सोमवार, 11 मई 2015

अखिलेश सरकार की जड़ों में मठ्ठा डाल रहे हैं बिजली विभाग के एसई प्रदीप मित्‍तल

मथुरा। कृष्‍ण की पावन जन्‍मस्‍थली में तैनात बिजली विभाग के एसई प्रदीप मित्‍तल एक ओर जहां अखिलेश सरकार की जड़ों में मठ्ठा डाल रहे हैं, वहीं आम लोगों के लिए ”जले पर नमक छिड़कने” वाली कहावत को बखूबी चरितार्थ कर रहे हैं।
विश्‍वविख्‍यात धार्मिक स्‍थलों में शुमार इस शहर की जनता पिछले करीब पंद्रह दिनों यानि जब से गर्मी ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू किया है, बिजली की भारी किल्‍लत का सामना कर रही है।
दिन तो लोगों का काम के बीच जैसे-तैसे बीत जाता है किंतु रात काटे नहीं कटती क्‍योंकि आधी रात के वक्‍त यहां तब बिजली काटी जाती है जब लोग गहरी नींद के आगोश में समाये होते हैं। बिजली की यह कटौती तीन से चार घंटे तक की होती है। दिन…और फिर रात में भी की जा रही इस भारी कटौती की वजह से लोगों के इन्‍वर्टर भी साथ छोड़ देते हैं क्‍योंकि वह पूरी तरह चार्ज ही नहीं हो पाते।
इस स्‍थिति में बीमार, वृद्ध और बच्‍चों के साथ घर के हर सदस्‍य को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जाहिर है कि इन हालातों में लोग यह जानने का प्रयास करते हैं कि बिजली की ऐसी किल्‍लत कब तक रहेगी क्‍योंकि अभी तो गर्मी ने अपने शुरूआती तेवर दिखाना शुरू ही किया है।
जनसामान्‍य इसके लिए मीडिया से भी यह अपेक्षा रखता है कि वह उसे किन्‍हीं बड़े अफसरों के मार्फत जानकारी दे क्‍योंकि बड़े विभागीय अफसर अपनी ओर से कोई जानकारी देना मुनासिब नहीं समझते।
बिना किसी पूर्व सूचना के इस धार्मिक शहर में दिन-रात की जा रही भारी बिजली कटौती के बावत पहले तो ”लीजेण्‍ड न्‍यूज़” ने राधापुरम एस्‍टेट के सब स्‍टेशन पर फोन किया। राधापुरम एस्‍टेट के सब स्‍टेशन पर जिन सज्‍जन ने फोन रिसीव किया उनका कहना था कि कटौती के बारे में उन्‍हें कुछ नहीं बताया जाता लिहाजा वह कुछ भी बता पाने में असमर्थ हैं। उच्‍च अधिकारी ही बता सकते हैं कि असलियत क्‍या है और यह स्‍थिति कब तक बनी रहेगी।
सब स्‍टेशन से इस आशय का जवाब मिलने पर ”लीजेण्‍ड न्‍यूज़” ने रात में ही एसई प्रदीप मित्‍तल को उनके सरकारी मोबाइल पर फोन किया।
आश्‍चर्यजनक रूप से एसई का भी जवाब वही था जो सब स्‍टेशन पर मौजूद रहे कर्मचारी का था।
एसई प्रदीप मित्‍तल के मुताबिक कटौती का फरमान सीधे लखनऊ से जारी होता है और उन्‍हें इसकी कोई सूचना नहीं दी जाती।
एसई का कहना था कि कटौती क्‍यों हो रही है और कितने दिन चलेगी, इसकी जानकारी लखनऊ में बैठे विभागीय अफसर ही दे सकते हैं इसलिए उन्‍हें फोन कर लें।
जब एसई से यह पूछा गया कि यहां के सबसे बड़े अफसर आप है, और आपको ही लखनऊ में बैठे अफसर कोई जानकारी नहीं देते तो किसी अन्‍य को वह जानकारी दे देंगे क्‍या?
इस पर एसई का जवाब था कि इसके लिए मैं क्‍या कर सकता हूं।
जब उनसे यह कहा गया कि लोगों से बिजली बिल के भुगतान की वसूली का जिम्‍मा आपका है और उसके लिए आप हरसंभव हथकंडा अपनाते हैं, बिल न दे पाने वालों के खिलाफ कार्यवाही आप कराते हैं, बिजली विभाग से मोटा वेतन-भत्‍ता आप लेते हैं तो क्‍या आपकी कोई जवाबदेही नहीं बनती, इस पर एसई का जवाब था कि डीएम साहब ने भी मुझसे कटौती के बारे में जानकारी मांगी थी और मैंने उन्‍हें बता दिया कि जवाब लखनऊ से ही मिल सकता है।
कहते हैं कि किसी को गुड़ भले ही न दे सको लेकिन उससे गुड़ जैसी बात तो करो ताकि वह आशान्‍वित रहे तथा उत्‍तेजित न हो…किंतु यहां तो जिम्‍मेदार अफसर ही लोगों के जले पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं।
जिलाधिकारी राजेश कुमार से उन्‍होंने क्‍या कहा, इसकी पुष्‍टि तो नहीं हो पाई अलबत्‍ता इतना जरूर पता लग गया कि बिजली विभाग के एसई आने वाले समय में अपने जवाबों से इस धार्मिक शहर के अंदर किसी बड़े उपद्रव का कारण बन सकते हैं क्‍योंकि उनका जवाब किसी भी समय आग के अंदर घी डालने का काम कर बैठेगा।
आज ही लखनऊ से छपे समाचार में स्‍पष्‍ट चेतावनी दी गई है कि पॉवर कार्पोरेशन ने पश्‍चिमी उत्‍तर प्रदेश को और बिजली दे पाने में असमर्थता जाहिर की है इसलिए पश्‍चिमी उत्‍तर प्रदेश के लोग बिजली का भारी संकट झेलने को तैयार रहें।
इन स्‍थितियों में गर्मी और बिजली संकट के साथ-साथ लोगों का दिमागी पारा भी बढ़ना स्‍वाभाविक है। उत्‍तेजित लोगों को जब कहीं से कोई संतोषजनक या आशावादी उत्‍तर नहीं मिलेगा तो टकराव की संभावना भी बढ़ जायेगी।
यूं भी बिजली विभाग ने प्रति किलोवाट के हिसाब से हर कनेक्‍शन पर मिनीमम बिल तो निर्धारित कर रखा है किंतु मिनीमम सप्‍लाई आज तक तय नहीं की।
कहने का मतलब यह है कि यदि कोई उपभोक्‍ता अपने निर्धारित भार का ईमानदारी के साथ इस्‍तेमाल कर रहा है तो बिजली विभाग उसे उसके हक की बिजली दिये बिना भी जबरन मिनमम बिल वसूल रहा है।
यह बात अलग है कि कोई भी ईमानदार उपभोक्‍ता अतिरिक्‍त एक यूनिट बिजली का इस्‍तेमाल नहीं कर सकता।
प्रदेश के सर्वाधिक भ्रष्‍ट विभागों में से एक बिजली विभाग के अंदर बिलिंग से किये गये करोड़ों के भ्रष्‍टाचार का मामला गत दिनों सामने आ ही चुका है। कनेक्‍शन से लेकर बिल के भुगतान तक में सुविधा शुल्‍क देकर कुछ भी खेल इस विभाग के कर्मचारी और अधिकारियों से करा लेना आम बात है, लेकिन बिजली की भारी किल्‍लत पर जवाबदेही लेने को कोई तैयार नहीं।
मथुरा ही नहीं, प्रदेश के हर जिले में बिजली विभाग के अफसरों की कार्यशैली लगभग ऐसी ही देखने को मिलती है जबकि उनकी माली हैसियत उनके पद से मिलने वाली तनख्‍वाह की तुलना में बहुत अच्‍छी देखी जा सकती है।
अतिरिक्‍त कमाई में बिजली विभाग का अदना सा कर्मचारी भी किसी से पीछे नहीं रहता किंतु जवाबदेही में उच्‍च अफसर भी सबसे छोटे कर्मचारी से तुलना करते नहीं शरमाते। वो बेझिझक कहते हैं कि उन्‍हें कुछ नहीं पता, कब तक हालात सुधरेंगे।
शायद इसीलिए सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह बार-बार कहते हैं कि कुछ अफसर ही अखिलेश सरकार की छवि धूमिल करने पर आमादा हैं। संभवत: मुलायम सिंह जानते हैं कि प्रदीप मित्‍तल जैसे अफसरों की संख्‍या ही अधिक है जो सरकार से तो सब-कुछ ले रहे हैं लेकिन उसकी ओर से गुड़ तो छोड़िये गुड़ जैसी बात भी नहीं करते।
गौरतलब है कि मथुरा, प्रदेश के उन अजूबे जिलों में से है जहां आज तक समाजवादी पार्टी का न तो कभी लोकसभा में कोई प्रतिनिधि पहुंच सका और न विधानसभा में, हालांकि पार्टी ने हरसंभव प्रयास किया।
अब 2017 में फिर विधानसभा के चुनाव होने हैं, अखिलेश सरकार केंद्र की पिछली यूपीए सरकार जैसा आचार-व्‍यवहार कर रही है। मुख्‍यमंत्री मुगालते में हैं कि उन्‍होंने उत्‍तर प्रदेश को उत्‍तम प्रदेश बनाने की राह पर ला खड़ा किया है। अफसर उनके इस मुगालते को बनाये रखना चाहते हैं। पार्टी की जिला इकाइयां सत्‍ता के मद में चूर हैं। पार्टी के पदाधिकारी या तो अंतर्कलह के शिकार हैं या निजी स्‍वार्थ पूरे कराने में लिप्‍त। आम आदमी के लिए जवाबदेही वह भी महसूस नहीं कर रहे।
फिर चाहे बात आज के लिए आवश्‍यक आवश्‍यकता बन चुकी बिजली की किल्‍लत से ताल्‍लुक रखती हो अथवा बेलगाम हो चुकी कानून-व्‍यवस्‍था से जुड़ी हो। अधिकारी चूंकि ले-देकर सीधे अपनी मनमाफिक तैनाती कराने में सक्षम हैं, इसलिए वह न तो जनता की सुनते हैं और न पार्टी पदाधिकारियों को कुछ समझते हैं।
अब भी वक्‍त है यदि माननीय मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव और उनका समाजवादी कुनबा इस तल्‍ख सच्‍चाई को महसूस करते हुए कुछ ठोस कदम उठा लें अन्‍यथा प्रदीप मित्‍तल जैसे अफसर उनकी जड़ों में मठ्ठा डालने का काम बखूबी कर ही रहे हैं।
-लीजेण्‍ड न्‍यूज़ विशेष

