नई दिल्ली। नैशनल ऑडिटर कैग ने अपनी रिपोर्ट में
यूपीए सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा में फर्जीवाड़े की पोल खोली है।
संसद में मंगलवार को पेश रिपोर्ट के मुताबिक, करीब सभी राज्यों में
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के
क्रियान्वयन में भारी अनियमितताएं बरती गईं हैं। मनरेगा के फंड का इस्तेमाल
उन कामों के लिए किया गया, जो इसके दायरे में नहीं आते हैं। कैग के
मुताबिक, मनरेगा के 13,000 करोड़ रुपये की बंदरबांट हुई और इसका लाभ भी सही
लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
कैग ने 14 राज्यों में ऑडिट के दौरान पाया कि सवा चार लाख जॉब कार्ड्स में फोटो नहीं थे, यानी वे फर्जी थे। 1.26 लाख करोड़ रुपये के 129 लाख प्रॉजेक्ट्स को मंजूरी दी गई, लेकिन इनमें से सिर्फ 30 फीसदी में ही काम हुआ। ऑडिटर ने यह भी पाया कि 2,252 करोड़ रुपये ऐसे प्रॉजेक्ट्स के लिए आवंटित कर दिए गए, जो नियम के मुताबिक मनरेगा के तहत नहीं आते हैं।
कैग ने 14 राज्यों में ऑडिट के दौरान पाया कि सवा चार लाख जॉब कार्ड्स में फोटो नहीं थे, यानी वे फर्जी थे। 1.26 लाख करोड़ रुपये के 129 लाख प्रॉजेक्ट्स को मंजूरी दी गई, लेकिन इनमें से सिर्फ 30 फीसदी में ही काम हुआ। ऑडिटर ने यह भी पाया कि 2,252 करोड़ रुपये ऐसे प्रॉजेक्ट्स के लिए आवंटित कर दिए गए, जो नियम के मुताबिक मनरेगा के तहत नहीं आते हैं।
