मंगलवार, 17 सितंबर 2013

मंत्रीजी बोले, भंवरी जैसा हाल कर देंगे

राजस्थान के एक और मंत्री पर दुष्कर्म करने का आरोप लगा है। आरोप लगाने वाली महिला जयपुर की रहने वाली है। जयपुर की एक अदालत ने उसकी ओर से दायर परिवाद पर पुलिस को सोढ़ाला थाने में मंत्री के खिलाफ केस दर्ज करने को कहा है। पीड़िता ने 13 सितंबर को कोर्ट में परिवाद दायर किया था।
पीड़िता ने बताया कि राजस्थान के सरकार के इस मंत्री ने 11 सितम्बर को उसे दोपहर ढाई बजे फोन कर अपने घर बुलाया। उसी दिन शाम करीब पांच बजे वहां पहुंची तो मंत्री ने उसे अच्छी नौकरी लगवाने का लालच दिया। साथ ही उसके रिश्तेदार को भी अच्छी नौकरी दिलाने का वादा किया।
कुछ देर बाद मंत्री कमरे में चला गया और पीड़िता को कमरे में बुलाया। मंत्री ने पीड़िता के जबरन कपड़े उतारे और दुष्कर्म का प्रयास किया। पीड़िता के विरोध करने पर मंत्री ने धमकी दी कि तुम्हारा हाल भी भंवरी देवी जैसा कर दिया जाएगा। मंत्री ने पीड़िता के बेटे की हत्या करने की भी धमकी दी।
इस पर पीड़िता कोर्ट पहुंची और मंत्री के खिलाफ केस दर्ज करवाने का आदेश देने की गुहार लगाई। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट क्रम संख्या 9 की अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156/3 के तहत मुकद्दमा दर्ज करने के लिए मामला सोढ़ाला थाने भिजवाया है।
इधर, मामले पर बाबूलाल नागर की खुली प्रतिक्रया अब तक नहीं आई लेकिन जानकार सूत्रों के अनुसार उन्होंने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। यह मंत्री पहले भी काफी विवादों में घिरे रहे हैं। जिसके चलते मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इनका विभाग बदल दिया था।

CAG ने BSP को किया बेपर्दा: सैकड़ों करोड़ के घोटाले खोले

लखनऊ। मुजफ्फरनगर दंगों पर चारों तरफ‌ से ‌घिरी अखिलेश सरकार को आज एक बड़ी राहत भरी खबर मिली है। आज भले ही विधानसभा स्‍थगित कर दी गई हो, लेकिन सदन में एकसाथ पेश हुईं कई रिपोर्ट्स ने मायावती के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। खबर है कि बसपा सरकार में 10 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान सिर्फ बिजली खरीद और वितरण में ही सामने आ रहा है।
कैग रिपोर्ट के ‌मुताबिक, बसपा राज में घपलों के कारण चर्चित रहने वाली यूपी राज्य औद्योगिक वि‌कास निगम लिमिटेड का 175 करोड़ का एक और घोटाला सामने आया है।
विधानसभा में पेश की गई कैग रिपोर्ट से खुलासा हुआ है ‌कि निगम ने 8 ग्रुप हाउसिंग प्लॉट और 34 कॉम‌र्शियल प्लाट को अपने द्वारा तय सिस्टम के खिलाफ जाकर ही बांट दिया।
कैग की रिपोर्ट कहती है कि अफसरों कि इस उदारता से यूपीएसआईडीसी को बाजार मूल्य पर 152 करोड़ और सर्किल रेट पर 24.‍5 करोड़ रुपये का अलग से नुकसान हुआ। यह प्लॉट नोएडा में बांटे गए।

शनिवार, 14 सितंबर 2013

कौन होगा मथुरा का 'मोदी' ?

(लीजेण्‍ड न्‍यूज़ विशेष) तमाम जद्दोजहद के बाद भारतीय जनता पार्टी ने नरेन्‍द्र मोदी के सिर प्रधानमंत्री पद की उम्‍मीदवारी का सेहरा अंतत: बांध दिया। एक बड़ा चैप्‍टर क्‍लोज हो गया लेकिन लोकसभा चुनावों के मद्देनजर इससे कई नए चैप्‍टर खुल गए।
देश-दुनिया और पक्ष-विपक्ष की बात किनारे करके अगर बात करें सिर्फ कृष्‍ण नगरी की, तो मोदी के गुजरात का यहां से गहरा नाता जो है। कुछ वैसा ही जैसा कृष्‍ण का द्वारिका से और द्वारिकाधीश का मथुरा से। जाहिर है कि इस रिश्‍ते का प्रभाव मथुरा की राजनीति को भी अवश्‍य प्रभावित करेगा।
राजनीति के सिरमौर श्रीकृष्‍ण की इस जन्‍मभूमि का उत्‍तर प्रदेश की राजनीति में वही स्‍थान है जो देश की राजनीति में उत्‍तर प्रदेश का।
किसी भी चुनाव में यहां होने वाली हार-जीत का असर समूचे राजनीतिक परिदृश्‍य पर साफ दिखाई देता है।
ऐसे में महत्‍वपूर्ण हो जाता है यह प्रश्‍न कि मथुरा में लोकसभा की उम्‍मीदवारी का सेहरा किसके सिर बंधेगा....... यानि कौन होगा मथुरा का मोदी?

