नयी दिल्ली। सरबजीत पर कैदियों ने हमला किया या
यह आईएसआई ने करवाया? पाकिस्तान की जेल में सरबजीत पर हुए हमले में साजिश
की बू आ रही है। सरबजीत सिंह की जान को जेल में खतरे के बारे में
इंटेलिजेंस ब्यूरो और रॉ की रिपोर्ट के बाद भारत सरकार ने पाक सरकार को
आगाह किया था, लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान ने कोई कदम नहीं उठाए।
पाकिस्तान की कोट लखपत जेल से छूटे सुरजीत सिंह ने भी सरबजीत पर हमले की
पीछे साजिश की आशंका जाहिर की है। उन्होंने कहा कि जेल में कैदियों के बीच
भाईचारा रहता है, इसलिए कोई कैदी हमला नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि
सरबजीत को खत्म करने के लिए यह साजिश रची गई होगी। कोट लखपत जेल में मारे
गए चमेल सिंह के बेटे दीपक सिंह ने भी सरबजीत पर हमले की पीछे साजिश की
आशंका जाहिर की है। (एजेंसी)
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शनिवार, 27 अप्रैल 2013
कोल स्केम में CBI की कई जगह छापेमारी
नई दिल्ली । कोल ब्लॉक आवंटन मामले में सीबीआई ने
शनिवार को दिल्ली-गाजियाबाद फरीदाबाद रायपुर समेत कई जगहों पर छापेमारी
की.
इस मामले में सीबीआई ने अभी तक 11 एफआईआर दर्ज की है. सीबीआई ने पुष्प स्टील लिमिटेड के मालिक अतुल और संजय जैन के घरों पर और आफिस में छापा मारा है.
इससे एक दिन पहले शुक्रवार को सीबीआई ने संकेत दिया था कि वह जल्द ही कोयला खदानों के आवंटन में कथित अनियमितता के संबंध में नया मामला दर्ज करेगी. नया मामला घोटाले की जांच की विभिन्न हलकों से हो रही आलोचना के बीच दायर किया जाएगा.
इस मामले में सीबीआई ने अभी तक 11 एफआईआर दर्ज की है. सीबीआई ने पुष्प स्टील लिमिटेड के मालिक अतुल और संजय जैन के घरों पर और आफिस में छापा मारा है.
इससे एक दिन पहले शुक्रवार को सीबीआई ने संकेत दिया था कि वह जल्द ही कोयला खदानों के आवंटन में कथित अनियमितता के संबंध में नया मामला दर्ज करेगी. नया मामला घोटाले की जांच की विभिन्न हलकों से हो रही आलोचना के बीच दायर किया जाएगा.
विकृत मानसिकता वाले थे महात्मा गांधी
नई दिल्ली । एक अमेरिकी वेबसाइट ने महात्मा
गांधी, बेंजामिन फ्रैंकलिन, विंस्टन चर्चिल और चार्ली चैपलिन समेत छह महान
लोगों को विकृत मानसिकता वाला व्यक्ति बताया है।
वेबसाइट ने अपने एक लेख 'विकृत मानसिकता वाले छह प्रसिद्ध प्रतिभाशाली व्यक्ति' (6 Famous Geniuses You Won't Believe Were Perverts) में इन सभी महान लोगों के सकारात्मक पक्ष को बताने के साथ-साथ उनके व्यक्तिगत जीवन के कुछ स्याह पहलुओं को भी पेश किया है।
लेख के अनुसार, भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्त कराने में गांधी की अहम् भूमिका रही है और वह निर्विवादित रूप से एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक नेता हैं। यह भी सत्य है कि 37 साल की उम्र तक उन्होंने ब्रह्मचर्य का पालन किया। हालांकि बाद में वह युवतियों के साथ सोने लगे और यह सिलसिला 70 साल की उम्र तक जारी रहा।
वेबसाइट ने अपने एक लेख 'विकृत मानसिकता वाले छह प्रसिद्ध प्रतिभाशाली व्यक्ति' (6 Famous Geniuses You Won't Believe Were Perverts) में इन सभी महान लोगों के सकारात्मक पक्ष को बताने के साथ-साथ उनके व्यक्तिगत जीवन के कुछ स्याह पहलुओं को भी पेश किया है।
लेख के अनुसार, भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्त कराने में गांधी की अहम् भूमिका रही है और वह निर्विवादित रूप से एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक नेता हैं। यह भी सत्य है कि 37 साल की उम्र तक उन्होंने ब्रह्मचर्य का पालन किया। हालांकि बाद में वह युवतियों के साथ सोने लगे और यह सिलसिला 70 साल की उम्र तक जारी रहा।
मंगलवार, 23 अप्रैल 2013
आखिर कब तक धैर्य रखेंगे हम?
