रविवार, 5 जनवरी 2014

चंदे के करोड़ों रु. हड़प गई तीस्‍ता सीतलवाड़: FIR दर्ज

अहमदाबाद। 
नरेंद्र मोदी के खिलाफ मुहिम चलाने वालीं सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ पर धोखाधड़ी के एक मामले में FIR दर्ज की गई है। उन पर गुलबर्ग सोसाइटी मेमोरियल के नाम पर जमा की गई राशि का इस्तेमाल निजी इस्तेमाल करने के लिए करने का आरोप है।
तीस्ता सीतलवाड़ जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता हैं। 2002 के गुजरात दंगों के बाद वह नरेंद्र मोदी का काफी मुखर विरोध करती रही हैं। 2002 में गुलबर्ग सोसाइटी को जला दिया गया था। सीतलवाड़ ने उस सोसाइटी के लिए एक मेमोरियल बनाने के वास्ते देश-विदेश से चंदा जमा करने का अभियान छेड़ा था। इस अभियान के तहत करोड़ों रुपये जमा हुए।
आरोप है कि इस पैसे से तीस्ता सीतलवाड़ और उनके पति जावेद आनंद के निजी खातों में एफडी करवा ली गई। अहमदाबाद पुलिस ने जांच के बाद इस मामले में FIR दर्ज कर ली। सीतलवाड़ और उनके पति जावेद आनंद के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 120 और 406 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
-एजेंसी

शनिवार, 4 जनवरी 2014

इस कदर घबराए हुए थे... कि पहले की थी मॉक कॉफ्रेंस

नई दिल्ली। 
बतौर प्रधानमंत्री दस साल के कार्यकाल में तीसरी बार मीडिया से रूबरू होने से पहले पीएम मनमोहन सिंह को रिहर्सल करवाई गई थी। यूपीए-2 के कार्यकाल में उनकी दूसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस के तैयारी के लिए मनमोहन ने सचिवालय के अधिकारियों के साथ रिहर्सल की थी। रिहर्सल के दौरान सचिवालय के अधिकारियों ने मनमोहन से सौ सवाल पूछे और उन्होंने जवाब दिया। पीएम मनमोहन अपने आपको रिहर्सल के माध्यम से मीडिया से रूबरू होने के लिए तैयार करके आए थे।
पहले हुई मॉक कॉन्फ्रेंस
सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए पूरी तैयारी करवाई गई थी। उन्होंने सचिवालय के साथ मॉक प्रेस कॉन्फ्रेंस करवाई थी। सचिवालय के अधिकारियों ने मॉक कॉन्फ्रेंस में पीएम से वे सवाल पूछे जो मीडिया पूछ सकती है। पीआईबी और डीएवीपी के 80 से ज्यादा अधिकारियों को मॉक कॉन्फ्रेंस की जिम्मेदारी गई थी। पीएम की प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिम्मेदारी सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी को मिली हुई थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस के प्रबंधन का काम तिवारी ही देख रहे थे।
-एजेंसी

दिल्‍ली मेट्रो पर 10 तक हो सकता है 26/11 जैसा हमला

नई दिल्‍ली। 
अब तक आतंकवादियों की नज़रों से बची दिल्ली मेट्रो पर आतंकी साया मंडराने लगा है. दिल्ली मेट्रो पर आतंकवादी 26/11 जैसा हमला कर सकते हैं. मिलिट्री इंटेलिजेंस के सूत्रों के मुताबिक नए साल में दस दिन के भीतर आतंकवादी दिल्ली मेट्रो को अपना निशाना बना सकते हैं. मिलिट्री इंटेलिजेंस ने मेट्रो सिक्योरिटी को अलर्ट भेजकर कहा है कि कुछ आतंकी संगठन 10 जनवरी तक मेट्रो में 26/11 जैसे आतंकी हमले को अंजाम दे सकते हैं.
सीआईएसएफ को मिली खुफिया जानकारी के अनुसार मेट्रो में आतंकी हमले का अलर्ट 31 दिसंबर को मिला था.
चेतावनी के अनुसार 2014 में 10 जनवरी तक आतंकवादी कभी भी दिल्‍ली मेट्रो को अपना निशाना बना सकते हैं.
आतंकवादियों की इस धमकी के बाद दिल्‍ली मेट्रो की सुरक्षा पहले से और अधिक बढ़ा दी गई है.
एनसीआर में 140 स्टेशन पर पांच हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात हैं.
इसके बाद हर मेट्रो स्‍टेशन में आने वाले यात्रियों पर कड़ी नज़र रखी जा रही है. मेट्रो ट्रेन और स्टेशन पर संदिग्ध मुसाफिरों से पूछताछ और सामान की गहन तलाशी का अभियान चलाया जा रहा है.
-एजेंसी

