मंगलवार, 3 जुलाई 2012

WOW CM साहब : न जन का मान, न तंत्र का भान

लोहिया को अपना आदर्श और खुद को धरती पुत्र कहलाने वाले मुलायम सिंह के पुत्र का यह कैसा समाजवाद है जो जनप्रतिधियों को जनता के पैसों से  मौज कराने का हिमायती है।
एक ओर जहां आम जनता महंगाई व भ्रष्‍टाचार से त्रस्‍त है और कानून-व्‍यवस्‍था की बदहाली ने उसका जीना हराम कर रखा है वहीं दूसरी ओर अखिलेश सरकार के अजीबो-गरीब फैसले ''जले पर नमक छिड़कने'' की कहावत को चरितार्थ करते नजर आते हैं।

शनिवार, 30 जून 2012

अबू जंदाल: सिर्फ आतंकी या कुछ और..

ऐसा लगता है कि हमारे मंत्रीगण अधिकांश मामलों और विशेषकर पाकिस्‍तान से जुड़े मुद्दों पर या तो अपनी बुद्धि व विवेक का इस्‍तेमाल किये बिना अमेरिका की लिखी हुई स्‍क्रिप्‍ट पढ़ते हैं या फिर वह इतनी अक्‍ल भी नहीं रखते जितनी कि उच्‍च पदों पर आसीन लोगों के लिए जरूरी होती है।

गुरुवार, 28 जून 2012

नेहरू की विरासत को समर्पित ....''जब जनता की सहनशक्‍ित जवाब दे....

आज कुछ लिखने से पहले मैं आपको यह बता देना चाहता हूं कि ना तो मैं निराशावादी हूं और ना ही किसी राजनीतिक दल या उसके किसी नेता विशेष से मेरा लगाव है।
मैं खालिस पत्रकार हूं और उस नाते हर वक्‍त देश, समाज और आम नागरिक की तकलीफों के बावत सोचता रहता हूं।
बेशक आज पत्रकारिता भी ऐसे रास्‍ते पर चल पड़ी है, जहां आम लोगों का भरोसा उसके ऊपर से उठने लगा है लेकिन उम्‍मीद अभी बाकी है।

मंगलवार, 26 जून 2012

समर्थन की कीमत वसूलेगी सपा !

अमेरिका से परमाणु समझौते से लेकर प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी तक यूपीए सरकार के संकटमोचक मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी अब केंद्र सरकार से समर्थन की कीमत वसूलने के मूड में है।

शुक्रवार, 22 जून 2012

हिंदुत्ववादी नेता क्यों न बने PM: RSS

प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर नीतीश कुमार के बयान पर बीजेपी ने भले ही औपचारिक रूप से कोई जवाब नहीं दिया लेकिन उसका मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) खुलकर नरेंद्र मोदी के समर्थन में आ गया है।

रात होते ही ऐसे होता है पानी का काला खेल!

देश की राजधानी दिल्ली पानी की भारी किल्लत से भले ही कराह रही हो, लेकिन यहां रात होते ही पानी का काला खेल शुरू हो जाता है। इस खेल में टैंकर माफिया का राज चलता है। इस गोरखधंधे में पुलिस और दिल्ली जल बोर्ड के कर्मचारी भी शामिल हैं।

कोयला घोटाले में सरकार का मुंह 'काला'

कोयला खदानों के आवंटन पर कैग की अंतिम रिपोर्ट ने सीधे-सीधे सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा है कि उसने कंपनियों को चुनते समय पारदर्शी प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
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