शुक्रवार, 13 सितंबर 2013

हमारे पास रुपये हैं, हम जितना चाहें खर्च करें किसी को क्‍या

आगरा। समाजवादी पार्टी की राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक गुरुवार को समाप्‍त हो गई। होटल मुगल में हुई यह बैठक जहां आजम खान की गैरमौजूदगी के चलते ज्‍यादा चर्चा में रही, वहीं समाजवादी सिद्धांतों के रहनुमा होने का दावा करने वाले सपाइयों की शाहखर्ची भी चर्चा में रही।
सपा कार्यकारिणी के सदस्‍य तमाम सुख-सुविधाओं से लैस कमरों में ठहरे। सवाल उठने पर अबू आजमी ने तपाक से जवाब दिया कि हमारे पास रुपए हैं, हम चाहे जितना खर्च करें। किसी को इससे क्‍या फर्क पड़ता है। सांसद नरेश अग्रवाल ने तो सवालों का मजाक उड़ाते हुए यहां तक कह दिया कि आप कहें तो राजस्‍थान के वीरान रेत पर बैठक कर लेंगे। वहां पानी भी नहीं मिलेगा।
समाजवादी पार्टी की राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में कितना खर्च हुआ, इसका जवाब तो कोई नहीं दे रहा। लेकिन जानकार सूत्र इस पर कम से कम एक करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान लगा रहे हैं। बैठक के लिए

बुधवार, 11 सितंबर 2013

ढिठाई के साथ नियमों का उल्‍लंघन करते हैं जनप्रतिनिधि

तिरुवनंतपुरम। विधानसभाओं और संसद में जनप्रतिनिधियों के आचरण को लेकर चिंता जाहिर करते हुए उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने आज कहा कि सदन में शिष्टाचार के नियमों एवं मानकों को कठोर बनाया जाने और उन्हें कड़ाई से लागू किए जाने की जरुरत है.
अंसारी ने यहां केरल विधानसभा की विशेष बैठक में अपने संबोधन में कहा कि विचारविमर्श के निकायों के तौर पर विधायिकाओं की आदर्श छवि इन दिनों जनप्रतिनिधियों के असंसदीय आचरण के चलते बिल्कुल विरोधाभासी सी हो गई है.

सोमवार, 9 सितंबर 2013

दंगे तो होंगे ही.. कोई रोक भी नहीं सकता

(लीजेण्‍ड न्‍यूज़ विशेष)
केंद्र सरकार की ताजा रिपोर्ट के अनुसार अखिलेश राज में अब तक सांप्रदायिक दंगों की 104 घटनाएं हो चुकी हैं। मुज़फ्फरनगर के दंगे में आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 26 लोग मारे जा चुके हैं जबकि प्रत्‍यक्षदर्शी बताते हैं कि यह संख्‍या सैकड़ों में है।
राज्‍यपाल बी. एल. जोशी ने मुज़फ्फरनगर के दंगों को लेकर केंद्र सरकार को जो रिपोर्ट भेजी है, वह कहती है कि इन दंगों के लिए पूरी तरह राज्‍य सरकार जिम्‍मेदार है।
जो भी हो, लेकिन यहां विचारणीय प्रश्‍न यह है कि एक ऐसे दौर में जब आम आदमी के लिए अपनी जरूरतें पूरी करना भी कठिन होता जा रहा है, तब लोग एक-दूसरे का खून बहाने पर इतनी जल्‍दी आमादा क्‍यों रहे हैं ?
यहां यह बताने की कोई जरूरत नहीं रह जाती कि हर दंगे का शिकार आम आदमी ही होता है, खास लोग कभी किसी दंगे की चपेट में नहीं आते और देश के वर्तमान लोकतंत्र की परिभाषा भी शायद यही है।

