गुरुवार, 7 नवंबर 2013

मोदी के साथ इन्‍हें भी उड़ाने की थी साजिश

पटना 
27 अक्तूबर को हुंकार रैली के दिन होटल मौर्या के पास ब्लास्ट कर भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली को उड़ाने की साजिश थी. पटना जंकशन पर ब्लास्ट के समय गिरफ्तार आइएम के आतंकी इम्तियाज ने पूछताछ के दौरान ऐसे कई सनसनीखेज खुलासे किये हैं.
पुलिस द्वारा पूछताछ के दौरान बनाये गये वीडियो फुटेज के माध्यम से आतंक का सच सामने आया है. वीडियो फुटेज में पूछताछ के दौरान इम्तियाज ने बताया कि उसे गांधी मैदान के पास एक होटल के पास बम रखना था. हालांकि, उसने उस होटल का नाम पता होने से इंकार किया. उसने बताया कि उसे और उसके साथियों को रांची में इस सीरियल बम ब्लास्ट को लेकर प्रशिक्षण दिया गया और बम सौंपे गये.
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इम्तियाज ने सभी नामों की जानकारी दी, जिन्हें प्रशिक्षण के बाद पटना में ब्लास्ट के लिए रांची से भेजा गया. वीडियो फुटेज में वह पुलिसकर्मियों से पानी के साथ दवा की मांग कर रहा है.
पुलिसकर्मियों द्वारा उसे पहले पानी पीने की सलाह दी जा रही है. पुलिस ने इम्तियाज की एक- एक बात की रेकॉर्डिग की है, जिसमें नवयुवकों को बरगला कर आतंक की ट्रेनिंग के दौरान उत्तेजक भाषण, उन्मादी साहित्य की जानकारी देने की बात शामिल है. उसने बताया कि रांची में बड़े स्तर पर आइएम की ओर से युवकों को लाकर प्रशिक्षित किया जा रहा था. उसने यह भी बताया कि तहसीन उर्फ मोनू व हैदर ने मिल कर पटना सीरियल बम ब्लास्ट की साजिश रची थी. इसके लिए उन्हें पाकिस्तान से यासीन भटकल का भाई दिशा-निर्देश दे रहा था.
वे जो टाइम बम लेकर पटना आये थे, वे मुजिबुल के लॉज में ही बने थे. सात दिनों तक पूछताछ के बाद इम्तियाज को रेल पुलिस ने उसे जेल वापस भेज दिया है. अब उसे गांधी मैदान थाने में दर्ज दूसरी प्राथमिकी में रिमांड पर लेने की प्रक्रिया पुलिस ने शुरू की है. इम्तियाज आइएम से लंबे समय से जुड़ा है.
रियाज भटकल ने सितंबर में किया था बॉर्डर की रेकी
इंडियन मुजाहिद्दीन के गिरफ्तार आतंकी यासीन भटकल का भाई रियाज भटकल सितंबर माह में बॉर्डर की रेकी की थी. इस दौरान वह भारत-नेपाल बॉर्डर से सटे (नेपाल में) एक गांव पहुंचा था. उसके साथ तीन अन्य लोग भी थे. रियाज किस मकसद से सीमावर्ती इलाके में पहुंचा था, इसका अब तक खुलासा नहीं हो सका है. बताया जाता है कि वह सितंबर माह की पहली सप्ताह में इस गांव पहुंचा था. खुफिया एजेंसी को भी रियाज के आने की सूचना मिली थी पर तब तक वह इलाका छोड़ चुका था.
खुफिया सूत्रों की मानें, तो रियाज तीन से पांच सितंबर के बीच बॉर्डर इलाके के एक गांव में आया था. वह काठमांडू से हवाई जहाज से जनकपुर पहुंचा था. फिर चार पहिया वाहन से अपने दो अन्य साथियों के साथ उक्त गांव गया.  
-एजेंसी

