लखनऊ। ग्रेटर नोएडा के गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में पुस्तकों की मनमानी
खरीदारी और मानकों को ताक पर रखकर की गयी नियुक्तियों में भारी घोटाला
उजागर हुआ है. लोकायुक्त न्यायमूर्ति एन.के. महरोत्रा ने बुधवार की शाम एक
और सनसनीखेज रिपोर्ट उत्तरप्रदेश सरकार को सौंपी है जिसमें ग्रेटर नोएडा के
गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के कई संकायों में छात्रों के न होते हुए भी लगभग
दो करोड़ 32 लाख रुपये की पुस्तकों की मनमानी खरीदारी और मानकों को ताक पर
रखकर की गयी नियुक्तियों में भारी घोटाला उजागर हुआ है.
Blog serves news about Corruption in India,Dirty politics,corruption free India,corruption in politics,real estate,Dharm and Society
गुरुवार, 11 जुलाई 2013
लल्लनजी V/S पप्पूजी
(लीजेण्ड न्यूज़ विशेष)
टीवी सीरियल लापतागंज का एक किरदार है लल्लनजी। लल्लनजी एक सरकारी मुलाजिम हैं और उनका तकिया कलाम है- हमसे तो किसी ने कहा ही नहीं।
काम कैसा भी हो, लल्लनजी से जब तक कोई कहता नहीं है तब तक वह कुछ नहीं करते। यहां तक कि खाना-पीना, उठना-बैठना भी उनका किसी के कहे बिना नहीं होता।
इसी प्रकार का एक दूसरा टीवी सीरियल था हम आपके हैं इन-लॉज। यह सीरियल हालांकि अपनी उम्र पूरी किये बिना ही दम तोड़ गया लेकिन उसका भी एक किरदार लापतागंज के लल्लनजी से प्रभावित था।
पप्पूजी नाम के इस किरदार का तकिया कलाम था- मैं नाराज हूं। वह कभी भी किसी बात पर वक्त-बेवक्त नाराज हो जाया करता था। घर जमाई के इस किरदार की खासियत यह थी कि वह ज्यादा देर तक किसी से नाराज नहीं रह पाता था। ये बात और है कि कुछ दिनों में ही दर्शक उससे नाराज हो गए ।
आप चाहें तो इसे इत्तिफाक मान सकते हैं कि हमारी राजनीति में भी ठीक इसी प्रकार के चरित्र हैं, हालांकि
टीवी सीरियल लापतागंज का एक किरदार है लल्लनजी। लल्लनजी एक सरकारी मुलाजिम हैं और उनका तकिया कलाम है- हमसे तो किसी ने कहा ही नहीं।
काम कैसा भी हो, लल्लनजी से जब तक कोई कहता नहीं है तब तक वह कुछ नहीं करते। यहां तक कि खाना-पीना, उठना-बैठना भी उनका किसी के कहे बिना नहीं होता।
इसी प्रकार का एक दूसरा टीवी सीरियल था हम आपके हैं इन-लॉज। यह सीरियल हालांकि अपनी उम्र पूरी किये बिना ही दम तोड़ गया लेकिन उसका भी एक किरदार लापतागंज के लल्लनजी से प्रभावित था।
पप्पूजी नाम के इस किरदार का तकिया कलाम था- मैं नाराज हूं। वह कभी भी किसी बात पर वक्त-बेवक्त नाराज हो जाया करता था। घर जमाई के इस किरदार की खासियत यह थी कि वह ज्यादा देर तक किसी से नाराज नहीं रह पाता था। ये बात और है कि कुछ दिनों में ही दर्शक उससे नाराज हो गए ।
आप चाहें तो इसे इत्तिफाक मान सकते हैं कि हमारी राजनीति में भी ठीक इसी प्रकार के चरित्र हैं, हालांकि
सोमवार, 8 जुलाई 2013
आतंकियों के भरोसे है मथुरा-वृंदावन की सुरक्षा
मथुरा
(लीजेण्ड न्यूज़ विशेष)। क्या मथुरा-वृंदावन के सभी प्रमुख मंदिरों की सुरक्षा आतंकवादियों के रहमो-करम पर निर्भर है?
