शनिवार, 22 सितंबर 2012

सरकार है या शेखचिल्‍ली उवाच ?

कल प्रधानमंत्री का राष्‍ट्र के नाम पूरे 17 मिनट का संबोधन सुना। ना चेहरे पर कोई भाव, न किसी प्रकार का स्‍पंदन। आंखें जैसे एकदम ठहरी हुई। मुंह से शब्‍द जरूर निकल रहे थे पर कुछ इस तरह कि कोई जबरन बुलवा रहा हो। कोई स्‍क्रिप्‍ट सिर्फ पढ़ी जा रही हो।
सच तो यह है कि उनके चेहरे पर उतने भी भाव नहीं थे जितने कठपुतलियों को नचाते वक्‍त उनका सूत्रधार ले आता है।

शुक्रवार, 21 सितंबर 2012

100 करोड़ में कोयले की कालिख से निजात की कवायद

कोयले की कालिख से छुटकारा पाने के लिए बेचैन यूपीए सरकार अपना चेहरा चमकाने पर 100 करोड़ रुपये खर्च करेगी। भ्रष्टाचार के आरोपों से जूझ रही सरकार अपनी साफ-सुथरी छवि जनता के बीच लाने की योजना बना रही है।
टेलीविजन, रेडियो और प्रिंट मीडिया के जरिए ऐसा करने के लिए सरकार ने 100 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इस राशि का इस्तेमाल विज्ञापन एवं दृश्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी) सरकार के लिए एक मजबूत प्रचार अभियान चलाने के लिए करेगा। खबरों के मुताबिक, भारत निर्माण एडवर्टाइजर्स जो यूपीए सरकार की छवि निखारो अभियान का हिस्सा है, विज्ञापन में स्थानीय कलाकारों को उतारेगा। अन्य कॉरपोरेट की तरह सरकार भी नकारात्मक छवि से मुक्त होने के लिए ट्विटर और फेसबुक जैसे सोशल नेटवर्क साइटों का इस्तेमाल करेगी।

.... इस तरह अलग किये गये अन्‍ना और अरविंद

तो क्‍या दिग्‍विजय सिंह का अन्‍ना पर लगाये आरोप सही थे ? 
भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन चलाने वाले समाजसेवी अन्ना हजारे को अरविंद केजरीवाल के बीच फूट डलवाने में संघ का हाथ होने की बात सामने आ रही है। एक निजी चैनल के मुताबिक संघ प्रवक्ता राम माधव को यह काम सौंपा गया था कि वह अन्ना को उनकी टीम से अलग करवाएं। उद्योगपति सीताराम जिंदल को यह काम सौंपा गया था कि वह संघ के वरिष्ठ नेताओं और अन्ना के बीच बातचीत करवाएं।
जिंदल ने अन्ना को मनाया
सूत्रों के मुताबिक जिंदल पिछले पन्द्रह दिन में कई बार अन्ना के गांव रालेगण सिद्धी गए। जिंदल ने अन्ना को विश्वास में लिया कि अरविंद केजरीवाल का राजनीतिक बनाने का फैसला गलत है। सूत्रों के मुताबिक बाबा रामदेव और ऑर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने भी अन्ना और केजरीवाल को अलग करवाने में महत्वपूर्ण भूमिक निभाई। किरण बेदी और पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह का भी उनको सहयोग मिला।

50 लाख के चेक बाउंस पर श्रीश्री को नोटिस

चंडीगढ़ । आर्ट आफ लिविंग के सर्वेसर्वा श्रीश्री रविशंकर और उनके सात डायरेक्टर 50 लाख रुपये की अदायगी को लेकर बुरी तरह उलझ गए हैं। मोहाली के जिला एवं सत्र न्यायालय ने गुरुवार को श्रीश्री रविशंकर समेत 8 लोगों के खिलाफ चेक बाउंस की शिकायत के चलते उन्हें तीन अक्टूबर तक स्थिति स्पष्ट करने का नोटिस जारी किया है।
दाखिल याचिका में मोहाली के न्यू राजू टेंट हाउस के मालिक राजिंदर धालीवाल, सहगल टेंट हाउस, वीडियो व स्टिल फोटोग्राफी की कंपनी रेड फायर और बलवंत सिंह ने आरोप लगाया है कि श्रीश्री रविशंकर के 7 निदेशकों ने सोलन व शिमला में साल 2011 में महा सत्संग समारोह के भव्य आयोजनों के दौरान उन्हें लाखों रुपये की चपत लगाई।

गुरुवार, 20 सितंबर 2012

सनसीनखेज खुलासे करेगी 'डिप्लोमेटिक चैनल्स'

