागों के ठेके लेना भी शामिल है।
इस बारे में लीजेण्‍ड न्‍यूज़ ने जयंती लाला और उनके पुत्र से अपना पक्ष रखने के लिए संपर्क करने का काफी प्रयास किया लेकिन किसी से संपर्क नहीं हो सका।
ग्रुप के एक अन्‍य हिस्‍सेदार तथा संजय देशवानी के अपहरण में आरोपी बनाये गये होडल निवासी नवीन कात्‍याल से जब इस पूरे प्रकरण की जानकारी चाही तो उन्‍होंने बताया कि संजय व कन्‍हैया का हिस्‍सा हमसे जयंती लाला ने खरीदा था और कुछ रकम का भुगतान करने के बाद शेष पूरी रकम किश्‍तों में दिसंबर 2014 तक चुका देने का वायदा किया था किंतु समय पर भुगतान नहीं किया गया लिहाजा हम संजय एवं कन्‍हैया को शेष रकम का भुगतान नहीं कर पाए।
नवीन कात्‍याल ने बताया जयंती लाला के रुख को देखकर हम दो लोगों यानि मैंने तथा सतपाल नागपाल ने भी अपनी हिस्‍सेदारी बेचने का मन बना लिया और काफी समय से ग्रुप के प्रोजेक्‍ट्स पर आना-जाना छोड़ दिया।
जब इस बात की जानकारी जयंती लाला को हुई तो उन्‍होंने हमसे कहा कि आप लोगों का हिस्‍सा भी मैं खरीद लूंगा, लेकिन आप दिसंबर माह तक रुक जाएं।
नवीन कात्‍याल ने बताया कि हम दोनों हिस्‍सेदार तो दिसंबर में जयंती लाला द्वारा संजय व कन्‍हैया के हिस्‍से की शेष रकम का भुगतान किये जाने तथा फिर हमारा हिस्‍सा खरीदने का इंतजार कर रहे थे किंतु इससे पहले यह घटना हो गई।
नवीन कात्‍याल का कहना था कि हमारा नाम एफआईआर में केवल इसलिए लिखाया गया है क्‍योंकि हम संजय व कन्‍हैया का भुगतान जयंती लाला से समय पर नहीं करा सके।
कात्‍याल का कहना था कि हम तो फिलहाल दो तरफ से फंसे हुए हैं। एक तरफ जयंती लाला से संजय व कन्‍हैया का हिसाब कराना है और दूसरी ओर अपनी हिस्‍सेदारी भी समाप्‍त करनी है।
उधर संजय के लापता होने के बाद दर्ज कराई गई एफआईआर में अपहरण व हत्‍या की आशंका जताये जाने के बाद एसएसपी ने सभी छ: आरोपियों को पूछताछ के लिए तलब किया है और बताया जाता है समाचार लिखे जाने तक उनसे पूछताछ चल रही थी।
दूसरी ओर संजय के बेटे केशव तथा कन्‍हैया खत्री ने पुलिस को जानकारी दी है कि जयंती लाला के लड़के हेमंत ने उन्‍हें भी जान से मारने की धमकी दी है।
गौरतलब है जेएसआर ग्रुप शुरू से किसी न किसी कारण विवादों में रहा है। इसके द्वारा खड़ी की गई अशोका हाइट्स और निर्माणाधीन प्रोजेक्‍ट अशोका सिटी में अवैध फ्लैट्स व टावर बनाये जाने का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब एक हिस्‍सेदार के लापता होने की खबर आ गई।
बताया जाता है जयंती लाला ने जेएसआर ग्रुप के अवैध निर्माण को अपने रसूख के बल पर वैध करा लेने के भरोसे से इस प्रोजेक्‍ट में हाथ डाला था किंतु वह संभवत: अपने मकसद में सफल नहीं हो पाए। ऐसी भी चर्चा है कि कमिश्‍नर आगरा मंडल की जिन अवैध निर्माणों को लेकर त्‍यौरियां चढ़ी हुई हैं और वह जिनके खिलाफ कार्यवाही अमल में लाना चाहते हैं, उनमें से एक जेएसआर ग्रुप का अशोका सिटी नामक प्रोजेक्‍ट भी है।
इस मामले में काफी समय से ग्रुप व एमवीडीए के अधिकारियों की अंडर टेबिल बातचीत जारी थी किंतु उसमें संभवत: पूरी सफलता नहीं मिल सकी।
सच्‍चाई जो भी हो, लेकिन इतना जरूर है कि इस धार्मिक जनपद में रियल एस्‍टेट का कारोबार अवैध निर्माण के साथ-साथ आपराधिक गतिविधियों की ओर भी बढ़ने लगा है।
कोषदा बिल्‍कॉन के दो हिस्‍सेदारों में हुआ विवाद आज तक खत्‍म होने का नाम नहीं ले रहा और उसमें नित-नये आरोप-प्रत्‍यारोप लगाये जा रहे हैं। दोनों ओर से कई एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं और कई प्रार्थनापत्र विभिन्‍न विभागों में लंबित हैं।
यदि यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब रियल एस्‍टेट के धंधे में इस्‍तेमाल किये जाने वाले हथकंडे, उनके अपने कारोबारियों के लिए ही गले का फंदा बन जायेंगे और यह विश्‍व प्रसिद्ध धार्मिक जनपद इस मामले में भी पहचाना जाने लगेगा।
-लीजेण्‍ड न्‍यूज़ विशेष 

रविवार, 30 नवंबर 2014

MVDA के ईमानदार VC का भ्रष्‍ट विकास!

