गुरुवार, 21 नवंबर 2013

यौन हमले में गोवा के CM ने तरुण तेजपाल पर कसा शिकंजा

नई दिल्‍ली। 
अपनी खोजी पत्रकारिता से देश में धूम मचाने वाले तरुण तेजपाल खुद मुश्किलो में घिर गए हैं। "तहलका" मैग्जीन के मुख्य संपादक तरुण तेजपाल पर अपनी बेटी की दोस्त के ऊपर यौन हमले का आरोप लगा है। गोवा के सीएम मनोहर पार्रिकर ने कहा है कि इस मामले में जांच शुरू हो गई है।
उन्होंने कहा कि अगर घटना गोवा की है तो इसकी एफआईआर भी गोवा में ही दर्ज होनी चाहिए। इसके अलावा गोवा पुलिस ने उस फाइव स्टार होटल से सीसीटीवी फुटेज मांगे हैं, जहां यह घटना घटी।
गौरतलब है कि गोवा में हुए तहलका मैगजीन के एक इवेंट के दौरान यह घटना घटी है।
इस आरोप के बाद उन्होंने छह महीने के लिए मैग्जीन से इस्तीफा प्रबंध संपादक को भेज दिया है। तेजपाल पर यौन हमले का आरोप लगाने वाली महिला मैग्जीन के लिए काम करती है और उनकी बेटी की दोस्त भी है। वहीं, पीड़िता के करीबी दोस्त ने तहलका के उसे दावे को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि वह मैग्जीन की ओर से उठाए कदम से संतुष्ट है। पीड़िता की महिला मित्र ने आरोप लगाया की उस पर यौन हमला किया गया था और वह पूरी तरह टूट चुकी है व भावनात्मक रूप से डरी हुई है।
मित्र ने बताया कि यह घटना कुछ दिनों तक लगातार चलती रही और पीड़िता उनसे हर बार यही कहती थी कि वह लगभग उनकी बेटी की उम्र की है। पीड़िता की "नहीं" को नजरअंदाज किया गया।

रविवार, 17 नवंबर 2013

भारत रत्‍न 'सचिन'..... या भारत रत्‍न 'कांग्रेस'