(लीजेण्ड न्यूज़ विशेष)
क्या भारत अराजकता और गृहयुद्ध की ओर बढ़ रहा है?
क्या देश की कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त होने के कगार तक जा पहुंची है?
हो सकता है कि पहली नजर में आपको यह प्रश्न बेमानी लगें... लेकिन गौर करें कि क्या इनमें थोड़ी सी भी सच्चाई है।
गौर करने को इसलिए कह रहा हूं क्योंकि आज हमारे पास देश की किसी भी समस्या पर गौर करने के लिए वक्त ही कहां है।
हम सब 'उसकी कमीज, मेरी कमीज से ज्यादा सफेद क्यों' के फेर में उलझे हुए हैं... या एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत उलझा दिए गये हैं।
यकीन न हो तो थोड़ा सा वक्त निकाल कर अपने चारों ओर नजरें घुमाकर देखिए। बहुत कम समय में पता लग जायेगा कि तरक्की की आड़ में हमें 'स्टेटस' की एक ऐसी दौड़ का हिस्सा बना दिया गया है जो कब और कहां जाकर खत्म होगी, कोई बताने वाला नहीं।
मास्टर से लेकर डॉक्टर तक और नेता से लेकर अभिनेता तक, वही सफल कहलाता है जिसने अच्छा पैसा कमाया हो। हर योग्यता का मापदण्ड सिर्फ और सिर्फ पैसा है।
क्या भारत अराजकता और गृहयुद्ध की ओर बढ़ रहा है?
क्या देश की कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त होने के कगार तक जा पहुंची है?
हो सकता है कि पहली नजर में आपको यह प्रश्न बेमानी लगें... लेकिन गौर करें कि क्या इनमें थोड़ी सी भी सच्चाई है।
गौर करने को इसलिए कह रहा हूं क्योंकि आज हमारे पास देश की किसी भी समस्या पर गौर करने के लिए वक्त ही कहां है।
हम सब 'उसकी कमीज, मेरी कमीज से ज्यादा सफेद क्यों' के फेर में उलझे हुए हैं... या एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत उलझा दिए गये हैं।
यकीन न हो तो थोड़ा सा वक्त निकाल कर अपने चारों ओर नजरें घुमाकर देखिए। बहुत कम समय में पता लग जायेगा कि तरक्की की आड़ में हमें 'स्टेटस' की एक ऐसी दौड़ का हिस्सा बना दिया गया है जो कब और कहां जाकर खत्म होगी, कोई बताने वाला नहीं।
मास्टर से लेकर डॉक्टर तक और नेता से लेकर अभिनेता तक, वही सफल कहलाता है जिसने अच्छा पैसा कमाया हो। हर योग्यता का मापदण्ड सिर्फ और सिर्फ पैसा है।
बलात्कार के एक लाख अभियुक्त 'बाइज़्ज़त बरी'
नई दिल्ली। पिछले साल दिसंबर में एक छात्रा के
साथ चलती बस में हुई सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद से भारत में महिलाओं
के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर लंबी बहस जारी है.
बलात्कार विरोधी एक नए कानून से लेकर बलात्कारियों को मौत की सज़ा दी जाए या नहीं, इस पर अभी भी पूर्ण रूप से सहमति नहीं बन सकी है.
लेकिन इस सब के बीच हैं आंकड़ों का सच, जो बताते हैं कि भारत में महिलाओं के खिलाफ़ होने वाले अपराधों के अलावा अभियुक्तों के विरुद्ध पुख्ता सबूत न होने की वजह से भी उनकी रिहाई हो जाती है.
