गुरुवार, 11 अक्टूबर 2012

न घर न कार,ऐसे हैं CM माणिक सरकार

अगरतला। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार शायद देश के पहले ऎसे सीएम हैं जिनके पास न तो खुद का घर है और न ही कार। उनका एसबीआई में खाता है जिसमें 17 सितंबर तक सिर्फ 6 हजार 500 रूपए जमा थे। सरकार को जो सैलरी मिलती है वह भी पार्टी (सीपीआईएम)को दान कर देते हैं। इसके बदले उन्हें हर महीने भत्ते के रूप में पांच हजार रूपए मिलते हैं।

जन सत्याग्रहियों और सरकार के बीच हुआ समझौता

आगरा में जल, जंगल और जमीन को लेकर सरकार और सत्याग्रहियों के बीच समझौता हो गया है। केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने आगरा जाकर सत्याग्रहियों के साथ समझौता किया।
जिन बातों पर समझौता हुआ है उसमें खास है
- 4-6 महीने के भीतर राष्ट्रीय भूमि सुधार नीति बनेगी।
- कृषि भूमि और आवास भूमि पर अधिकार के लिए कानून बनाया जाएगा।
- जितने भी ज़मीन से जुड़े मुकदमे होते हैं उनके जल्द निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनेगी।

..तो वाड्रा मामले पर इसलिए चुप हैं मोदी जी

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार गांधी परिवार पर हमला बोल रहे हैं लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद पर लगे आरोपों पर वे चुप हैं। ऎसे में सवाल उठता है कि आखिर मोदी चुप क्यों हैं। एक समाचार पत्र के मुताबिक मोदी की इस चुप्पी की वजह है उनकी सरकार की ओर से डीएलएफ को सस्ती दर पर दी गई जमीन। समाचार पत्र के मुताबिक 2007 में गुजरात सरकार ने डीएलएफ को गांधीनगर में सस्ती रेट पर एक लाख स्कवेयर मीटर लैण्ड दी थी।
गुजरात कांग्रेस के सभी सांसदों और विधायकों ने पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को जून 2011 में एक ज्ञापन सौंपा था। इसमें कहा गया था कि बिना नीलामी के डीएलएफ को जमीन दे दी गई।

विकलांगों का भी पैसा डकार गए कानून मंत्री

फर्रुखाबाद से सांसद एवं देश के कानून मंत्री सलमान खुर्शीद और उनकी पत्नी लुईस खुर्शीद पर जालसाजी का बड़ा आरोप लगा है। आज तक न्यूज़ चैनल के स्टिंग आपरेशन के मुताबिक, कानून मंत्री के ट्रस्ट डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट को साल 2010 और 2011 में 1.39 करोड़ रुपए का सरकारी अनुदान मिला, जिसे फर्जी हस्ताक्षर और मुहर के सहारे हड़प लिया गया है। केंद्र सरकार से मिला यह अनुदान विकलांगों को ट्राई साइकिल, बैसाखी और सुनने की मशीन मुहैया कराने के लिए था।
इस मसले पर कानून मंत्री सहित कांग्रेस का कोई पदाधिकारी सामने नहीं आ रहा है। हालांकि कानून मंत्री ने चिट्ठी लिखकर सफाई दी है।

रविवार, 7 अक्टूबर 2012

फट चुका है लोकतंत्र का ढोल

प्रसिद्ध शायर बालस्‍वरूप राही का एक शेर कुछ यूं है-
आबरू क्‍यों किसी की लुट जाए ।
 देश है ये, कोई हरम तो नहीं ।।

लेकिन जब देश की ही आबरू दांव पर लगी हो तो क्‍या कहेंगे, क्‍या करेंगे?
क्‍या तमाशबीन बने रहेंगे सदा की तरह, या भांड़ों की उस जमात का हिस्‍सा बन जायेंगे जो अपने बुद्धि व विवेक को कभी किसी राजनीतिक दल के लिए गिरवीं रख देती है और कभी उसके सुप्रीमो की चापलूसी को ही सब-कुछ समझती है।
इस माह अगस्‍त में देश को स्‍वतंत्र हुए पूरे 65 साल हो गये। इन पैंसठ सालों में आम आदमी को न तो सम्‍मानपूर्वक जीने का हक मिला और न जरूरतें पूरी करने लायक रोजी-रोजगार। कानून की किताबें लगता है जैसे सामर्थ्‍यवानों की हिफाजत के लिए लिखी गई हैं और संविधान में दर्ज आम आदमी के अधिकार की बातें किस्‍से-कहानियां बन चुकी हैं।

हम हो रहे कंगाल लेकिन विधायक मालामाल

आम आदमी बढ़ती महंगाई से परेशान हैं। हर महीने मिलने वाले वेतन से परिवार का खर्चा चलाना आम आदमी के लिए मुश्किल हो रहा है लेकिन उसी आम आदमी की ओर से चुने जाने वाले जन प्रतिनिधि दिन-ब-दिन माला माला होते जा रहे हैं। दस राज्यों के 1 हजार 75 विधायकों की इनकम के आंकलन के मुताबिक एक विधायक के घर की इनकम आम आदमी के पांच सदस्यों के परिवार की इनकम से कहीं ज्यादा है।
एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म के मुताबिक आम आदमी और विधायक की इनकम में सबसे ज्यादा अंतर उत्तर प्रदेश में है। विधायक और उसके परिवार की सालाना औसत इनकम 14.6 लाख है। सामान्य परिवार की औसत आय से यह 10 गुना ज्यादा है। सामान्य व्यक्ति की सालाना औसत आय 1.3 लाख है। यूपी के अलावा पंजाब,असम और तमिलनाडु में भी विधायकों और आम आदमी की इनकम में जबरदस्त फर्क देखा गया है।

गुरुवार, 4 अक्टूबर 2012

कहीं मार तो नहीं दिया प्रकाशानंद ?

यौन उत्‍पीड़न के 20 मामलों में टेक्सास की हेज काउन्टी ज्यूरी से 18 महीने पहले 14 वर्ष की सजा प्राप्‍त होने के बाद फरार हुए तथाकथित धार्मिक गुरू प्रकाशानंद सरस्‍वती के बारे में अमेरिका के संघीय अधिकारी इस आशय का अनुमान लगा रहे हैं कि वह अपने धार्मिक अनुयायियों की मदद से भारत भाग आया है। उनका यह अनुमान काफी हद तक ठीक भी है लेकिन 'लीजेण्‍ड न्‍यूज़' ने जब इस बावत और पड़ताल की तो चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं।
कभी स्‍वामी प्रकाशानंद सरस्‍वती के नजदीक रहे सूत्रों पर भरोसा करें तो यह भी संभव है कि उसकी हत्‍या कर दी गई हो।
इन सूत्रों के मुताबिक जब मार्च 2011 के दौरान टेक्सास में प्रकाशानंद पर एक के बाद एक यौन उत्‍पीड़न के 20 आरोप लगाये गये तो उनसे जुड़ी वृंदावन व मथुरा की धार्मिक संस्‍थाओं के संचालक काफी परेशान हो गये थे। इन लोगों ने तभी से प्रकाशानंद को लेकर षड्यंत्र बना लिया था और उसके अनुसार योजना पर अमल करते रहे।
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