क्रिकेट के 'भगवान' की कसम, मुझे जितनी खुशी सचिन तेंदुलकर को 'भारत रत्‍न' देने से नहीं हुई उससे कहीं अधिक खुशी इस बात से हुई कि किसी खिलाड़ी को 'पहला' भारत रत्‍न कांग्रेस के नेतृत्‍व वाली सरकार ने दिया। कुछ और देर कर दी होती तो पता नहीं यह श्रेय मिल पाता या नहीं। लोकसभा चुनाव नजदीक हैं।
अब कोई किसी खिलाड़ी को भारत रत्‍न देता रहे लेकिन कांग्रेस के नाम बने इस रिकॉर्ड को नहीं तोड़ पायेगा।
इससे पहले कांग्रेस ने सचिन तेंदुलकर के रूप में किसी खिलाड़ी को राज्‍यसभा का सदस्‍य बनवाने की पहल की थी। यह भी एक रिकॉर्ड है।
पहल करने और रिकॉर्ड बनाने में कांग्रेस का यूं भी कोई जवाब नहीं। इस मामले में कांग्रेस के सामने सचिन कहीं नहीं टिकते।
देश को पहली बार कांग्रेस ने स्‍वतंत्रता दिलवाई। दूसरी बार कौन दिलवायेगा, नहीं मालूम।
कांग्रेस ने देश को पहला प्रधानमंत्री, पहला राष्‍ट्रपति और यहां तक कि पहली सरकार दी।
कांग्रेस ने पहली बार किसी सरदार को प्रधानमंत्री बनवाया। कांग्रेस ने ही पहली बार किसी सरदार को राष्‍ट्रपति बनवाया और पहली बार किसी सरदार को योजना आयोग का उपाध्‍यक्ष बनाया।
कांग्रेस ने पहली बार देश को महिला प्रधानंत्री देने का गौरव उपलब्‍ध कराया और पहली बार 'आपातकाल' से परिचित कराया।
पहल करने के मामले में कांग्रेस के नाम अनगिनित रिकॉर्ड हैं।
पहली बार उसने किसी ऐसे व्‍यक्‍ति को प्रधानमंत्री के पद पर काबिज किया जो कभी कहीं से अब तक लोकसभा का कोई चुनाव नहीं लड़ा।
पहली बार कांग्रेस के किसी युवराज ने देश के प्रधानमंत्री को सार्वजनिक रूप से 'नॉनसेंस' कहकर गौरवान्‍वित किया और पहली बार ही कांग्रेस ने रिमोट के जरिए केंद्र की सरकार संचालित करने का प्रयोग किया जो सफल रहा।
कांग्रेसी शासनकाल के अभी करीब साढ़े  5 महीने बाकी हैं, इसलिए काफी संभावना है कि वह पहल करने के और कई रिकॉर्ड बना डाले। मसलन वह भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और भाजपा नेता अटलबिहारी वाजपेयी को इसलिए भारत रत्‍न दे सकती है क्‍योंकि भाजपा ने ऐलान कर दिया है कि कांग्रेस द्वारा उन्‍हें भारत रत्‍न न दिए जाने की सूरत में वह केंद्र में अपनी अगली सरकार बनने पर उन्‍हें भारत रत्‍न दे डालेगी।
यहां सवाल किसी प्रधानमंत्री को भारत रत्‍न देने का नहीं, पहल करने के उस रिकॉर्ड का है जिसे कांग्रेस किसी दूसरे के नाम नहीं होने देना चाहती।
वह नहीं चाहती कि विपक्षी पार्टी के किसी नेता (चाहे वह प्रधानमंत्री ही क्‍यों न रहा हो) को भारत रत्‍न देने की पहल करने का श्रेय कोई दूसरा लूट ले जाए।
कांग्रेस यह भी नहीं चाहती कि पहल करने के उसके रिकॉर्ड को कोई दूसरा बीट करे लिहाजा उसने अपराधियों को राजनीति में संरक्षण देने वाला कानून लाने की पहल की। अब चाहे कोई ऐसा कानून ही क्‍यों न बना ले पर कानून बनाने की पहल करने का रिकॉर्ड कांग्रेस के नाम ही रहेगा।
कांग्रेस के नाम पहल करने की फेहरिस्‍त में एक और रिकॉर्ड इस आशय का है कि एक ईमानदार कहलाने वाले प्रधानमंत्री सर्वाधिक भ्रष्‍ट सरकार को सफलतापूर्वक दस सालों तक चलाते रहे तथा कोयले की खान में घुसकर भी बेदाग निकल पाये।
अगर कोई यह कहे कि उन्‍होंने यह कारनामा सीबीआई के बल पर किया है तो इसके लिए भी वह तारीफ के हकदार हैं क्‍योंकि सीबीआई को सरकारी तोते का सर्वोच्‍च न्‍यायालय से खिताब दिलवाने की पहल उन्‍होंने ही की है। इससे पहले लोग चाहे जो समझते रहे हों, पर सरकारी ठप्‍पा कोई नहीं लगवा पाया।
बहरहाल, अगर हम कांग्रेस की पहल से बने सभी रिकॉर्ड्स की बात करें तो 25 सचिन तेंदुलकर मिलकर भी उन्‍हें नहीं तोड़ पायेंगे इसलिए मुझे सचिन तेंदुलकर को मिले भारत रत्‍न से कई गुना अधिक प्रसन्‍नता इस बात की हुई कि तमाम रिकॉर्ड्स की उपलब्‍धियों के बीच कांग्रेस ने किसी खिलाड़ी को भारत रत्‍न देने की पहल कर रिकॉर्ड बखूबी अपने नाम कर लिया और इस तरह एक कांग्रेसी राज्‍यसभा सदस्‍य को मिले भारत रत्‍न से भी खुद को विभूषित करने में सफल रही। जय हिंद!  जय भारत!
-यायावर

सचिन का सम्मान या ध्यानचंद का अपमान

इंदौर। 
अगर ध्यानचंद को भारत रत्न देना ही नहीं था तो फिर इसका भरोसा क्यों दिया गया। क्यों पिछले छह महीनों से प्रधानमंत्री कार्यालय इस बात का भरोसा दिला रहा था कि जल्द ही दद्दा ध्यानचंद को भारत रत्न से सम्मानित कर दिया जाएगा। अचानक से सचिन तेंदुलकर का नाम आया और उन्हें सम्मानित करने की घोषणा भी कर दी गई। आखिर लोकतंत्र में व्यवस्थाओं के भी कुछ मायने होने चाहिए या नहीं। जब दद्दा को सम्मान दिए जाने की फाइल पहले से चल रही है तो फिर उनसे पहले किसी और को सम्मान देने के मायने क्या हैं, यह अपमान नहीं तो क्या है?
यह दर्द और गुस्सा है दद्दा ध्यानचंद के बेटे अशोक ध्यानचंद का। पेशेवर हॉकी खिलाड़ी रहे अशोक कहते हैं कि सचिन को सम्मान देना था तो सरकार दे, उससे कोई आपत्ति नहीं है लेकिन उससे पहले से दद्दा का नाम चल रहा था और पीएमओ ने इसके लिए भरोसा भी दिलाया था तो फिर उन्हें क्यों नहीं दिया गया।
उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति उठाई कि जब दद्दा का नाम पहले से था तो उनका हक पहले था न कि सचिन का। अगर दद्दा ध्यानचंद को भारत रत्न नहीं देना था तो फिर सरकार ने इतनी नौटंकी की क्यों। पीएमओ साफ हमें नो बोल देता तो कम से कम हमें तसल्ली हो जाती। हम मान लेते कि दद्दा के खेल और देश के सम्मान को बढ़ाने में कोई कमी बाकी रह गई होगी।
उन्होंने कहा कि हम सरकारी प्रक्रिया के सहारे छह महीनों से बैठे हुए हैं। आज मान लिया कि सम्मान सरकारी और ओहदेदारों से ताल्लुकातों से ही मिलते हैं। हमने ओहदेदारों से ताल्लुकात नहीं बनाए, दद्दा ने भी नहीं बनाए, इसीलिए आज किनारे किए गए हैं।
उन्होंने तंज कसा कि दद्दा कभी फाइव स्टार के प्रतिनिधि नहीं रहे। वह गरीब खिलाड़ियों के प्रतिनिधि के तौर पर जिंदगी भर रहे और जिंदगी के बाद भी गरीब खिलाड़ियों के लिए एक मिशाल हैं। ऎसे में मीडिया का एक तबका फाइव स्टार के प्रतिनिधियों को ही जगह देता है। ऎसे में दद्दा हिंदुस्तान की आवाज बनकर ही पीछे ही रह गए।
-एजेंसी