शनिवार, 9 मई 2015

महाराजा न्‍यूज़ के संचालक श्रीचंद और उनके पुत्र पर धोखाधड़ी का मुकद्दमा दर्ज

मथुरा। डेन नेटवर्क के लिए मथुरा में महाराजा न्‍यूज़ के नाम से केबिल नेटवर्क संचालित करने वाले पिता-पुत्र श्रीचंद अग्रवाल व कौशल अग्रवाल सहित डेन नेटवर्क के चेयरमैन समीर मनचंदा के खिलाफ धोखाधड़ी, अमानत में खयानत करने तथा गाली-गलौज करके जान से मारने की धमकी देने का मुकद्दमा एसएसपी के आदेश पर थाना कोतवाली की रिपोर्टिंग चौकी कृष्‍णा नगर में दर्ज किया गया है।
पूर्व में श्रीचंद अग्रवाल मथुरा में ही मिलीविजन के नाम से केबिल नेटवर्क का संचालन कर चुके हैं और फिलहाल डेन नेटवर्क की फ्रेंचाइजी लेकर महाराजा न्‍यूज़ के नाम से केबिल नेटवर्क चला रहे हैं।
अपराध संख्‍या 0474/2015 पर आईपीसी की धारा 420, 504, 506 तथा 406 के तहत दर्ज उक्‍त मामले में राम कुमार शर्मा (पहलवान) पुत्र स्‍व. श्री मोहन पहलवान ने 07 मई के दिन एसएसपी मथुरा को इस आशय का एक प्रार्थना पत्र दिया था कि उनकी मां श्रीमती विमला देवी पत्‍नी स्‍व. श्री मोहन पहलवान ने श्रीचंद अग्रवाल पुत्र श्री सोहन लाला अग्रवाल तथा कौशल अग्रवाल पुत्र श्रीचंद अग्रवाल निवासीगण राधा ऑर्चिड कॉलोनी मसानी के माध्‍यम से डेन नेटवर्क के चेयरमैन समीर मनचंदा, 236 ओखला इंडस्‍ट्रियल एस्‍टेट नई दिल्‍ली को भूतेश्‍वर स्‍थित मोहन प्‍लाजा काम्‍पलेक्‍स के बेसमेंट में निर्मित दुकान संख्‍या 25 लगायत 34 मय हॉल व तीसरी मंजिल की छत कार्यालय व डिश एंटीना के सेटअप बॉक्‍स आदि लगाने के लिए टैक्‍स के अलावा 90 हजार रुपए प्रतिमाह के किराये पर दिया था।
राम पहलवान के अनुसार दिसंबर 2014 में इसके लिए उनकी मां ने एक माह का पेशगी किराया इस शर्त पर लिया था कि यह लोग 6 महीने के अंदर अपना कार्यालय आदि व्‍यवस्‍थित करके कार्य शुरू कर देंगे और फिर 6 महीने का एकमुश्‍त किराया देकर एक पंजीकृत किरायेनामा निष्‍पादित करा लेंगे। उसके बाद हर महीने की पहली तारीख को मय टैक्‍स के देते रहेंगे।
राम पहलवान द्वारा दर्ज कराये गये मुकद्दमे के अनुसार श्रीचंद अग्रवाल, उनके पुत्र कौशल आदि ने शर्तों का पालन नहीं किया लिहाजा उनसे कई बार कहा गया कि वह शर्तों का पालन करें तथा किराया अदा करें।
लगातार टाले जाने पर जब इसके पीछे का कारण जानने की कोशिश की गई तो पता लगा कि राम पहलवान की मां के नाम से किराया तो हर महीने श्रीचंद अग्रवाल तथा कौशल अग्रवाल के पास आता रहा है और उन्‍होंने किराया लेने के लिए कोई किरायानामा भी बना लिया है। इस किराये के चेक मोहन कंस्‍ट्रक्‍शन कंपनी के नाम से बनते रहे हैं।
एफआईआर के अनुसार इन चेकों को भुनाने के लिए तीनों आरोपियों ने मिलीभगत करते हुए सिंडीकेट बैंक मथुरा की चौक बाजार शाखा में एक खाता भी खोल लिया जिसका नंबर 85211010001064 है।
इस तरह इन आरोपियों ने षड्यंत्र पूर्वक कूटरचित दस्‍तावेज तैयार करके विमला देवी का लाखों रुपया हड़प लिया।
राम पहलवान के अनुसार जब उन्‍होंने इस बारे में श्रीचंद अग्रवाल, उनके पुत्र कौशल तथा समीर मनचंदा से बात करनी चाही तो इन्‍होंने 20 मार्च 2015 की शाम करीब 7.30 बजे मोहन प्‍लाजा कॉम्‍पलेक्‍स स्‍थित कार्यालय पर बुलाकर अवैध हथियार दिखाते हुए राजीनामा करने का दबाव बनाया।
राम पहलवान का कहना है कि उनके द्वारा राजीनामा से इंकार करने पर आरोपियों ने गालियां बकते हुए कहा कि हम मीडिया वाले हैं, पुलिस व प्रशासन में हमारी पहुंच काफी ऊपर तक है, इसलिए तू हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
तेरी भलाई इसी में है कि इस जगह का बैनामा हमारे पक्ष में कर दे अन्‍यथा तुझे जान से मार देंगे।
बताया जाता है कि एसएसपी को प्रार्थना पत्र देने से पहले मय सबूतों के राम पहलवान ने इलाका पुलिस से संपर्क किया था ताकि षड्यंत्रकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली जाए किंतु महाराज न्‍यूज़ के संचालकों के प्रभाव में इलाका पुलिस न एफआईआर दर्ज नहीं की। हारकर उन्‍होंने एसएसपी को प्रार्थना पत्र दिया और तब उनके आदेश से रिपोर्टिंग चौकी कृष्‍णा नगर पर कल शाम मुकद्दमा दर्ज किया गया है किंतु समाचार लिखे जाने तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी।
-लीजेण्‍ड न्‍यूज़ विशेष

गुरुवार, 7 मई 2015

शैलेन्‍द्र अग्रवाल केस: पकड़ा जाए वह चोर, बाकी सब साहूकार!

