बुधवार, 7 नवंबर 2012

मिसाइल और टैंक देश को सुरक्षा नहीं दे सकते: इफ्तिखार चौधरी

पाकिस्तान में सेना और अदालत के बीच चल रहे टकराव के बीच मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार चौधरी ने मंगलवार को कहा कि मिसाइलें और टैंक देश में स्थिरता और सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकते और जजों को राज्यों में कानून की सर्वोच्चता सुनिश्चित करनी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश का यह बयान सेना प्रमुख अशफाक कयानी की उस टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें अशफाक कयानी ने सुप्रीम कोर्ट को कड़े शब्दों में चेताया हुए कहा था कि सुप्रीम कोर्ट देश की सेना को कमजोर करने की कोशिश न करे।

रविवार, 4 नवंबर 2012

TATA व एन मूर्ति जैसे लोग चलवा रहे हैं IAC आंदोलन

अरविंद केजरीवाल का आंदोलन इंफोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति सहित अन्य उद्योगपतियों के पैसे से चल रहा है। नारायण मूर्ति ने साल 2010-11 में केजरीवाल के पब्लिक कॉज रिसर्च फाउंडेशन को 12 लाख रूपए दान दिए थे। एक समाचार पत्र ने यह जानकारी दी है। समाचार पत्र के मुताबिक मुंबई की स्टॉक ब्रोकिंग फर्म एनम सिक्योरिटी ने 2 लाख रूपए दान दिए थे। इस कंपनी के मालिक हैं वल्लभ भंसाली।
रतन टाटा के सोशल वेलफेयर ने 25 लाख का चेक दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक विक्रम लाल की "एकर"ने एकर गुडवर्थ ट्रस्ट के नाम से 3 लाख का चेक दिया था। नीमेश कंपानी के जेएम फाइनेंशियल फाउंडेशन ने पचास हजार का चेक दिया था। अन्य सहयोग देने वालों में इंडसंड इंक बैंक के बॉस और बैंकर रोमेश सोबती शामिल है।

मंगलवार, 30 अक्टूबर 2012

दबाया गया राजीव गांधी की हत्या का सबूत

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या से जुड़े अहम सबूत को दबा दिया गया था। यह दावा किया है मामले की जांच से जुड़े अधिकारी के रागोथामन ने। उन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि उस समय के आईबी चीफ एमके नारायणन ने राजीव गांधी की हत्या से जुड़े वीडियो को दबाए रखा। इस वीडियो में मानव बम धुन को दिखाया गया है,जो श्रीपेरम्बदुर में राजीव गांधी के पहुंचने से पहले मौजूद थी।
उन्होंने बताया कि वीडियो के गायब होने के मामले की प्राथमिक जांच हो चुकी है। विशेष जांच टीम के प्रमुख डीआर कार्तिकेयन ने पश्चिम बंगाल के मौजूदा गर्वनर नारायणन को छोड़ दिया। हाल ही में प्रकाशित पुस्तक "राजीव गांधी की हत्या की साजिश-सीबीआई की फाइलों के हवाले" में दावा किया गया है कि राजीव गांधी की हत्या के बाद आईबी के वीडियोग्राफर को जो टेप मिला था उसे एसआईटी के साथ कभी शेयर नहीं किया गया। गौरतलब है कि 21 मई 1991 को राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी।

सोमवार, 29 अक्टूबर 2012

मनमोहन सरकार में ईमानदार को सजा, चापलूसों को ईनाम

क्या केंद्रीय कैबिनेट में जयपाल रेड्डी का ट्रांसफर सजा के तौर पर हुआ है? उन्हें पेट्रोलियम से साइंस और टेक्नॉलजी मंत्री बनाया गया है। क्या ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि रेड्डी रिलायंस समेत कई पेट्रोलियम कंपनियों पर काफी सख्त थे? जयपाल रेड्डी सोमवार सुबह अपने मंत्रालय का चार्ज नए मंत्री वीरप्पा मोइली को देने नहीं पहुंचे। बताया जाता है कि वह अपने तबादले से सख्त नाराज हैं।
रविवार को कैबिनेट में हुए जंबो फेरबदल के बाद राजनीतिक गलियारों में रेड्डी के ट्रांसफर को लेकर ऐसे ही सवाल गुपचुप उठ रहे हैं। इन सवालों को अरविंद केजरीवाल की इंडिया अगेंस्ट करप्शन ने जबान भी दे दी है। आईएसी के योगेंद्र यादव ने कहा कि जयपाल रेड्डी को रिलायंस पर सख्त होने की सजा दी गई है। रेड्डी के करीबी भी इसे डिमोशन के तौर पर देख रहे हैं।

शुक्रवार, 26 अक्टूबर 2012

ध्‍वस्‍त होंगे अशोका हाइट्स के 90 फ्लैट्स !