शुक्रवार, 15 नवंबर 2013

सेना के महत्वपूर्ण दस्तावेजों सहित 5 दिन से मेजर लापता

लखनऊ 
सेना के महत्वपूर्ण दस्तावेज लेकर बरेली से लखनऊ जा रहे एक मेजर काठगोदाम एक्सप्रेस से लापता हो गए। काफी तलाशने पर उसका कोई सुराग नहीं लगा है। घटना के बाद से खलबली मची है। मेजर को तलाशने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। खुफिया एजेंसियां भी हाई अलर्ट पर हैं। संबंधित स्टेशन की जीआरपी और आरपीएफ से भी मदद मांगी गई है।
 मामला सेना से जुड़ा होने के कारण उसे बेहद गोपनीय रखा गया है। 17 राजस्थान रायफल में तैनात मेजर आनंद टंडन 10 नवंबर को काठगोदाम से काठगोदाम-हावड़ा एक्सप्रेस से लखनऊ रवाना हुए थे। उनके पास सेना से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज भी थे। उन्हें 11 नवंबर को लखनऊ पहुंचना था, लेकिन वह निर्धारित समय पर नहीं पहुंचे। मेजर के लखनऊ न पहुंचने पर सेना के आला अफसरों ने उनके मोबाइल फोन पर संपर्क साधा। उनका मोबाइल भी बंद है। सेना पूरी शिद्दत से मेजर को तलाशने में जुटी है।
बरेली जंक्शन पर भी आरपीएफ व जीआरपी को संदेश भेजा गया है। आरपीएफ थाना प्रभारी एसएस गब्र्याल के अनुसार, काठगोदाम-हावड़ा एक्सप्रेस से आनंद टंडन नाम मेजर के लापता होने का मैसेज मिला है। वहीं जंक्शन के अंतर्गत आने वाले सभी आरपीएफ थानों को सूचित कर दिया गया है। फिलहाल मेजर का फोटो और निवास का पता सार्वजनिक नहीं किया गया है।
-एजेंसी

भारत में साइबर अटैक का बड़ा खतरा

नई दिल्ली। 
देश के कई बैंक और कंपनियों को साइबर अटैक के एक बड़े खतरे का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि इन जगहों पर अभी भी विंडोज एक्स पी ऑपरेटिंग सिस्टम में काम हो रहा है। जबकि माइक्रोसॉफ्ट जल्द ही इस ऑपरेटिंग सिस्टम को किसी तरह का सपोर्ट नहीं देगा। माइक्रोसॉफ्ट का मानना है कि अप्रैल 2014 के बाद विंडोज एक्स पी इस्तेमाल करने से खतरा 6 गुना बढ़ जाएगा। माइक्रोसॉफ्ट के मुताबिक एक भी वायरस अटैक के चलते बैंक को 1 दिन में 1100 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। फिलहाल भारत में 34,000 बैंक ब्रांच विंडोज एक्स पी पर काम कर रहे हैं। देश का सबसे बड़े बैंक एसबीआई भी अब इस खतरे से निपटने की तैयारी कर रहा है।
भारत साइबर क्राइम से प्रभावित होने वाले 5 बड़े देशों में शामिल है। एक अनुमान के मुताबिक पिछले साल 4 करोड़ से ज्यादा लोग किसी न किसी तरह साइबर क्राइम से प्रभावित हुए हैं। आने वाले समय में ये खतरा और बढ़ सकता है।
जानकारों के मुताबिक कंपनियों को साइबर रिस्क से बचने के लिए न सिर्फ साइबर सिक्योरिटी पर खर्च बढ़ाना चाहिए बल्कि कंपनी पर आने वाली किसी दिक्कत के लिए इंश्योरेंस भी लेना चाहिए। एचडीएफसी एर्गो और टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनियां साइबर रिस्क के लिए इंश्योरेंस करती हैं।
-एजेंसी