टू-व्‍हीलर्स पर रखकर ही करोड़ों के सेब बेच लिए वीरभद्र ने

नई दिल्‍ली। 
रिश्वत लेने के आरोपों से घिरे हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की परेशानियां और बढ़ने वाली हैं। उनके खिलाफ जांच में यह बात सामने आई है कि अपने बगान के करोड़ों रुपये के सेब की उन्होंने टू-वीलर्स और तेल टैंकर से ढुलाई करवा ली। यह ठीक वैसा ही हास्यास्पद मामला है, जिस तरह से बिहार में चारा घोटाले की जांच में यह बात सामने आई थी कि सांड़ों को स्कूटर से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया गया था।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने एक बार फिर वीरभद्र सिंह के उस दावे की जांच में तेजी ला दी है, जिसमें उन्होंने 3 सालों में बागवानी से होने वाली आय 6.56 करोड़ रुपये दिखाई थी। एक इंग्लिश न्यूज़ पेपर ने लिखा है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने वीरभद्र सिंह और इंश्योरेंस एजेंट आनंद चौहान को अलग-अलग नोटिस भेजे हैं। नोटिस में वीरभद्र सिंह की बागवानी से हुई आय के बारे में सवाल उठाए गए हैं।
कहा जाता है कि आनंद चौहान ही मुख्यमंत्री के श्रीखंड वाले बागानों की देखरेख करता था। जून 2008 में वीरभद्र और आनंद चौहान ने एक एमओयू साइन किया था। इस एमओयू के तहत चौहान को वीरभद्र के बागान की देखभाल करनी थी। यह भी तय किया गया था कि चौहान को बागान से होने वाली आमदनी वीरभद्र और उनके परिवार की तरफ से एलआईसी या म्यूचुअल फंड्स में इन्वेस्ट करनी होगी।
चौहान ने क्लेम किया है कि उसने वीरभद्र सिंह के बागान के सेब यूनिवर्सल ऐपल असोसिएट के चुन्नीलाल को बेचे हैं। चुन्नीलाल नाम के शख्स ने टैक्स अथॉरिटीज़ को उन 18 गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन नंबर दिए हैं, जिनकी मदद से वीरभद्र के बागानों से सेब ढोए गए थे। जब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इन नंबरों की जांच की तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। मालूम हुआ कि इनमें से दो नंबर- HP 06 0768 और HP 06 1123 तो स्कूटर के हैं। एक अन्य नंबर HP 63 4975 तेल टैंकर का है। एक नंबर तो ऐसा है जो किसी को अलॉट ही नहीं हुआ। इनमें से कुछ नंबर ऐसे 'ट्रिपर' वीकल्स के हैं, जो यूज नहीं किए गए।
ऐसे में एक ऑफिशल ने आरोप लगाया, 'इन नंबरों को देखकर साफ लगता है कि चुन्नीलाल को कोई सेब नहीं बेचे गए। इसका मतलब है कि वीरभद्र सिंह ने बागवानी से जो आमदनी दिखाई है, वह झूठी है।'
इसी हफ्ते की शुरुआत में राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर वीरभद्र सिंह पर रिश्वत लेने और केंद्रीय इस्पात मंत्री रहते हुए एक स्टील कंपनी से पैसे लेने का आरोप लगाया था। 2 मार्च, 2012 को वीरभद्र सिंह ने 3 फाइनैंशल इयर्स के लिए इनकम टैक्स रिटर्न्स फाइल किए थे। उन्होंने बताया था कि बगवानी के जरिए उन्हें 2009-10 में 2.12 करोड़, 2010-11 में 2.80 करोड़ और 2011-12 में 1.55 करोड़ की आमदनी हुई है। उन्होंने क्लेम किया था कि 105 बीघा में फैले सेब के बागान से उन्हें आमदनी हुई है इसलिए वह इनकम टैक्स रिटर्न्स में रिविज़न करना चाहते हैं।
अखबार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने साल 2010-11 में हुई वीरभद्र सिंह की आमदनी का आंकलन करने का काम दोबारा शुरू कर दिया है। हालांकि वीरभद्र सिंह के करीबियों का कहना है कि उनकी जानकारी में ऐसी कोई बात नहीं आई है।
-एजेंसी