-शिवपाल यादव ने कहा, सिंचाई विभाग की जमीन कब्‍जाने वाले भूमाफिया बख्‍शे नहीं जायेंगे
-ग्राम समाज की जमीन को लेकर भी हुई उच्‍च अधिकारियों से शिकायत
-13 करोड़ 68 लाख के भुगतान की वसूली के लिए एक ठेकेदार ने ली न्‍यायालय की शरण

डेवलपमेंट अथॉर्टी से अप्रूवल की आड़ लेकर भूमाफिया किस तरह कृष्‍ण की नगरी मथुरा में रेत के अवैध महल खड़े करते हैं, इसका जीता जागता उदाहरण है J S R ग्रुप का प्रोजेक्‍ट अशोका हाइट्स।
अशोका हाइट्स इस बात का भी उदाहरण है कि सरकारी मशीनरी अपने-अपने हिस्‍से का सुविधा शुल्‍क लेकर किस तरह एक अवैध प्रोजेक्‍ट का पहले तो आंखें बंद करके विस्‍तार होते चुपचाप देखती रहती है और जब जांच के घेरे कसते हैं तो सारा ठीकरा उन लोगों के सिर फोड़ने का पूरा प्रयास करती है जो भ्रष्‍ट अफसरों की शै पर ही अपने प्रोजेक्‍ट की नाजायज रूप से न केवल लंबाई-चौड़ाई बढ़ाते जाते हैं बल्‍कि उन जरूरी सुविधाओं को भी ताक पर रख देते हैं जो किसी भी बहुमंजिला इमारत के निर्माण में अत्‍यंत आवश्‍यक होती हैं।

बुधवार, 24 अक्टूबर 2012

1 अरब फूंक देश की ही चीन से जासूसी कराई जनरलों ने

रक्षा मंत्रालय के एक इंटरनल ऑडिट में खुलासा किया गया है कि आर्मी चीफ विक्रम सिंह, वी. के. सिंह और कुछ टॉप जनरलों ने स्पेशल फाइनैंशल पावर्स के तहत 2 सालों में 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की ऐसी आपातकालीन खरीद की जिसमें चीन ने अपने जासूसी उपकरण फिट कर रखे थे। चीन समेत कई देशों की खुफिया एजेंसियां जासूसी के लिए ऐसे हथकंडे अपनाती हैं।
ऑडिट में यह पता चला है कि इन विदेशी उपकरणों को खरीदने के लिए गाइडलाइंस का भी उल्लंघन किया गया। जिस उपकरण को आर्मी के एक भाग ने रिजेक्ट कर दिया, उसी को दूसरे ने खरीद लिया। यह बात भी गौर करने लायक है कि भारतीय उपकरणों से महंगे होने के बावजूद विदेशी उपकरण खरीदे गए।
ऑडिटर्स ने पाया कि विदेशी उपकरण सीधे कंपनी से खरीदने की बजाय भारतीय एजेंट से खरीदे गए जबकि कंपनी के लोग भारत में मौजूद थे। कुछ मामलों में बिचौलियों का भी इस्तेमाल किया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि ईस्टर्न कमांड ने विदेशी कंपनी की हाई रिज़ॉल्यूशन वाली दूरबीन महंगे दामों पर भारतीय एजेंट से खरीदीं, जबकि दूरबीन बनाने वाली कंपनी उसे कम दामों पर दे रही थी।

वाड्रा,गडकरी,वीरभद्र... अभी और न जाने कितने हैं इस हमाम में

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) प्रेजिडेंट नितिन गडकरी अकेले नहीं हैं जिन्होंने अपने ड्राइवर मनोहर पनसे को रहस्यमय तरीके से अपनी 11 फर्मों का डायरेक्टर बनाया। यह लिस्ट काफी लंबी है। ऐसे कई नेता हैं जिनके चपरासी, क्लर्क और ड्राइवर रहस्यमय तरीके से रातोंरात लखपति बन गए, या फिर मालिक ने उन्हें अपनी कंपनियों में बड़े पदों पर बैठा दिया। इसके पीछे आखिर खेल क्या है, आप दिमाग पर थोड़ा जोर डालेंगे तो समझ जाएंगे।
'बेनामी लेनदेन का है पूरा खेल'
इन मामलों पर नजर रखने वाले अधिकारियों की मानें तो ऐसे कई नेता हैं जिन्होंने बेनामी लेनदेन को छिपाने के लिए अपनी कई फर्मों के डायरेक्टर अपने ड्राइवरों और चपरासियों का बनाया हुआ है। एक सीनियर ब्यूरोक्रेट कहते हैं, 'इन फर्मों में असल में लेनदेन होता है, लेकिन हर किसी को पता होता है कि करने वाला ऐसा कर ही नहीं सकता। उन्हें बस इस्तेमाल किया जा रहा होता है।'
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...