बुधवार, 13 नवंबर 2013

ऐसा व्‍यक्‍ति CBI जैसी संस्‍था का चीफ कैसे हो सकता है

सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा के क्रिकेट में सट्टेबाज़ी को क़ानूनी बनाने के मामले में बलात्कार का हवाला देने से विवाद खड़ा हो गया है. विभिन्न नारीवादी संगठनों और बुद्धजीवियों ने उनकी इस टिप्पणी की निंदा की है. द्रविड़ मंगलवार को दिल्ली में सीबीआई और राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा द्वारा आयोजित 'इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन इवॉल्विंग कॉंमन स्ट्रैटजीज़ टु कॉम्बैट करप्शन एंड क्राइम' में बोल रहे थे.
इसी मौक़े पर सिन्हा ने कहा, "क्रिकेट में सट्टेबाज़ी को क़ानूनी बनाने से कोई नुक़सान नहीं होगा क्योंकि ऐसा प्रतिबंध लगाने से कोई फ़ायदा नहीं जिसे लागू न किया जा सके."
सट्टेबाज़ी
सिन्हा ने कहा, "अगर आप सट्टेबाज़ी पर प्रतिबंध लागू नहीं कर सकते… तो कुछ वैसा ही कहना हो गया कि अगर आप बलात्कार को रोक नहीं सकते तो उसका मज़ा लीजिए."
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सीबीआई के प्रवक्ता ने रंजीत सिन्हा के बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा, "सिन्हा का बयान सट्टेबाज़ी के संदर्भ में दिया गया था, वो क्रिकेट में सट्टेबाज़ी को क़ानूनी बनाने के मसले पर बोल रहे थे."
सिन्हा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए आल इंडिया प्रोग्रेसिव वुमन्स एसोसिएशन (एआईपीडब्ल्यूए) की सचिव कविता कृष्णन ने कहा, "संदर्भ साफ़ नहीं है यह सवाल ही नहीं उठना चाहिए. सीबीआई चीफ़ सट्टेबाज़ी को रोक नहीं सकते तो उसे क़ानूनी बना देने की बात कर रहे थे. सीबीआई चीफ़ को बलात्कार और मज़ा के बीच फ़र्क़ नहीं पता है, वो सीबीआई जैसी महत्वपूर्ण संस्था का प्रमुख कैसे हो सकता है. सीबीआई निदेशक को अपने इस बयान के लिए तत्काल पद से हटाया जाना चाहिए."
राष्ट्रीय महिला आयोग की निदेशक ममता शर्मा के कार्यालय के अनुसार सीबीआई निदेशक का बयान का संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग उन्हें नोटिस भेजेगा.
-एजेंसी

मंगलवार, 12 नवंबर 2013

कश्मीर मसले का हल बंदूक से ही संभव

श्रीनगर 
सुरक्षा एवं विदेश मामलों पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के सलाहकार सरताज अजीज से मुलाकात के एक दिन बाद जम्मू एवं कश्मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली गिलानी ने आज कश्मीर मसले को लेकर एक बार फिर जहर उगला। जम्मू एवं कश्मीर पर अपने रुख को दोहराते हुए गिलानी ने कहा, ‘जम्मू एवं कश्मीर का स्थायी समाधान बंदूक से हो सकता है।’
रिपोर्टों के मुताबिक गिलानी ने एक स्थानीय समाचार चैनल से कहा, ‘ब्रिटीश शासन के खिलाफ जब भारत संघर्ष कर रहा था तो एक तरफ महात्मा गांधी का शांति का आंदोलन चल रहा था तो दूसरी ओर भगत सिंह थे जिन्होंने आजादी के लिए हिंसा के रास्ते को अपनाया। भारत आज भगत सिंह को शहीद के रूप में याद करता है।’
अलगाववादी नेता इसके पहले कह चुके हैं कि पाकिस्तान के साथ कश्मीर समस्या का हल निकालने के लिए बंदूक स्थायी समाधान हो सकता है।
गौरतलब है कि गिलानी और जेकेएलएफ के अन्य नेताओं ने रविवार को नई दिल्ली में अजीज से मुलाकात की। इन नेताओं ने अजीज से भारत-पाक संबंध, एलओसी पर स्थिति सहित जम्मू एवं कश्मीर के ताजा राजनीतिक हालात पर चर्चा की।
इस बैठक को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई। मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस बैठक को लेकर सरकार से सवाल किए।
-एजेंसी
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