अपराधों का लेखा-जोखा रखने वाली संस्था नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार 2001 से लेकर 2010 तक दर्ज किए गए बलात्कार के मामलों में मात्र 36,000 अभियुक्तों के खिलाफ ही अपराध साबित हो सके.
बलात्कार विरोधी एक नए कानून से लेकर बलात्कारियों को मौत की सज़ा दी जाए या नहीं, इस पर अभी भी पूर्ण रूप से सहमति नहीं बन सकी है.
लेकिन इस सब के बीच हैं आंकड़ों का सच, जो बताते हैं कि भारत में महिलाओं के खिलाफ़ होने वाले अपराधों के अलावा अभियुक्तों के विरुद्ध पुख्ता सबूत न होने की वजह से भी उनकी रिहाई हो जाती है.
अपराधों का लेखा-जोखा रखने वाली संस्था नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार 2001 से लेकर 2010 तक दर्ज किए गए बलात्कार के मामलों में मात्र 36,000 अभियुक्तों के खिलाफ ही अपराध साबित हो सके.
अवैध है कोयला ब्लॉकों के आवंटन की प्रक्रिया:बनर्जी
संसद की कोयला एवं इस्पात संबंधी स्थाई समिति की रिपोर्ट को आज दोनों सदनों में पेश किए जाने के बाद समिति के अध्यक्ष कल्याण बनर्जी ने कहा कि वर्ष 1993 से 2010 के बीच कोयला ब्लॉकों का आवंटन अपारदर्शी तरीके से किया गया। किसी पारदर्शी प्रक्रिया को अपनाए बगैर कुछ लोगों को निजी लाभ के लिए कोयला ब्लॉकों का आवंटन कर दिया गया और प्राकृतिक संसाधन के आवंटन से सरकार को कोई राजस्व भी नहीं मिला।
बनर्जी ने सरकार पर शक्ति का पूरी तरह से दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकोर मनमाने ढंग से इस तरह का निर्णय नहीं ले सकती है। समिति का मानना है कि कोयला ब्लॉकों के आवंटन के लिए पूरी निर्णय प्रक्रिया की जांच की जानी चाहिए और उन सभी लोगों को दोषी ठहराया जाना चाहिए जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इस प्रक्रिया से जुड़े थे।
कैग ने फिर खोली मनरेगा में बड़ी लूट
नई दिल्ली। नैशनल ऑडिटर कैग ने अपनी रिपोर्ट में
यूपीए सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा में फर्जीवाड़े की पोल खोली है।
संसद में मंगलवार को पेश रिपोर्ट के मुताबिक, करीब सभी राज्यों में
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के
क्रियान्वयन में भारी अनियमितताएं बरती गईं हैं। मनरेगा के फंड का इस्तेमाल
उन कामों के लिए किया गया, जो इसके दायरे में नहीं आते हैं। कैग के
मुताबिक, मनरेगा के 13,000 करोड़ रुपये की बंदरबांट हुई और इसका लाभ भी सही
लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
कैग ने 14 राज्यों में ऑडिट के दौरान पाया कि सवा चार लाख जॉब कार्ड्स में फोटो नहीं थे, यानी वे फर्जी थे। 1.26 लाख करोड़ रुपये के 129 लाख प्रॉजेक्ट्स को मंजूरी दी गई, लेकिन इनमें से सिर्फ 30 फीसदी में ही काम हुआ। ऑडिटर ने यह भी पाया कि 2,252 करोड़ रुपये ऐसे प्रॉजेक्ट्स के लिए आवंटित कर दिए गए, जो नियम के मुताबिक मनरेगा के तहत नहीं आते हैं।
कैग ने 14 राज्यों में ऑडिट के दौरान पाया कि सवा चार लाख जॉब कार्ड्स में फोटो नहीं थे, यानी वे फर्जी थे। 1.26 लाख करोड़ रुपये के 129 लाख प्रॉजेक्ट्स को मंजूरी दी गई, लेकिन इनमें से सिर्फ 30 फीसदी में ही काम हुआ। ऑडिटर ने यह भी पाया कि 2,252 करोड़ रुपये ऐसे प्रॉजेक्ट्स के लिए आवंटित कर दिए गए, जो नियम के मुताबिक मनरेगा के तहत नहीं आते हैं।
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