गुरुवार, 28 फ़रवरी 2013

ब्रज के तीन अभागे संत !

(लीजेण्‍ड न्‍यूज़ विशेष)
योगीराज भगवान श्रीकृष्‍ण की जन्‍मस्‍थली, ब्रजभूमि तथा ब्रजवासियों के लिए कार्ष्‍णि गुरू शरणानंद, साध्‍वी ऋतंभरा और कृपालु महाराज जैसे धर्मगुरू क्‍या अब एक बोझ बन गये हैं ?
इन साधुवेशधारी तथाकथित धर्मगुरूओं द्वारा बड़े-बड़े मठ, मंदिर एवं आश्रमों के जरिये ब्रजभूमि में वास करके क्‍या सिर्फ और सिर्फ अपनी दुकानें चलाई जा रही हैं ?
कृष्‍ण की पटरानी कहलाने वाली यमुना के अस्‍तित्‍व पर ही ब्रजमण्‍डल में गहरा प्रश्‍नचिन्‍ह अंकित हो जाने के बावजूद यमुना को लेकर शुरू किये गये आंदोलन से गुरू शरणानंद, ऋतंभरा और कृपालु की उदासीनता क्‍या यही दर्शाती है ?

बुधवार, 27 फ़रवरी 2013

यूपी: वार्ता विफल, हजारों शिक्षक गिरफ्तार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अपनी मांगों को लेकर बुधवार को विधानसभा भवन के सामने धरना पर बैठे सूबे के डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों को राज्य सरकार ने बुधवार को बातचीत का न्यौता तो भेजा, लेकिन वार्ता विफल रही, जिसके बाद हजारों शिक्षकों को गिरफ्तार कर लिया गया।
डिग्री कॉलेज के हड़ताली शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल बुधवार को राज्य के नगर विकास मंत्री आजम खान से मिला, लेकिन उनकी वार्ता सफल नहीं हो पाई। इसके बाद विधानसभा भवन के सामने धरना पर बैठे हजारों शिक्षकों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारी शिक्षकों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हजारों शिक्षकों को गिरफ्तार कर बसों से जेल भेज दिया। पुलिस को शिक्षकों को नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा।

ढोंग या सच्चाई ?

लगभग तीस महिलाएँ, पुरुष और बच्चे हाथ हिला-हिलाकर, झूम झूमकर नाच रहे हैं. स्टेज पर एक नौजवान गिटार बजा रहा है और कई लड़के लड़कियाँ एक साथ गा रही हैं.
ये किसी पार्टी का दृश्य नहीं है.

मुंबई के पास अम्बरनाथ में ये एक चर्च का दृश्य है, जहाँ हर महीने के पहले हफ़्ते में अलग- अलग धर्मों के लोग लाइलाज बीमारियों से मुक्ति पाने या ‘चंगाई’ हासिल करने के लिए इकट्ठा होते हैं.
इसके बाद उनमें से ज़्यादातर ईसाई धर्म को अपना लेते हैं.
चर्च के अधिकारियों का फिर भी कहना है कि ये धर्म परिवर्तन नहीं बल्कि ‘मन परिवर्तन है’.
सभा के बीच में कुछ महिलाएँ और पुरुष स्टेज पर आकर अपने अनुभव बताते हैं और कहते हैं कि चर्च आने के बाद कैसे उन्हें बीमारियों से छुटकारा मिल गया.
वहाँ मौजूद सब लोग इन विवरणों को सुनकर तालियाँ बजाते हैं.

मंगलवार, 26 फ़रवरी 2013

एक वो रेलमंत्री थे, एक ये रेलमंत्री हैं

भारतीय रेल नेटवर्क दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा नेटवर्क है। इतना बड़ा नेटवर्क होने के बावजूद रेल दुर्घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पाया है।
औसतन देश में हर साल 300 दुर्घटनाएं होती हैं। इनमें छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं शामिल हैं। इतनी दुर्घटनाएं होने के बावजूद आजादी के बाद से लेकर आज तक सरकार इन्हें रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा पाई है।
यही नहीं, दुर्घटना के वक्त जो भी रेल मंत्री होता है, वह जिम्मेदारी लेने के बजाए दूसरों पर जिम्मेदारी डाल कर पीछे हट जाता है।
हमारे रेल मंत्रियों को लाल बहादुर शास्त्री से सीख लेनी चाहिए।
शास्त्री 13 मई 1952 से लेकर 7 दिसंबर 1956 तक रेल मंत्री थे। उन्होंने सितंबर 1956 को एक रेल दुर्घटना होने पर अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी।
इस दुर्घटना में 112 लोगों की मौत हो गई थी। उस वक्त प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने उनका इस्तीफा मंजूर करने से मना कर दिया था।
हालांकि तीन महीने बाद तमिलनाडु के अरियालुर में हुई रेल दुर्घटना (जिसमें144 लोगों की मौत हो गई थी) की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शास्‍त्री जी ने पद से इस्तीफा दे दिया।

सोमवार, 25 फ़रवरी 2013

झूठा कौन...HM, CM OR IB

नई दिल्ली। हैदराबाद बम धमाकों के तीन दिन बाद भी इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) द्वारा भेजे जाने वाले खुफिया अलर्ट का सच सामने नहीं आया है। इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी के बयान तो अलग-अलग हैं ही, साथ में केंद्रीय गृह मंत्रालय के अफसर भी अलग-अलग जानकारी दे रहे हैं।

रविवार, 24 फ़रवरी 2013

विधायकों के लिए मोदी "एप" रखना अनिवार्य

गुजरात भाजपा के बड़े नेताओं, मंत्रियों और विधायकों को हर हाल में अपने मोबाइल फोन में मोदी एप रखना होगा।
मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी के सभी नेताओं को अपने मोबाइल फोन में यह सुविधा रखने का निर्देश दिया है ताकि नेता उनकी ताजा गतिविधियों से अवगत रहें।
छरोड़ी में आयोजित तीन दिवसीय वर्कशॉप में शिरकत करने वाले भाजपा विधायक उस समय सन्न रह गए जब प्रदेश भाजपा की आईटी टीम ने उनसे मोदी एप के बारे में पूछा। आईटी टीम ने विधायकों से पूछा कि उन्होंने अपने मोबाइल फोन में मोदी एप डाउनलोड किया है अथवा नहीं।

शनिवार, 23 फ़रवरी 2013

मैला ढोने वालों को पुजारी बनवायेंगे मोदी

अहमदाबाद। गुजरात के कुछ इलाकों में जहां दलितों को अभी भी मंदिरों में प्रवेश नहीं दिया जाता वहीं नरेंद्र मोदी सरकार ने एक परिवर्तनकारी फैसला किया है। राज्‍य सरकार ने सर पर मैला ढोनेवालों को मंदिरों में पुजारी बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए उन्हें हिंदू रीति-रिवाज के तहत विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वह सभी कर्मकाण्ड विधिवत करा सकें।
एक अंग्रेजी समाचार पत्र के अनुसार, सामाजिक न्याय विभाग ने सफाई कामदारों के प्रशिक्षण के लिए 2013-14 के बजट में 22.50 लाख रुपये निर्धारित की है। इन्हें सोला भागवत पीठ और सोमनाथ संस्कृत विद्यापीठ जैसे संस्‍थानों में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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