बुधवार, 6 फ़रवरी 2013

पाकिस्‍तान एक फर्जी देश: काटजू

प्रेस परिषद् के अध्यक्ष मार्कण्डेय काटजू की नज़र में पाकिस्तान एक 'फ़र्ज़ी' देश है जिसे ब्रितानियों ने बनावटी द्विराष्ट्रीय सिद्धांत के तहत बनाया.
दिल्ली विश्व विद्यालय में एक परिचर्चा के तहत बोलते हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कण्डेय काटजू ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि अगले 15-20 वर्षों में भारत व पाकिस्तान फिर एक हो जाएंगे और एक मज़बूत, शक्तिशाली, धर्म निरपेक्ष एवं आधुनिक विचारों वाली सरकार सत्ता में आयेगी.
उन्होंने हाल में पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा भारतीय सैनिकों का सिर काटे जाने के बाद संचार माध्यमों द्वारा युद्दोन्माद पैदा किए जाने की निंदा की.
ब्रितानियों ने मूर्ख बनाया

मंगलवार, 5 फ़रवरी 2013

2जी मामले में अटार्नी जनरल ने किया बड़ा खुलासा

अटार्नी जनरल जी ई वाहनवती ने 2जी मामले की जांच कर रहे संसदीय दल से आज कहा कि 2008 में स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए आवेदन आमंत्रित करने के मामले में जिस प्रेस नोट को उन्होंने मंजूरी दी थी, उसे जारी करने से पहले बदल दिया गया था।
सूत्रों ने कहा कि टूजी घोटाला मामले में संयुक्त संसदीय के समक्ष उपस्थित होने वाले वाहनवती ने कहा कि दूरसंचार मंत्रालय ने उन्हें एक प्रेस नोट दिखाया था, जिसे उन्होंने मंजूरी दी थी। समझा जाता है कि उन्होंने समिति से कहा कि कुछ दिनों बाद जारी किए गए प्रेस नोट से कुछ बातें गायब थीं।

सोमवार, 4 फ़रवरी 2013

मुखबिरों के झूठ से इंटेलीजेंस एजेंसियां परेशान

मुखबिरों से मिल रही गलत सूचनाओं की वजह से भारत की खुफिया एजेंसियों के सामने समस्या खड़ी हो गई है। पिछले कुछ वक्त से भारत-पाकिस्तान बॉर्डर से खुफिया एजेंसियों को जिस तरह की गलत सूचनाएं मिल रही हैं, उससे यह शंका पैदा हो गई है कि कहीं मुखबिर सिर्फ पैसा लेने के लिए तो मनगढ़ंत बातें बता रहे हैं?
सूत्रों के मुताबिक 8 जनवरी को लांस नायक हेमराज का सिर काटे जाने की घटना पर इंटेलिजेंस ब्यूरो और मिलिटरी इंटेलिजेंस ने एक जैसी रिपोर्ट बनाई थी। एजेसियों की खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद ने घटना के कुछ दिन पहले पीओके में आकर भारतीय जवानों के खिलाफ जहर उगला था। मगर बाद में पता चला कि यह खबर पुख्ता नहीं थी। दोनों इंटेलिजेंस एजेंसियों को यह जानकारी मुखबिरों से मिली थी। काफी सालों से इंटेलिजेंस सर्विसेज से जुड़े एक सीनियर ऑफिशल का मानना है कि दोनों एजेसियों को एक ही सोर्स से जानकारी मिली थी।