क्या मथुरा-वृंदावन सहित जनपद के सभी धार्मिक स्थान तभी तक महफूज हैं, जब तक आतंकवादी अपनी खास रणनीति के तहत यहां किसी वारदात को अंजाम देना नहीं चाहते? इन प्रश्नों के जवाब तलाशने से पहले यह जान लेना जरूरी है कि जब-जब देश के किसी हिस्से में आतंकवादी वारदात होती है, तब-तब जिन प्रमुख धार्मिक जनपदों को हाईअलर्ट पर लिया जाता है उनमें मथुरा-वृंदावन भी शामिल रहता है।
रहे भी क्यों नहीं,
क्या मथुरा-वृंदावन सहित जनपद के सभी धार्मिक स्थान तभी तक महफूज हैं, जब तक आतंकवादी अपनी खास रणनीति के तहत यहां किसी वारदात को अंजाम देना नहीं चाहते? इन प्रश्नों के जवाब तलाशने से पहले यह जान लेना जरूरी है कि जब-जब देश के किसी हिस्से में आतंकवादी वारदात होती है, तब-तब जिन प्रमुख धार्मिक जनपदों को हाईअलर्ट पर लिया जाता है उनमें मथुरा-वृंदावन भी शामिल रहता है।
रहे भी क्यों नहीं,
शुक्रवार, 5 जुलाई 2013
जन्मभूमि व ईदगाह की सुरक्षा ताक पर
(लीजेण्ड न्यूज़ विशेष)
मीना मस्जिद से बजी खतरे की घंटी. मथुरा के जिन दो प्रमुख धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर पिछले 20 वर्षों से करोड़ों रुपया खर्च किया जा रहा है और जिनके कारण हर समय देश की इंटेलीजेंस एजेंसियों के प्रमुख अधिकारियों की पेशानी पर बल पड़े रहते हैं, उनकी सुरक्षा को वही तार-तार करने पर आमादा हैं जिन्हें सरकार ने बड़े भरोसे के साथ यहां तैनात किया हुआ है।
यही नहीं, इन अधिकारियों की नासमझी के कारण शहर की शांत फिज़ा भी खराब होने का अंदेशा है।
मीना मस्जिद से बजी खतरे की घंटी. मथुरा के जिन दो प्रमुख धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर पिछले 20 वर्षों से करोड़ों रुपया खर्च किया जा रहा है और जिनके कारण हर समय देश की इंटेलीजेंस एजेंसियों के प्रमुख अधिकारियों की पेशानी पर बल पड़े रहते हैं, उनकी सुरक्षा को वही तार-तार करने पर आमादा हैं जिन्हें सरकार ने बड़े भरोसे के साथ यहां तैनात किया हुआ है।
यही नहीं, इन अधिकारियों की नासमझी के कारण शहर की शांत फिज़ा भी खराब होने का अंदेशा है।
बुधवार, 3 जुलाई 2013
डराता भी है बांके बिहारी का वृंदावन
(लीजेण्ड न्यूज़ विशेष)
घर-घर में पूज्यनीय तुलसी के पौधे का एक नाम वृंदा भी है और उसकी बहुतायत के कारण मथुरा से मात्र 10 किलोमीटर दूर स्थित श्रीकृष्ण की एक क्रीड़ास्थली को वृंदावन कहते हैं। अर्थात तुलसी वन, तुलसी का वन।
इसके अलावा भी वृंदावन की अनेक खासियतें हैं। तमाम पहचान हैं। जैसे बांके बिहारी, तटिय स्थान, इस्कॉन, निधि वन, कुंज गलियां, यमुना का तट, नामचीन साधु-संतों के आश्रम, मठ, आदि-आदि।
वृंदावन की इन तमाम विशेषताओं से लोग परिचित हैं और इसलिए यहां हर समय भीड़ का दबाव बना रहता है। लेकिन वृंदावन में बहुत कुछ ऐसा भी है जिससे यहां आने वाले दर्शनार्थी और पर्यटक तब तक अनजान रहते हैं, जब तक कि उनका उससे वास्ता नहीं पड़ता।
वृंदावन के इस दूसरे रूप का साक्षात्कार करने वाले या तो उसे अपना लेते हैं या फिर खुद उसका हिस्सा बन जाते हैं।
कुछ सामर्थ्यवान बाहरी लोगों और कुछ वृंदावनवासियों के बीच कायम हो चुकी इसी जुगलबंदी का परिणाम है कि आज वृंदावन एक ऐसे वीभत्स रूप में डेवलप हो रहा है जिसे जान लेने व समझ लेने वाला आम आदमी इतना भयभीत हो जाता है कि फिर सोचने-समझने की शक्ति ही खो बैठता है।
वृंदावन के इस दूसरे रूप में छिपे हैं सत्ता के गलियारों तक अपनी अच्छी-खासी पकड़ रखने वाले भूमाफिया, पुलिस प्रशासन की नाक के बाल बन चुके धर्म के ठेकेदार, नशीले पदार्थों के तस्कर, क्रिकेट के बुकी, एमसीएक्स के धंधेबाज और हर किस्म के लाइजनर।
घर-घर में पूज्यनीय तुलसी के पौधे का एक नाम वृंदा भी है और उसकी बहुतायत के कारण मथुरा से मात्र 10 किलोमीटर दूर स्थित श्रीकृष्ण की एक क्रीड़ास्थली को वृंदावन कहते हैं। अर्थात तुलसी वन, तुलसी का वन।
इसके अलावा भी वृंदावन की अनेक खासियतें हैं। तमाम पहचान हैं। जैसे बांके बिहारी, तटिय स्थान, इस्कॉन, निधि वन, कुंज गलियां, यमुना का तट, नामचीन साधु-संतों के आश्रम, मठ, आदि-आदि।