महाभारत नायक योगीराज श्रीकृष्‍ण की जन्‍मस्‍थली और विश्‍व विख्‍यात धार्मिक जिला मथुरा में एमवीडीए के उपाध्‍यक्ष पद पर तैनात पीसीएस अधिकारी नागेन्‍द्र प्रताप उसी तरह के ईमानदार हैं जिस तरह पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह हुआ करते थे।
कमिश्‍नर आगरा मण्‍डल प्रदीप भटनागर ने अपने निरीक्षण में मथुरा के चार अवैध निर्माणों को सील करवाकर यह साबित कर दिया कि मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण में ऊपर से नीचे तक भ्रष्‍टाचार का बोलबाला है और यहां तैनात अधिकारी अपने-अपने तरीके से इस भ्रष्‍टाचार को भरपूर प्राश्रय दे रहे हैं।
यहां ध्‍यान देने की बात यह है कि कमिश्‍नर प्रदीप भटनागर को इन अवैध निर्माणों पर कार्यवाही करने के लिए मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को लगभग खदेड़ कर भेजना पड़ा अन्‍यथा बेहिसाब शिकवा-शिकायतों के बावजूद ये अधिकारी अवैध निर्माण को लेकर आंखें बंद किये बैठे थे।
उल्‍लेखनीय है कि विकास प्राधिकरण मथुरा-वृंदावन के उपाध्‍यक्ष नागेन्‍द्र प्रताप यादव को सत्‍ताधारी समाजवादी पार्टी के परिवार का अंग माना जाता है और कहा जाता है कि वह शासन स्‍तर से कुछ भी कराने में सक्षम हैं।
इसी प्रकार सचिव श्‍याम बहादुर सिंह की भी मथुरा जैसे मलाईदार प्राधिकरण में पोस्‍टिंग तथा उपाध्‍यक्ष नागेन्‍द्र प्रताप यादव से सेटिंग यह साबित करती है कि उनकी शासन स्‍तर पर पहुंच कम नहीं है।
ऐसे में इन दोनों अधिकारियों को लेकर यह सवाल पैदा होना स्‍वाभाविक है कि फिर उक्‍त अधिकारी किसलिए प्राधिकरण के क्षेत्र में अवैध निर्माण पर जिंदा मक्‍खी निगल रहे थे और क्‍यों सारी शिकायतों को पी रहे थे?