आगरा पुलिस की गिरफ्त में आये शैलेन्‍द्र अग्रवाल पर यह कहावत पूरी तरह सटीक बैठती है कि ”पकड़ा जाए वह चोर, बाकी सब साहूकार!” शैलेन्‍द्र “आलू वाला” के नाम से मशहूर समाजवादी पार्टी के जिस तथाकथित युवा नेता को न्‍यायालय ने आज से 75 घंटों की पुलिस कस्‍टडी में दिया है, उससे अब भले ही उसके नामचीन रिश्‍तेदार पल्‍ला झाड़कर खड़े हों, भले ही मीडिया आज उसे लेकर पूरे-पूरे पेज की कहानी गढ़ रहा हो, किंतु कड़वा सच यह है कि उसे इस मुकाम तक पहुंचाने में उसके सफेदपोश रिश्‍तेदारों की भूमिका भी कम महत्‍वपूर्ण नहीं है।
शैलेन्‍द्र अग्रवाल की जिस लाइफ स्‍टाइल को लेकर आज तमाम सवाल खड़े किये जा रहे हैं, और उसे बड़ा नटवरलाल बताया जा रहा है, उसकी यह लाइफ स्‍टाइल तब भी थी जब उसके साथ शहर के नामचीन मिठाई विक्रेता ने अपनी बेटी की शादी की थी। संभवत: तब शैलेन्‍द्र की इसी लाइफ स्‍टाइल ने मिठाई विक्रेता को प्रभावित किया होगा अन्‍यथा उसकी गतिविधियां असंदिग्‍ध तो कभी नहीं रहीं।
मथुरा के डैम्‍पियर नगर के ही एक अन्‍य उद्योगपति परिवार के घर से जब एक ही नंबर की एक कार और दूसरी बुलेट मोटरसाइिकल बरामद हुई तो कोतवाली पुलिस को पता लगा था कि वह शैलेन्‍द्र अग्रवाल की हैं। निकट संबंधों के चलते वही उनके यहां उन दोनों वाहनों को खड़ा कर गया था। शैलेन्‍द्र अग्रवाल ने ऐसा क्‍यों किया, इसका खुलासा तो कभी नहीं हुआ अलबत्‍ता ले-देकर पुलिस को सेट कर लिया गया और शैलेन्‍द्र अग्रवाल सकुशल अपनी गतिविधियों को परवान चढ़ाता रहा।
शादी के बाद भी शैलेन्‍द्र की गतिविधियों में कोई सुधार नहीं हुआ। एक बार तो उसने पारि‍वारिक कारणों से खुद के ही पैर में गोली मार ली थी किंतु तब भी बदनामी से बचने के लिए उसके खास रिश्‍तेदारों ने मामला दबवा दिया।
एक दौर ऐसा भी आया जब शैलेन्‍द्र अग्रवाल समाजवादी पार्टी के सबसे युवा व चमकदार नेता के रूप में पहचान बना चुका था। मथुरा शहर में चारों ओर समाजवादी पार्टी के होर्डिंग उसके सौजन्‍य से लगे नजर आते थे। इन होर्डिंग्‍स पर उसकी आदमकद तस्‍वीर होती थी और कोई दिन ऐसा नहीं होता था जब शैलेन्‍द्र की खबरें अखबारों का हिस्‍सा न बनें।
इस दौर में शैलेन्‍द्र अखबार वालों को भी विभिन्‍न तरीकों से भरपूर ऑब्‍लाइज करता था। तथाकथित बड़े अखबार के मालिकों तथा स्‍टाफ ने तो उससे लाखों रुपए अर्जित किये लिहाजा क्‍या मजाल कि उसे कभी उसकी संदिग्‍ध गतिविधियों का भी अहसास कराया हो अथवा उस ओर इशारा किया हो।
शैलेन्‍द्र जब आगरा में आयकर विभाग के एक कर्मचारी की हत्‍या में नामजद हुआ, तब भी उसे सही रास्‍ते पर लाने का प्रयास उसके निकटस्‍थ रिश्‍तेदारों या यार-दोस्‍तों ने नहीं किया।
वैसे शैलेन्‍द्र अग्रवाल जिस तरह की संदिग्‍ध गतिविधियों में संलिप्‍त था और उसकी जो लाइफ स्‍टाइल थी, वही लाइफ स्‍टाइल तथा वैसी ही गतिविधियां उसके निकटस्‍थ रिश्‍तेदारों तथा यार-दोस्‍तों की भी हमेशा रही हैं और आज भी हैं। फर्क केवल इतना है कि शैलेन्‍द्र आज पुलिस कस्‍टडी में है और निकटस्‍थ रिश्‍तेदारों तथा यार-दोस्‍तों ने उसी प्रकार पुलिस-प्रशासन को अपनी कस्‍टडी में ले रखा है जिस प्रकार कभी शैलेन्‍द्र रखा करता था।
शैलेन्‍द्र के जो कारनामे आज पुलिस तथा अखबारों के माध्‍यम से आम जनता के सामने आ रहे हैं, वह न सिर्फ उसके खास रिश्‍तेदारों के सामने बहुत पहले से थे बल्‍कि वह खुद भी अब तक उन कारनामों को अंजाम दे रहे हैं। हां, यह जरूर माना जायेगा कि शैलेन्‍द्र पकड़ा गया और वह पकड़ से दूर हैं। यह बात अलग है कि किसी न किसी रोज उनके कारनामे भी अखबारों की सुर्खियों का हिस्‍सा बनेंगे।
इस मामले में सूत्र बताते हैं कि आये दिन किसी न किसी ‘अवार्ड’ से नवाजे जाने वाले शिक्षा माफियाओं से लेकर सर्राफा व्‍यवसाई और रीयल एस्‍टेट के बड़े कारोबारियों से लेकर कई होटल कारोबारी तक शैलेन्‍द्र अग्रवाल के नक्‍शे कदम पर चल रहे हैं। सुरा और सुंदरियों का यह लोग भरपूर उपभोग व उपयोग करते हैं, साथ ही क्रिकेट की सट्टेबाजी से लेकर एमसीएक्‍स के अवैध कारोबार तक में इनका खासा इनवॉल्‍वमेंट है, बावजूद इसके अब तक यह इज्‍ज़तदार कहलाते हैं। हालांकि पूर्व में कॉलगर्ल्‍स के साथ पकड़े जाने, क्रिकेट की सट्टेबाजी तथा दूसरे कालेधंधों में इन सफेदपोशों का नाम सामने आता रहा है किंतु अब तक यह खुद को बचाने में सफल रहे हैं।
हाल ही में एक रेप केस की पीड़ित लड़की ने जब पुलिस को इस आशय का बयान दिया था कि उसे कुछ तथाकथित ”बड़े लोगों” के साथ भी हमबिस्‍तर होने को मजबूर किया जाता था तो शहर के कई बड़े लोगों की नींद उड़ गई थी। उन्‍होंने अचानक नामजद आरोपी की पैरवी बंद करके मीडिया से इस आशय की अपनी पैरवी शुरू कर दी कि वह लड़की द्वारा लिये गये ”बड़े लोगों” के नाम सार्वजनिक न कर दे।
बताया जाता है कि अनेक खास अवसरों पर यह तथाकथित सफेदपोश बड़े लोग शैलेन्‍द्र अग्रवाल की सेवाएं भी अपने लिए लेते रहे हैं।
जिन आईएएस और आईपीएस के आज शैलेन्‍द्र अग्रवाल से रिश्‍तों को खंगाला जा रहा है, वह जग जाहिर थे और क्‍यों थे, यह भी सबको पता है। ये रिश्‍ते न तो केवल पैसों के लेनदेन तक सीमित थे और न शैलेन्‍द्र इनका एकतरफा लाभ उठाता था। ये रिश्‍ते एक-दूसरे के पूरक बन चुके थे और हर क्षेत्र में परस्‍पर सहभागिता के थे।
अब पुलिस को अदालत से मिली 75 घंटों की कस्‍टडी में शैलेन्‍द्र कितने राज खोलता है या पुलिस उसमें से कितने राज सार्वजनिक करती है, यह तो आने वाला वक्‍त ही बतायेगा परंतु एक बात पूरी तरह तय है कि शैलेन्‍द्र जिस हमाम का हिस्‍सा बनकर इस गति को प्राप्‍त हुआ है, उसमें उसके जैसे अनेक सफेदपोश भी खड़े हैं। वो रिश्‍तेदार भी हैं और राजदार भी। बस देखना यह है कि शैलेन्‍द्र की तरह उनका राजफाश कब होता है।
इतना निश्‍चित है कि जिस दिन उनके कारनामे सार्वजनिक होंगे, उस दिन शैलेन्‍द्र बहुत पीछे छूट जायेगा।
-लीजेण्‍ड न्‍यूज़ विशेष

बुधवार, 29 अप्रैल 2015

कोषदा बिल्‍डकॉन के प्रोजेक्‍ट ”मंदाकिनी” में 120 फ्लैट्स अवैध!