शुक्रवार, 3 जनवरी 2014

ना इधर-उधर की तू बात कर, ये बता कि काफिला क्यूं लुटा

नई दिल्‍ली। 
"हजारों जवाबों से अच्छी है मेरी खामोशी, ना जाने कितने सवालों की आबरू रखी।" कुछ इस शायराना अंदाज में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कोलगेट मामले में विपक्ष के पूछे सवालों का जवाब दिया था और आज दस साल में तीसरी बार मनमोहन खुद प्रेस कांफ्रेंस कर कई अहम सवालों का जवाब दे रहे हैं।
आखिर अब ऎसा क्या हो गया, जो उन्हें अपनी चुप्पी तोड़नी पड़ रही है। आईए जानते हैं कि वो क्या मजबूरियां हैं जिनके चलते उनको सालों की चुप्पी तोड़नी पड़ रही है।
दिसंबर 2013 में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जनता ने सिरे से नकार दिया। कांग्रेस को राजस्थान, मध्यप्रदेश, दिल्ली और छत्तीसगढ़ में मुंह की खानी पड़ी। पार्टी की थोड़ी सी लाज केवल मिजोरम में बची, जहां उनकी सरकार फिर से सत्ता में आई।
इन चार राज्यों हुई दुर्गती ने कांग्रेस की आंखे खोल दी। जनता ने अपना गुस्सा कांग्रेस को बाहर का रास्ता दिखाकर जाहिर किया। चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस को अहसास हो गया कि जनता ने पार्टी को पूरी तरह से नकार दिया है, अगर अब कोई कोशिश नहीं हुई तो लोकसभा चुनाव में और भी बुरे परिणामों से दो-चार होना पड़ सकता है। माना जा रहा है कि मनमोहन सिंह की चुप्पी और अन्य कांग्रेस नेताओं का बड़बोलापन भी हार का एक बड़ा कारण रहा।
इन चार राज्यों के चुनाव में यह भी सामने आया कि कांग्रेस को अगर डूबने से बचाना है, तो परम्परा को तोड़ते हुए चुनाव से पहले प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित करना होगा। फिलहाल कांग्रेस के पास केवल एक नाम है जिसको लेकर पार्टी आशान्वित है। वह नाम है कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का।
मनमोहन को अपनी पारी समेटने और राहुल गांधी की नई पारी के आगाज के लिए चुप्पी तोड़ने की जरूरत पड़ी। इससे पहले भी मनमोहन राहुल गांधी के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने का संकेत यह कहकर दे चुके हैं कि वे राहुल गांधी के नेतृत्व में काम करने का तैयार हैं।
मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार के अब तक के कार्यकाल में मंहगाई ने जमकर आम आदमी के सब्र की परीक्षा ली। खुद मनमोहन और वित्तमंत्री की लाख कोशिशों के बावजूद मंहगाई सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती रही। मंहगाई फैक्टर ने न केलव कांग्रेस को दिसंबर में हुए विधानसभा चुनाव में सबक सिखाया, वल्कि संकेत भी दे दिए कि लोकसभा चुनाव मे भी इतिहास दोहराया जा सकता है।
जब शायरी में किया जवाब-तलब
पिछले वर्ष मार्च में मनमोहन सिंह ने संसद में कुछ इस तरह से विपक्ष को खरी-खरी सुनाई-
"हमको है उनसे वफा की उम्मीद, जो नहीं जानते वफा क्या है।"
इस बार विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने ये दिया जवाब-
"कुछ तो मजबूरियां रही होंगी यूं कोई बेवफा नहीं होता।"
इसके बाद सुषमा ने फिर शायरना अंदाज में कहा-
"तुम्हें वफा याद नहीं, हमें जफा याद नहीं,
जिंदगी और मौत के तो दो ही रास्ते हैं,
एक तुम्हें याद नहीं, एक हमें याद नहीं।"

