रविवार, 7 अप्रैल 2013

डैम में पानी नहीं है तो क्या उसमें पेशाब कर दें?

मुंबई। लोकसभा चुनावों से पहले बड़बोले बयानों का दौर जोरों पर है जबकि ऐसे समय जिम्मेदार पद पर बैठे राजनेताओं से मर्यादा बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने राज्य में सूखे की हालत पर आज ऐसा बयान दिया है कि सुनने वाले भी शर्मशार हो जाएं।
अजित पवार एनसीपी नेता और केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार के भतीजे हैं।

शुक्रवार, 5 अप्रैल 2013

हमारा 'पप्‍पू' पास क्‍यों नहीं होता ?

डिस्‍क्‍लेमर: हमारे 'पप्‍पू' और 'पापे' का इस देश के किसी जिंदा या मुर्दा नेता से कोई ताल्‍लुक नहीं है। यदि इनके क्रिया-कलाप किसी नेता से मेल खाते हैं, तो यह सिर्फ इत्‍तिफाक हो सकता है। जिस तरह देश की जनता किसी नेता के आचरण को गंभीरता से नहीं लेती, इसी तरह हमारे 'पप्‍पूजी' और 'पापेजी' के आचरण को भी गंभीरता से न लिया जाए। ये दोनों सिर्फ विपक्ष के सहयोग से जनता का मनोरंजन कर रहे हैं।
(लीजेण्‍ड न्‍यूज़ विशेष)
हमारा 'पप्‍पू' एक बार फिर फेल हो गया। कोई कहता है कि 'पप्‍पू'

गुरुवार, 4 अप्रैल 2013

भूखे रहकर भेड़िये नहीं भगाए जाते अरविंद

नयी दिल्‍ली। आम आदमी पार्टी के संस्‍थापक और सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल के अनशन का 13वां दिन है। उनकी हालत नाजुक होती जा रही है और उनकी आंत सिकुड़ने लगी है। मालूम हो कि अरविंद केजरीवाल दिल्‍ली में बढ़े हुए बिजली और पानी के बिल का विरोध कर रहे हैं। केजरीवाल के अनशन समाप्त करने को लेकर अलग अलग लोगों के बयान आ रहे हैं मगर वह अनशन खत्म करने को तैयार नहीं हैं। इसके चलते उनकी सेहत में लगातार गिरावट आ रही है।

मंगलवार, 2 अप्रैल 2013

बड़ा सवाल: काला धन आखिर है कितना?

इस मामले पर रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी जिन 3 एजेंसियों को दी गई थी उनमें आपस में ही इस बात को लेकर मतभेद है कि काले धन का कारोबार आखिर है कितना बड़ा ?
NIPFP के मुताबिक 10 लाख करोड़
NIFM के मुताबिक 12 लाख करोड़
BJP के मुताबिक 462 अरब डॉलर
काला धन वापस लाने या फिर इस पर रोक लगाने की सरकार की कोशिशें मुश्किल में पड़ सकती हैं क्योंकि इस मामले पर रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी जिन 3 एजेंसियों को दी गई थी उनमें आपस में ही इस बात को लेकर मतभेद है कि काले धन का कारोबार कितना बड़ा है।
बाबा रामदेव के आंदोलन और विपक्षी पार्टियों के हंगामे में जिस तरीके से काले धन की बड़ी तस्वीर पेश की गई, सरकारी दस्तावेजों में ये तस्वीर धुंधली होती दिख रही है। इसकी वजह है कि काले धन के कारोबार को लेकर भारी मतभेद।

सोमवार, 1 अप्रैल 2013

यूपी को चला रहे हैं साढ़े चार CM

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दकी ने आज आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था में कोई सुधार नहीं आया है क्योंकि प्रदेश में "एक से ज्यादा सत्ता के केन्द्र हैं।
आजमगढ़ में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की बैठक लेने आए पूर्व मंत्री ने कहा कि प्रदेश को जब साढ़े चार मुख्यमंत्री चला रहे हैं तो कानून-व्यवस्था कैसे सुधर सकती है।
उन्होंने कहा कि मेरे हिसाब से मुलायम सिंह यादव, आजम खान, शिवपाल सिंह यादव और राम गोपाल यादव प्रदेश के चार मुख्यमंत्री हैं, जबकि अखिलेश यादव आधे मुख्यमंत्री हैं। जब इतने मुख्यमंत्री हों तो प्रदेश में लोग कैसे भयमुक्त रह सकते हैं।

रविवार, 31 मार्च 2013

चरस और हिरोइन सप्‍लाई करते हैं बेनी: शिवपाल

लखनऊ। केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा और सपा नेताओं के बीच जुबानी जंग जारी है।
रविवार दोपहर काशी में समीक्षा बैठक के लिये पहुंचे लोक निर्माण मंत्री शिवपाल यादव ने कहा कि बेनी प्रसाद वर्मा हेरोइन और चरस के सप्लायर हैं। नशे की चीजों का स्मगलिंग करते हैं। वह सिगरेट में गांजा, चरस और स्मैक मिलाकर पीते हैं। हर वक्त नशे में रहते हैं।
गुस्से में दिख रहे शिवपाल ने कहा कि वह कांग्रेसियों में पुराने नशेड़ी हैं। भांग, गांजा और हेरोइन पीते और खाते हैं। देश के बाहर सप्लाई भी करते हैं। केंद्र सरकार नशेड़ी के बहकावे में है।

शुक्रवार, 29 मार्च 2013

दिवालिया होने को हैं मथुरा के कई एजुकेशनल ग्रुप

(लीजेण्‍ड न्‍यूज़ विशेष)
कभी केवल भांग, भजन, भोजन, द्वारिकाधीश, बिहारीजी और कृष्‍ण जन्‍मभूमि के लिए पहचाना जाने वाला विश्‍व प्रसिद्ध धार्मिक जनपद मथुरा जब देखते-देखते टेक्‍नीकल एजुकेशन के क्षेत्र में तेजी के साथ जगह बनाने लगा तब हो सकता है कि बहुत से लोगों को कोई खास आश्‍चर्य न हुआ हो लेकिन अब अगर यहां के कई नामचीन टेक्‍नीकल कॉलेज एकाएक दिवालिया हो जाएं तो शायद ही कोई आश्‍चर्यचकित हुए बिना रह पायेगा।
जी हां, चौंकिए मत। लीजेण्‍ड न्‍यूज़ के हाथ लगे दस्‍तावेज और विभिन्‍न सूत्रों से मिल रहीं अत्‍यंत भरोसेमंद जानकारियां कहती हैं कि कृष्‍ण की नगरी के कई बड़े टेक्‍नीकल इंस्‍टीट्यूट्स भारी आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे हैं। ये इंस्‍टीट्यूट्स लगभग दिवालिया होने के कगार पर हैं।
बताया जाता है कि ऐसे इंस्‍टीट्यूट्स में वो ग्रुप भी शामिल हैं जिनसे मथुरा की एक अलग पहचान बन गई थी और जिन्‍हें खड़ा करने में करोड़ों नहीं, अरबों की संपत्‍ति लगी।
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