पूर्व विदेश सचिव के श्रीनिवासन ने एक सनसनीखेज खुलासा किया है। विदेश सचिव का पद छोड़ने के 17 साल बाद क्रिस श्रीनिवासन ने अपने संस्मरण "डिप्लोमेटिक चैनल्स" में यह खुलासा किया है।
रॉ ने किया था फोन टैप-
श्रीनिवासन के अनुसार भारत की खुफिया एजेंसी रॉ ने पाकिस्तान समर्थित असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ स्टेट (साउथ एशिया) रॉबिन रफेल तथा इस्लामाबाद में अमरीकी राजदूत के बीच टेलिफोन पर हुई वार्ता टैप की थी।
अमरीका ड्राफ्ट का समर्थन नहीं करने वाला-
इस बातचीत में स्पष्ट हो गया था कि अमरीका कश्मीर पर भारत के खिलाफ पाकिस्तान द्वारा संयुक्त राष्ट्र में पेश ड्राफ्ट मसौदे का समर्थन नहीं करने वाला है। यह पुस्तक जल्द ही लंदन में लॉन्च होने वाली है। कश्मीर पर प्रस्ताव सितंबर 1994 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की कमेटी की पहली बैठक में पेश किया था।

शनिवार, 15 सितंबर 2012

वाह मनमोहन! मांस निर्यात पर सब्सिडी और कपास पाबंद

विधानसभा चुनावों के लिए प्रचार अभियान में डटे गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को संप्रग सरकार द्वारा कथित तौर पर बूचड़खानों और मांस निर्यात में सब्सिडी देने का मामला उठाया।
मोदी ने यहां कहा कि केंद्र एक तरफ कपास के निर्यात पर प्रतिबंध लगाता है जिससे प्रदेश के किसानों को बेहद नुकसान होता है और दूसरी तरफ वह मांस निर्यात में सब्सिडी देता है।
उन्होंने कहा कि गुजरात के लोगों को गुमराह करने की बजाय

नोएडा एक्सटेंशन नाम की कोई जगह नहीं

सिर्फ बिल्डर्स के दिमाग की उपज है
NOIDA EXTENSION
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के रिकार्ड में नोएडा एक्सटेंशन नाम की कोई जगह ही नहीं है. नोएडा एक्सटेंशन तो बिल्डर्स के दिमाग की उपज है.
यही नहीं, बिल्डर्स ने नोएडा एक्सटेंशन के नाम से अपने फ्लैट ऊंचे दामों पर बेच डाले हैं. जिस जमीन पर नोएडा एक्सटेंशन को बिल्डर्स बसा रहे हैं, उसका नोएडा प्राधिकरण से भी कुछ लेना देना नहीं है.
नोएडा एक्सटेंशन के करीब दो दर्जन बिल्डर्स को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने ही ग्रुप हाउसिंग प्लॉट आवंटित किए हैं.
नोएडा एक्सटेंशन ने प्राधिकरण को काफी टेंशन दी है। प्राधिकरण के सीईओ रमा रमण का कहना है कि नोएडा एक्सटेंशन का नाम ‘ग्रेटर नोएडा वेस्ट’ होगा.
अब नोएडा एक्सटेंशन को ‘ग्रेटर नोएडा वेस्ट’ के नाम से ही जाना जाएगा.
इसके लिए प्राधिकरण एक प्रस्ताव बोर्ड में लेकर जाएगा. बोर्ड से प्रस्ताव पास होने के बाद प्राधिकरण के रिकॉर्ड में यह नाम दर्ज हो जाएगा.
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने दो साल पहले नोएडा व ग्रेटर नोएडा की सीमा पर ग्रुप हाउसिंग स्कीम लांच कर करीब दो दर्जन छोटे-बड़े बिल्डर्स को जमीन आवंटित की थी.
नोएडा, दिल्ली और एनसीआर के लोग ग्रेटर नोएडा में मकान खरीदने से कतराते हैं. वह नोएडा की प्रॉपर्टी को ग्रेटर नोएडा से काफी सुरक्षित और फायदे का सौदा मानते हैं लिहाजा बिल्डर्स ने इसका फायदा उठाया और नोएडा एक्सटेंशन का नाम दे दिया.
नोएडा शब्द जुड़ते ही खरीदार भ्रमित हो गए और उन्होंने जमकर फ्लैट बुक कराए जबकि हकीकत में इस क्षेत्र से नोएडा प्राधिकरण का कुछ भी लेना-देना नहीं है.
ग्रेनो प्राधिकरण ने जमीन आवंटित की है, सारी सुविधाएं ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण दे रहा है लेकिन बिल्डर्स नोएडा के नाम को भुना रहे हैं.
नोएडा एक्सटेंशन ने ग्रेनो प्राधिकरण के अफसरों को टेंशन भी बहुत दिया है. कभी किसानों का आंदोलन तो कभी कोर्ट के झमेले, या फिर एनसीआर प्लान बोर्ड से मास्टर प्लान 2021 की मंजूरी का मामला.
इस टेंशन से मुक्ति पाने के बाद ग्रेनो प्राधिकरण के सीईओ रमा रमण नोएडा एक्सटेंशन नाम सुनने को तैयार नहीं हैं.
उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि नोएडा एक्सटेंशन नाम की कोई जगह नहीं है, इस जगह का नाम ग्रेटर नोएडा वेस्ट होगा. प्राधिकरण अपने रिकॉर्ड में ग्रेटर नोएडा वेस्ट ही दर्ज करेगा.
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