कुछ वर्ष पहले विकीलिक्स मामले पर संसद में डिबेट के दौरान मनमोहन सिंह ने आलम इकबाल का लिखा शेर सुषमा स्वराज पर निशाना साधते हुए कहा-
"माना की तेरे दीद के काबिल नहीं हूं मैं,
तुम मेरा शौक तो देख, मेरा इंतजार तो कर।"

मनमोहन इस शायरी को पढ़ते हुए मुस्कुराते रहे और सदन में ठहाके गूंज उठे।
सुषमा ने भी मुस्कुराते हुए इकबाल का ही एक शेर पढ़ा-
"ना इधर-उधर की तू बात कर, ये बता कि काफिला क्यूं लुटा,
हमें रहजनों से गिला नहीं, तेरी रहबरी का सवाल है..."

-एजेंसी

गुरुवार, 2 जनवरी 2014

केंद्रीय गृहमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र से चल रहा था सिमी का अड्डा

नई दिल्‍ली। 
महाराष्ट्र के सोलापुर में प्रतिबंधित संगठन सिमी के मॉडयूल का खुलासा होने के बाद खुफिया एजेंसियां परेशान है। परेशान इसलिए है क्योंकि सोलापुर गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे का निर्वाचन क्षेत्र है। मध्य प्रदेश पुलिस ने 25 दिसंबर को सिमी के पांच संदिग्धो को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 31 दिसंबर को चार और संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। खुफिया एजेंसियां इनके सोलापुर से लिंक को नजदीकी से ट्रेक कर रही है। सूत्रों के मुताबिक इन्होंने अपने ठिकाने पर भारी मात्रा में विस्फोटक जमा कर रखा था।
यह ठिकाना उस स्थान से नजदीक था जहां शिंदे पिछले हफ्ते दौरे पर जाने वाले थे। दो लोगों को सोलापुर से गिरफ्तार किया गया था जबकि एक्टिविस्ट शहर का रहने वाला था। इससे संदेह पैदा होता है कि प्रतिबंधित संगठन वहां अपना ठिकाना बना रहा था। सूत्रों के मुताबिक संदिग्ध शिंदे को निशाना बनाने की कोशिश में थे। सूत्रों के मुताबिक शिंदे नियमित रूप से अपने निर्वाचन क्षेत्र में जाते रहते हैं।
लोकसभा चुनाव से पहले भी शिंदे सोलापुर के क्षेत्रों में जाएंगे। 25 दिसंबर को सूचना के आधार पर मध्य प्रदेश के आतंक निरोधी दस्ते ने सोलापुर के निवासी खालिद अहमद को गिरफ्तार किया था। इसके बाद चार और लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें अबू फैजल शामिल था,जो खंडवा में जेल तोड़ने का मास्टर माइंड बताया जा रहा है। अहमद से पूछताछ के बाद सोलापुर से दो और गिरफ्तारियां हुई थी। इनकी पहचान सादिक और उमर हाफिज के रूप में हुई थी।
जांचकर्ताओं के मुताबिक संदिग्धों को सोलापुर में स्थित ठिकाने से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद हुई है। जिस मकान में ये संदिग्ध छिपे हुए थे वहां से 100 डेटोनेटर.70 जिलेटिन की छडियां और तीन जिंदा बम बरामद हुए थे। सूत्रों के मुताबिक मॉडयूल के लीडर अबू फैजल के तहरीक ए तालिबान ऑफ पाकिस्तान से संबंध है। फैजल तालिबान के कुछ नेताओं के संपर्क में था,जो कसाब को दी गई फांसी का बदला लेने के लिए बड़ी हस्तियों का निशाना बनाना चाहते थे।
-एजेंसी