ताज साहित्य उत्सव में मैस्‍से ने कहा शोभा डे को पोर्न लेखिका


रेजिनाल्‍ड मैस्‍से 
शोभा डे
ताजसाहित्य उत्सव में मशहूर एनआरआई लेखक रेजिनाल्‍ड मैस्‍से ने लेखिका शोभा डे के बारे में विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि शोभा डे खूबसूरत हैं, स्‍टाइलिश कपड़े पहनती हैं, लेकिन गंभीर लेखक नहीं हैं। वह सॉफ्ट पोर्नोग्राफी लिखती हैं। उनके लेखन में साहित्‍यिक बातें नहीं होती।
मैस्से के लिए उत्सव के समापन के बाद भी सेंट जोंस कॉलेज में विशेष व्‍याख्‍यान आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा कि स्‍टाइल और लुक का लाभ लेना शोभा डे की कला है। सॉफ्ट पोर्नोग्राफी किसी तरह का साहित्‍य नहीं हो सकता है। यदि आयोजन समिति के लोग यदि उनके संपर्क में हों, तो मेरा यह संदेश जरूर पहुंचा दें।
उन्होंने कहा कि भारतीय लेखकों में अहंकार समाया हुआ है। वे मजदूर की तरह लेखक हैं। इसलिए, लेखकों को अपने बौद्धिक संपदा अधिकार के संरक्षण के लिए ट्रेड यूनियन बनाना चाहिए। कविता और दर्शन (फिलॉसफी) अलग-अलग चीजें हैं। कविता में फिलॉसफी शामिल करना बेहद गलत है।
उन्‍होंने अरविंदो घोष का उदाहरण देते हुए कहा कि घोष की कविताएं इसी वजह से क्‍लिस्‍ट हैं। सबसे अच्‍छी कविताएं वही होती हैं, जो लोगों तक आसानी समझ में आ सके।

रविवार, 3 फ़रवरी 2013

क्या है PIL (जनहित याचिका)

देश के हर नागरिक को संविधान की ओर से छह मूल अधिकार दिए गए हैं। ये हैं : समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के खिलाफ अधिकार, संस्कृति और शिक्षा का अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार और मूल अधिकार पाने का रास्ता।

अगर किसी नागरिक (आम आदमी) के किसी भी मूल अधिकार का हनन हो रहा है, तो वह हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मूल अधिकार की रक्षा के लिए गुहार लगा सकता है। वह अनुच्छेद-226 के तहत हाई कोर्ट का और अनुच्छेद-32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है।

अगर यह मामला निजी न होकर व्यापक जनहित से जुड़ा है तो याचिका को जनहित याचिका के तौर पर देखा जाता है। पीआईएल डालने वाले शख्स को अदालत को यह बताना होगा कि कैसे उस मामले में आम लोगों का हित प्रभावित हो रहा है।

अगर मामला निजी हित से जुड़ा है या निजी तौर पर किसी के अधिकारों का हनन हो रहा है तो उसे जनहित याचिका नहीं माना जाता। ऐसे मामलों में दायर की गई याचिका को पर्सनल इंट्रेस्ट लिटिगेशन कहा जाता है और इसी के तहत उनकी सुनवाई होती है।

दायर की गई याचिका जनहित है या नहीं, इसका फैसला कोर्ट ही करता है।

पीआईएल में सरकार को प्रतिवादी बनाया जाता है। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट सरकार को उचित निर्देश जारी करती हैं। यानी पीआईएल के जरिए लोग जनहित के मामलों में सरकार को अदालत से निदेर्श जारी करवा सकते हैं।

शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2013

यूपी के स्कूल में लादेन ने मांगा जॉब !

साल 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में अमरीकी हमले में दुनिया का सबसे खूंखार आतंकी और अल कायदा का सरगना ओसामा बिन लादेन मारा गया था पर विश्वास करें या नहीं लेकिन वह उन लाखों उम्मीदवारों में शामिल है जिसने यूपी के प्राइमरी स्कूल में टीचर की जॉब के लिए एप्लाई किया है।
ओसामा ने अपने पिता का नाम बिल क्लिंटन बताया है, जो अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति हैं। आगरा के ओसामा ने अकेले जॉब के लिए एप्लाई नहीं किया है। अयोध्या के राम जन्मभूमि के रहने वाले जय श्रीराम ने भी जॉब के लिए एप्लाई किया है। जय श्रीराम ने पिता का नाम दशरथ बताया है।
जय श्रीराम एग्जाम में हमेशा अव्वल आया है। उसने हर एग्जाम में 100 फीसदी अंक पाए हैं।

सोमवार, 28 जनवरी 2013

छोटे भाई की बड़ी 'माया' पर उठे सवाल

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के छोटे भाई के कंट्रोल वाली कुछ कंपनियों ने करीब 760 करोड़ रुपए के कैश ट्रांजैक्शन किए हैं। इतनी ज्यादा रकम के स्रोत को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इकनॉमिक टाइम्स ने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज को फाइल किए गए डॉक्युमेंट्स की जांच की है। इससे पता चला है कि आनंद कुमार की कंट्रोलिंग वाली 7 में से सिर्फ एक कंपनी का ठोस बिजनेस है। बाकी कंपनियां 2007 में बहुजन समाजवादी पार्टी (बीएसपी) की चीफ मायावती के मुख्यमंत्री बनने के बाद बनाई गई थीं।
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