संसद की कोयला एवं इस्पात संबंधी स्थाई समिति की रिपोर्ट को आज दोनों सदनों में पेश किए जाने के बाद समिति के अध्यक्ष कल्याण बनर्जी ने कहा कि वर्ष 1993 से 2010 के बीच कोयला ब्लॉकों का आवंटन अपारदर्शी तरीके से किया गया। किसी पारदर्शी प्रक्रिया को अपनाए बगैर कुछ लोगों को निजी लाभ के लिए कोयला ब्लॉकों का आवंटन कर दिया गया और प्राकृतिक संसाधन के आवंटन से सरकार को कोई राजस्व भी नहीं मिला।
बनर्जी ने सरकार पर शक्ति का पूरी तरह से दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकोर मनमाने ढंग से इस तरह का निर्णय नहीं ले सकती है। समिति का मानना है कि कोयला ब्लॉकों के आवंटन के लिए पूरी निर्णय प्रक्रिया की जांच की जानी चाहिए और उन सभी लोगों को दोषी ठहराया जाना चाहिए जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इस प्रक्रिया से जुड़े थे।