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया डेवलेपमेंट अथॉरिटी सहित कोषदा बिल्‍डकॉन को नोटिस
मथुरा। रीयल एस्‍टेट के क्षेत्र में कार्यरत कंपनी कोषदा बिल्‍डकॉन के प्रोजेक्‍ट ”मंदाकिनी” में 120 फ्लैट्स के निर्माण पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। मंदाकिनी में 120 फ्लैट्स के निर्माण को अवैध बताते हुए कोषदा बिल्‍डकॉन के एक पार्टनर ने ही इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ली है और अनुरोध किया है कि इन फ्लैट्स का निर्माण रुकवाया जाए और इनमें से जितने फ्लैट्स का निर्माण कराया जा चुका है, उन्‍हें ध्‍वस्‍त कराया जाए।
कोर्ट ने पार्टनर की याचिका पर उत्‍तर प्रदेश के अर्बन डेवलेपमेंट एंड हाउसिंग विभाग, मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के अध्‍यक्ष, उपाध्‍यक्ष व सचिव तथा कोषदा बिल्‍डकॉन प्रा. लि. के डॉयरेक्‍टर श्‍याम सुंदर बंसल को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। 07 अप्रैल 2015 को कोर्ट द्वारा जारी किये गये नोटिस के जवाब तथा उस पर सुनवाई के लिए अगली तारीख 12 मई 2015 तय की है।
हाईकोर्ट के न्‍यायाधीश विनोद कुमार मिश्रा तथा दिलीप गुप्‍ता ने इस मामले में काउंटर एफीडेविट फाइल करने के लिए तीन सप्‍ताह तथा रीजॉइंडर एफीडेविट फाइल करने के लिए मात्र एक सप्‍ताह का समय दिया है।
कोषदा बिल्‍डकॉन के पार्टनर जैन रियलटर्स प्रा. लि. सेक्‍टर-7 द्वारिका नई दिल्‍ली की ओर से डायरेक्‍टर अजय कुमार जैन पुत्र सुरेश चंद्र जैन द्वारा इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय को दी गई जानकारी के मुताबिक कोषदा बिल्‍डकॉन के प्रोजेक्‍ट मंदाकिनी में एफएसआई ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्‍ट के तहत 4026 वर्ग मीटर जमीन 72 लाख रुपए में खरीदी थी।
कोषदा बिल्‍डकॉन के प्रोजेक्‍ट मंदाकिनी की कुल जमीन के इस 16 प्रतिशत हिस्‍से की रजिस्‍ट्री 31 मार्च 2011 को कराई गई थी।
जैन रियलटर्स के मुताबिक कोषदा बिल्‍डकॉन में 16 प्रतिशत जमीन की हिस्‍सेदारी हो जाने के बाद कोषदा बिल्‍डकॉन के निदेशकों ने उनके सामने इस आशय का एक प्रस्‍ताव रखा कि चूंकि उनके द्वारा प्रोजेक्‍ट निर्माण के लिए डेवलेपमेंट अथॉरिटी तथा राज्‍य सरकार से जरूरी सभी अनुमतियां ली जा चुकीं हैं इसलिए वह अपने हिस्‍से के निर्माण कार्य का ठेका भी उन्‍हें ही दे दें।
जैन रियलटर्स के अनुसार उन्‍होंने कोषदा के निदेशकों द्वारा दी गई इस मौखिक जानकारी पर भरोसा करके उन्‍हें अपने हिस्‍से के भी निर्माण कार्य का ठेका दे दिया और इसके लिए बाकायदा लिखा-पढ़ी की गई।
कोषदा मंदाकिनी वृंदावन में जब ”टावर बी” के नाम से किये जाने वाले निर्माण के बावत जैन रियलटर्स ने कोषदा के निदेशक श्‍याम सुंदर बंसल आदि से डेवलेवमेंट अथॉरिटी सहित सभी विभागों से प्राप्‍त अनुमति के कागजातों की प्रतिलिपि दिखाने व देने को कहा तो वह किसी प्रकार के ऐसे कोई कागजात नहीं दिखा पाये।
बार-बार अनुरोध किये जाने के बावजूद अनुमति संबंधी दस्‍तावेज न दिखाये जाने पर जैन रियलटर्स ने मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण से जानकारी की तो पता लगा कि कोषदा बिल्‍डकॉन ने उनके हिस्‍से की जमीन पर टावर बनाने संबंधी कोई अनुमति ली ही नहीं है और जो अनुमति ली गई है, वह सिर्फ 42 फ्लैट्स की है।
इसी प्रकार उनके टॉवर पर हैलीपैड बनाने की भी स्‍वीकृति नहीं ली गई है जबकि उन्‍हें ऐसा बताया गया था और प्रचार माध्‍यमों में भी टावर पर हैलीपैड बनाने का उल्‍लेख किया गया था।
जैन रियलटर्स ने बताया है कि इस तरह की जानकारी मिलने के बाद उन्‍होंने कोषदा बिल्‍डकॉन के निदेशकों से अवैध निर्माण कार्य तुरंत बंद करने का अनुरोध किया और कहा कि वह उनके हिस्‍से की जमीन का भौतिक कब्‍जा उन्‍हें दे दें ताकि वह उस पर निर्माण के लिए जरूरी सभी औपचारिकताएं पूरी करा सकें किंतु इस मांग को सुनकर कोषदा के निदेशक उत्‍तेजित हो गये तथा उन्‍होंने जैन रीयलटर्स के निदेशक अजय जैन को धमकी देते हुए जमीन पर भौतिक कब्‍जा देने से स्‍पष्‍ट इंकार कर दिया।
इस मामले में अजय जैन की ओर से 25 जुलाई 2013 को ‘कोषदा बिल्‍डकॉन प्रा. लि.’ के मालिकानों श्याम सुन्दर बंसल पुत्र श्री गोपाल दास बंसल निवासी-मकान नंबर 2255, भक्तिधाम भरतपुर गेट मथुरा, गौरव अग्रवाल पुत्र श्री माधव प्रसाद अग्रवाल  निवासी मण्डी रामदास मथुरा, नरेन्द्र किशन गर्ग पुत्र श्रीराम गर्ग निवासी मकान नंबर जी 6 किशना अपार्टमेंट, मसानी तिराहा, मथुरा तथा कोषदा बिल्डकॉन प्रा. लि. कोषदा हाउस तिलक द्वार, मथुरा (उप्र) के खिलाफ थाना कोतवाली वृंदावन में मुकद्दमा अपराध संख्‍या 503/13 पर धारा 380, 384, 387, 392, 406, 409, 417, 420, 423, 424, 427, 448, 451, 452, 456, 467, 506, 120 B आईपीसी के तहत एफआईआर दर्ज कराई।
इसके बाद जैन रियलटर्स को ज्ञात हुआ कि कोषदा बिल्‍डकॉन के मालिकानों ने उनकी जमीन पर किये गये अवैध निर्माण को कंपाउंड के जरिए नियमित कराने के लिए मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण में प्रार्थनापत्र दिया है।
जैन रियलटर्स ने मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण को बाकायदा पत्र लिखकर अनुरोध किया कि कोषदा के निदेशकों का आवेदन गैर कानूनी है लिहाजा उन्‍हें ऐसी कोई अनुमति न दी जाए। साथ ही जैन रीयलटर्स की जमीन पर कोषदा बिल्‍डकॉन द्वारा कराये गये अवैध निर्माण को ध्‍वस्‍त कराकर उसका खर्चा कोषदा बिल्‍डकॉन से वसूल किया जाए किंतु प्राधिकरण ने उनके अनुरोध को नजरंदाज कर दिया।
जैन रियलटर्स के मुताबिक उन्‍होंने जमीन की रजिस्‍ट्री से लेकर आपराधिक मुकद्दमे आदि से संबंधित सभी कागजातों की प्रतियां भी मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण को उपलब्‍ध कराईं किंतु कोई नतीजा नहीं निकला इसलिए अब उन्‍हें इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय की शरण लेनी पड़ी ताकि उनकी तरह वो लोग कोषदा बिल्‍डकॉन की धोखाधड़ी का शिकार होने से बच सकें जो उनके झूठे प्रचार पर भरोसा करके वहां फ्लैट बुक करा चुके हैं या फिर कराने का विचार कर रहे हैं।
इस संबंध में मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के अधिकारियों से लेकर कोषदा बिल्‍डकॉन के निदेशकों तक से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई किंतु कोई भी अपना पक्ष रखने के लिए सामने आने को तैयार नहीं हुआ।
-लीजेण्‍ड न्‍यूज़ विशेष

