मंगलवार, 10 जुलाई 2012

45 लाख करोड़ का काला धन विदेश में

समाचार ऐजेंसी पीटीआई के मुताबिक भारतीय वाणिज्‍य उद्योग परिसंघ फिक्की ने कहा है कि अगर भारत की सरकार 45 लाख करोड़ रुपए के काले धन को विदेश से देश ले आए, तो भारत की अर्थव्यवस्था को काफी फायदा हो सकता है.
भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय मंदी से जूझ रही है और ऐसी आशंका है कि चालू वित्तीय वर्ष के सकल घरेलू उत्पाद में 5.13 लाख करोड़ रुपए का घाटा हो सकता है.

सोमवार, 9 जुलाई 2012

THE UNDERACHIEVER PM:TIME MAGAZINE

विश्‍व की प्रतिष्ठित टाइम पत्रिका ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कामकाज पर सख्त टिप्पणी करते हुए उन्हें अंडरअचीवर बताया है.
'पत्रिका के ताजा अंक में मनमोहन सिंह को निशाना बनाया गया है. पत्रिका में कहा गया है कि मनमोहन सिंह लोगों की उम्मीद पर खरे नहीं उतर रहे.
टाइम पत्रिका की कवर स्टोरी में प्रधानमंत्री की काबिलियत पर सवाल उठाया गया है. टाइम ने लिखा है कि मनमोहन उम्मीद से कम कामयाबी हासिल करने वाले शख्स साबित हुए हैं.

शनिवार, 7 जुलाई 2012

बड़ों को रास नहीं आ रहा RTI एक्‍ट

आने वाले सालों में बेमतलब हो सकता है सूचना का अधिकार
सरकारी अधिकारियों को ट्रेनिंग में सिखाया जाता है कि कैसे जवाब देने से बचा जाए। यह कहना है शैलेश गांधी का जो छह जुलाई को सूचना आयुक्त के पद से सेवानिवृत हो रहे हैं।

मंगलवार, 3 जुलाई 2012

WOW CM साहब : न जन का मान, न तंत्र का भान

लोहिया को अपना आदर्श और खुद को धरती पुत्र कहलाने वाले मुलायम सिंह के पुत्र का यह कैसा समाजवाद है जो जनप्रतिधियों को जनता के पैसों से  मौज कराने का हिमायती है।
एक ओर जहां आम जनता महंगाई व भ्रष्‍टाचार से त्रस्‍त है और कानून-व्‍यवस्‍था की बदहाली ने उसका जीना हराम कर रखा है वहीं दूसरी ओर अखिलेश सरकार के अजीबो-गरीब फैसले ''जले पर नमक छिड़कने'' की कहावत को चरितार्थ करते नजर आते हैं।

शनिवार, 30 जून 2012

अबू जंदाल: सिर्फ आतंकी या कुछ और..

ऐसा लगता है कि हमारे मंत्रीगण अधिकांश मामलों और विशेषकर पाकिस्‍तान से जुड़े मुद्दों पर या तो अपनी बुद्धि व विवेक का इस्‍तेमाल किये बिना अमेरिका की लिखी हुई स्‍क्रिप्‍ट पढ़ते हैं या फिर वह इतनी अक्‍ल भी नहीं रखते जितनी कि उच्‍च पदों पर आसीन लोगों के लिए जरूरी होती है।

गुरुवार, 28 जून 2012

नेहरू की विरासत को समर्पित ....''जब जनता की सहनशक्‍ित जवाब दे....

आज कुछ लिखने से पहले मैं आपको यह बता देना चाहता हूं कि ना तो मैं निराशावादी हूं और ना ही किसी राजनीतिक दल या उसके किसी नेता विशेष से मेरा लगाव है।
मैं खालिस पत्रकार हूं और उस नाते हर वक्‍त देश, समाज और आम नागरिक की तकलीफों के बावत सोचता रहता हूं।
बेशक आज पत्रकारिता भी ऐसे रास्‍ते पर चल पड़ी है, जहां आम लोगों का भरोसा उसके ऊपर से उठने लगा है लेकिन उम्‍मीद अभी बाकी है।

मंगलवार, 26 जून 2012

समर्थन की कीमत वसूलेगी सपा !

अमेरिका से परमाणु समझौते से लेकर प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी तक यूपीए सरकार के संकटमोचक मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी अब केंद्र सरकार से समर्थन की कीमत वसूलने के मूड में है।
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