शनिवार, 7 सितंबर 2013

84 Year old Young man

कई राज्‍यों में विधानसभा चुनाव और उसके बाद 2014 के लोकसभा चुनावों को देखते हुए वोटों के सौदागर चाहे जो कहें लेकिन सच्‍चाई यही है कि तथाकथित धर्मगुरू आसाराम बापू पर लगे यौन शोषण के गंभीर आरोपों ने आम आदमी के मन में ऐसे धर्मगुरुओं को लेकर गहरा प्रश्‍नचिन्‍ह अंकित कर दिया है।
इस वीडियो में जिस शख्‍स को आप हाथी जैसी चाल चलते देख रहे हैं, वह स्‍वयंभू पांचवें जगद्गुरू कृपालु महाराज हैं और खुद इनके भक्‍तों की मानें तो इनकी उम्र फिलहाल 84 साल है।
गौरतलब है कि 60-62 साल की उम्र में जब सामान्‍यत: लोग रिटायर्ड हो जाते हैं और धर्म के अनुसार भी इस समय वानप्रस्‍थ आश्रम ग्रहण कर लिया जाता है, तब इस देश के नेता और ऐसे तथाकथित धार्मिक गुरू पहले से कहीं अधिक सक्रिय दिखाई देते हैं।
अपने दोनों ओर हाथ बांधे कतारबद्ध खड़े स्‍त्री-पुरुषों के बीच चल रहे कृपालु महाराज के धार्मिक धंधे का टर्नओवर करोड़ों नहीं, अरबों का है और इस धंधे के उत्‍तराधिकारी उनकी अपनी संतानें हैं।
द इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ डिवाइन लव तथा द यूनिवर्सल सोसायटी ऑफ स्‍प्रेचुअल लव नामक संस्‍थाओं के माध्‍यम से अपने धार्मिक कारोबार को संचालित करने वाले कृपालु महाराज भी यौन शोषण के आरोपों में कई बार देश-विदेश की जेलों के मेहमान रहे हैं।
बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि कृपालु महाराज को सर्वप्रथम यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार कराने का श्रेय उन्‍हीं डॉ. नरेन्‍द्र दाभोलकर को जाता है जिनकी पिछले दिनों हत्‍या कर दी गई। दाभोलकर द्वारा स्‍थापित संस्‍था 'अंध श्रृद्धा निर्मूलन समिति' ने ही नागपुर की दो लड़कियों के साथ कृपालु द्वारा दुष्‍कृत्‍य किये जाने का मामला उठाया था।
वीडियो में कृपालु महाराज का गुणगान करने वाली आवाज़ से लेकर उनके सामने जमीन पर बैठकर कृपा प्राप्‍त करने वाला व्‍यक्‍ति कोई और नहीं, इनके पेशेवर तौर-तरीकों का माध्‍यम है ताकि तमाम दूसरे लोगों को प्रभावित व आकर्षित किया जा सके।
सुंदर महिलाओं के जिस समूह को आप इस वीडियो में कृपालु महाराज की आरती उतारते देख रहे हैं, यह दरअसल इनकी वो एग्‍जीक्‍यूटिव्‍स हैं जो इनके लिए धनी-मानी मुर्गे फंसाती हैं और उसके एवज में पहले से तय अपना हैंडसम कमीशन तथा सुख-सुविधाएं हासिल करती हैं। यही महिलाएं महाराज जी की दैहिक एवं भौतिक तापों का निवारण उनकी इच्‍छानुसार करने का इंतजाम भी करती हैं।
चूंकि कृपालु महाराज की कृपापात्र बनने के लिए उनकी अपनी कुछ शर्तें है, और यह उन शर्तों को पूरा करने के बाद ही इस मुकाम तक पहुंचती हैं लिहाजा महाराजजी की जरूरतों को यह उनके एक इशारे से समझ जाती हैं।
बच्‍चों को लेकर वात्‍सल्‍य का भाव प्रदर्शित करने वाले कृपालु की वास्‍तविक सोच का अंदाज आप इस वीडियो के उस हिस्‍से से लगा सकते हैं, जहां कृपालु महाराज खुद तो कीमती स्‍पोर्ट शू में चल रहे हैं और उनके कृपापात्र बच्‍चे नंगे पैर हैं।
बीमारों की सेवा-सुश्रूषा का नाटक करते दिखाई देने वाले कृपालु महाराज ने मनगढ़ स्‍थित अपने आश्रम का भारी-भरकम गेट गिर जाने के कारण हुई दर्जनों मौतों पर बमुश्‍किल इतना भर कहा था कि ये तो ईश्‍वर की मर्जी थी। इसमें मैं क्‍या कर सकता हूं।
कड़वा सच तो यह है कि कदम-कदम पर धर्म का सौदा करने वाले कृपालु महाराज और इनके जैसे तमाम तथाकथित धर्मगुरू न केवल देश के आर्थिक अपराधी हैं बल्‍कि सामाजिक अपराधी भी हैं।
देश भारी आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है और देशवासी सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती जा रही महंगाई से त्रस्‍त हैं लेकिन एक ओर धर्म के सौदागर ऐसे तथाकथित धर्मगुरू तथा दूसरी ओर इनके संरक्षणदाता वोटों के सौदागरों पर किसी प्रकार का कोई दुष्‍प्रभाव नहीं पड़ रहा क्‍योंकि इनकी आमदनी निष्‍प्रभावी है।
ऐसे में क्‍या यह सवाल पैदा नहीं होता कि आखिर इनकी आमदनी के वो कौन से स्‍त्रोत हैं, जो कभी नहीं सूखते। जिन पर कभी मंदी की मार नहीं पड़ती और जिनके खजाने का कभी कोई आंकलन नहीं कराया जाता जबकि इनकी शारीरिक, मानसिक तथा तथाकथित बौद्धिक ऊर्जा का राज यही अकूत संपदा है।
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