मंगलवार, 28 अप्रैल 2015

जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स पर शिकंजा कसने की तैयारी, पुलिस-प्रशासन ने लिया संज्ञान

डस्‍टर ईनाम की घोषणा भी फर्जी, भाग्‍यशाली विजेता भी ग्रुप से जुड़े लोगों के ही परिजन
आगरा से प्रकाशित लगभग सभी प्रमुख दैनिक अखबारों में ”भ्रामक जैकेट विज्ञापन” देकर लोगों को ठगने की कोशिश करने वाले रीयल एस्‍टेट ग्रुप जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स पर जिला प्रशासन ने भी अपनी निगाहें केंद्रित कर दी हैं। प्रशासन ने जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स के विज्ञापनों पर संज्ञान लिया है और आवश्‍यक जांच तथा विचार-विमर्श के बाद शिकंजा कसने की तैयारी की जा रही है।
इधर जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स के विज्ञापनों तथा उनकी मंशा के बारे में आज जब ”लीजेण्‍ड न्‍यूज़” ने और छानबीन की तो बड़े ही चौंकाने वाले तथ्‍य प्रकाश में आये।
उदाहरण के लिए विज्ञापन के तहत ”12 फ्लैट…12 डस्‍टर” की जिस ईनामी स्‍कीम में पांच फ्लैट बुक कराने वाले पांच भाग्‍यशाली विजेताओं का नाम दिया गया है, वह कोई और नहीं जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स के ग्रुप से जुड़े हुए लोगों के परिजन ही हैं। यही कारण है कि कल यानी 26 अप्रैल की शाम इन लोगों को डस्‍टर वितरण करने जैसा कोई कार्यक्रम हुआ ही नहीं जबकि शाम साढ़े सात बजे होटल शीतल रीजेंसी में इस कार्यक्रम को करने का हवाला विज्ञापन के अंदर दिया गया था।
दरअसल, इस आशय का प्रचार लोगों को प्रलोभन देकर फंसाने के लिए किया गया। हालांकि फिलहाल यह ज्ञात नहीं हो सका है कि ग्रुप से जुड़े लोग कितने लोगों को फांसने में सफल रहे और आगे कितने लोगों को फांसे जाने का टारगेट है।
हां, यह जरूर पता लगा है कि विज्ञापन में जिन फ्लैट्स की बात की गई है वह भी उनके अपने नहीं हैं।
ग्रुप से ही जुड़े सूत्रों की मानें तो इसके लिए वृंदावन स्‍थित जिस प्रोजेक्‍ट का इस्‍तेमाल किया जा रहा है जो किसी पूर्व पटवारी तथा उसके भाई का है।
jagran-1प्रोजेक्‍ट के मालिकानों से तो इस संबंध में बात नहीं हो पाई किंतु बताया जाता है कि यहां स्‍थित फ्लैट की कीमत 31 लाख से शुरू है जिन्‍हें जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स इस शर्त पर 15 लाख में बुक कर रहा है कि पूरा पेमेंट उनकी शर्तों के मुताबिक तय समय सीमा व सुविधा के अनुसार देना होगा।
गौरतलब है कि 15 लाख में फ्लैट बुक करके जिस तरह की (एसयूवी) गाड़ी डस्‍टर देने का लालच दिया जा रहा है उसकी कम से कम कीमत साढ़े आठ लाख रुपए है। ऐसे में फ्लैट की कीमत क्‍या रह जायेगी, यह अपने आप में सोचने का विषय है।
जाहिर है कि इसके साथ यह सवाल भी स्‍वत: खड़ा हो जाता है कि जिस फ्लैट को उसके असली मालिक 31 लाख में बेच रहे हैं, उसे जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स कैसे 15 लाख में बेच सकता है, वह भी डस्‍टर गाड़ी ईनाम में देकर।
लीजेण्‍ड न्‍यूज़ द्वारा कल इस बारे में खबर प्रकाशित किये जाने के बाद जब कुछ लोगों ने जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स के लिए काम कर रहे लोगों से पूछताछ की तो उन्‍होंने उन्‍हें यह कहकर गुमराह करने का प्रयास किया कि हम नंबर दो के पैसे को नंबर एक में करने के लिए यह खेल, खेल रहे हैं।
यदि उनकी इस बात को सच मान लिया जाए तो स्‍पष्‍ट हो जाता है कि जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स से जुड़े लोगों की नीयत नेक नहीं है और न उनका इरादा ठीक है। इतना नंबर दो का पैसा कहां से आया और उसमें कौन-कौन शामिल है, इसका पता लगना जरूरी है।
आज इस बारे में होटल शीतल रीजेंसी के मालिक अमित जैन ने भी साफ किया कि हमारा जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स या उससे जुड़े किसी व्‍यक्‍ति से कोई वास्‍ता नहीं है। वह प्राकृतिक आपदा के मारे किसान परिवारों को एक लाख एक रुपए की आर्थिक मदद देने के लिए होटल परिसर का इस्‍तेमाल करने जैसा प्रचार किस आधार पर कर रहे हैं, इस बावत में उनसे पूछताछ करूंगा।
अमित जैन ने भी स्‍वीकार किया कि शासन-प्रशासन के संज्ञान में लाये बिना ऐसे किसी आयोजन का किया जाना कानून-व्‍यवस्‍था के लिए मुश्‍किलें खड़ी कर सकता है और उससे हालात बिगड़ने की पूरी आशंका है।
इधर एडीएम फाइनेंस तथा पुलिस के आला अधिकारियों ने भी जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स के बारे में आवश्‍यक जांच पड़ताल कर प्रभावी कार्यवाही किये जाने की बात कही है जिससे भविष्‍य में फिर कोई इस तरह का प्रयास करने की हिमाकत न कर सके।
अब देखना यह है कि इतना सब कुछ पता लगने तथा शासन व प्रशासन स्‍तर पर जानकारी हो जाने के बावजूद जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स कितने लोगों को अपने जाल में फंसा पाता है और कितने लोग उसके जाल में फंसते हैं क्‍योंकि जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स का कारनामा अंतत: पुलिस प्रशासन के लिए ही सिरदर्द साबित होगा। जो लोग आज उसके भ्रामक विज्ञापनों के जाल में फंसकर अपना पैसा लुटा देंगे कल वही पुलिस-प्रशासन पर एफआईआर दर्ज करके पैसा बरामद करने के लिए दबाव बनायेंगे।
-लीजेण्‍ड न्‍यूज़ विशेष