वहां दंगा पीड़ित खदेड़े जा रहे थे, यहां हो रही थी आतिशबाजी

लखनऊ। 
उत्‍तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक तरफ जहां दंगा पीडि़तों को कड़कड़ाती ठंड के बीच राहत शिविरों से खदेड़ दिया गया, वहीं प्रदेश सरकार ने सैफई में महोत्‍सव नए साल पर पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है। मंगलवार रात नए साल के स्‍वागत में सैफर्इ महोत्‍सव के दौरान करीब 1 करोड़ रुपए की आतिशबाजी की गई। यही नहीं, नए साल के कार्यक्रम में बॉलीवुड सिंगर जावेद अली और कॉमेडियन राजू श्रीवास्‍तव को भी बुलाया गया था। इनके अलावा लोगों के मनोरंजन के लिए काफी संख्‍या में मुंबई से कलाकारों को भी बुलाया गया था।
इससे पहले सैफई महोत्‍सव की शुरूआत में प्रदेश की समाजवादी पार्टी सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च कर नाच-गाने का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में बॉलीवुड की कई मशहूर हस्तियों ने शिरकत की थी। उस समय महोत्‍सव में सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव, उनके बेटे और प्रदेश के मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव अपने परिवार के साथ मौजूद थे। इटावा जिले में मुलायम सिंह यादव के पैतृक गांव सैफई में 26 दिसंबर से शुरू हुआ यह महोत्‍सव 14 जनवरी तक चलेगा। इस महोत्‍सव में मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव सोमवार शाम तक रहे।
इस सर्द भरे मौसम में सरकार इन पीडि़तों को कैम्‍पों से हटाकर उन्‍हें उनके मूलनिवास स्‍थान पहुंचा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मुजफ्फरनगर दंगों के 483 पीड़ितों को राहत कैम्प से हटा दिया है। उन्हें प्रभावित इलाके की खाली पड़ी इमारतों में शिफ्ट कर दिया गया है। मुजफ्फरनगर जिले में अब कोई और राहत शिविर नहीं शेष बचा है जबकि पड़ोसी शामली में चार शिविर हैं। जिला मजिस्ट्रेट कौशल राज शर्मा के अनुसार, दिन में 420 परिवारों को यहां से भेजा गया जबकि शेष 63 परिवारों को शाम को सुरक्षित स्थान पर भेजा गया। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के मुख्य सचिव प्रवीण कुमार ने भी शिविरों का दौरा किया। कुमार शामली के चार शिविरों में गए और यहां चिकित्सा सुविधाओं से जुड़ी व्यवस्था का जायजा लिया। जिला मजिस्ट्रेट ने कहा कि यहां से जाने वाले परिवारों को 10 दिनों का राशन प्रदान किया गया। इसके साथ ही इन्हें चिकित्सा सुविधा और सुरक्षा भी प्रदान की जाएगी। अगस्त में दंगा भड़कने के बाद से लोई के राहत शिविरों में 510 परिवार रह रहे हैं।
गौरतलब है कि विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मुजफ्फरनगर और उसके आसपास हुए दंगों में 225 लोगों के विरुद्ध चार्जशीट पेश की है। एसआईटी का गठन उत्‍तर प्रदेश सरकार ने मुजफ्फरनगर दंगों की जांच के लिए किया था। एसआईटी एडिशनल एसपी मनोज झा ने बताया कि दंगों के 28 मामलों में 225 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई है जबकि अन्य मामलों में 28 शिकायतों का पता नहीं लगाया जा सका है।
-एजेंसी
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