जाहिर है कि दोनों अधिकारियों के लगातार ऐसा करने के पीछे कोई न कोई निजी स्‍वार्थ जरूर रहा होगा अन्‍यथा प्राधिकरण के उपाध्‍यक्ष जिन नागेन्‍द्र प्रताप की गिनती ईमानदार अधिकारियों में की जाती है, वह क्‍यों खुद तथा अपने अधीनस्‍थों को भ्रष्‍टाचार की बुनियाद पर एक-दो नहीं अनेक इमारतें खड़ी कराते देखने के बाद भी अब तक चुप्‍पी साधे बैठे रहे।
गौरतलब है कि मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण ने कल कमिश्‍नर के आदेश पर जिन चार अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्यवाही की है, वह तो मात्र उदाहरण भर हैं। सच तो यह है कि ऐसे अवैध निर्माणों की मथुरा, वृंदावन तथा गोवर्धन में लंबी फेहरिस्‍त है जबकि यह तीनों स्‍थान प्राधिकरण के कार्यक्षेत्र का हिस्‍सा हैं।
मथुरा में राष्‍ट्रीय राजमार्ग नंबर दो पर खड़ी की जा रही कई कॉलोनियों में पास नक्‍शे के इतर काफी अवैध निर्माण कराया जा चुका है और कॉलोनाइजर इस अवैध निर्माण को प्राधिकरण से अप्रूव्‍ड घोषित कर बेच भी चुके हैं पर प्राधिकरण के अधिकारी तमाशबीन बने हुए हैं। बताया जाता है कि इन सबको वैध कराने के लिए अधिकारियों एवं बिल्‍डर्स के बीच लंबे समय से बार्गेनिंग चल रही है। प्रति अवैध फ्लैट के हिसाब से करोड़ों की डील हुई है। प्राधिकरण के ही सूत्र बताते हैं कि कुछ पर मोहर लग चुकी है और कुछ पर लगना बाकी है।
यही हाल वृंदावन का है। वृंदावन में चूंकि फ्लैट, विला तथा भवनों की मांग काफी ज्‍यादा है इसलिए वृंदावन में अवैध निर्माण मथुरा से कहीं अधिक संख्‍या में चल रहा है। यहां कोई बिल्‍डर मल्‍टी स्‍टोरी बिल्‍डिंग की छत पर ही हैलीपैड की सुविधा देने का प्रचार कर रहा है तो कोई अपने प्रोजेक्‍ट को विश्‍व स्‍तरीय सुविधाओं से सुसज्‍जित करने का प्रचार करके लोगों की जेब तराश रहा है लेकिन न कोई देखने वाला है और न सुनने वाला।
आश्‍चर्य की बात तो यह है कि प्राधिकरण के क्षेत्र में और कृष्‍ण जन्‍मभूमि के सर्वाधिक संवेदनशील यलो व ग्रीन जोन में निर्माणाधीन इन बहुमंजिला रिहायशी इमारतों के नक्‍शे किस स्‍तर पर और कैसे पास हो रहे हैं, पास हैं भी या नहीं, हैं तो कितनी मंजिल तक के नक्‍शे पास हैं, इन सवालों के जवाब देने वाला कोई नहीं।
दरअसल विकास प्राधिकरण के संरक्षण में भ्रष्‍टाचार की बुनियाद पर इन इमारतों की लंबाई तथा इनकी संख्‍या बढ़ते जाने का एक प्रमुख कारण और है। यह कारण है प्राधिकरण और बिल्‍डर्स को यह पता होना कि मीडिया की कमजोरी क्‍या है।
सर्वविदित है कि मीडिया की कमजोरी हैं विज्ञापन, इसलिए विकास प्राधिकरण और बिल्‍डर्स अपने-अपने स्‍तर से मीडिया को विज्ञापन की पंजीरी बांटकर उसका मुंह बंद करते रहते हैं। चूंकि मीडिया ही उनके इस कारनामे तथा बिल्‍डर्स व अधिकारियों की सांठगांठ को उजागर कर सकता है लिहाजा वह मीडिया की इस कमजोरी का पूरा लाभ उठा  रहे हैं।
मीडिया इसी में खुश रहता है कि उसे बिल्‍डर भी विज्ञापन देता है और प्राधिकरण भी, बाकी जनता जाये भाड़ में। जनता से उसे मिलना भी क्‍या है। यूं भी अब अखबार और अखबार नवीसों का जनहित से कोई सीधा वास्‍ता रह नहीं गया। जनहितकारी होने का ढोंग वह उसी स्‍थिति-परिस्‍थिति में करते हैं जब वैसा करना उनकी बाध्‍यता हो जाती है। जैसे कल कमिश्‍नर के आदेश पर अवैध निर्माण सील करने के बाद तो खबरें प्रकाशित की गईं हैं किंतु इससे पहले मीडिया अपने मुंह पर खुद सील लगाये हुए था जबकि उसे सब-कुछ पता था।