करीब नौ हजार एनजीओ के लाइसेंस रद्द किये सरकार ने

नई दिल्‍ली। भारत सरकार ने लगभग नौ हज़ार ऐसे एनजीओ (ग़ैर सरकारी संगठनों) के लाइसेंस रद्द कर दिये हैं जिन्होंने पिछले तीन वर्षों में अपने वार्षिक वित्तीय रिटर्न दाखिल नहीं किए थे.
गृह मंत्रालय के एक आदेश में कहा गया है कि कुल 10,343 एनजीओ (ग़ैर सरकारी संगठनों) को अक्टूबर, 2014 में अपने सालाना रिटर्न दाख़िल करने के लिए कहा गया था जिसमें विदेश से आई वित्तीय मदद का पूरा विवरण अनिवार्य था लेकिन सिर्फ़ 229 गैर सरकारी संगठनों ने ही गृह मंत्रालय के इस आदेश पर ‘अमल′ किया जबकि 8,975 ने अमल नहीं किया जिनके लाइसेंस सरकार ने रद्द कर दिए हैं.
ये कार्यवाही ग्रीनपीस इंडिया की विदेशी फ़ंडिंग निलंबित किए जाने और फ़ोर्ड फॉउन्डेशन को निगरानी सूची में रखे जाने के बाद की गई है.
इस आदेश के अनुसार जिन गैर सरकारी संगठनों के ख़िलाफ़ कार्यवाही हुई है उन्होंने वर्ष 2009-2010, 2010-2011 और 2011-12 में विदेशी फंडिंग समेत अपने वित्तीय रिटर्न नहीं दाख़िल किए हैं.
भारतीय रिज़र्व बैंक और सम्बंधित एनजीओ के साथ साथ गृह मंत्रालय के इस आदेश को उन सभी ज़िलाधिकारियों को भी भेज दिया गया है जिनके इलाके में इनका पंजीकरण है.
ख़ास बात ये है कि ये सभी लाइसेंस विदेशी चंदा नियमन क़ानून यानी एफसीआरए के कथित उल्लंघन करने के सम्बन्ध में रद्द किए गए हैं.
केंद्र में आसीन भाजपा नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने पिछले कुछ महीनों से एफसीआरए कानून पर कड़ा रुख अख्तियार कर रखा है.
ग्रीनपीस इंडिया की विदेशी फ़ंडिंग निलंबित किए जाने का मामला दोबारा अदालत पहुँच चुका है.

सोमवार, 27 अप्रैल 2015

ठगों का गिरोह तो नहीं रीयल एस्‍टेट ग्रुप “जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स” ?