मायावती के भाई का 400 करोड़ रु. IT ने किया रिलीज

नई दिल्ली 
बसपा सुप्रीमो मायावती को एक और राहत मिली है। आयकर विभाग ने फिक्स डिपोजिट में जमा 400 करोड़ रुपए रिलीज कर दिए हैं। यह रकम मायावती के भाई आनंद कुमार और उनके ग्रुप ऑफ कंपनीज की है। आयकर विभाग ने रकम को वैध ठहराया है। आयकर विभाग ने जून में रकम को जब्त कर लिया था। आनंद कुमार ने जब टैक्स चुका दिया तो रकम को वैध घोषित कर दिया गया। इस मामले से जुड़ी पूरी जांच बंद कर दी गई है। अब मायावती के भाई अपनी पसंद के वेंचर में इस रकम को निवेश कर सकते हैं। कुमार, नोएडा और दिल्ली में करीब दर्जनभर रजिस्टर्ड कंपनियां चलाते हैं।
सीबीआई ने हाल ही में मायावती के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला बंद कर दिया था। 27-29 जून को आयकर विभाग की टीम ने यूपी के मेडिकल कॉलेज, कौशांबी के होटल सहित 27 ठिकानों पर छापे मारे थे। छापे के दौरान असामान्य ट्रांजेक्शन का खुलासा हुआ था।
छापे की कार्यवाही के दौरान पता चला कि सालाना 22 लाख रुपए इनकम घोषित करने वाले 22 साल के एक युवक ने होटेलियर के वेंचर में 10 करोड़ रुपए निवेश किए थे। हालांकि कुमार ने दावा किया कि उनके पास काला धन नहीं है। उन्होंने चुकाए गए टैक्स को सबूत के रूप में पेश किया। चार महीने बाद आयकर विभाग ने कुमार की दलीलें स्वीकार कर लीं।
-एजेंसी