ये बात दीगर है कि जिन इमारतों में अवैध निर्माण चल रहा है उनमें से अधिकांश शहर के उन लोगों की है जिनसे मीडिया व मीडियाकर्मी समय-समय पर ऑब्‍लाइज होते रहते हैं या जिनके लिए ऐसे लाइजनर सक्रिय हैं जो मीडिया को मैनेज करके रखते हैं।
कल भी जो इमारतें सील हुई हैं उनमें से दो इमारतों का स्‍वामित्‍व ऐसे तत्‍वों के पास है जिनकी प्रशासन तथा मीडिया में तूती बोलती है। वह दिन को रात कह दें तो मीडिया वही कहता है और रात को दिन बता दें तो मीडिया वह रटने लगता है।
यही कारण है कि मथुरा में अवैध निर्माण बेहिसाब बढ़ता जा रहा है क्‍योंकि प्रशासन, मीडिया तथा बिल्‍डर्स का गठजोड़ सबको खुली चुनौती देने में सक्षम है।
आज एमवीडीए के उपाध्‍यक्ष नागेन्‍द्र प्रताप हैं तथा सचिव श्‍याम बहादुर सिंह, कल इनकी जगह कोई दूसरे अधिकारी हो सकते हैं लेकिन न तो मीडिया बदलने वाला है और न वो कॉकस जो हर अधिकारी को अपने चंगुल में ले लेता है।
भ्रष्‍ट अधिकारी तो इनकी राह देखते हैं लेकिन ईमानदारी का तमगा लगाये बैठे तथा शासन तक पहुंच रखने वाले नागेन्‍द्र प्रताप जैसे अधिकारी भी इस कॉकस से बच नहीं पाते।
माना कि कमिश्‍नर ने बहुत सी शिकायतों के मद्देनजर चार अवैध निर्माण कार्यों के खिलाफ इन अधिकारियों को कार्यवाही करने पर मजबूर कर दिया लेकिन उन तमाम इमारतों का क्‍या जो अब भी सारे नियम-कानूनों को खुली चुनौती दे रही हैं और आमजन के व्‍यवस्‍था में भरोसे का मजाक उड़ा रही हैं। झूठे प्रचार के जरिए इन्‍हें खड़ा करने वाले आमजन की जेब काट रहे हैं और मीडिया इसमें उनका सहयोग कर जनता के भरोसे का खून कर रहा है।
रीयल एस्‍टेट और प्राधिकरण के गठजोड़ से बने इस कॉकस के हाथ फिलहाल तो कानून से भी अधिक शक्‍तिशाली प्रतीत होते हैं। कमिश्‍नर प्रदीप भटनागर भी इस तल्‍ख सच्‍चाई को भली-भांति जानते होंगे।
हो सकता है इनमें से कल कोई उन्‍हें अपनी ताकत का अहसास कमिश्‍नर साहब को भी करा दे तथा फिर सब-कुछ उसी प्रकार ढर्रे पर चलने लगे जैसा अब तक चला आ रहा था.... बेशक कमिश्‍नर साहब ने एक कंकड़ फैंककर उथल-पुथल मचा दी है।
यदि ऐसा होता है तो कोई आश्‍चर्य नहीं....आश्‍चर्य तो तब होगा जब कल जिन इमारतों को सील किया गया है, उनकी सील न टूट पाए और दूसरी भी ऐसी तमाम इमारतें सील कर दी जाएं।
-लीजेण्‍ड न्‍यूज़ विशेष        
 

सोमवार, 24 नवंबर 2014

ममता हैं सारधा चिटफंड घोटाले की सबसे बड़ी लाभार्थी: कुणाल

कोलकाता। 
तृणमूल कांग्रेस से निलंबित सांसद व सारधा चिटफंड घोटाले के आरोपी कुणाल घोष ने राज्य की मुखिया ममता बेनर्जी पर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह इस घोटाले की सबसे बड़ी लाभार्थी हैं। उन्होंने कहा है कि ममता को उनके सामने बैठाकर संयुक्त रूप से पूछताछ की जानी चाहिए। गौरतलब है कि घोष ने कुछ ही दिन पहले जेल में नींद की गोलियां खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की।
उन्होंने धमकी दी थी कि अगर सीबीआई ने घोटाले के असली आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया तो वह आत्महत्या कर लेंगे। घोष द्वारा की गई आत्महत्या की कोशिश के बाद राज्य सरकार ने कारागार मंत्री एचए सफवी को पद से हटा दिया था। सारधा घोटाले में नाम आने के बाद कुणाल घोष ही वह शख्स हैं जिन्होंने मामले से बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का संबंध होने की बात कही थी।