मथुरा। “जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स”  की ओर से 25 अप्रैल 2015 के दैनिक जागरण और 26 अप्रैल 2015 के हिन्‍दुस्‍तान अखबार में एक ही प्रकार के “जैकेट विज्ञापन” प्रकाशित कराये गये हैं।
मथुरा की सांसद और प्रसिद्ध अभिनेत्री हेमा मालिनी द्वारा इन दोनों तारीखों पर वृंदावन में कराये गये दो दिवसीय “मथुरा महोत्‍सव” का इन विज्ञापनों में हवाला देते हुए और वृंदावन में ही प्रस्‍तावित विश्‍व के सबसे ऊंचे मंदिर चंद्रोदय की ”प्रतिकृति” दर्शाते हुए प्रचारित किया गया है कि ”राधा-रानी ग्रीन सिटी” (राधारानी मानसरोवर मंदिर के सामने) ”छोटी सी इन्‍वेस्‍टमेंट लायेगी खुशियों की सौगात”।
”मथुरा महोत्‍सव” में पधारे हुए सभी गणमान्‍य अतिथियों, कलाकारों एवं नागरिकों का ”जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स” हार्दिक स्‍वागत करता है” जैसे शब्‍दों के साथ विज्ञापन में लाल पट्टी के ऊपर अलग से लिखा गया है- ”रु. 2.40 लाख का प्‍लॉट खरीदो और रु. 2.56 लाख का बोनस वापस पाओ यानी प्‍लॉट फ्री”।
विज्ञापन में न तो कहीं यह लिखा है कि इस प्‍लॉट का आकार क्‍या होगा यानी यह कितना बड़ा होगा और न कहीं यह लिखा है कि प्‍लॉट होगा कहां।
विज्ञापन के कोने में “T&C Apply”  अर्थात ”नियम व शर्तें लागू” जरूर लिखा है, किंतु हर फ्रॉड विज्ञापन की तरह इसमें भी नियम व शर्तों का उल्‍लेख कहीं नहीं किया गया।
इस संदर्भ में जब ”लीजेण्‍ड न्‍यूज” ने विज्ञापन के तहत दिये गये ”जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स” के मोबाइल नंबर 8445087799 पर बात की तो किन्‍हीं ”सैंगर साहब” ने फोन रिसीव किया।
सैंगर साहब द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स की स्‍कीम वाले इन सभी प्‍लॉट्स का साइज 60 वर्ग गज का है। इस हिसाब से जमीन की कीमत 4 हजार रुपए प्रति वर्ग गज हुई।
सैंगर साहब के अनुसार ”जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स” प्‍लॉट के एकमुश्‍त दो लाख चालीस हजार रुपए जमा कराने वाले व्‍यक्‍ति को प्रति माह 1500 रुपए (पंद्रह सौ रुपए) देगा। यह पैसा प्‍लॉट खरीदने वाले के बैंक अकाउंट में दो साल तक जमा कराया जायेगा। इस तरह प्‍लॉट खरीदने वाले को दो सालों में 36 हजार रुपए प्राप्‍त होंगे। इसके साथ ही जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स प्‍लॉट लेने वाले के नाम 25 महीने बाद का (पोस्‍ट डेटेड) 2, 20,000 (दो लाख बीस हजार रुपए) की रकम वाला चेक देगा।
सैंगर साहब से यह पूछे जाने पर कि 25 महीने बाद इस चेक के बैंक से पास होने की क्‍या गारंटी होगी, सैंगर साहब ने साफ कहा कि गारंटी किसी बात की नहीं है। हम तो सिर्फ मार्केटिंग के बंदे हैं। इस बारे में बात करनी है तो ”सतीश मिश्रा जी” से बात कर लीजिए, उनका नंबर विज्ञापन में “EXOTIC PROMOTERS & DEVELOPERS” के साथ लिखा है।
प्‍लॉट बेचने वाले इसी विज्ञापन के दूसरे यानी नीचे वाले हिस्‍से जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स का ही एक और विज्ञापन है। इस विज्ञापन में ”मल्‍टी स्‍टोरी फ्लैट्स तथा डस्‍टर के रिबन बंधे डैमो” सहित लिखा है- 12 फ्लैट्स, 12 डस्‍टर”। ये फ्लैट्स भी डेवलेवमेंट अथॉर्टी से अप्रूव्‍ड हैं या नहीं, कहां बन रहे हैं और कितने मंजिल के बन रहे हैं, इसकी कोई जानकारी भी विज्ञापन में नहीं दी गई।
विज्ञापन के अनुसार स्‍कीम में जिन पांच भाग्‍यशाली ग्राहकों ने फ्लैट बुक किया था, उन्‍हें 26 अप्रैल को SUV डस्‍टर गाड़ियां वितरित की जानीं थीं।
भाग्‍यशाली विजेताओं के नाम लिखे हैं- मंजू चौहान, कपिल शर्मा, पंकज गौतम, मनोज कुमार तथा विजय कुमार। ये कौन हैं और कहां के हैं, इस बारे में विज्ञापन के अंदर कोई जानकारी नहीं दी गई है अलबत्‍ता ”डस्‍टर” वितरण की तारीख 26 मई 2015 की शाम साढ़े सात बजे और स्‍थान होटल शीतल रीजेंसी, मसानी रोड लिखा है।
होटल शीतल रीजेंसी पर कल देर शाम तक डस्‍टर वितरण जैसे किसी कार्यक्रम की जानकारी नहीं मिल पाई और न यह पता लगा कि भाग्‍यशाली विजेताओं को डस्‍टर वितरण किसके कर कमलों से होगा। इस बावत कोई जानकारी विज्ञापन में भी नहीं दी गई थी।
विज्ञापन में एक सूचना यह भी दी गई है कि मथुरा खंड के ”हर आत्‍म हादसाग्रस्‍त किसान परिवार को 100001 (एक लाख एक हजार) रुपए की मदद जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स की ओर से 15 मई 2015 को होटल शीतल रीजेंसी में ही शाम साढ़े सात बजे प्रदान की जायेगी।