शनिवार, 2 नवंबर 2013

...तो आओ इस दीवाली नए सिरे से प्रार्थना करें


( लीजेण्‍ड न्‍यूज़ विशेष)
दो खण्‍डों वाले 'कृष्‍ण यजुर्वेद' से संबंधित 'उपनिषद' में भगवान सूर्य की उपासना करते हुए महर्षि सांकृति कहते हैं-
असतो मा सद्गमय, 
तमसो मा ज्योतिर्गमय, 
मृत्योर्मा अमृतं गमय
हे सूर्यदेव! हमें असत्‍य से सत्‍य की ओर, अन्धकार से प्रकाश की ओर और मृत्यु से अमृत की ओर ले चलो।
इसका उत्‍तर देते हुए भगवान सूर्य ने कहा था- योगकर्म को समझते हुए सदैव अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।'
योग की ओर प्रवृत्त होने पर, अन्त:करण दिन-प्रतिदिन समस्त भौतिक इच्छाओं से दूर हो जाता है। साधक लोक-हित के कार्य करते हुए सदैव हर्ष का अनुभव करता है। वह सदैव पुण्यकर्मों के संकलन में ही लगा रहता है। दया, उदारता और सौम्यता का भाव सदैव उसके कार्यों का आधार होता है।
प्रश्‍नोत्‍तर के रूप में महर्षि सांकृति एवं भगवान आदित्‍य के बीच हुए इस संवाद का उद्देश्‍य तब जो भी रहा हो लेकिन आज जब हम वर्ष 2013 की दीपावली मना रहे हैं तो इसकी बहुत जरूरत महसूस हो रही है।
अगले साल लोकसभा चुनाव होने जा रहे हैं और उससे पूर्व राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्‍ली सहित कुछ राज्‍यों में विधानसभा चुनाव होने हैं।
चुनावों का यह एक ऐसा दौर है जब आम आदमी राजनीति का वीभत्‍स रूप देखने को अभिशप्‍त है। वह उन्‍हीं लोगों, उन्‍हीं पार्टियों में से किसी का चुनाव करने को मजबूर है जिन्‍होंने राजनीति को भयावह बना दिया है।
महंगाई, भ्रष्‍टाचार, अनाचार और दुराचार अपने चरम पर हैं लेकिन राजनेता इस स्‍थिति के लिए एक-दूसरे को जिम्‍मेदार ठहराकर अपना उल्‍लू सीधा करने में लगे हैं।
जनसामान्‍य की किसी स्‍तर पर सुनवाई नहीं हो रही क्‍योंकि विशिष्‍टजनों ने जैसे पूरे देश और इसकी तथाकथित लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था को बंधक बना लिया है। वह लोकतंत्र की, संविधान की, अपने अधिकार और कतर्व्‍यों की, संवैधानिक संस्‍थाओं के दायित्‍वों की तथा आम आदमी की गरीबी एवं अमीरी की परिभाषा अपनी सुविधानुसार गढ़ रहे हैं।
आम आदमी के लिए जीवन बोझ बन गया है। उसका सारा सामर्थ्‍य और सारी योग्‍यता अपने व परिवार के लिए जरूरी संसाधनों का इंतजाम करने में जाया हो रही है। निजी हितों को पूरा करने के फेर में वह देशहित को पूरी तरह तिलांजलि दे चुका है।
वह इस लायक भी नहीं रहा कि अपने लिए ''असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्मा अमृतं गमय'' की भगवान से प्रार्थना कर सके।
खोखली तरक्‍की और खोखले दंभ ने उसे कहीं का नहीं छोड़ा.....और उसकी इसी दयनीय दशा का लाभ मुठ्ठीभर नेता उठा रहे हैं।
66 साल बीत गये देश को स्‍वतंत्र हुए लेकिन आम आदमी अब तक सही मायनों में स्‍वतंत्रता का स्‍वाद चखने को तरस रहा है।
संविधान प्रदत्‍त अधिकारों का झुनझुना थामे यदि वह लोकतंत्र के फटे हुए ढोल को पीटकर राजनेताओं के कानों तक अपनी आवाज पहुंचाने का प्रयत्‍न करता है तो उसे लठिया दिया जाता है। उस पर मुकद्दमे लाद दिए जाते हैं। अदालतों के चक्‍कर काटने को उसकी एक जिंदगी कम पड़ जाती है।
नेताओं को उनके कर्तव्‍यों का भान कराने की कोशिश करता है तो दलगत राजनीति का शिकार बना दिया जाता है। समूची राजनीति को सांप्रदायिक बना डालने वाले ही धर्मनिरपेक्षता और धर्मसापेक्षता का खेल अपने बनाये नियमों के तहत खेल रहे हैं।
खुद को देश का भाग्‍य विधाता मानने वालों ने इस देश की उत्‍सवप्रेमी जनता को न रोने लायक छोड़ा है, न हंसने लायक। दीवाली अब उसका दिवाला निकालने आती है तथा होली खून के आंसू रुलाती है।
वक्‍त आ गया है कि असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्मा अमृतं गमय... की प्रार्थना और भगवान सूर्य द्वारा उसके संदर्भ में दिए गये उत्‍तर का गूढ़ार्थ समझा जाए तथा आज के परिपेक्ष्‍य में उस पर अमल किया जाए।
जब तक ऐसा नहीं किया जायेगा तब तक हर साल दीवाली और अंधियारी, और काली तथा और भयावह होती जायेगी।
हम दीवाली और होली मनाने की औपचारिकता तो निभायेंगे लेकिन इलेक्‍ट्रॉनिक दीपकों का झूठा उजाला हमारी आंखों की रोशनी छीनता रहेगा।
.......जब असत्‍य से सत्‍य के मार्ग पर चलने का शक्‍ति नहीं होगी....जब अंधकार से प्रकाश की ओर जाने में आंखें चुंधियाएंगी........तो किस तरह मृत्‍यु से अमरता की ओर ले जाने का वरदान मांगोगे। क्‍या करोगे जीकर। जीवन जीने का उल्‍लास तभी तक है जब तक उत्‍साह है। जब तक उत्‍साह है, तब तक हर दिन त्‍यौहार है। हर पल दीवाली और हर दिन होली है।
...तो आओ...नए सिरे से प्रार्थना करें कि हे ईश्‍वर... हमें आज के इस कठिन दौर से बाहर निकलने, राजनेताओं के षड्यंत्रों से मुक्‍ति पाने तथा देश को उनसे बचाये रखने की युक्‍ति दे।
हमें सामर्थ्‍य दे कि हम ''सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु  निरामया:.....को सार्थक कर एक ऐसी उपनिषद को रच सकें जो हमें हर दिन होली और हर रात दीवाली का अहसास करा पाए।