दिल्‍ली के 300 जज लैपटॉप घोटाले में शामिल, जांच शुरू

नई दिल्‍ली। 
दिल्ली की निचली अदालतों के करीब 300 जज लैपटॉप खरीदने में बरती गई अनियमितताओं को लेकर जांच की जद में हैं। साल 2013 में दिल्ली सरकार और दिल्ली हाईकोर्ट ने लैपटॉप खरीदने के लिए फंड जारी किया था मगर अधिकांश जजों ने कंप्यूटर और लैपटॉप्स के पैसों से अपने घर के लिए टीवी और होम थिएटर खरीद लिए।
दिल्ली हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस जी. रोहिणी ने हाईकोर्ट के 3 जजों का पैनल बनाया है, जो इन जजों द्वारा खर्च किए गए पैसे की जांच कर रहा है। पैनल जजों द्वारा लैपटॉप्स खरीदने के बाद जमा करवाए गए डॉक्यूमेंट्स की जांच कर रहा है।
इस स्कीम के तहत जजों को कंप्यूटर व अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर अपडेट करने के लिए 1 लाख 10 हजार रुपये तक की रकम खर्च करनी थी। इस स्कीम के पीछे विचार यह था कि जज अपनी सुविधा के हिसाब के कंप्यूटर, लैपटॉप्स या आईपैड ले सकें ताकि केसों को निबटाने की रफ्तार बढ़ जाए।
जांच कर रहे पैनल ने न्यायिक अधिकारियों को मेमो जारी किए हैं और पूछा है कि आपने पैसे किस तरह से खर्च किए। एक सूत्र ने बतायाा, 'सभी जज शुरुआत में जांच की जद में थे लेकिन अब करीब 300 जजों पर शक है कि उन्होंने अनियमितता बरती। पाया गया कि इनमें से कुछ ने टीवी या होम थिएटर सिस्टम खरीद लिए।'
यह मामला तब सामने आया जब रुटीन विजिलेंस इन्क्वायरी की गई। चीफ जस्टिस और अन्य सीनियर जजों को सबूत दिखाए गए, तब जाकर हरकत में आते हुए चीफ जस्टिस जी. रोहिणी ने जांच के लिए 3 सीनियर जजों का एक पैनल बनाया।
सूत्रों के मुताबिज जांच पैनल की तरफ से जारी मेमो का जवाब देते हुए कई जजों ने बताया है कि उन्होंने क्या खरीदा है। इसके लिए कुछ ने अपने डेबिट/क्रेडिट कार्ड्स की डीटेल्स भी अटैच की हैं ताकि दिखाया जा सके कि जितने का बिल है उतनी ही पेमेंट भी हुई है। जांच पैनल वेंडर्स की जानकारी भी चेक कर रहा है।

शुक्रवार, 14 नवंबर 2014

IPL फिक्‍सिंग केस में सुप्रीम कोर्ट ने किया नामों का खुलासा

नई दिल्‍ली। 
सुप्रीम कोर्ट ने आईपीएल में मैच फिक्सिंग को लेकर अहम नामों का खुलासा किया है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान चार नामों का खुलासा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान जिन चार नामों का खुलासा हुआ है वे हैं सुंदर रमन, मय्यपन, श्रीनिवासन और राज कुंद्रा। इसके साथ ही बीसीसीआई के चुनावों के लिए होने वाली सालाना बैठक को भी सुप्रीम कोर्ट ने स्‍थागित करने के लिए कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मुदगल कमेटी रिपोर्ट में शामिल खिलाड़ियों के नामों का खुलासा नहीं किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने जिन लोगों के नामों का खुलासा किया है। उन लोगों को रिपोर्ट की कॉपी उपलब्‍ध कराई जाएगी। चार हफ्ते के अंदर इन लोगों को अपना जवाब दाखिल करना है।
सुप्रीम कोर्ट आईपीएल में मैच फिक्सिंग को लेकर अब अगली सुनवाई 24 नवंबर को करेगा। अभी इस बात का पता नहीं हो पाया है कि सुप्रीम कोर्ट ने इन नामों का खुलासा किस संदर्भ में किया है।