वृंदावन की इन तमाम विशेषताओं से लोग परिचित हैं और इसलिए यहां हर समय भीड़ का दबाव बना रहता है। लेकिन वृंदावन में बहुत कुछ ऐसा भी है जिससे यहां आने वाले दर्शनार्थी और पर्यटक तब तक अनजान रहते हैं, जब तक कि उनका उससे वास्ता नहीं पड़ता।
वृंदावन के इस दूसरे रूप का साक्षात्कार करने वाले या तो उसे अपना लेते हैं या फिर खुद उसका हिस्सा बन जाते हैं।
कुछ सामर्थ्यवान बाहरी लोगों और कुछ वृंदावनवासियों के बीच कायम हो चुकी इसी जुगलबंदी का परिणाम है कि आज वृंदावन एक ऐसे वीभत्स रूप में डेवलप हो रहा है जिसे जान लेने व समझ लेने वाला आम आदमी इतना भयभीत हो जाता है कि फिर सोचने-समझने की शक्ति ही खो बैठता है।
वृंदावन के इस दूसरे रूप में छिपे हैं सत्ता के गलियारों तक अपनी अच्छी-खासी पकड़ रखने वाले भूमाफिया, पुलिस प्रशासन की नाक के बाल बन चुके धर्म के ठेकेदार, नशीले पदार्थों के तस्कर, क्रिकेट के बुकी, एमसीएक्स के धंधेबाज और हर किस्म के लाइजनर।
मंगलवार, 2 जुलाई 2013
वाह यूपी: लालबत्ती लगी कार से कुत्ता जाता है टहलने
लखनऊ । हो सकता है आपको यकीन न हो लेकिन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक लाल
बत्ती लगी कार से कुत्ता शाम को टहलने जाता है। सामाजिक कार्यकर्ता नूतन
ठाकुर ने परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव को भेजे पत्र में कहा है कि एक भारी
भरकम कुत्ता हर शाम राम मनोहर लोहिया पार्क में सफेद रंग के सरकारी
एम्बेसडर कार पर पीछे की सीट पर बैठ कर आता है। इस वीआईपी कुत्ते को साथ
आया नौकर वहीं पार्क में घुमाता है।
ठाकुर ने इसे लाल/नीली बत्ती के प्रयोग से संबंधित शासनादेश का सीधा उल्लंघन बताते हुए इस संबंध में कार्रवाई किये जाने की मांग की है। साथ ही अन्य लोगों द्वारा इस प्रकार का दुरुपयोग रोकने के संबंध में आदेश जारी करने की भी मांग की है।
-एजेंसी
ठाकुर ने इसे लाल/नीली बत्ती के प्रयोग से संबंधित शासनादेश का सीधा उल्लंघन बताते हुए इस संबंध में कार्रवाई किये जाने की मांग की है। साथ ही अन्य लोगों द्वारा इस प्रकार का दुरुपयोग रोकने के संबंध में आदेश जारी करने की भी मांग की है।
-एजेंसी
शनिवार, 29 जून 2013
अपने गृहराज्य में आई आपदा पर धोनी की चुप्पी?
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान और दुनिया
के 16वें सबसे अमीर खिलाड़ी महेन्द्र सिंह धोनी प्राकृतिक आपदा का कहर झेल
रहे अपने गृहराज्य उतराखंड को ही भूल गए हैं।
उतराखंड की जलप्रलय में करीब 1000 लोग मारे जा चुके हैं और यह संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है।
उतराखंड के कई गांव सिरे से ही साफ हो गए हैं। देश विदेश में अनेक हस्तियों और संस्थाओं ने विपदा की इस घड़ी में उतराखंड की मदद के लिए अपने हाथ बढाए हैं लेकिन कप्तान धोनी ने ऐसे समय में अपने गृहराज्य को भुला दिया है।
टीम इंडिया में उनके युवा साथी खिलाड़ी और तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने उतराखंड के पीड़ितों के लिए अपनी तरफ से एक लाख रपए देने की घोषणा की है जबकि टीम इंडिया से बाहर चल रहे आफ स्पिनर हरभजन सिंह ने भी दस लाख रुपए की मदद दी है।
उतराखंड की जलप्रलय में करीब 1000 लोग मारे जा चुके हैं और यह संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है।
उतराखंड के कई गांव सिरे से ही साफ हो गए हैं। देश विदेश में अनेक हस्तियों और संस्थाओं ने विपदा की इस घड़ी में उतराखंड की मदद के लिए अपने हाथ बढाए हैं लेकिन कप्तान धोनी ने ऐसे समय में अपने गृहराज्य को भुला दिया है।
टीम इंडिया में उनके युवा साथी खिलाड़ी और तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने उतराखंड के पीड़ितों के लिए अपनी तरफ से एक लाख रपए देने की घोषणा की है जबकि टीम इंडिया से बाहर चल रहे आफ स्पिनर हरभजन सिंह ने भी दस लाख रुपए की मदद दी है।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)