गुरुवार, 31 अक्टूबर 2013

विश्‍वभर में एक जैसी है मर्दों की ये आदत

पुरुषों की महिलाओं को घूरने की आदत सदियों पुरानी है, पर घूरते समय वे क्या देखते हैं। इसका जवाब एक आई-ट्रेकिंग तकनीक ने दिया है। आई-ट्रेकिंग तकनीक से महिला-पुरुष के एक-दूसरे को घूरने पर अध्ययन कर रहे वैज्ञानिकों ने दिलचस्प खुलासे किए हैं। अमरीका के यूनिवर्सिटी ऑफ नेब्रास्का-लिनकॉल्न के अध्ययनकर्ताओं के अनुसार पुरुष महिलाओं की आंखों और चेहरे को घूरने में कम समय जाया करते हैं। वहीं, महिलाएं भी अन्य महिलाओं को घूरते समय ज्यादा समय चेहरे से नीचे की बॉडी को देती हैं।
क्या घूरते हैं पुरुष?
अध्ययन के मुताबिक पुरुष महिलाओं की आंखों और चेहरे को घूरने में बेहद कम समय लगाते हैं। जबकि महिलाओं के वक्ष स्थल और कमर के आस-पास के हिस्से को घूरने में तुलनात्मक रूप से ज्यादा समय देते हैं।
अध्ययन यह भी बताता है कि पुरुष औसत से बड़े वक्ष स्थल व हिप्स और पतली कमर वाली महिलाओं को और भी ज्यादा देर तक घूरते हैं।

सोमवार, 28 अक्टूबर 2013

संदिग्‍ध मौत मर रहे हैं वैज्ञानिक, सो रही है सरकार

कुछ समय पहले ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े एक वैज्ञानिक की मौत ने पूरे विश्व का ध्यान अपनी ओर खींचा था परन्तु बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि भारत के सर्वोच्च प्रतिष्ठित परमाणु प्रतिष्ठान बार्क में पिछले तीन वर्ष के दौरान नौ भारतीय वैज्ञानिकों की संदिग्‍ध मौत हो चुकी है।
ईरान की सरकार ने तो अपने वैज्ञानिक की मौत से सबक लेकर सभी वैज्ञानिकों को कड़ी सुरक्षा उपलब्ध कराई परन्तु भारतीय संस्थान में स्थिति इसकी ठीक उलट है। सबसे दुखद बात तो यह है कि भारतीय जनता को इसकी कानों-कान खबर तक नहीं है।
यहीं नहीं, केरल पुलिस तथा इंटेलीजेंस ब्यूरो भी इन वैज्ञानिकों पर गाहे-बगाहे झूठे आरोप लगाने से नहीं चूकते। अप्रैल 2010 की घटना बहुत कम लोगों को याद होगी जब दो शीर्ष स्तर के वैज्ञानिकों को केरल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और लम्बे समय तक जेल में रखने के बाद उनके खिलाफ सबूत ना मिलने के कारण रिहा कर दिया था।
हाल ही हुई ताजा घटना में भाभा परमाणु रिसर्च सेंटर (बार्क) में काम करने वाले दो प्रमुख इंजीनियर्स के. के. जोश तथा अभिश शिवम के शव इसी माह की सात तारीख को विशाखापट्टनम नौसैनिक यार्ड के पास एक रेलवे पटरी पर पड़े हुए पाए गए थे। दोनों इंजीनियर भारत द्वारा स्वदेशी तकनीक से विकसित परमाण्विक पनडुब्बी पर काम कर रहे थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक दोनों की हत्या जहर देकर की गई थी, हत्या के बाद उनके शवों को रेल की पटरी पर लाकर पटका गया था।