गौरतलब है कि वर्ष 2011 में वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम में शामिल एक प्रमुख खिलाड़ी का नाम आईपीएल मैच फिक्सिंग में शामिल है। इस बात का पता जस्टिस मुकुल मुदगल कमेटी की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में आईपीएल मैच फिक्सिंग को लेकर जमा की गई फाइनल रिपोर्ट में है।
जस्टिस मुकुल मुदगल कमेटी की रिपोर्ट से पता चला है कि यह खिलाड़ी टीम ‌इंडिया का नियमित खिलाड़ी नहीं है पर उस खिलाड़ी ने अंतिम आईपीएल में एक प्रमुख टीम की तरफ से मैच खेला था।
जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि जिस खिलाड़ी का नाम रिपोर्ट में सामने आया है। उसका चेन्नई और जयपुर फ्रेंचाइजी से कुछ भी लेना-देना नहीं है। इस मामले में दो अन्य टीमों के खिलाड़ी जांच के दायरे में हैं।
तीन साल पुराने फोन टेप के जरिए इस खिलाड़ी से पूछताछ की गई है। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से नियुक्त किए गए आईपीएस अधिकारी बीबी मिश्रा ने इस खिलाड़ी को समन दिया और उससे पूछताछ की है। बीबी मिश्रा को जस्टिस मुकुल मुदगल कमेटी की मदद करने के लिए नियुक्त किया गया है।
इससे पहले भारतीय टीम के कई वरिष्ठ खिलाड़ियों से इस मामले में पूछताछ हो चुकी है। आईसीसी चेयरमैन एन श्रीनिवासन के दामाद मय्यपन की भूमिका को लेकर चेन्नई सुपर किंग्स के कई खिलाड़ियों से पूछताछ की गई थी।
ऑडियो टेप की फॉरेसिंक रिपोर्ट में मय्यपन की आवाज के नमूने सही पाए गए। इस ऑडियो टेप में मय्यपन की तरफ से आईपीएल मैचों सट्टेबाजी को लेकर बातचीत की गई है।
सुप्रीम कोर्ट की तरफ से बनाई गई कमेटी में सॉलिस्टिर जनरल एल नागेश्चर राव, वरिष्ठ अधिवक्ता निलॉय डूटा, बीबी मिश्रा और पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली शामिल है।
जस्टिस मुदगल कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में किसी का नाम भी लीक न हो इसके लिए जांच रिपोर्ट में खिलाड़ियों को नाम के बजाए नंबर से संबोधित किया गया है।
-एजेंसी

सोमवार, 10 नवंबर 2014

फिर एक 'संत' की कानून-व्‍यवस्‍था को खुली चुनौती

हिसार/नई दिल्‍ली।
जूनियर इंजीनियर पद से बर्खास्‍तगी के बाद 'संत' बने रामपाल आज भी कोर्ट में पेश नहीं होंगे। उनकी ओर से कोर्ट को मेडिकल रिपोर्ट भिजवा दी गई है। उनके वकील अदालत को बता रहे हैं कि खराब सेहत की वजह से रामपाल कोर्ट आने की स्थिति में नहीं हैं। रामपाल के निजी गार्ड्स और समर्थकों ने पुलिस को रोकने के लिए रविवार से ही मोर्चाबंदी कर रखी है। जमीन विवाद और हत्‍या के एक मामले में बार-बार समन के बावजूद पेश नहीं होने पर कोर्ट ने रामपाल को 10 नवंबर को पेश करने का आदेश दिया था लेकिन पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी के लिए कोई पहल नहीं की। उनके समर्थकों की मोर्चाबंदी के मद्देनजर आश्रम से करीब 25 किलोमीटर दूर पुलिस ने अतिरिक्‍त कंपनियां एहतियातन तैयार रखी थीं लेकिन रामपाल की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने कदम नहीं उठाए।
चंडीगढ़ में पूरी तैयारी
हिसार में बाबा के करीब 50 हजार समर्थक उनके डेरे को घेरा डालकर खड़े हैं। उधर, चंडीगढ़ पुलिस ने अपनी ओर से पूरी तैयारी कर रखी है। सोमवार सुबह 4 बजे से शहर के सारे एंट्री प्वाइंट, रेलवे स्टेशन और हाईकोर्ट में 5 हजार जवान तैनात किए गए हैं। अगर बाबा के समर्थक चंडीगढ़ पहुंचते हैं तो हाउसिंग बोर्ड के पास, रेलवे लाइट प्वाइंट और हाईकोर्ट की सड़क के पास से ट्रैफिक डायवर्ट किया जाएगा। चंडीगढ़ की तरफ से रेलवे स्टेशन की एंट्री ही बंद कर दी जाएगी। स्टेशन पर जीआरपी ने 150 महिला कांस्टेबल और 450 पुरुष कांस्टेबल तैनात किए गए हैं। जीआरपी के 50 अफसर भी तैनात हैं।
सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल ने रविवार को शासन और प्रशासन को अपनी ताकत का अहसास कराने में कोई कमी नहीं छोड़ी। बंदूकों से लैस उनके निजी कमांडो आश्रम की छतों के अलावा चंडीगढ़ हाईवे पर घूमते नजर आए। ये कमांडो आश्रम के आसपास एक किलोमीटर के दायरे में फैले हुए थे।
आश्रम ने सशस्त्र युवाओं को दिखाकर पुलिस प्रशासन को डराया, वहीं महिलाओं और बच्चों को टकराव रोकने के लिए ढाल भी बनाया। सैकड़ों महिलाएं अपने बच्चों को गोदी में लेकर आश्रम के मुख्य द्वार पर घंटों बैठी रहीं। रामपाल के अनुयायी बैनर लेकर करौंथा कांड की सीबीआई जांच के साथ कुछ जजों के नाम लिखकर उनके ऊपर कार्यवाही की मांग की कर रहे थे। इस दौरान हाईवे से गुजरने वाला हर शख्स आश्रम के बाहर की गतिविधियों को देखकर चुपके से गुजरता रहा। अगर किसी अनजान शख्स ने आश्रम के सामने रुक कर पड़ताल करने की कोशिश की तो उसे संत के अनुयायियों ने पकड़ लिया और पूछताछ करने के बाद ही छोड़ा। ऐसा दहशत भरा माहौल दोपहर दो बजे तक रहा। फिर महिलाओं को आश्रम के भीतर भेज दिया गया और छतों से कमांडो भी हटा लिए गए।
दोपहर बाद माहौल में बदलाव को लेकर जब आश्रम के प्रवक्ता राजकपूर से बात हुई तो उनका कहना था कि सुबह कुछ ऐसी जानकारी मिली थी, जिससे सुरक्षा प्रबंध बढ़ाए गए थे। वैसे भी साधक टकराने के लिए तैनात नहीं थे बल्कि अपने गुरुजी के लिए जान न्योछावर करने के लिए खड़े थे। गुरुजी अपने उपदेश में कहते भी हैं, मारने से अच्छा मरना है। उनका कहना था कि सुरक्षा में तैनात अनुयायियों को कम करने के पीछे एक वजह यह भी है कि अगर पुलिस कोई कार्यवाही के लिए हिसार से चलेगी तो उन्हें आधा घंटे से अधिक समय लगेगा और हमें तीन से चार मिनट लगेंगे।
रिश्तेदारों के पास ठहरे हैं अनुयायी
संत रामपाल के अनुयायी केवल आश्रम में ही मौजूद नहीं हैं, बल्कि आसपास के गांवों में अपने रिश्तेदारों के पास भी ठहरे हुए हैं। वे टेलीविजन और फोन के माध्यम से आश्रम की जानकारी ले रहे हैं। उन्हें पुलिस से टकराव की स्थिति में तत्काल आश्रम पहुंचने के निर्देश हैं।
मीडिया से बात न करने की हिदायत
रविवार को सत्संग का आखिरी दिन होने से आश्रम में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही थी। इस पर आश्रम के सामने माहौल को देखने के लिए 11 बजे के बाद मीडियाकर्मियों की आवाजाही शुरू हो गई। आश्रम प्रबंधन ने सभी श्रद्धालुओं और अपने कमांडोज को मीडिया से बातचीत नहीं करने की हिदायत दी ताकि आश्रम की जानकारी प्रशासन तक न पहुंच सके।
सत्संग के बाद डटे रहे श्रद्धालु
बरवाला आश्रम में पिछले तीन दिनों से चल रहा सत्संग रविवार रात 10 बजे खत्म हो गया। पर इसके बाद भी श्रद्धालु आश्रम में ही डटे रहे। रात को काफी अनुयायी आश्रम से निकल गए। इसके बावजूद देर रात तक हजारों लोग आश्रम में मौजूद थे।
लिस का एक भी अधिकारी नहीं पहुंचा आश्रम
वैसे तो पुलिस प्रशासन ने संत रामपाल की गिरफ्तारी के लिए जिलेभर में पैरा मिलिट्री फोर्स सहित हरियाणा पुलिस की 35 कंपनियां तैनात की है लेकिन गिरफ्तारी से संबंधित बातचीत को लेकर एक भी पुलिसकर्मी रविवार को आश्रम नहीं पहुंचा। आश्रम के प्रवक्ता राजकपूर ने बताया कि कोई भी पुलिस अधिकारी आश्रम में नहीं आया है।