इस मामले में भी ”जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स” की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। सवाल इसलिए खड़े होते हैं कि आपदाग्रस्‍त और आत्‍महत्‍या करने वाले किसान परिवारों की यदि इन्‍फ्रा होम्‍स को वाकई मदद करनी है तो वह जिला प्रशासन अथवा उत्‍तर प्रदेश शासन के माध्‍यम से कर सकता था। उसके लिए स्‍वयं होटल पर बुलाकर रुपया बांटने की क्‍या आवश्‍यकता है।
दूसरा सवाल यह भी पैदा होता है कि ”जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स” कितने किसान परिवारों की मदद करने जा रहा है और क्‍या उसने शासन-प्रशासन से ऐसे किसान परिवारों की जानकारी कर ली है। क्‍या जिला प्रशासन से इस तरह पैसा बांटे जाने की इजाजत ली जा चुकी है।
क्‍योंकि विज्ञापन के जरिए ”जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स” ने जिस तरह का प्रचार किया है, उसे पढ़कर हजारों किसान पैसा लेने पहुंच सकते हैं और ऐसे में कानून-व्‍यवस्‍था बनाये रखने की समस्‍या खड़ी हो सकती है।
इस संबंध में लीजेण्‍ड न्‍यूज़ ने एडीएम प्रशासन से जानकारी की तो उनका कहना था कि किसानों को मुआवजे बांटने का जिम्‍मा एडीएम फाइनेंस देख रहे हैं इसलिए मैं इस बारे में कोई जानकारी नहीं दे सकता।
एडीएम फाइनेंस और डीएम से बात करने का काफी प्रयास किया गया किंतु उनका नंबर लगातार व्‍यस्‍त आता रहा।
जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स के बारे में जानकारी के निए गूगल का सहारा लिया तो पता लगा कि जे. एस इन्‍फ्रा नामक उत्‍तर प्रदेश के पीलीभीत जिले का एक वेलनोन रीयल एस्‍टेट ग्रुप है. इस ग्रुप के एक मालिक गंगवार का कहना है कि जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स से हमारा कोई वास्‍ता नहीं है और न मथुरा-वृंदावन में हमारा कोई कारोबार है।
गूगल पर jsinfrahomes.com को खोलने पर एक Enquiry Form खुलता है जिसके नीचे दिल्‍ली का एक डॉट नंबर तथा एक मोबाइल नंबर लिखा है। इसके अलावा कोई जानकारी नहीं दी गई है।
इन नंबरों पर बात करने से ज्ञात हुआ कि उनका भी मथुरा-वृंदावन में न तो कोई प्रोजेक्‍ट है और न इस नाम से उन्‍होंने वहां के या कहीं के भी किसी व्‍यक्‍ति को काम करने के लिए अधिकृत किया हुआ है। इस जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स से बात करने वाले संदीप नामक व्‍यक्‍ति ने कहा कि हम पूरे मामले की जानकारी करके पुलिस को सूचित करते हैं ताकि कोई हमारी फर्म या हमारे नाम का दुरुपयोग न कर सके।
”जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स” के दैनिक जागरण तथा हिन्‍दुस्‍तान अखबारों में छपे विज्ञापन के अंदर एक्‍सुक्‍लूसिव मार्केटेड बाय- एग्‍जोटिक प्रमोटर्स एंड डेवलेपर्स कृष्‍णा 2/B- 103-104 Omaxe Eternity, Chatikra Vrindavan Road, Vrindavan (UP)।
इस प्रमोटर्स के बारे में भी केवल ”क्‍वेरी फार्म” और एक मोबाइल नंबर लिखा है। साथ ही यह भी लिखा है-
Useful information
1- Avoid scams by acting locally or paying with PayPal
2- Never pay with Western Union, Moneygram or other anonymous payment services
3- Don’t buy or sell outside of your country. Don’t accept cashier cheques from outside your country
4-This site is never involved in any transaction, and does not handle payments, shipping, guarantee transactions, provide escrow services, or offer “buyer protection” or “seller certification”
यह कुछ इसी तरह है जिस तरह अखबार मालिक अपने यहां छपने वाले विज्ञापनों से पल्‍ला झाड़ने के लिए अखबार के किसी कोने में एक छोटी सी जरूरी सूचना छाप देते हैं कि विज्ञापन के सत्‍य-असत्‍य होने की हम कोई गारंटी नहीं देते। किसी भी प्रकार के लेन-देन से पहले स्‍वयं अपने स्‍तर से पूरी जानकारी कर लें।
आश्‍चर्य की बात यह है कि छोटी-छोटी बातों पर नजर रखने का दावा करने वाला जिला प्रशासन इतने गंभीर मामले में विज्ञापन छपने के बावजूद तमाशबीन बना हुआ है। मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण चुप्‍पी साधे बैठा है जबकि करोड़ों रुपए ठगने का प्‍लॉट विज्ञापनों में प्रलोभन के माध्‍यम से न केवल खड़ा कर लिया गया है बल्‍कि अनेक लोगों को ठगा भी जा चुका है। ऐसी सूचनाएं सामने आ रही हैं।
हो सकता है कि जब तक पुलिस, प्रशासन तथा मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण इस मामले पर ध्‍यान दें तब तक ”जे. एस. इन्‍फ्रा होम्‍स” करोड़ों रुपए की ठगाई करके निकल जाए और लालच में आकर इन्‍हें पैसा देने वालों के पास रिपोर्ट दर्ज कराने के अतिरिक्‍त कुछ हाथ में न रह जाए।
तब पैसा जमा करने वाले तो अपने साथ हुई ठगी का रोना रोयेंगे और पुलिस-प्रशासन सांप के निकल जाने पर लकीर पीटने की कहावत को चरितार्थ करता रहेगा।
-लीजेण्‍ड न्‍यूज़ विशेष
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