रविवार, 27 अक्टूबर 2013

2014 के राजनीतिक विदूषक

(लीजेण्‍ड न्‍यूज़ विशेष)
मेरी मां ने मुझसे हाल ही में एक रात को कहा कि राजनीति किसी तेज घातक जहर की तरह है।
मेरी मां की जब संसद में अचानक तबियत खराब हो गई और उन्‍हें हॉस्‍पीटल ले जाया जा रहा था तो उनकी आंखों में आंसू थे। उन्‍होंने मुझसे कहा कि जिस खाद्य सुरक्षा कानून के लिए मैं इतने दिनों से लड़ रही थी, आज उसी के बिल को पास कराने के लिए मैं वोटिंग नहीं कर पा रही। मैं हॉस्‍पीटल जाने से पहले वोटिंग करना चाहती हूं।

मेरी मां ने मुझसे कहा कि मेरी दादी को मार दिया गया, मेरे पापा को मार दिया गया और इसी तरह कुछ लोग मेरी हत्‍या करना चाहते हैं।
तीन अलग-अलग मौकों पर लेकिन एक ही उद्देश्‍य से राहुल गांधी द्वारा दिए गये बयानों के हिस्‍से हैं ये।
इसमें कोई दो राय नहीं कि राजनीति का मकसद ही सत्‍ता पर काबिज होना होता है और उसके लिए आमजन का भावनात्‍मक दोहन भी सारे राजनीतिक दल अपने-अपने तरीकों से करते हैं लेकिन 2014 के लोकसभा चुनावों से पूर्व राजनीति का जो रूप सामने आ रहा है, वह किसी ऐसे विदूषक का है जो हंसाता कम है और डराता ज्‍यादा है।
राहुल गांधी की इन दिनों जो बॉडी लेंग्‍वेज है और जिस तरह वह एग्रेसिव होकर बोलते हैं, जरा कल्‍पना करके देखिए कि क्‍या देश को कोई ऐसा पीएम रास आयेगा।

शुक्रवार, 25 अक्टूबर 2013

मथुरा से तय होगा मुलायम का PM बनना!

लीजेण्‍ड न्‍यूज़ विशेष
 अपनी आंखों में प्रधानमंत्री बनने का सपना संजोए बैठे समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने सोमवार को उत्‍तर प्रदेश सरकार के मंत्रियों को इस आशय की चेतावनी दी है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में जिन मंत्रियों के क्षेत्र से पार्टी प्रत्‍याशी को हार का मुंह देखना पड़ेगा, उन्‍हें अपने राजनीतिक भविष्‍य का खुद ही फैसला करना होगा। मुलायम सिंह का स्‍पष्‍ट संकेत यह था कि हार का मुंह देखने के लिए वहां से ताल्‍लुक रखने वाले मंत्री जिम्‍मेदार माने जायेंगे और इसके लिए उन्‍हें अपना पद तक गंवाना पड़ सकता है।
मुलायम सिंह ने साफ कहा कि उनके पास ऐसी रिपोर्ट है जिससे पता लगता है कि कई मंत्री ठीक से काम नहीं कर रहे हैं।
सपा मुखिया की रिपोर्ट पर तो किसी को कोई शक क्‍यों होने लगा लेकिन जिन लोकसभा क्षेत्रों को लेकर अभी से शक है, उनके लिए पार्टी क्‍या कर रही है?
महत्‍वपूर्ण बात यह है कि इन क्षेत्रों से प्रदेश सरकार में किसी की नुमाइंदगी तो दूर, विधायक तक नहीं है।
अब बड़ा सवाल यहां यह खड़ा होता है कि ऐसी जगहों पर शिकस्‍त मिलने का ठीकरा समाजवादी पार्टी किसके सिर फोड़ेगी, किसे अपने राजनीतिक भविष्‍य पर सोचने को बाध्‍य करेगी और कैसे यहां अपनी जमीन तैयार करेगी।
यदुवंशी श्रीकृष्‍ण की जन्‍मस्‍थली मथुरा का नाम एक ऐसे ही जिले के रूप में दर्ज है जहां आज तक समाजवादी पार्टी अपना कोई जनाधार खड़ा करने में सफल नहीं हुई।

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