प्रवक्ता बोले : कोर्ट को लेकर दुविधा में
आश्रम के प्रवक्ता राजकपूर ने कहा कि गुरुजी के सामने अजीब समस्या पैदा हो गई है। अगर वह कोर्ट में जाते हैं तो अवमानना का नोटिस आ जाता है और पेश नहीं होते हैं तो गैर जमानती वारंट जारी कर दिया जाता है।
एसपी बोले:  हर हलचल पर नजर
रामपाल की गिरफ्तारी के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं। हर हलचल पर नजर है। हाईकोर्ट के निर्देशों की पालना होगी।
- सतेंद्र गुप्ता, एसपी।
सतलोक आश्रम के बाहर हिसार-चंडीगढ़ हाईवे पर करीब एक किलोमीटर तक संत रामपाल के अनुयायियों का जमावड़ा रहा।
आश्रम के अंदर आने वाले भक्तों पर भी पैनी नजर रखी जा रही है। आश्रम के मेन गेट पर भारी संख्या में संत के अनुयायी हर आदमी पर नजर रखे हुए हैं। वहीं, एसडीएम प्रशांत अटकान सहित अन्य स्थानीय आश्रम के मौजूदा हालात पर नजर रखे हैं।
सतलोक आश्रम और पुलिस-प्रशासन के बीच टकराव की आशंका के चलते आश्रम के नजदीक से सरकारी बसों को गुजरने नहीं दिया गया। फिर भी पूरे दिन संत के अनुयायियों का आना-जाना जारी रहा। आश्रम की बसें अनुयायियों को लाने और ले जाने में लगातार जुटी रहीं।
जिला प्रशासन ने सतलोक आश्रम के संचालक संत रामपाल की गिरफ्तारी के वारंट जारी होने के मामले में बरवाला पुलिस स्टेशन में दमकल विभाग की गाड़ियां, एंबुलेंस और क्रेन को तैनात किया गया है। गौरतलब है कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने तथाकथित संत रामपाल के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी करते हुए उन्हें 10 नवंबर को अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है। उनके अनुयायियों ने संत को अस्वस्थ बताते हुए उनकी गिरफ्तारी का आदेश मानने से साफ मना कर दिया है। ऐसे में प्रशासन व अनुयायियों में टकराव की आशंका है।
संत पर अदालती काम में दखल देने का आरोप है। इसी मामले में उन्हें कई बार पेशी के आदेश हो चुके हैं मगर वह पेश नहीं हुए। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने लगातार तीसरी पेशी में हाजिर न होने के मामले में रोहतक के करौंथा गांव स्थित आश्रम के संत रामपाल के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए हैं क्योंकि वे तीसरी पेशी पर भी नहीं पहुंच सके।
सतलोक आश्रम के श्रद्धालुओं की संस्था राष्ट्रीय समाजसेवा कमेटी के अध्यक्ष राम कुमार ढाका के खिलाफ भी गैर जमानती वारंट जारी किए थे लेकिन वे कोर्ट में पेश हो गए हैं। ढाका ने अदालत में शपथ-पत्र देकर हिसार अदालत के बाहर हंगामे की जिम्मेदारी ली थी और कहा था कि हंगामे से संत रामपाल को कोई लेना-देना नहीं है।
न्यायालय ने हरियाणा के पुलिस महानिदेशक तथा गृह सचिव को 10 नवंबर को अपनी मौजूदगी में आदेश की पालना सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। संत रामपाल की आज न्यायालय में पेशी होनी थी और ऐहतियाती तौर पर पुलिस ने कड़े सुरक्षा के इंतजाम किए। करीब तीन हजार पुलिसकर्मी ड्‍यूटी पर तैनात किये गये। पेशी को देखते हुए प्रशासन ने धारा 144 लगा रखी है ताकि संत के समर्थक कोई बवाल न मचाएं। जीरकपुर, मोहाली और पंचकूला में चंडीगढ़ प्रवेश द्वारों पर नाके लगाए हुए थे।
-Legendnews
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